बंगाल की खाड़ी में बढ़ता सतही तापमान बढ़ा रहा तेज तूफानों की आशंका बंगाल की खाड़ी की सतह पर बढ़ती गर्मी और तापमान के चलते भविष्य में चक्रवाती तूफानों के तेजी से ताकतवर होने और अप्रत्याशित व्यवहार का जोखिम गहराने लगा है। समुद्री सतह पर बढ़ता तापमान और पानी में जमा हो रही अतिरिक्त ऊष्मा आने वाले दिनों में मौसमी चक्र को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। बंगाल की खाड़ी भौगोलिक रूप से हमेशा से ही चक्रवातों के लिहाज से संवेदनशील इलाका रही है, लेकिन अब पानी का असामान्य रूप से गर्म होना इन तूफानी प्रणालियों को अतिरिक्त ऊर्जा देने का काम कर रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर वायुमंडलीय और समुद्री परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो कम समय के भीतर कोई भी मौसमी विक्षोभ बहुत तीव्र चक्रवात में तब्दील हो सकता है। तट से टकराने से ठीक पहले तूफानों की तीव्रता में अचानक होने वाली यह बढ़ोतरी तटीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। यही कारण है कि समुद्र विज्ञानी इस पूरे बदलाव को भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत मानकर बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। भविष्य के खतरों को लेकर विशेषज्ञों की चेतावनी इस पूरी स्थिति का तात्पर्य यह कतई नहीं है कि इस समय कोई विनाशकारी तूफान सीधे दस्तक देने की स्थिति में है। वास्तविक चिंता भविष्य में बनने वाले मौसमी तंत्रों और उनके अप्रत्याशित व्यवहार को लेकर है। समुद्र के तापमान में होने वाली इस बढ़ोतरी से वर्षा के नियमित ढर्रे में भी व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। ओडिशा सहित पूरे पूर्वी समुद्री तट पर बसे राज्यों में अचानक अत्यधिक बारिश, जलभराव, बाढ़ और समुद्री कटाव जैसी समस्याएं विकराल रूप ले सकती हैं। इसके अलावा समुद्र पर निर्भर रहने वाले मछुआरों और स्थानीय समुदायों के लिए भी समुद्र की अनिश्चितता नई मुश्किलें लेकर आएगी। वैज्ञानिकों के सामने सबसे जटिल चुनौती यह आ रही है कि ये तूफानी तंत्र अब पहले की तरह सीधा व्यवहार नहीं कर रहे हैं, बल्कि तट के निकट पहुंचते ही उनकी शक्ति में अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव दर्ज हो रहा है। गर्म समुद्री जल से मिलती है तूफानों को असीमित ऊर्जा समुद्री विज्ञान शोधकर्ता और सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रताप के. महंती बताते हैं कि कोई भी चक्रवाती तंत्र अपनी मुख्य शक्ति और जीवन गर्म समुद्री जल से ही ग्रहण करता है। सतह का तापमान जितना अधिक होगा, उठने वाले तूफान को उतनी ही ज्यादा भाप, नमी और तापीय ऊर्जा प्राप्त होगी, जिससे वह बेहद कम वक्त में अत्यधिक शक्तिशाली रूप ले सकता है। बंगाल की खाड़ी पहले से ही दुनिया के सबसे अधिक चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में गिनी जाती है, ऐसे में पानी का निरंतर गर्म होना बेहद गंभीर हालात पैदा कर सकता है। जब ऐसे तूफान जमीन से टकराने से ऐन पहले तेजी से तीव्र होते हैं, तो तटीय आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और तैयारियों का समय बहुत घट जाता है। ओडिशा और पूर्वी तटवर्ती इलाकों में बढ़ सकती हैं मुश्किलें बढ़ते समुद्री तापमान का असर केवल तेज हवाओं या चक्रवाती बवंडर तक ही सीमित नहीं रहता। ओडिशा और