बंगाल के स्कूली बच्चों की थाली में इस्कॉन के सात्विक भोजन के साथ जुड़ेगा अंडा, टीएमसी नेता कुणाल घोष ने जनगणना और सुरक्षा पर भी सरकार को घेरा पश्चिम बंगाल के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इस्कॉन के सात्विक शाकाहारी भोजन के साथ अब बच्चों को अलग से अंडा दिया जाएगा। तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने इस फैसले को बच्चों के पोषण अधिकार की जीत बताते हुए 2027 की जनगणना और आतंकवाद के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। कोलकाता में पश्चिम बंगाल के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में दिए जाने वाले मिड-डे मील योजना को लेकर उठा विवाद अब एक नया मोड़ ले चुका है। सुवेंदु सरकार द्वारा राज्य के स्कूली भोजन की आपूर्ति का जिम्मा इस्कॉन संस्था को सौंपे जाने के बाद से बच्चों की थाली से अंडा गायब हो गया था। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। कुणाल घोष ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति पूरा सम्मान होने के बावजूद स्कूली बच्चों के पोषण और उनके पसंदीदा आहार के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। टीएमसी की लगातार मांग के बाद अब सरकार ने इस्कॉन के शाकाहारी मेनू के साथ बच्चों को अलग से अंडा देने की व्यवस्था पर सहमति जताई है। स्कूली पोषण और इस्कॉन के भोजन मॉडल पर विवाद पश्चिम बंगाल चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पराजय के पश्चात अस्तित्व में आई नई मुख्यमंत्री सुवेंदु की सरकार ने विद्यालयों में मिड-डे मील तैयार करने तथा बांटने का टेंडर इस्कॉन को आवंटित किया था। इस्कॉन द्वारा आपूर्ति शुरू करते ही स्कूली बच्चों के दैनिक भोजन से अंडा हटा दिया गया। इस कदम का विरोध करते हुए तृणमूल कांग्रेस ने इसे बच्चों के पोषण अधिकारों का सीधा उल्लंघन बताया। पार्टी की ओर से मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने कहा कि इस्कॉन एक बेहद सम्मानित और प्रतिष्ठित धार्मिक संस्था है। संस्था की साख या उनकी कार्यशैली से पार्टी को कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। मूल समस्या यह उत्पन्न हुई कि संस्था के जुड़ने से बच्चों के दैनिक आहार से अंडे को पूरी तरह बाहर कर दिया गया। अंडा बच्चों के शारीरिक विकास और संतुलित पोषण का मुख्य स्रोत होता है। कुणाल घोष ने इस बात पर जोर दिया कि अनेक छोटे बच्चे सामान्य भोजन करने में आनाकानी करते हैं, लेकिन अंडे की मौजूदगी उन्हें खुशी-खुशी खाना खाने के लिए प्रेरित करती है। जब इस्कॉन को भोजन आपूर्ति का दायित्व दिया गया तो संस्था ने अपने धार्मिक नियमों के अनुसार केवल सात्विक शाकाहारी भोजन परोसना शुरू किया। इस पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने शाकाहारी विकल्पों को बढ़ावा देने की वकालत की। शाकाहारी मेनू के साथ अंडा देने के समझौते पर बनी सहमति तृणमूल कांग्रेस ने तर्क दिया कि जो बच्चे या परिवार मांसाहारी भोजन पसंद करते हैं, उनसे उनका आहार चुनने का अधिकार नहीं छीना जा सकता। राज्य सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के दावों के बीच टीएमसी के कड़े रुख के बाद अंततः एक व्यावहारिक समाधान निकाला गया। पार्टी की मांगों के दबाव में आकर सरकार को यह फैसला लेना पड़ा कि इस्कॉन अपने नियमित शाकाहारी मेनू के अनुसार सात्विक भोजन परोसेगा, परंतु जिन बच्चों को अंडे की आवश्यकता है, उन्हें अलग से अंडा उपलब्ध कराया जाएगा। तृणमूल कांग्रेस इस नए फैसले को अपनी एक प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक जीत मान रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे बच्चों के पोषण अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे और किसी संस्था के धार्मिक नियमों का भी उल्लंघन नहीं होगा। कुणाल घोष ने मीडिया के समक्ष आधिकारिक बयान देते हुए अपनी बात रखी, जिसे उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किया। उनका कहना था कि बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी रुचि के साथ खिलवाड़ करने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध किया जाएगा। प्रस्तावित 2027 की जनगणना पर टीएमसी की कड़ी निगरानी मिड-डे मील के विवाद के अलावा कुणाल घोष ने आगामी 2027 की राष्ट्रीय जनगणना को लेकर भी अपनी पार्टी की रणनीतिक स्थिति स्पष्ट की। तृणमूल कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह देश भर में प्रस्तावित जनगणना की पूरी प्रक्रिया पर लगातार सतर्क नजर बनाए रखेगी। कुणाल घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना की आड़ में देश के किसी भी वास्तविक नागरिक को परेशान या प्रताड़ित न किया जाए। उन्होंने आशंका जताई कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं की आड़ में वैध नागरिकों की पहचान या उनके नागरिक अधिकारों पर आघात करने का प्रयास हो सकता है। इसी संदर्भ में तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल के निवासियों और अपनी पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि कार्यकर्ता हर इलाके में स्थिति पर नजर रखें ताकि किसी भी वैध भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची या नागरिक रिकॉर्ड से गलत तरीके से न हटाया जा सके और न ही उसकी पहचान को खतरे में डाला जा सके। