उत्तराखंड में विदाई लेते मानसून का कहर जारी, देहरादून से उत्तरकाशी तक नदियां उफान पर और कई रास्ते बंद उत्तराखंड में मानसून के आखिरी दौर में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। लगातार हो रहे भूस्खलन और नदियों के उफान पर होने से चारधाम यात्रा मार्ग समेत कई नेशनल हाईवे बाधित हो गए हैं। उत्तराखंड में मौसम का मिजाज एक बार फिर पूरी तरह से बदल गया है और मानसून की वापसी के समय हो रही ताबड़तोड़ बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। शुक्रवार की रात से शुरू हुआ बादलों के बरसने का सिलसिला रविवार को भी पूरे दिन बिना रुके जारी रहा। इस मूसलाधार बारिश के चलते राज्यभर की नदियां और नाले खतरे के निशान के करीब पहुंच गए हैं, जबकि पहाड़ी रास्तों पर लगातार गिरते मलबे और चट्टानों ने यातायात को बुरी तरह से ठप कर दिया है। मौसम विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई जिलों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। विशेष तौर पर उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून जैसे इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की पूरी आशंका जताई गई है, जिससे प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। बीते चौबीस से अड़तालीस घंटों के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादलों ने सबसे ज्यादा जोर दिखाया है। आंकड़ों पर गौर करें तो चंपावत जिले में सबसे अधिक एक सौ साठ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जबकि काशीपुर में एक सौ तैंतीस मिलीमीटर, उधमसिंह नगर में एक सौ बीस मिलीमीटर, लैंसडाउन में एक सौ बारह मिलीमीटर और नैनीताल में करीब एक सौ सात मिलीमीटर पानी गिर चुका है। इस भारी जलप्रपात के कारण पहाड़ी इलाकों से लगातार भूस्खलन की खौफनाक तस्वीरें सामने आ रही हैं। पर्वतीय क्षेत्रों की कई संपर्क सड़कें और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग मलबे की चपेट में आ चुके हैं, जिससे स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आए तीर्थयात्रियों की आवाजाही पर भी पूर्ण विराम लग गया है। गढ़वाल मंडल के तमाम जिलों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने और तीव्र बौछारें पड़ने की कड़ी चेतावनी दी गई है, जबकि ऊंचे शिखरों पर हुई बर्फबारी ने ठंड में उल्लेखनीय इजाफा कर दिया है। देहरादून और हरिद्वार में जलभराव की गंभीर समस्या राज्य की राजधानी देहरादून में सुबह से ही बादलों की आवाजाही के बीच तेज बारिश का दौर रुक-रुक कर चल रहा है, जिसके कारण शहर की कई प्रमुख सड़कों और गलियों में पानी भर गया है। राजधानी से सटे लोकप्रिय पर्यटन स्थल चकराता में लगातार पानी गिरने और ठंडी हवाएं चलने से पारे में भारी गिरावट आई है, जिससे लोगों को मजबूरन अपने गर्म कपड़े बाहर निकालने पड़ गए हैं। मौसम विभाग ने देहरादून के साथ-साथ हरिद्वार जिले में भी तीव्र बौछारें पड़ने और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका व्यक्त की है। हरिद्वार के कई निचले इलाकों में जलभराव का खतरा मंडरा रहा है, जिसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने और पानी से भरे मार्गों से बचने की सख्त हिदायत दी है। लगातार हो रही इस बारिश से मैदानी क्षेत्रों में जनजीवन पर भी काफी असर पड़ा है और लोग अपने घरों में ही रहने को मजबूर हैं। उत्तरकाशी और चारधाम रूट पर बार-बार बाधा सीमांत जनपद उत्तरकाशी में पिछले दो दिनों से जारी झमाझम बारिश ने यात्रा मार्गों को बुरी तरह से प्रभावित कर डाला है। गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर अलग-अलग जगहों से भारी मात्रा में बोल्डर और कीचड़ सड़क पर आ रहे हैं, जिससे यातायात बार-बार बाधित हो रहा है। प्रशासन द्वारा भारी मशीनों और बुलडोजर की मदद से मलबा हटाने का काम युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है, लेकिन बार-बार हो रहे भूस्खलन के कारण राहत कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। उत्तरकाशी