{
  "type": "article",
  "title": "आशुतोष रांका और सौरव दास की हिरासत बढ़ने पर भड़कीं ममता बनर्जी, तुरंत रिहाई की उठाई मांग",
  "summary": "जंतर-मंतर मामले में आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ाए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा विरोध जताते हुए इसे युवाओं का उत्पीड़न बताया।",
  "content": "पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सामाजिक कार्यकर्ताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने दोनों युवा कार्यकर्ताओं को अविलंब जेल से रिहा करने का आग्रह करते हुए वर्तमान प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके अनुसार देश भर में नौजवानों की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने के सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।\n\nसोशल मीडिया पर तीखा प्रहार\nममता बनर्जी ने अपने आधिकारिक X पर लिखा कि हिरासत की अवधि को लगातार आगे बढ़ाने के पीछे अधिकारियों की हताशा साफ झलकती है। उन्होंने इस पूरी कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला करने वाला एक खतरनाक वायरस करार दिया और कहा कि नई पीढ़ी के लड़के और लड़कियों को इस तरह प्रताड़ित करना तत्काल बंद होना चाहिए।\n\n \nप्रशासनिक रुख की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का दमनात्मक रवैया लंबे समय तक नहीं चलने वाला है। ममता बनर्जी ने कहा, \"यह 'स्टेट-स्पॉन्सर्ड' (सरकार द्वारा प्रायोजित) आतंकवाद है।\" उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि राजनीतिक ताकत हमेशा किसी एक के हाथ में नहीं रहती। देश के स्वाधीनता सेनानियों के संघर्ष को याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह हमारे पुरखों ने औपनिवेशिक हुकूमत के जुल्मों का डटकर मुकाबला किया था, उसी तरह आज भी लोग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए अडिग खड़े रहेंगे।\n\nकोलकाता से दिल्ली और मुंबई तक का जिक्र\nममता बनर्जी के अनुसार कोलकाता, दिल्ली और मुंबई समेत देश के तमाम बड़े शहरों में नागरिकों और युवाओं पर दबाव की स्थिति चरम पर पहुंच चुकी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जब निष्ठावान नागरिक लोकतंत्र और राष्ट्र को सुरक्षित रखने के संकल्प के साथ आगे आएंगे, तब सत्ता के गलियारों में बैठे अहंकारियों को असलियत समझ में आएगी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि व्यवस्था वास्तव में लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करती है, तो आशुतोष और सौरव को बिना किसी विलंब के मुक्त किया जाना चाहिए।\n\nमजिस्ट्रेट के समक्ष हुई थी पेशी\nयह पूरा राजनीतिक विवाद उस समय और गहरा गया जब सौरव दास और आशुतोष रांका को मंदिर मार्ग थाने में तैनात विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। सुनवाई के बाद मजिस्ट्रेट ने दोनों को अतिरिक्त दो दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। दूसरी ओर इस मामले में यह बात भी उठ रही है कि दोनों सह-संयोजकों को जेल में बनाए रखने के उद्देश्य से उनकी जमानत प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाने की कोशिशें की जा रही हैं।\n\nजंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला\nगौरतलब है कि यह कानूनी कार्रवाई राष्ट्रीय राजधानी में स्थित जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हुई है। दोनों कार्यकर्ताओं पर तय नियमों और पाबंदियों की अनदेखी करने का आरोप लगा था। दोनों ने जंतर-मंतर परिसर के बंद मुख्य द्वार को फांदकर भीतर प्रवेश किया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें मौके पर ही रोक कर हिरासत में ले लिया था।\n\nउस शुरुआती घटना के बाद 13 अक्टूबर को दोनों को पहली बार पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अब अनधिकृत रूप से प्रवेश करने के इस पूरे मामले की विस्तृत जांच अपराध शाखा यानी क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है, जिससे दोनों सीजेपी नेताओं की कानूनी अड़चनें और बढ़ गई हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह घटनाक्रम नागरिक विरोध प्रदर्शनों और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी के संबंध में कड़े प्रशासनिक नियमों के प्रभाव को दर्शाता है।