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  "type": "article",
  "title": "अंडाल में खदान क्षेत्र की जमीन धंसने से मची तबाही, 1000 लोग हुए बेघर और ईसीएल प्रबंधन पर फूटा गुस्सा",
  "summary": "पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले स्थित अंडाल में बंद कोयला खदान के ऊपर अचानक जमीन धंसने से करीब 1000 लोग बेघर हो गए हैं। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने ईसीएल प्रबंधन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है।",
  "content": "पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले स्थित अंडाल कस्बे में भू-धंसान की घटना के बाद से माहौल बेहद तनावपूर्ण और चिंताजनक बना हुआ है। प्रभावित इलाके में चारों तरफ तबाही का मंजर नजर आ रहा है, कहीं जमीन पर गहरी और चौड़ी दरारें पड़ गई हैं, कहीं मकानों के आंगन ध्वस्त हो गए हैं, तो कहीं रिहायशी इमारतों की दीवारें खतरनाक तरीके से झुक चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन और ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की टीमों ने सुरक्षा के लिहाज से पूरे प्रभावित क्षेत्र की घेराबंदी कर दी है। इसके बावजूद, बेघर हुए लोग अपनी जिंदगी भर की मेहनत से जोड़ी गई जमा-पूंजी, घरेलू सामान और महत्वपूर्ण सरकारी कागजात पीछे छोड़ने को तैयार नहीं हैं। सुरक्षा खतरों का हवाला देकर पुलिस और प्रशासन लोगों को जर्जर इमारतों में जाने से रोक रहा है, लेकिन कई निवासी जान जोखिम में डालकर अपने घरों में दाखिल होने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।\n\nअचानक हुई भू-धंसान और रात भर मची चीख-पुकार\nयह हादसा उस वक्त शुरू हुआ जब इलाके में अचानक एक तेज और खौफनाक धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इसके तुरंत बाद जमीन फटने लगी और देखते ही देखते लंबी-लंबी दरारें उभर आईं। कुछ ही पलों के भीतर एक के बाद एक कई मकान जमीन में धंसने लगे। अपनी आंखों के सामने अपने सपनों के आशियानों को ढहते देख लोग बदहवास होकर जान बचाने के लिए बाहर की तरफ भागे। इस अचानक आई आपदा के कारण करीब 1000 लोग रातों-रात बेघर हो गए। मंगलवार की पूरी रात प्रभावित परिवारों ने बेहद दहशत और अनिश्चितता के माहौल में काटी। कई लोगों ने स्थानीय धर्मशालाओं में पनाह ली, जबकि बड़ी संख्या में लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हुए। हालांकि, बुधवार से प्रशासन की ओर से प्रभावितों के लिए भोजन का प्रबंध शुरू किया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ खाना बांटने से उनके बेघर होने का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।\n\nदस्तावेजों का संकट और छात्रों के भविष्य पर मंडराता अनिश्चितता का साया\nबेघर हुए लोगों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके आवश्यक दस्तावेजों की है। निवासियों के आधार कार्ड, वोटर पहचान पत्र, राशन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य महत्वपूर्ण कागजात क्षतिग्रस्त घरों के भीतर ही फंसे रह गए हैं। निवासियों को डर है कि अगर ये दस्तावेज जल्द बाहर नहीं निकाले गए, तो आने वाले समय में उन्हें पहचान साबित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस आपदा से सबसे अधिक प्रभावित छात्र-छात्राएं हुए हैं। अपनी सामान्य पढ़ाई-लिखाई से दूर होकर कुछ विद्यार्थी अस्थायी डॉरमेट्री के एक कोने में बैठकर अपनी पढ़ाई जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सभी के चेहरों पर एक ही सवाल है कि आखिर उनकी जिंदगी दोबारा सामान्य पटरी पर कब लौटेगी, जिसका जवाब फिलहाल किसी प्रशासनिक अधिकारी के पास नहीं है।