उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ वारदातों में 17 फीसदी का उछाल, देहरादून में गहराया डर उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ आपराधिक मामलों में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कभी सुकून के लिए पहचाने जाने वाले देहरादून में लगातार हो रही वारदातों से बुजुर्गों में दहशत है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहचान लंबे समय तक सुकून भरे माहौल, चाय के बागानों, लीची और बासमती की खेती के लिए रही है। देश भर से लोग अपनी नौकरी पूरी करने के बाद यहां एक शांत जीवन बिताने के इरादे से बसते रहे हैं। अब सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े दावों के बीच जमीनी तस्वीर बदलती नजर आ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार राज्य के भीतर वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े अपराधों में 17 फीसदी का इजाफा दर्ज हुआ है। चोरी, झपटमारी, ठगी और हत्या जैसी गंभीर घटनाओं ने शहर के माहौल को अशांत कर दिया है, जिससे उम्रदराज आबादी में असुरक्षा की भावना तेजी से बढ़ रही है। सुबह की सैर से भी कतराने लगे हैं वरिष्ठ नागरिक बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का सीधा असर बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य के लिहाज से जरूरी मानी जाने वाली सुबह और शाम की सैर अब खौफ का सबब बन चुकी है। कर्नल (रिटायर्ड) मूर्ति सिंह साजवान ने शहर की वर्तमान स्थिति पर निराशा जाहिर करते हुए कहा कि उनके बचपन से लेकर आज तक का माहौल पूरी तरह बदल चुका है और अपराधी बुजुर्गों को निशाना बनाते समय किसी तरह का संकोच नहीं दिखाते। हालिया हिंसक घटनाओं से गहराया आक्रोश शहर में सामने आई कई जानलेवा वारदातों ने पूर्व सैन्य अधिकारियों और आम नागरिकों को झकझोर कर रख दिया है। कर्नल साजवान के अनुसार बीते साल जब सुबह की सैर पर निकले एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर की गोली लगने से मौत हुई थी, तब पूर्व सैन्य कर्मियों ने लामबंद होकर मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र भेजकर सख्त कदम उठाने की मांग की थी। अब हालात यह हैं कि अपराधी सीधे घरों के भीतर दाखिल होकर बुजुर्गों को अपना शिकार बना रहे हैं। स्थानीय निवासी देबू रावत ने रायपुर इलाके की घटना की चर्चा करते हुए कहा कि एक बुजुर्ग दंपत्ति और उनकी घरेलू सहायिका की हत्या जैसे मामलों ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। एकांत में रहने वाले बुजुर्गों के लिए बढ़ा खतरा देहरादून में ऐसे परिवारों की तादाद काफी अधिक है जिनके बच्चे रोजगार अथवा अन्य जिम्मेदारियों के चलते राज्य से बाहर या विदेशों में कार्यरत हैं। घरों में अकेले रहने के कारण ऐसे वरिष्ठ नागरिक असामाजिक तत्वों के आसान निशाने पर आ जाते हैं। मौजूदा वर्ष में ही बुजुर्गों को निशाना बनाए जाने के 4 से 5 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। स्थानीय नागरिक एम आर सकलानी का कहना है कि शारीरिक रूप से कमजोर उम्रदराज लोगों की हिफाजत के लिए प्रशासन को ठोस योजना बनानी चाहिए, ताकि वे बिना किसी भय के अपनी सामान्य जिंदगी जी सकें। पुलिस गश्त और सुरक्षा तंत्र की मांग लगातार बिगड़ते हालात के बीच पूर्व अधिकारियों और वरिष्ठ नागरिकों ने पुलिस और सरकार से प्रभावी कदम उठाने की गुहार लगाई है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि संवेदनशील इलाकों में पुलिस की नियमित गश्त बढ़ाई जाए और अकेले रह रहे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक खास निगरानी तंत्र तैयार किया जाए। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन अपराधों की रोकथाम नहीं हुई, तो सेवानिवृत्ति के बाद सुकून की तलाश में यहां बसने वाले बुजुर्ग अपने ही घरों में सिमट कर रह जाएंगे। इसका आप पर असर उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध अपराधों में हुई वृद्धि से बुजुर्गों की दैनिक सुरक्षा और स्वतंत्रता सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। • भारत में: देश भर से सेवानिवृत्ति के बाद उत्तराखंड में बसने की योजना बना रहे लोगों को अब अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर नए सिरे से विचार करना होगा। यह स्थिति दूसरे राज्यों में रह रहे