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  "type": "article",
  "title": "दीपावली पूजन में तिजोरी और मुख्य द्वार के वास्तु नियम लाएंगे समृद्धि",
  "summary": "दीपावली पर घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, घी के 11 दीपक और तिजोरी में पीली कौड़ी व गोमती चक्र रखने से सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।",
  "content": "दीपावली के महापर्व का स्वागत करने के लिए हर परिवार अपने आशियाने को संवारने में जुट जाता है। घरों में रंग-रोगन, बिजली की झालरों की सजावट और आंगन में कलात्मक रंगोलियां बनाने का मुख्य उद्देश्य मां लक्ष्मी का आदरपूर्वक सत्कार करना होता है। लोक मान्यता के अनुसार कार्तिक अमावस्या की निशा में धन की देवी लक्ष्मी पृथ्वी लोक पर विचरण करती हैं और अपने साधकों को वैभव तथा संपन्नता का वरदान प्रदान करती हैं। इसी पावन अवसर पर भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की शास्त्रोक्त विधि से अर्चना की जाती है। पूजा-अर्चना के विधान के अलावा इस शुभ रात्रि पर वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करने से घर के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और वर्ष भर आर्थिक स्थिरता कायम रहने का विश्वास किया जाता है। यदि गृह निर्माण अथवा साज-सज्जा से जुड़े दोष मानसिक तनाव पैदा कर रहे हों, तो इस विशेष दिन परंपरागत उपायों से अनुकूल वातावरण बनाया जा सकता है।\n\nप्रवेश द्वार पर मांगलिक स्वास्तिक और दीप प्रज्वलन\nवर्ष 2026 में 8 नवंबर को दीपावली का उत्सव मनाया जाएगा। पर्व की तैयारी और दिशा नियमों को लेकर देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंद किशोर मुदगल ने महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उनके मतानुसार किसी भी भवन का मुख्य प्रवेश द्वार सकारात्मक तरंगों और धन के आवागमन का प्राथमिक माध्यम होता है। इसलिए प्रवेश द्वार की शुद्धता और सज्जा सबसे पहले सुनिश्चित की जानी चाहिए।\n\nसकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने के लिए प्रवेश द्वार के दोनों पाश्र्वों पर हल्दी और कुमकुम के सम्मिश्रण से मांगलिक स्वास्तिक का निर्माण करना अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त द्वार के दोनों तरफ 11-11 शुद्ध घी के दीपक प्रज्वलित करने का विधान बताया गया है। इन दीपकों को रखते समय दिशा का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, क्योंकि दीपक की लौ या मुख सदैव पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। ऐसा करने से गृह परिसर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां निष्प्रभावी हो जाती हैं और गृह स्वामियों को मानसिक शांति के साथ देवीय कृपा का लाभ मिलता है।\n\nतिजोरी में पीली कौड़ी और गोमती चक्र स्थापित करने की विधि\nपारिवारिक बजट में बरकत बनाए रखने तथा संचित धन की सुरक्षा के लिए तिजोरी से जुड़े वास्तु उपाय अत्यंत असरदार माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार धन के भंडार को समृद्ध रखने के लिए सात पीली कौड़ियां और 11 गोमती चक्र लेकर उन्हें एक पवित्र लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर पोटली तैयार करनी चाहिए। इस पोटली को विधिवत धूप-दीप दिखाने के बाद घर की तिजोरी या धन स्थान के उत्तर-पश्चिम कोण में स्थापित कर देना चाहिए।\n\nपारंपरिक मान्यताओं के अनुसार उत्तर-पश्चिम दिशा वायु तत्व से जुड़ी होती है और इस कोण में कौड़ी तथा गोमती चक्र की स्थापना से वित्तीय बाधाएं दूर होती हैं। नियमित रूप से यह व्यवस्था घर में धन के निरंतर प्रवाह को प्रोत्साहित करती है और कर्ज या अचानक आने वाले आर्थिक संकटों से सुरक्षा प्रदान करती है। तिजोरी को इस प्रकार व्यवस्थित करना वास्तु दोषों के शमन के लिए भी उत्तम माना जाता है।\n\nपरिसर की गहन स्वच्छता और वास्तु संतुलन\nपर्व के समय केवल बाहरी दिखावे या ऊपरी सजावट पर निर्भर रहने के बजाय घर के अप्रयुक्त कोनों की सफाई करना अनिवार्य बताया गया है। अक्सर देखा जाता है कि लोग मुख्य कमरों को चमका देते हैं लेकिन लंबे समय से रखे पुराने सामान, स्टोर रूम और अंधेरे कोनों की उपेक्षा कर देते हैं।