\n\nईसीएल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप और राजनीतिक आक्रोश\nघटना के बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी गुस्सा है। लोगों का स्पष्ट रूप से कहना है कि यह कोई अचानक आई प्राकृतिक आपदा नहीं है, बल्कि सालों से जारी प्रशासनिक और संस्थागत लापरवाही का सीधा परिणाम है। बंद पड़ी कोयला खदानों के ऊपर बसे इस कस्बे में जब भी भारी बारिश होती है, तब-तब भू-धंसान और भूस्खलन का खतरा मंडराने लगता है। निवासियों का आरोप है कि बार-बार पत्राचार और शिकायतों के बावजूद खदान सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।\n\nआपदा की सूचना मिलते ही रानीगंज के विधायक पार्थ घोष और पांडवेश्वर के पूर्व सीपीआईएम विधायक गौरांग चटर्जी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के प्रबंधन के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। विधायक पार्थ घोष ने दावा किया कि यह हादसा ईसीएल के बकोला क्षेत्र से जुड़े कोलियरी अधिकारियों की घोर लापरवाही की वजह से हुआ है, जिन्होंने बार-बार चेतावनी दिए जाने के बाद भी कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाया। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए तुरंत सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास और उचित मुआवजे की मांग की। वहीं, पूर्व विधायक गौरांग चटर्जी ने आरोप लगाया कि खनन क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में ईसीएल की विफलता के कारण आज आम नागरिकों को अपने घर छोड़कर दर-दर भटकने पर मजबूर होना पड़ा है।\n\nस्थायी पुनर्वास और मुआवजा देने की बढ़ती मांग\nप्रशासन द्वारा दी जा रही तात्कालिक राहत के बीच प्रभावित लोग अब स्थायी समाधान की मांग पर अड़े हैं। इलाके में जारी तनाव को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बनी हुई है, वहीं ईसीएल और जिला प्रशासन के अधिकारियों पर दबाव बढ़ रहा है कि वे विस्थापित 1000 लोगों के लिए सुरक्षित आवास, नष्ट हुए ढांचों के मुआवजे और फंसे हुए दस्तावेजों को सुरक्षित बाहर निकालने की ठोस योजना तुरंत सार्वजनिक करें।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: पुरानी और बंद पड़ी खदानों के निकट स्थित आवासीय क्षेत्रों में बुनियादी सुरक्षा मानकों और समयबद्ध पुनर्वास नीतियों को लागू करने की आवश्यकता रेखांकित होती है।\n\nपश्चिम बंगाल (अंडाल) में: विस्थापित हुए 1000 नागरिकों को तत्काल सुरक्षित आवास, दैनिक आवश्यकता की आपूर्ति और घरों में फंसे आवश्यक दस्तावेजों की पुनर्प्राप्ति की सख्त जरूरत है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अंडाल में जमीन धंसने की घटना कहां और क्यों हुई?\nयह घटना पश्चिम बंगाल के पश्चिम बर्दवान जिले स्थित अंडाल कस्बे में ईसीएल के बकोला क्षेत्र की बंद कोयला खदान के ऊपर हुई, जहां खदान की ढलान और बारिश के कारण अचानक जमीन धंस गई।\n\n2. इस हादसे में कितने लोग प्रभावित और बेघर हुए हैं?\nभू-धंसान की इस अचानक आई आपदा में करीब 1000 लोग रातों-रात बेघर हो गए और उन्हें धर्मशालाओं या खुले आसमान के नीचे शरण लेनी पड़ी।\n\n3. स्थानीय लोगों ने हादसे के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया है?\nस्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) के बकोला क्षेत्र के अधिकारियों पर बार-बार चेतावनी देने के बावजूद सुरक्षा कदम न उठाने का आरोप लगाया है।\n\n4. प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांगें क्या हैं?\nपीड़ित परिवारों की प्रमुख मांग सुरक्षित स्थान पर स्थायी पुनर्वास, वित्तीय मुआवजा और क्षतिग्रस्त घरों में फंसे आधार कार्ड व बैंक दस्तावेजों को सुरक्षित बाहर निकालना है।",
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  "category": "पश्चिम बंगाल",
  "publishedAt": "2026-07-29",
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