आसपास के राज्यों में इसके चलते अत्यधिक मूसलाधार बारिश और भयंकर बाढ़ की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। समुद्री लहरों के तेज थपेड़ों से तटीय इलाकों की जमीन का कटाव तेज हो सकता है, जिससे किनारे बसे गांवों और बस्तियों पर संकट मंडराने लगेगा। इसके साथ ही मछुआरों के दैनिक काम-काज पर गहरी चोट पहुंचेगी और अनपेक्षित मौसम के कारण कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसका अर्थ यह है कि खतरा सिर्फ तेज रफ्तार हवा का नहीं, बल्कि भारी वर्षा और समुद्र के उफान का साझा संकट है, जिसकी वजह से तापमान में होने वाले मामूली बदलावों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। बदल रहा है मौसमी प्रणालियों का पारंपरिक व्यवहार आईआईटी भुवनेश्वर के एसोसिएट प्रोफेसर संदीप पटनायक के अनुसार हाल के वर्षों में गंभीर मौसमी प्रणालियों की कार्यप्रणाली में स्पष्ट बदलाव देखा जा रहा है। बंगाल की खाड़ी के भीतर उत्पन्न होने वाले गहरे दबाव और चक्रवाती सिस्टम अक्सर तटीय और भीतरी दोनों ही इलाकों में भारी तबाही मचाने वाली वर्षा लाते हैं। सामान्य परिस्थितियों में ये सिस्टम समुद्र के भीतर विकसित होते हैं और तट की ओर बढ़ते हुए धीरे-धीरे शक्ति हासिल करते हैं। हालांकि हाल के दौर में कई प्रणालियां तट के बेहद करीब आकर लंबा वक्त बिताती देखी गई हैं, जहां वे अचानक बहुत शक्तिशाली हो जाती हैं या अप्रत्याशित रूप से कमजोर पड़ जाती हैं। समुद्र और जमीनी सतह के बीच चलने वाली यह जटिल परस्पर क्रिया सटीक मौसम पूर्वानुमान जारी करने के काम को काफी पेचीदा बना देती है। 28 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान का महत्वपूर्ण संकेत मौसम विभाग के वैज्ञानिक उमाशंकर दास के अनुसार बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का सामान्य तापमान आमतौर पर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। इतना तापमान किसी भी मौसमी प्रणाली को भरपूर नमी और गतिशीलता प्रदान करने के लिए पर्याप्त होता है। इस सीमा में होने वाली थोड़ी सी भी बढ़ोतरी चक्रवात की अंतिम शक्ति को कई गुना बढ़ा सकती है। इसके साथ ही समुद्र के भीतर मौजूद कुल ऊष्मा और ऊपरी जल स्तर के मिश्रण की प्रक्रिया भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि समुद्र की ऊपरी परत में अतिरिक्त गर्मी लंबे समय तक टिकी रहती है, तो चक्रवाती तंत्र को बिना रुके लगातार ऊर्जा मिलती रहती है, जिससे उसकी मारक क्षमता बढ़ जाती है। मौसम वैज्ञानिकों के समक्ष निगरानी की बड़ी चुनौती बंगाल की खाड़ी में चक्रवातों के सटीक मार्ग और उनकी ताकत का सही समय पर अनुमान लगाना इसलिए भी कठिन है, क्योंकि यहां समुद्र और वायुमंडल के बीच कई तरह की भौतिक प्रक्रियाएं एक साथ सक्रिय रहती हैं। गर्म पानी के अलावा हवा की दिशा, गति और ऊपरी वायुमंडल की रासायनिक व भौतिक स्थितियां भी तूफान के पूरे पथ को निर्धारित करती हैं। ऐसी स्थिति में मौसम विज्ञानियों के लिए सबसे जरूरी यह हो गया है कि वे समुद्र के हर हिस्से से वास्तविक समय का डेटा एकत्र करें। बंगाल की खाड़ी के जिन समुद्री क्षेत्रों में वर्तमान में निगरानी तंत्र की कमी है, वहां तत्काल आधुनिक समुद्री निगरानी उपकरण और सेंसर्स स्थापित करने की मांग की जा रही है, ताकि समय रहते सटीक अलर्ट जारी किए जा सकें। इसका आप पर असर बंगाल की खाड़ी