\n\n• नागरिक अधिकारों पर प्रभाव: सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन करते समय स्थानीय पुलिस द्वारा तय किए गए नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कानूनी धाराओं का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों को किसी भी क्षेत्र में अनुमति की शर्तों की पूरी जानकारी रखनी चाहिए।\n• दिल्ली में: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील विरोध स्थलों पर सुरक्षा घेरे तोड़ने या अनधिकृत प्रवेश करने पर तुरंत गिरफ्तारी और मामले अपराध शाखा को सौंपे जा रहे हैं। वहां पहुंचने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों को सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा।\n• कानूनी प्रक्रियाओं की समयसीमा: विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र और पुलिस हिरासत के विस्तार से जमानत मिलने में देरी हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में विधिक सहायता टीमों को समय पर उचित अदालतों में अपील दायर करनी होगी।\n• छात्र और युवा समुदाय: राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों से जुड़े युवाओं के लिए यह मामला स्पष्ट करता है कि नियम तोड़ने पर अदालती कार्रवाई लंबी खिंच सकती है। अपने मुद्दों को उठाते समय कानूनी दायरे में रहना बेहद आवश्यक है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा पाबंदियों को तोड़े जाने और उसके बाद प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए सख्त कदमों की वजह से पैदा हुआ है।\n\n• सीधा कारण: कार्यकर्ताओं द्वारा जंतर-मंतर के बंद प्रवेश द्वार को फांदकर भीतर जाने के कारण पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और पाबंदियों के उल्लंघन का मामला दर्ज किया। इसी के चलते अदालत ने पहले 13 अक्टूबर को पांच दिन और फिर दो दिन की अतिरिक्त न्यायिक हिरासत मंजूर की।\n• जमानत प्रक्रिया पर विवाद: बचाव पक्ष और राजनीतिक विरोधियों का आरोप है कि जमानत की सुनवाई में जानबूझकर अड़चनें पैदा की जा रही हैं ताकि दोनों सह-संयोजकों को जेल से बाहर आने से रोका जा सके।\n• जांच का स्तर बढ़ना: अनधिकृत प्रवेश के इस मामले को स्थानीय थाने से हटाकर अपराध शाखा को सौंप दिया गया, जिससे जांच का दायरा और कानूनी जटिलता बढ़ गई।\n• राजनीतिक विरोध: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस कानूनी कार्रवाई को युवाओं की आवाज कुचलने और सरकारी तंत्र का दुरुपयोग करार देते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ममता बनर्जी ने आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में क्या कहा?\nउन्होंने दोनों की हिरासत को सरकार प्रायोजित उत्पीड़न बताते हुए कहा कि नई पीढ़ी के युवाओं को प्रताड़ित करना बंद किया जाए और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।\n\n2. आशुतोष रांका और सौरव दास को कब और क्यों हिरासत में लिया गया था?\nदोनों को जंतर-मंतर पर पाबंदियों का उल्लंघन करने और ताला लगे गेट को फांदकर अंदर प्रवेश करने के आरोप में 13 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।\n\n3. सोमवार को मजिस्ट्रेट अदालत से क्या आदेश आया?\nमंदिर मार्ग थाने में विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के बाद दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई।\n\n4. इस मामले की जांच अब कौन सी एजेंसी कर रही है?\nजंतर-मंतर पर अनधिकृत प्रवेश से जुड़े इस पूरे मामले की जांच क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई है।",
  "url": "https://trendkia.com/west-bengal/ashutosh-ranka-aura-sourav-das-ki-hirasata-barhane-para-bharakin-mamata-banerjee-turnta-rihai-ki-uthai-manga-49633",
  "category": "पश्चिम बंगाल",
  "publishedAt": "2026-10-20",
  "tags": [
    "ममता बनर्जी",
    "आशुतोष रांका",
    "सौरव दास",
    "जंतर मंतर",
    "न्यायिक हिरासत",
    "क्राइम ब्रांच",
    "दिल्ली पुलिस"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}