उन परिवारों की चिंता भी बढ़ाती है जिनके बुजुर्ग माता-पिता अकेले रह रहे हैं। • देहरादून में: शहर में अकेले रहने वाले बुजुर्गों को अपनी दिनचर्या और आवाजाही के दौरान अत्यधिक सतर्कता बरतनी होगी। मॉर्निंग वॉक और बाजार जाने जैसी सामान्य गतिविधियों में सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त सावधानी और स्थानीय स्तर पर सतर्कता बरतने की जरूरत है। • प्रशासनिक स्तर पर: पुलिस को रिहायशी इलाकों में गश्त बढ़ाने और बुजुर्गों के सत्यापन तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करना होगा। वरिष्ठ नागरिकों के संगठनों द्वारा दी गई चेतावनियों के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव अपेक्षित है। • घरेलू सुरक्षा: अकेले रहने वाले वृद्ध नागरिकों को अपने घरों में घरेलू सहायकों के सत्यापन और बुनियादी सुरक्षा उपायों को तुरंत चाक-चौबंद करना पड़ेगा। इस वर्ष सामने आए गंभीर मामलों के बाद सुरक्षा समीक्षा बेहद आवश्यक हो गई है। ऐसा क्यों हुआ उत्तराखंड में बुजुर्गों के खिलाफ अपराधों में दर्ज 17 फीसदी की बढ़ोतरी के पीछे सुनियोजित आपराधिक हरकतें और सामाजिक बदलाव प्रमुख वजह हैं। शहर में अकेले रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या उन्हें अपराधियों का आसान शिकार बना रही है। • सीधे तौर पर बढ़ता जोखिम: हालिया महीनों में चोरी, झपटमारी, धोखाधड़ी और हत्या जैसी वारदातों ने सीधे तौर पर कमजोर वर्ग को प्रभावित किया है। इस वर्ष ही बुजुर्गों को निशाना बनाए जाने के 4 से 5 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। • अकेले रहने की स्थिति: शहर में बड़ी तादाद में ऐसे बुजुर्ग रहते हैं जिनके परिजन नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में बाहर या विदेशों में रहते हैं। शारीरिक रूप से कमजोर होने और घर में अकेले होने के कारण अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। • हिंसक हमलों का सिलसिला: पिछले साल सुबह की सैर के दौरान एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर की गोली मारकर हत्या और रायपुर में बुजुर्ग दंपत्ति व नौकरानी का तिहरा हत्याकांड सुरक्षा में बड़ी खामियों को दर्शाता है। इन घटनाओं से अपराधियों के दुस्साहस का पता चलता है। • सुरक्षा तंत्र की सुस्ती: वरिष्ठ नागरिकों की ओर से राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजे जाने के बावजूद पर्याप्त पुलिस गश्त न होना स्थिति को गंभीर बना रहा है। प्रशासन से प्रभावी निगरानी ढांचा न बनने तक अपराधों पर रोक लगाना मुश्किल साबित हो रहा है। सवाल-जवाब 1. उत्तराखंड में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधों में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है? राज्य में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ होने वाले अपराधों में 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2. देहरादून के बुजुर्गों में किन वारदातों के कारण भय का माहौल बना है? चोरी, झपटमारी, धोखाधड़ी, घरों में घुसपैठ और हत्या जैसी संगीन घटनाओं के कारण बुजुर्गों में गहरा खौफ है। 3. पूर्व सैन्य कर्मियों ने सुरक्षा को लेकर क्या कदम उठाया था? एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर की गोली लगने से मौत के बाद पूर्व फौजियों ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। 4. रायपुर क्षेत्र में हाल ही में कौन सी गंभीर घटना घटी थी? रायपुर क्षेत्र में एक बुजुर्ग दंपत्ति और उनकी नौकरानी की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया था। 5. इस वर्ष देहरादून में बुजुर्गों के खिलाफ कितने गंभीर मामले दर्ज हो चुके हैं? मौजूदा वर्ष में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े 4 से 5 गंभीर आपराधिक मामले सामने आ चुके हैं। 6. वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय निवासियों ने पुलिस प्रशासन से क्या मांग की है? निवासियों ने पुलिस गश्त बढ़ाने और अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए विशेष सुरक्षा ढांचा तैयार करने की मांग की है। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-varishtha-nagarikon-ke-khilapha-varadaton-men-17-phisadi-ka-uchhala-dehradun-men-gaharaya-dara-45566 TrendKia — Har trend, sabse pehle.