उत्तरकाशी में केदारताल ट्रैक पर बर्फबारी और हिमस्खलन के बीच फंसे 8 लोगों की तलाश जारी, रेस्क्यू में जुटी टीमें उत्तरकाशी के 15 हजार फीट ऊंचे केदारताल ट्रैक पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन के बाद 7 ट्रैकर्स और 1 स्थानीय गाइड का 72 घंटे बाद भी पता नहीं चल सका है। SDRF, NIM और NDRF की टीमें हवाई रेकी और जमीनी अभियान के जरिए बचाव कार्य में जुटी हैं। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री हिमालय के दुर्गम केदारताल ट्रैक पर अचानक बदले मौसम और हिमस्खलन के चलते सात ट्रैकर्स और एक स्थानीय गाइड का संपर्क कट गया है। करीब 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर घने हिमपात के बीच तीसरे दिन भी इन आठ लापता व्यक्तियों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। स्थानीय जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की टीमें विपरीत मौसम के बीच लगातार राहत एवं खोज अभियान चला रही हैं। 12 सदस्यीय दल का सफर और मौसम का प्रकोप यह 12 सदस्यीय ट्रैकिंग दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। बीते गुरुवार को उच्च हिमालयी क्षेत्र में अचानक हालात बिगड़ गए और भीषण बर्फबारी शुरू हो गई। इस दौरान ग्लेशियर टूटने और हिमस्खलन की वजह से पूरा ट्रैक अवरुद्ध हो गया, जिससे यह दल दो अलग-अलग हिस्सों में बंट गया। शुरुआती खतरे को देखते हुए बचाव दलों ने त्वरित कदम उठाते हुए कच्ची ढांग के निकट फंसे चार सपोर्टिंग स्टाफ को सुरक्षित निकाल लिया था। हालांकि, भोजखड़क से आगे निकल चुके सात पर्यटक और एक गाइड हिमस्खलन की चपेट में आने के बाद शेष दल से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए। उस समय बचाव दल और इन पर्यटकों के बीच केवल कुछ किलोमीटर का फासला था, लेकिन भारी बर्फबारी ने आगे बढ़ने की राह रोक दी। लापता लोगों की पहचान और परिजनों की चिंता लापता आठ लोगों में पश्चिम बंगाल के 5 ट्रैकर्स, उत्तर प्रदेश के 2 ट्रैकर्स तथा उत्तरकाशी के रहने वाले स्थानीय गाइड सिद्धार्थ राणा शामिल हैं। सिद्धार्थ राणा के परिजनों ने प्रशासन से खोज अभियान को और अधिक तेज करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही परिजनों ने संबंधित ट्रैकिंग एजेंसी पर समय रहते प्रशासन को सूचना न देने का आरोप भी लगाया है। इससे पहले 30 अक्टूबर को ट्रैकिंग एजेंसी के माध्यम से फोन पर संपर्क स्थापित हुआ था, जिसमें ट्रैकर्स ने कच्ची ढांग के पास सुरक्षित होने की बात कहते हुए फौरन मदद मांगी थी। सूचना मिलने पर एजेंसी ने कुली और गाइड की एक टीम रवाना की, जिसने भारी मशक्कत करते हुए लगभग 6 किलोमीटर तक बर्फ हटाकर रास्ता साफ करने की कोशिश की थी। हेलीकॉप्टर से हवाई रेकी और जमीनी बचाव अभियान हवाई और जमीनी स्तर पर राहत कार्य को आगे बढ़ाने के लिए कई एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। शनिवार सुबह 6 बजे राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 10 सदस्यीय टीम उत्तरकाशी से गंगोत्री के लिए रवाना हुई थी। इसके साथ ही SDRF के 6 जवान, वन विभाग के 2 सदस्य और ट्रैकिंग एजेंसी के 7 सदस्य भी ग्राउंड रेस्क्यू में जुटे। रविवार को दूसरे दिन मौसम में मामूली सुधार के दौरान हेलीकॉप्टर की मदद से केदारताल और भोजखड़क क्षेत्र में दो बार हवाई निरीक्षण किया गया, लेकिन बर्फ से ढके पूरे इलाके में ट्रैकर्स या उनके टेंट का कोई सुराग नहीं दिखा। सोमवार सुबह करीब 7 बजकर 35 मिनट पर देहरादून से एक हेलीकॉप्टर हर्षिल स्थित सेना के हेलीपैड पर पहुंचा। इसके बाद सुबह 8 बजकर 35 मिनट पर NIM के 2 