# दुर्गापुर में मोबाइल टावर लगाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन युवतियों समेत सात गिरफ्तार

> पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में किराए के मकान से फर्जी कॉल सेंटर चलाकर देशभर के लोगों को मोबाइल टावर का लालच देने वाले गिरोह के सात सदस्यों को पुलिस ने पकड़ा है।

**Type:** article · **Category:** पश्चिम बंगाल · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/west-bengal/durgapur-men-mobaila-tavara-lagane-ka-jhansa-dekara-saibara-thagi-karane-vale-giroha-ka-pardaphasha-tina-yuvatiyon-sameta-sata-gir-51219 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर अपराध, दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल पुलिस, मोबाइल टावर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर में साइबर अपराध की एक बड़ी साजिश सामने आई है, जहां खाली जमीन और छतों पर मोबाइल टावर स्थापित करने का झांसा देकर देशभर के नागरिकों के बैंक खाते खाली किए जा रहे थे। दुर्गापुर के बेनाचिति इलाके में स्थित एक किराए के मकान पर पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक छापा मारकर एक फर्जी दफ्तर का भंडाफोड़ किया। इस कार्रवाई के दौरान मौके से तीन युवतियों सहित कुल सात आरोपियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस पूरे गोरखधंधे की कमान बिहार से जुड़े एक संदिग्ध समूह के हाथों में थी, जो स्थानीय स्तर पर युवाओं को जोड़कर नेटवर्क चला रहा था।

## किराए के मकान से संचालित हो रहा था ठगी का कॉल सेंटर
जांच अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह बेनाचिति क्षेत्र के एक आवासीय मकान को किराए पर लेकर वहां से पूरा नेटवर्क संचालित कर रहा था। आरोपियों ने देश के विभिन्न राज्यों में रहने वाले जमीन मालिकों और मकान मालिकों की पहचान की और उनसे संपर्क साधना शुरू किया। वे पीड़ितों को प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के मोबाइल नेटवर्क टावर लगाने का प्रस्ताव देते थे। इस प्रस्ताव में जमीन मालिकों को हर महीने भारी-भरकम किराया देने के साथ-साथ लाखों रुपये की अग्रिम एकमुश्त राशि देने का बड़ा प्रलोभन दिया जाता था। इस तरह के लुभावने वादों में फंसकर लोग आसानी से उनकी बातों पर विश्वास कर लेते थे।

## ओटीपी हासिल कर खातों से उड़ाते थे रकम
जब कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति पर टावर लगवाने के लिए राजी हो जाता था, तो जालसाज प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का नाटक करते थे। गिरोह के सदस्य पीड़ितों से कागजी औपचारिकताओं, प्रशासनिक मंजूरी, रजिस्ट्रेशन और फाइल प्रोसेसिंग फीस के नाम पर संपर्क बनाए रखते थे। इसी प्रक्रिया के दौरान किसी न किसी तकनीकी बहाने से पीड़ित के फोन पर आने वाला वन टाइम पासवर्ड अर्थात ओटीपी मांग लिया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति अपना ओटीपी साझा करता, आरोपी तुरंत उसके बैंक खाते में सेंध लगाकर पूरी जमा पूंजी साफ कर देते थे। इस काम के लिए पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जिलों से युवक-युवतियों को भर्ती कर उनसे कॉल कराने का काम लिया जा रहा था।

## लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज और भारी मात्रा में सिम कार्ड जब्त
इस फर्जीवाड़े की गुप्त सूचना मिलने के बाद दुर्गापुर थाने की पुलिस, पश्चिम बंगाल पुलिस की साइबर विंग और ए-जोन आउटपोस्ट की संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से बेनाचिति के इस ठिकाने पर दबिश दी। तलाशी अभियान के दौरान पुलिस ने मौके से कई फर्जी पहचान पत्र, सक्रिय सिम कार्ड, स्मार्टफोन, लैपटॉप, लैन फोन और अन्य संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। पुलिस प्रशासन अब पकड़े गए सातों आरोपियों से सघन पूछताछ कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने अब तक कितने नागरिकों को ठगा है और इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के तार किन-किन अन्य राज्यों से जुड़े हुए हैं।

## इसका आप पर असर
इस कार्रवाई से नागरिकों को दूरसंचार टावर और ऑनलाइन प्रलोभन देने वाले संगठित साइबर गिरोहों के तौर-तरीकों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता का पता चलता है।