की ऊंची चोटियों पर हुई हल्की बर्फबारी के कारण तापमान सामान्य से काफी नीचे लुढ़क गया है, जिससे कड़ाके की ठंड महसूस होने लगी है। मौसम विभाग ने उत्तरकाशी के लिए भारी बारिश की चेतावनी को आगे भी बरकरार रखा है, जिससे चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऋषिकेश और श्रीनगर में गंगा और अलकनंदा का रौद्र रूप पहाड़ी जिलों में लगातार बरस रहे पानी का सीधा असर श्रीनगर और ऋषिकेश से गुजरने वाली नदियों के जलस्तर पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। श्रीनगर जलविद्युत परियोजना के बांध में पानी की भारी आवक दर्ज होने के बाद सुरक्षा कारणों से डैम के गेट खोलकर अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। इस पानी के मैदानी हिस्से में पहुंचते ही गंगा नदी एक बार फिर उफान पर आ गई है और उसका जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। ऋषिकेश के प्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर गंगा का पानी इतना ऊपर आ गया कि वहां होने वाला नियमित आरती स्थल पूरी तरह से जलमग्न हो गया। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस और प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा का घेरा और अधिक मजबूत कर दिया है तथा नदी के पास रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं को तटों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। नैनीताल और अल्मोड़ा में बंद पड़े राष्ट्रीय राजमार्ग कुमाऊं मंडल के प्रसिद्ध पर्यटक शहर नैनीताल में पिछले अड़तालीस घंटों से लगातार बारिश होने के कारण हालात काफी बिगड़ चुके हैं। नैनीताल और हल्द्वानी को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर ज्योलीकोट के पास अचानक पहाड़ी का एक हिस्सा दरक जाने से भारी मलबा सड़क पर आ गिरा। इसके परिणामस्वरुप सड़क के दोनों छोर पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और कई घंटों तक आवाजाही पूरी तरह से ठप रही। वहीं दूसरी ओर, अल्मोड़ा जिले में पिछले तीन दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के चलते क्वारब के पास बार-पास भूस्खलन हो रहा है। जिले की आधा दर्जन से ज्यादा ग्रामीण सड़कें मलबे की चपेट में आने से बंद पड़ी हैं, जिसके कारण सैकड़ों गांवों का संपर्क सीधे तौर पर तहसील मुख्यालयों से पूरी तरह से कट गया है। बागेश्वर और चंपावत में प्रशासनिक स्तर पर राहत कार्य जारी बागेश्वर जिले में पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण गरुड़ और बागेश्वर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 109 पूरी तरह से अवरुद्ध हो चुका है। रवाईखाल के नजदीक पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर और कीचड़ सड़क पर आ जाने के कारण रास्ता बंद हो गया है। सीमा सड़क संगठन यानी बीआरओ की टीमें बुलडोजर के साथ मार्ग को बहाल करने के प्रयास में जुटी हुई हैं, लेकिन ऊपर से लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण राहत और बचाव कार्यों में खासी रुकावट आ रही है। जिले में कुल तीन मुख्य सड़कें बंद होने के कारण गरुड़ क्षेत्र से जिला मुख्यालय आने-जाने वाले आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा चंपावत जिले में पिछले चौबीस घंटों के दौरान सबसे अधिक एक सौ साठ मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जिससे तमाम नदी-नाले उफान पर बह रहे हैं। मौसम में सुधार की उम्मीद और आगामी पूर्वानुमान लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बीच मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जताई है और आगामी उनतीस सितंबर से मौसम में सुधार होने के संकेत दिए हैं। उनतीस सितंबर को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे पर्वतीय जनपदों में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की जा सकती है, जिससे मानसूनी प्रकोप के कुछ कम होने की संभावना है। हालांकि तब तक प्रशासन ने लोगों से