# उत्तराखंड राज्यसभा सीट के लिए बीजेपी ने दिनेश आर्य के नाम पर लगाई मुहर

> भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से खाली हो रही एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए वरिष्ठ नेता दिनेश आर्य को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है.

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-rajyasabha-sita-ke-lie-bjp-ne-dinesh-arya-ke-nama-para-lagai-muhara-42705 · **Language:** Hindi
**Tags:** दिनेश आर्य, उत्तराखंड राज्यसभा, पुष्कर सिंह धामी, भारतीय जनता पार्टी, नैनीताल, उत्तराखंड राजनीति

उत्तराखंड में एक सीट पर होने जा रहे आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने आधिकारिक प्रत्याशी की घोषणा कर दी है. पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने लंबे विचार-विमर्श के बाद वरिष्ठ नेता दिनेश आर्य पर भरोसा जताया है. संगठन में दशकों से समर्पित भूमिका निभा रहे दिनेश आर्य वर्तमान में उत्तराखंड सरकार के तहत राज्यस्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिसे राज्य मंत्री स्तर का दर्जा हासिल है. जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ रखने वाले आर्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं और लंबे समय से राज्य में पार्टी की विभिन्न संगठनात्मक जिम्मेदारियों का सफल निर्वहन करते रहे हैं.

## पार्टी और सरकार में निभाई हैं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
दिनेश आर्य का राजनीतिक जीवन पूरी तरह संगठन और जनसेवा से जुड़ा रहा है. वे पहले भी नैनीताल जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष के रूप में पार्टी का नेतृत्व कर चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने पार्टी के अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री पद पर भी अपनी सेवाएं दी हैं. राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उनकी सक्रियता उस समय भी बेहद अहम रही जब उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी यानी पीआरओ के रूप में कार्य किया. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से तृतीय वर्ष शिक्षित होने के साथ-साथ उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआती नींव विद्यार्थी परिषद के जरिए रखी थी. नैनीताल में जिला संयोजक से शुरुआत कर उन्होंने युवा मोर्चा और अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश स्तर के दायित्वों को निष्ठापूर्वक पूरा किया है.

## चार दशकों का संगठनात्मक सफरनामा
दिनेश आर्य का राजनीतिक और सामाजिक सफर चार दशकों से अधिक समय में फैला हुआ है. वर्ष 1985 में उन्होंने विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता के रूप में नैनीताल में प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की थी. इसके बाद वर्ष 1986 में उन्हें विद्यार्थी परिषद का नैनीताल जिला संयोजक नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने वर्ष 1988 तक लगातार काम किया. वर्ष 1988 से 1991 के दौरान उन्होंने युवा मोर्चा नैनीताल के जिला मंत्री का पद संभाला. संगठन के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए वर्ष 1992 से 1995 तक उन्हें अनुसूचित मोर्चा नैनीताल का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया. बाद में वे वर्ष 1996 से 1998 तक युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे और वर्ष 2001 से 2002 के दौरान अनुसूचित मोर्चा के प्रदेश महामंत्री पद पर सक्रिय रहे.

## राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय पटल तक का अनुभव
वर्ष 2002 से वर्तमान समय तक वे लगातार प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य के रूप में पार्टी के सांगठनिक ढांचे को मजबूती दे रहे हैं. वर्ष 2007 से 2010 के बीच उन्होंने भाजपा नैनीताल के जिलाध्यक्ष के रूप में सफलतापूर्वक संगठन का संचालन किया. उनके सांगठनिक कौशल को देखते हुए वर्ष 2017 से 2021 के बीच उन्हें अनुसूचित जाति मोर्चा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया और साथ ही मोर्चे के पंजाब प्रभारी का महत्वपूर्ण दायित्व भी सौंपा गया. वर्ष 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं. इसके पश्चात वर्ष 2023 से वर्तमान तक वे दायित्वधारी के रूप में उत्तराखंड सरकार की राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक फैसले से उत्तराखंड के संगठनात्मक समीकरणों और विधायी प्रतिनिधित्व पर सीधा असर पड़ेगा.

- **भारत में:** संसद के उच्च सदन में राष्ट्रीय नीतियों और विधायी चर्चाओं में उत्तराखंड के मुद्दों को उठाने के लिए एक नया प्रतिनिधित्व मिलेगा. इससे संसद में सत्ता पक्ष की रणनीतिक स्थिति मजबूत रहेगी.
- **उत्तराखंड में:** लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय कैडर को उच्च सदन भेजने से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा. कुमाऊं क्षेत्र और अनुसूचित वर्ग से आने वाले नेताओं का प्रशासनिक व राजनीतिक प्रभाव राज्य में और सुदृढ़ होगा.
- **कार्यकर्ताओं के लिए:** विद्यार्थी परिषद और मोर्चा राजनीति से जुड़े कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने की स्पष्ट प्रेरणा मिलेगी. दशकों तक निष्ठावान रहने वाले पदाधिकारियों की पहचान को बल मिलेगा.
- **प्रशासनिक स्तर पर:** पेयजल अनुश्रवण परिषद में उनके अनुभव का लाभ नीतिगत स्तर पर पेयजल योजनाओं की निगरानी में देखने को मिलता रहा है. अब वे राष्ट्रीय मंच पर राज्य के बुनियादी मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठा सकेंगे.

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से खाली हो रही एकमात्र राज्यसभा सीट पर दिनेश आर्य को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है. इस चयन के पीछे उनकी लंबी संगठनात्मक पृष्ठभूमि, निष्ठा और प्रशासनिक अनुभव प्रमुख कारक रहे हैं.

- **दीर्घकालिक निष्ठा:** वे वर्ष 1985 से विद्यार्थी परिषद और आरएसएस से जुड़कर निरंतर सक्रिय रहे हैं. चार दशकों के निष्कलंक करियर और निरंतर जमीनी जुड़ाव ने उनके पक्ष में निर्णय को मजबूत किया.
- **सामुदायिक व क्षेत्रीय संतुलन:** वे नैनीताल जिले से आते हैं और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चा में राष्ट्रीय स्तर तक नेतृत्व कर चुके हैं. इससे राज्य में क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को संतुलित करने में मदद मिलती है.
- **विश्वसनीय प्रशासनिक तालमेल:** मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पीआरओ और राज्य स्तरीय पेयजल परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने सरकार और संगठन के बीच कुशल समन्वय स्थापित किया. इस अनुभव ने उनके चयन को शीर्ष स्तर पर आसान बना दिया.

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तराखंड राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी का उम्मीदवार कौन है?
भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता और वर्तमान में राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार बनाया है.

### 2. दिनेश आर्य वर्तमान में किस सरकारी पद पर कार्यरत हैं?
वे उत्तराखंड सरकार में राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष के रूप में दायित्वधारी हैं, जिसे राज्य मंत्री स्तर का दर्जा प्राप्त है.

### 3. दिनेश आर्य ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत कब और कहां से की थी?
उन्होंने वर्ष 1985 में नैनीताल से विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ता के रूप में सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी.

### 4. क्या दिनेश आर्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी काम कर चुके हैं?
हां, दिनेश आर्य ने वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) के रूप में कार्य किया था.

### 5. दिनेश आर्य बीजेपी नैनीताल के जिलाध्यक्ष कब रहे थे?
दिनेश आर्य ने वर्ष 2007 से लेकर 2010 तक बीजेपी नैनीताल के जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी निभाई थी.

### 6. अनुसूचित जाति मोर्चा में दिनेश आर्य ने कौन सा राष्ट्रीय दायित्व संभाला था?
वर्ष 2017 से 2021 तक वे अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और पंजाब प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.

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