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी की गिरफ्तारी और सुरक्षा पर सवाल पत्रकार वार्ता के दौरान कुणाल घोष ने राज्य में हाल ही में स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ द्वारा चलाए गए अभियान और उसमें पकड़े गए संदिग्ध उग्रवादी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। पश्चिम बंगाल से जैश-ए-मोहम्मद के एक संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी के बाद कुणाल घोष ने देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद से निपटना और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा करना एक महत्वपूर्ण पहलू है, परंतु जब कोई घोषित उग्रवादी देश के भीतर एक राज्य से दूसरे राज्य में बेखौफ होकर घूमता है, तो यह बेहद चिंताजनक है। संदिग्ध आतंकी आम नागरिक का छद्म रूप धारण करके आसानी से किराए का मकान ले लेता है और बिना किसी रुकावट के शरण पा जाता है। तृणमूल कांग्रेस नेता ने सीधा सवाल दागा कि जब यह आतंकी विभिन्न राज्यों की सीमाओं को पार कर रहा था और आम बस्तियों में किराए पर रह रहा था, तब केंद्र सरकार की केंद्रीय खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं। उन्होंने इस पूरी घटना को केंद्रीय खुफिया तंत्र और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी नाकामी करार दिया। उन्होंने कहा कि देश के वीर जवानों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इसमें किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जा सकती। राजनीतिक संदेश और भावी रणनीति कुणाल घोष के इन बयानों से यह स्पष्ट संदेश मिलता है कि तृणमूल कांग्रेस आने वाले समय में जनहित, स्कूली पोषण, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों के अधिकारों के मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार को घेरने में कोई ढिलाई नहीं बरतेगी। जहाँ एक तरफ इस्कॉन के शाकाहारी भोजन के साथ अलग से अंडा दिए जाने के निर्णय को टीएमसी अपनी नीतिगत विजय के रूप में पेश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ 2027 की जनगणना और आतंकवाद के मसले पर आक्रामक रुख अपनाकर पार्टी राज्य में अपने जनाधार और राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत करने का प्रयास कर रही है। कुणाल घोष के वक्तव्य ने राज्य की राजनीति में शिक्षा, सुरक्षा और नागरिक अधिकारों की बहस को एक नया आयाम दे दिया है। इसका आप पर असर • भारत में: 2027 में होने वाली प्रस्तावित जनगणना और आंतरिक सुरक्षा के मुद्दों पर देश भर के नागरिकों में अपने अधिकारों और पहचान संबंधी प्रक्रियाओं को लेकर जागरूकता बढ़ेगी। • पश्चिम बंगाल में: सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों के छात्रों को पोषण अधिकार के तहत आहार में अंडा मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूल उपस्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सवाल-जवाब 1. पश्चिम बंगाल के मिड-डे मील विवाद में क्या फैसला हुआ है? इस्कॉन द्वारा दिए जा रहे सात्विक शाकाहारी भोजन के साथ-साथ बच्चों को अलग से अंडे उपलब्ध कराए जाएंगे। 2. तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष ने इस्कॉन संस्था को लेकर क्या स्टैंड लिया? उन्होंने कहा कि टीएमसी इस्कॉन की धार्मिक प्रतिष्ठा का सम्मान करती है, लेकिन बच्चों को पोषण अधिकार और अंडे से वंचित नहीं किया जा सकता। 3. 2027 की जनगणना को लेकर टीएमसी ने क्या चेतावनी दी है? टीएमसी प्रक्रिया पर नजर रख रही है ताकि जनगणना की आड़ में किसी भी वैध भारतीय नागरिक का नाम, पहचान या अधिकार प्रभावित न हो। 4. जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी पर क्या सवाल उठाए गए? कुणाल घोष ने केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा कि संदिग्ध राज्य दर राज्य बिना रोक-टोक कैसे घूम रहा था। https://trendkia.com/west-bengal/bengal-ke-skuli-bachchon-ki-thali-men-iskcon-ke-satvika-bhojana-ke-satha-jurega-anda-tmc-neta-kunal-ghosh-ne-janaganana-aura-surak-12835 TrendKia — Har trend, sabse pehle.