पूरी सतर्कता बरतने की अपील की है क्योंकि पहाड़ों पर दरकती चट्टानें और उफनती नदियां अभी भी गंभीर खतरा बनी हुई हैं। यात्रा करने वाले लोगों को विशेष रूप से मौसम की स्थिति देखकर ही घर से निकलने की सलाह दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके। इसका आप पर असर उत्तराखंड में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जनजीवन और यात्रा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे आम नागरिकों को काफी सावधानी बरतनी होगी। • भारत में: चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की ताजा स्थिति की जांच अवश्य कर लें। पहाड़ी रास्तों पर लगातार भूस्खलन के कारण हाईवे बंद होने से लंबी देरी और ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ सकता है। • उत्तराखंड में: देहरादून, हरिद्वार, उत्तरकाशी और नैनीताल के स्थानीय निवासियों को जलभराव वाले क्षेत्रों और उफनती नदियों के किनारों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्राएं टालने और सुरक्षित स्थानों पर रहने का आग्रह किया है। ऐसा क्यों हुआ उत्तराखंड में मानसून के इस अचानक और उग्र रूप के पीछे सक्रिय मानसूनी प्रणालियां और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश मुख्य कारण हैं। पिछले कुछ दिनों से कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण बादलों की सक्रियता काफी बढ़ गई है। • सक्रिय मानसूनी गतिविधियां: पिछले चौबीस से अड़तालीस घंटों के दौरान राज्यभर में अत्यधिक सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण लगातार तीव्र बौछारें पड़ी हैं। चंपावत और काशीपुर जैसे क्षेत्रों में भारी मात्रा में पानी गिरने से मिट्टी में नमी बहुत अधिक बढ़ गई है। • भौगोलिक संरचना और भूस्खलन: उत्तराखंड की संवेदनशील पहाड़ी बनावट और ढलानों पर लगातार पानी गिरने से चट्टानें कमजोर हो जाती हैं। इसके परिणामस्वरुप गंगोत्री और यमुनोत्री राजमार्ग समेत कई प्रमुख मार्गों पर भारी मलबा और बोल्डर खिसक रहे हैं। • नदियों का जलस्तर बढ़ना: पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण श्रीनगर जलविद्युत परियोजना के बांधों में पानी का दबाव काफी बढ़ गया। सुरक्षा कारणों से पानी छोड़े जाने के कारण मैदानी इलाकों में नदियां उफान पर आ गई हैं। सवाल-जवाब 1. उत्तराखंड में भारी बारिश का दौर कब से शुरू हुआ? उत्तराखंड में भारी बारिश का यह दौर शुक्रवार रात से शुरू हुआ और रविवार को भी दिनभर जारी रहा। 2. किन जिलों में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है? पिछले चौबीस घंटों के दौरान चंपावत में सबसे ज्यादा 160 मिलीमीटर, काशीपुर में 133 मिलीमीटर और उधमसिंह नगर में 120 मिलीमीटर बारिश मापी गई है। 3. किन राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन के कारण आवाजाही बाधित हुई है? गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग, नैनीताल-हल्द्वानी हाईवे और गरुड़-बागेश्वर नेशनल हाईवे-109 पर भूस्खलन के कारण यातायात बाधित हुआ है। 4. ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर क्या स्थिति उत्पन्न हुई? गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण ऋषिकेश के सुप्रसिद्ध त्रिवेणी घाट पर नियमित आरती स्थल जलमग्न हो गया है। 5. मौसम विभाग के अनुसार राहत कब तक मिलने की संभावना है? मौसम विभाग के अनुसार उनतीस सितंबर से मौसम में सुधार होने के आसार हैं और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश ही दर्ज की जाएगी। 6. उत्तरकाशी और चमोली के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम का हाल कैसा है? उत्तरकाशी और चमोली के ऊंचाई वाले शिखरों पर बारिश के साथ बर्फबारी होने से तापमान काफी गिर गया है और ठंड बढ़ गई है। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-monsoon-fury-heavy-rains-disruption-from-dehradun-to-uttarkashi-as-rivers-swell-and-roads-shut-39691 TrendKia — Har trend, sabse pehle.