# गर्मी में कूलर लगाने जा रहे हैं? वास्तु के मुताबिक इस एक दिशा से दूरी बनाना ही समझदारी, जानें कहां रखने पर बरसेगा पैसा

> वास्तु शास्त्र कूलर को जल और वायु तत्व का संगम मानता है। जानिए घर की किस दिशा में इसे रखना सुख-समृद्धि लाता है और कौन-सी दिशा आर्थिक तंगी और कलह को न्योता दे सकती है।

**Category:** वास्तु · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/vastu/garmi-men-kulara-lagane-ja-rahe-hain-vastu-ke-mutabika-isa-eka-disha-se-duri-ban-404

तपती गर्मी में एयर कूलर हर घर की पहली पसंद बन जाता है, क्योंकि यह कम खर्च में ठंडक का सबसे आसान जरिया है। लेकिन वास्तु शास्त्र की नजर में यह सिर्फ बिजली से चलने वाला कोई सामान्य उपकरण नहीं है। इसमें पानी भी भरा होता है और यह हवा भी फेंकता है, यानी इसके भीतर जल और वायु दोनों तत्व एक साथ सक्रिय रहते हैं। इसी वजह से माना जाता है कि कूलर को घर में किस कोने में टिकाया गया है, इसका सीधा असर घर की ऊर्जा और माहौल पर पड़ता है। ठीक दिशा में रखा कूलर जहां शुभ फल दे सकता है, वहीं गलत जगह चुनने पर तरह-तरह की दिक्कतें सिर उठा सकती हैं।

## सबसे उपयुक्त मानी गई है वायव्य दिशा

वास्तु के जानकार उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण को कूलर के लिए नंबर एक जगह बताते हैं। तर्क यह है कि यह दिशा वायु तत्व की मानी जाती है और कूलर का काम ही हवा देना है, इसलिए दोनों का मेल बनता है। मान्यता है कि इस कोने में रखा कूलर घर में सकारात्मक ऊर्जा का बहाव बनाए रखता है, परिवार के लोगों के लिए तरक्की के दरवाजे खोलता है और साथ ही इसकी ठंडी हवा का फायदा भी कहीं बेहतर ढंग से मिलता है।

## उत्तर दिशा से जुड़ा है धन का योग

उत्तर दिशा का संबंध धन के देवता कुबेर और जल तत्व से जोड़ा जाता है। चूंकि कूलर पानी के बिना चल ही नहीं सकता, इसलिए इसे इस दिशा में रखना भी शुभ बताया गया है। वास्तु मान्यता कहती है कि ऐसा करने पर घर में आर्थिक स्थिरता टिकी रहती है और पैसों से जुड़ी उलझनें कुछ कम हो सकती हैं।

## विकल्प के तौर पर पूर्व दिशा भी ठीक

कई बार घर की बनावट ऐसी होती है कि उत्तर या वायव्य कोने में कूलर रखना मुमकिन नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में पूर्व दिशा को एक अच्छा विकल्प माना गया है। कहा जाता है कि इस ओर कूलर रखने से घरवालों की सेहत दुरुस्त रहती है और सोच में सकारात्मकता बढ़ती है।

## दक्षिण-पूर्व कोने को कहें ना

सबसे बड़ी सावधानी इसी दिशा को लेकर है। वास्तु शास्त्र दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण को अग्नि तत्व का इलाका मानता है। पानी से भरे कूलर को आग वाली इस दिशा में रखना उचित नहीं समझा जाता, क्योंकि अग्नि और जल का यह टकराव असंतुलन पैदा करता है। मान्यता के अनुसार इसी असंतुलन से घर में तनाव, आपसी विवाद और आर्थिक परेशानियां बढ़ने लगती हैं। यही कारण है कि इस कोने से कूलर को दूर रखने की सलाह दी जाती है।

## दिशा के अलावा इन बातों पर भी दें ध्यान

सिर्फ सही दिशा चुन लेना ही काफी नहीं है। वास्तु के मुताबिक खराब या बेकार पड़े कूलर को लंबे समय तक गंदा छोड़े रखना अशुभ माना जाता है। साथ ही कूलर का पानी समय-समय पर बदलते रहना चाहिए, क्योंकि एक ही जगह रुका और मैला पानी घर में नकारात्मकता को न्योता दे सकता है।

**(डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।)**

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