और SDRF के 6 सदस्यों सहित कुल 8 रेस्क्यू कर्मियों को हेलीकॉप्टर से केदारताल अभियान के लिए भेजा गया। इसका आप पर असर हिमालयी क्षेत्रों में अप्रत्याशित बर्फबारी और हिमस्खलन के चलते ट्रैकिंग गतिविधियों में भारी जोखिम बढ़ गया है। • भारत में: उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रैकिंग या साहसिक यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों को मौसम के पूर्वानुमान और स्थानीय चेतावनियों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। किसी भी यात्रा से पहले पंजीकृत एजेंसियों और आपातकालीन संचार साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य है। • उत्तराखंड में: उत्तरकाशी और गंगोत्री क्षेत्र के ऊंचाई वाले ट्रैक्स पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय गाइडों और ट्रैकिंग एजेंसियों के लिए आपातकालीन सूचना तंत्र के नियमों का कड़ाई से पालन करना जरूरी हो गया है। • पर्यटकों के लिए: 15,000 फीट जैसी अत्यधिक ऊंचाई पर जाने वाले दलों को खराब मौसम में आगे बढ़ने से बचना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में सुरक्षित आश्रयों पर रुकना और बचाव दलों के संपर्क में रहना जीवन रक्षक साबित होता है। • बचाव कार्यों में: पर्वतीय इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए वायुसेना और विशेष आपदा बलों का त्वरित समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। प्रतिकूल मौसम में समय पर सूचना मिलना ही सुरक्षित निकासी का मुख्य आधार है। ऐसा क्यों हुआ गंगोत्री हिमालय के उच्च पर्वतीय क्षेत्र में अचानक आए गंभीर मौसमी बदलाव और भारी बर्फबारी के कारण यह दुर्घटना घटी। • सीधा कारण: केदारताल मार्ग पर अचानक भारी बर्फबारी होने और ग्लेशियर टूटने से आए हिमस्खलन ने पूरे रास्ते को बंद कर दिया। इस वजह से आगे बढ़ रहे ट्रैकर्स और गाइड रास्ते में ही घिर गए। • भौगोलिक परिस्थितियां: 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र बेहद दुर्गम है, जहां तापमान शून्य से नीचे रहता है और संकरे रास्ते बर्फ से पूरी तरह ढक जाते हैं। ऐसी स्थिति में रास्ता पहचानना और आगे बढ़ना बेहद मुश्किल हो जाता है। • दल का बंटना: मौसम बिगड़ने पर 12 सदस्यीय दल दो हिस्सों में बंट गया, जिससे पीछे रह गए चार सदस्यों को तो निकाल लिया गया लेकिन आगे बढ़ चुके आठ लोग अलग-थलग पड़ गए। संचार टूटने और भारी बर्फ जमने से जमीनी बचाव में रुकावट आई। सवाल-जवाब 1. केदारताल ट्रैक पर कुल कितने लोग लापता हैं? इस ट्रैक पर कुल 8 लोग लापता हैं, जिनमें 7 पर्यटक और 1 स्थानीय गाइड शामिल हैं। 2. लापता ट्रैकर्स किन राज्यों के रहने वाले हैं? लापता दल में 5 ट्रैकर्स पश्चिम बंगाल के, 2 उत्तर प्रदेश के और स्थानीय गाइड उत्तरकाशी के रहने वाले हैं। 3. यह ट्रैकिंग दल गंगोत्री से कब रवाना हुआ था? यह 12 सदस्यीय दल 27 अक्टूबर को गंगोत्री से केदारताल के लिए निकला था। 4. बचाव अभियान में कौन-सी टीमें शामिल हैं? राहत एवं खोज अभियान में SDRF, NIM, NDRF, वन विभाग और ट्रैकिंग एजेंसी के सदस्य शामिल हैं। 5. लापता गाइड का क्या नाम है? लापता स्थानीय गाइड का नाम सिद्धार्थ राणा है। 6. यह घटना कितनी ऊंचाई पर हुई है? यह घटना लगभग 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर दुर्गम केदारताल ट्रैक पर हुई है। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarkashi-men-kedartal-traika-para-barphabari-aura-himaskhalana-ke-bicha-phnse-8-logon-ki-talasha-jari-reskyu-men-juti-timen-54898 TrendKia — Har trend, sabse pehle.