\n\nवास्तु सिद्धांतों के अनुसार पूजा स्थल, तिजोरी के आसपास का स्थान और मुख्य द्वार पर रत्ती भर भी धूल या कबाड़ नहीं होना चाहिए। जहां स्वच्छता, व्यवस्थित रखरखाव और प्रकाश की समुचित व्यवस्था होती है, वहीं माता लक्ष्मी का स्थायी निवास संभव माना जाता है। अतः दीपावली पूजन से पूर्व पूरे घर का कचरा बाहर निकाल कर पर्यावरण को शुद्ध करना ही समृद्धि का मूल आधार है।\n\nइसका आप पर असर\nदीपावली पर बताए गए इन पारंपारिक वास्तु नियमों का पालन करके परिवार अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, स्वच्छता और सकारात्मक माहौल तैयार कर सकते हैं।\n\n• दैनिक स्वच्छता: पूजन से पूर्व घर के पुराने कबाड़ और धूल की छंटाई से रहने का परिवेश स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बनता है। इससे परिवार के सदस्यों में ताजगी और सकारात्मक सोच का संचार होता है।\n• आर्थिक योजना: तिजोरी को व्यवस्थित करके शुभ सामग्री स्थापित करने से धन प्रबंधन और बचत पर परिवार का ध्यान केंद्रित होता है। यह वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में मददगार साबित होता है।\n• पारंपरिक नियम: प्रवेश द्वार पर 11 घी के दीपक पूर्व दिशा में रखने का स्पष्ट नियम पूजन विधि को अनुशासित करता है। श्रद्धालु निर्धारित समय पर सही दिशा का पालन करके पूजा संपन्न कर सकते हैं।\n• समय सीमा: यह समस्त तैयारी वर्ष 2026 में 8 नवंबर को पड़ने वाली दीपावली से पूर्व पूरी करनी होगी। समय रहते व्यवस्था करने से ऐन वक्त की हड़बड़ी से बचा जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदीपावली की रात वास्तु नियमों और विशेष वस्तुओं के उपयोग के पीछे प्राचीन मान्यताएं और ऊर्जा संतुलन के सिद्धांत जुड़े हुए हैं।\n\n• सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश: मुख्य द्वार को घर का मुख माना जाता है, जहां से वायु और प्रकाश के साथ ऊर्जा का प्रवेश होता है। हल्दी-कुमकुम का स्वास्तिक और 11 दीपक नकारात्मक शक्तियों को रोककर सकारात्मक प्रवाह बढ़ाने के उद्देश्य से लगाए जाते हैं।\n• प्राकृतिक प्रतीकों का महत्व: कौड़ी और गोमती चक्र जल तत्व तथा समृद्धि के पारंपरिक प्रतीक माने जाते हैं। लाल वस्त्र में बांधकर इन्हें उत्तर-पश्चिम दिशा में रखने की परंपरा आर्थिक अवरोध दूर करने के विश्वास पर आधारित है।\n• स्वच्छता का आध्यात्मिक आधार: धार्मिक मान्यताओं में देवी लक्ष्मी का वास केवल वहीं माना गया है जहां स्वच्छता और व्यवस्था हो। गंदगी और अव्यवस्था को नकारात्मकता का मुख्य स्रोत समझा जाता है, जिसे दूर करना पर्व का प्राथमिक नियम है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वर्ष 2026 में दीपावली का पर्व किस तारीख को मनाया जाएगा?\nसाल 2026 में दीपावली का त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा।\n\n2. दीपावली के दिन मुख्य द्वार पर कितने दीपक जलाने की सलाह दी गई है?\nप्रवेश द्वार के दोनों तरफ 11-11 शुद्ध घी के दीपक जलाने का विधान बताया गया है।\n\n3. मुख्य द्वार पर दीपक जलाते समय किस दिशा का ध्यान रखना जरूरी है?\nदीपक प्रज्वलित करते समय दीपक की लौ या मुख सदैव पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।\n\n4. तिजोरी के उपाय के लिए कितनी कौड़ियां और गोमती चक्र चाहिए?\nइस उपाय के लिए सात पीली कौड़ियां और 11 गोमती चक्र एक लाल कपड़े में बांधकर रखने चाहिए।\n\n5. कौड़ी और गोमती चक्र की पोटली को तिजोरी में किस दिशा में रखना चाहिए?\nइस पोटली को घर की तिजोरी या धन स्थान के उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थापित करना चाहिए।\n\n6. मुख्य दरवाजे पर स्वास्तिक किन चीजों से बनाना शुभ माना गया है?\nमुख्य द्वार के दोनों पाश्र्वों पर हल्दी और कुमकुम के मिश्रण से स्वास्तिक बनाना शुभ बताया गया है।",
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    "पंडित नंद किशोर मुदगल"
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