के गर्म होने से भविष्य में पूर्वी तटीय क्षेत्रों में तूफानों की अप्रत्याशित तीव्रता, भारी बारिश और तटीय कटाव का खतरा काफी बढ़ सकता है। • भारत में: पूर्वी तटवर्ती राज्यों में मौसम के बदलते मिजाज के कारण मानसून और चक्रवात पूर्व तैयारियों पर असर पड़ेगा। इसके चलते आपदा प्रबंधन एजेंसियों को वास्तविक समय की निगरानी और पूर्व चेतावनी प्रणालियों को और मजबूत करना होगा। • ओडिशा में: तटीय बस्तियों और कृषि क्षेत्रों में बाढ़ और कटाव का जोखिम गहरा सकता है। समुद्र में जाने वाले मछुआरों को मौसम विभाग के ताजा अलर्ट पर लगातार नजर रखनी होगी। • आजीविका पर असर: तटीय इलाकों में मछली पकड़ने के व्यवसाय और स्थानीय व्यापार में अनिश्चितता बढ़ सकती है। बदलते मौसम के कारण किसानों को भी फसलों की बुवाई और कटाई के समय सावधानी बरतनी होगी। • आपदा प्रबंधन: तटीय प्रशासन को आपातकालीन बचाव योजनाओं और शरणस्थलों की व्यवस्था को पहले से ज्यादा दुरुस्त रखना पड़ेगा। कम समय में तेज होने वाले तूफानों के लिए त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र जरूरी हो जाएगा। ऐसा क्यों हुआ बंगाल की खाड़ी की सतह का तापमान सामान्य 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के दायरे में रहने और अतिरिक्त ऊष्मा संचित होने से मौसमी विक्षोभों को अत्यधिक ऊर्जा मिल रही है। • तापीय ऊर्जा का संचय: गर्म समुद्री जल भाप और नमी का मुख्य स्रोत होता है, जो तूफानी प्रणालियों को तेजी से शक्ति प्रदान करता है। ऊपरी परत में गर्मी लंबे समय तक टिकने से चक्रवात तट के करीब पहुंचकर भी ऊर्जावान बने रहते हैं। • वायुमंडलीय जटिलताएं: समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाली कई समानांतर प्रक्रियाएं मौसमी प्रणालियों के व्यवहार को अप्रत्याशित बना रही हैं। हवा की दिशा और ऊपरी वायुमंडलीय स्थितियां मिलकर तूफानों के मार्ग और तीव्रता में अचानक बदलाव लाती हैं। • निगरानी का अभाव: समुद्र के कई दूरस्थ हिस्सों में पर्याप्त रीयल-टाइम निगरानी तंत्र न होने से डेटा मिलने में कठिनाई आती है। सटीक सूचनाओं की कमी के कारण वैज्ञानिक तंत्रों के अचानक बदलने वाले व्यवहार का समय रहते आकलन करने में चुनौतियां महसूस कर रहे हैं। सवाल-जवाब 1. क्या बंगाल की खाड़ी में फिलहाल कोई चक्रवात दस्तक दे रहा है? फिलहाल किसी खास विनाशकारी चक्रवात के आने की सूचना नहीं है, यह चेतावनी भविष्य के खतरों को लेकर है। 2. समुद्र का तापमान चक्रवात को कैसे प्रभावित करता है? गर्म समुद्री जल से तूफान को अतिरिक्त गर्मी और नमी मिलती है, जिससे वह कम समय में बहुत अधिक ताकतवर हो सकता है। 3. बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का सामान्य तापमान कितना रहता है? मौसम विज्ञानियों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में समुद्री सतह का तापमान आमतौर पर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के करीब रहता है। 4. इस स्थिति से किन क्षेत्रों के सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है? ओडिशा समेत भारत के पूर्वी तटीय राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और तटीय कटाव का खतरा बढ़ सकता है। https://trendkia.com/west-bengal/bay-of-bengal-men-barhata-satahi-tapamana-barha-raha-teja-tuphanon-ki-ashnka-42582 TrendKia — Har trend, sabse pehle.