# उत्तराखंड में राज्यसभा सीट के लिए बीजेपी ने कसी कमर, 15 संभावित चेहरों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी

> उत्तराखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर बीजेपी प्रदेश संगठन ने 15 नामों की सूची केंद्रीय आलाकमान को भेज दी है। विधानसभा में स्पष्ट बहुमत के चलते पार्टी की जीत तय मानी जा रही है, जहां कुमाऊं के वरिष्ठ नेता का नाम सबसे आगे चल रहा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-rajya-sabha-sita-ke-lie-bjp-ne-kasi-kamara-15-snbhavita-cheharon-ki-suchi-kendriya-netritva-ko-saunpi-41252 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तराखंड राज्यसभा चुनाव, बीजेपी, कुमाऊं, देहरादून, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, निर्वाचन आयोग, उत्तराखंड राजनीति

देहरादून में खाली होने जा रही राज्यसभा की एक सीट को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य विधानसभा में मजबूत संख्या बल के कारण इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा भारी है और पार्टी प्रत्याशी की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है। इसी कड़ी में प्रदेश संगठन ने गहन मंथन के बाद 15 संभावित प्रत्याशियों के नामों की एक फेहरिस्त तैयार करके केंद्रीय नेतृत्व को प्रेषित कर दी है। अब पार्टी आलाकमान की ओर से अधिकृत उम्मीदवार के नाम का ऐलान किसी भी क्षण किया जा सकता है।

## कुमाऊं के वरिष्ठ स्वयंसेवक पर दांव लगाने की चर्चा
पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, संगठन इस बार क्षेत्रीय संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व को साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत कुमाऊं मंडल के किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व को संसद के उच्च सदन भेजने की मजबूत संभावना बन रही है। इस दौड़ में कुमाऊं क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले एक ऐसे वरिष्ठ नेता का नाम सबसे प्रमुखता से उभर रहा है जो वैश्य समाज से आते हैं और लंबे अरसे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़कर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्रीय नेतृत्व इस नाम को हरी झंडी देता है, तो इससे समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान मिलने के साथ-साथ जातीय समीकरणों को भी मजबूती मिलेगी।

## नामांकन से लेकर परिणाम तक का विस्तृत कार्यक्रम
निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित चुनावी समय-सारिणी के तहत प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी। उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तय की गई है। इसके अगले दिन यानी 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा की जाएगी। नाम वापस लेने के इच्छुक प्रत्याशी 9 अक्टूबर तक अपना पर्चा वापस ले सकेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतों की गिनती शुरू कर दी जाएगी।

## विधानसभा में संख्या बल और दिल्ली में अंतिम फैसला
उत्तराखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के विधायकों की संख्या इतनी मजबूत है कि इस चुनाव में पार्टी प्रत्याशी की निर्विरोध या एकतरफा जीत तय समझी जा रही है। यही वजह है कि प्रदेश इकाई द्वारा सूची भेजे जाने के बाद सबकी निगाहें अब नई दिल्ली में जुटने वाली केंद्रीय चुनाव समिति पर टिकी हैं। केंद्रीय नेतृत्व की बैठक में ही इस बात पर अंतिम मुहर लगेगी कि संसद के उच्च सदन में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।

## इसका आप पर असर
यह चुनाव सीधे तौर पर राज्य के विधायी प्रतिनिधित्व और क्षेत्रीय सत्ता संतुलन को प्रभावित करता है।

- **भारत में:** संसद के उच्च सदन में सत्ता पक्ष की स्थिति को मजबूती मिलेगी। कानून निर्माण और विधायी प्रक्रियाओं में इस सीट का सीधा योगदान रहेगा।
- **उत्तराखंड में:** प्रदेश के स्थानीय मुद्दों और विकास परियोजनाओं को राष्ट्रीय पटल पर उठाने के लिए एक नया प्रतिनिधि मिलेगा। कुमाऊं अथवा संबंधित क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर राजनीतिक प्राथमिकताओं में फेरबदल देखने को मिल सकता है।
- **मतदाताओं के लिए:** यह चुनाव आम जनता के बजाय केवल निर्वाचित विधायकों के माध्यम से संपन्न होता है। इसलिए नागरिकों को सीधे मतदान केंद्र नहीं जाना होगा, बल्कि उनके चुने हुए विधायक इस प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।
- **राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए:** संगठन के वरिष्ठ और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को यह संदेश मिलेगा कि जमीनी काम को उच्च स्तर पर पहचान मिलती है। इससे आगामी स्थानीय चुनावों के लिए पार्टी काडर में सक्रियता बढ़ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट का कार्यकाल समाप्त होने के कारण यह चुनाव कराना अनिवार्य हुआ है।

- **सीट का रिक्त होना:** वर्तमान राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल पूरा होने के कारण निर्वाचन आयोग ने नियमानुसार चुनावी प्रक्रिया शुरू की है। यह उच्च सदन में संवैधानिक प्रतिनिधित्व बनाए रखने की एक अनिवार्य प्रक्रिया है।
- **बीजेपी का संख्या बल:** उत्तराखंड विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास पूर्ण बहुमत मौजूद है। इसी संख्या बल के आधार पर पार्टी उम्मीदवार की जीत निश्चित मानी जा रही है, जिससे उम्मीदवारी की होड़ तेज हो गई है।
- **जातीय और क्षेत्रीय संतुलन:** प्रदेश संगठन ने सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को ध्यान में रखकर 15 नाम छांटे हैं। कुमाऊं और वैश्य समुदाय के प्रतिनिधित्व को साधने की रणनीतिक जरूरत ने चयन प्रक्रिया को खास दिशा दी है।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तराखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तारीख क्या है?
नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है।

### 2. नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी कब तक होगी?
नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर है।

### 3. मतदान और मतगणना किस तारीख को संपन्न होगी?
मतदान 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना की जाएगी।

### 4. बीजेपी प्रदेश संगठन ने केंद्रीय नेतृत्व को कितने नामों की सूची भेजी है?
उत्तराखंड बीजेपी संगठन ने 15 संभावित दावेदारों की सूची बनाकर केंद्रीय आलाकमान को भेजी है।

### 5. राज्यसभा उम्मीदवारी की दौड़ में किस क्षेत्र के नेता का नाम प्रमुखता से चल रहा है?
कुमाऊं मंडल से आने वाले वैश्य समाज के वरिष्ठ संघनिष्ठ नेता का नाम इस दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है।

### 6. क्या इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार की जीत तय मानी जा रही है?
हां, मौजूदा विधानसभा में बीजेपी के पास पर्याप्त संख्या बल होने के कारण पार्टी प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._