- **भारत में:** देश का कोई भी नागरिक यदि अपनी जमीन या छत पर टावर लगवाने के लुभावने प्रस्ताव प्राप्त करता है, तो उसे सीधे संबंधित दूरसंचार कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करनी चाहिए। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ पंजीकरण या शुल्क के नाम पर बैंक विवरण या ओटीपी कभी भी साझा न करें।
- **पश्चिम बंगाल में:** राज्य के मकान मालिकों को अपने परिसर किराए पर देते समय किरायेदारों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन कराना चाहिए। संदिग्ध रूप से आवासीय क्षेत्रों में कई फोन या कॉल सेंटर जैसी गतिविधियां दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी थाने को सूचित करें।
- **वित्तीय सुरक्षा:** यदि किसी व्यक्ति के साथ ऐसी कोई धोखाधड़ी होती है, तो उसे बिना किसी देरी के राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। घटना के पहले कुछ घंटों में सूचना देने से बैंक द्वारा संदिग्ध लेनदेन को रोकने की संभावना बढ़ जाती है।
- **युवाओं के लिए चेतावनी:** नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को बिना आधिकारिक दस्तावेज वाले अनौपचारिक कॉल सेंटरों में काम करने से बचना चाहिए। अनजाने में भी फर्जी कॉल का हिस्सा बनने पर गंभीर कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का सामना करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कार्रवाई एक सुनियोजित साइबर अपराध गिरोह के खिलाफ मिली ठोस खुफिया जानकारी के आधार पर की गई, जो विभिन्न राज्यों के नागरिकों को निशाना बना रहा था।

- **आसान शिकार बनाने की रणनीति:** गिरोह ने ग्रामीण और उपनगरीय इलाकों के जमीन मालिकों को निशाना बनाया, क्योंकि टावर से मिलने वाले भारी किराए और अग्रिम भुगतान का लालच आसानी से लोगों को प्रभावित कर लेता है। अधिकांश लोग दूरसंचार कंपनियों की टावर स्थापना की वास्तविक प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं होते।
- **फर्जी कार्यालय का सहारा:** आरोपियों ने आवासीय क्षेत्र में किराए का मकान लेकर उसे एक गोपनीय कॉल सेंटर का रूप दे दिया। बिहार से आए मास्टरमाइंड ने स्थानीय युवक-युवतियों को भर्ती किया ताकि विभिन्न बोलियों में विश्वास के साथ लोगों से बात की जा सके।
- **ओटीपी आधारित ठगी तंत्र:** जब पीड़ित औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सहमत हो जाते, तो जालसाज प्रक्रिया शुल्क के बहाने ओटीपी मांगते थे। इस तकनीकी झांसे के कारण पीड़ितों को अहसास ही नहीं होता था कि वे अपने ही बैंक खाते की निकासी को मंजूरी दे रहे हैं।
- **पुलिस की संयुक्त कार्रवाई:** दुर्गापुर पुलिस को बेनाचिति इलाके में चल रही इस संदिग्ध गतिविधि की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद स्थानीय थाने, साइबर सेल और चौकी की संयुक्त टीम ने त्वरित छापेमारी कर इस नेटवर्क का खात्मा किया।

## सवाल-जवाब

### 1. दुर्गापुर में पुलिस ने किस तरह के गिरोह का भंडाफोड़ किया है?
पुलिस ने मोबाइल नेटवर्क टावर लगाने का झांसा देकर नागरिकों से ओटीपी लेकर उनके बैंक खातों से पैसे उड़ाने वाले एक अंतरराज्यीय साइबर गिरोह को पकड़ा है।

### 2. इस मामले में कुल कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
छापेमारी के दौरान तीन युवतियों समेत कुल सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

### 3. आरोपी अपना फर्जी दफ्तर कहां से चला रहे थे?
यह गिरोह पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर शहर के बेनाचिति इलाके में स्थित एक किराए के मकान से अपना अवैध कॉल सेंटर चला रहा था।

### 4. छापेमारी के दौरान पुलिस को क्या सामग्री मिली?
पुलिस ने मौके से कई लैपटॉप, स्मार्टफोन, सक्रिय सिम कार्ड, लैन फोन और फर्जी पहचान पत्र बरामद किए हैं।

### 5. जालसाज लोगों को किस बात का लालच देते थे?
आरोपी जमीन या मकान मालिकों को अपनी संपत्ति पर मोबाइल टावर लगवाने के बदले भारी मासिक किराया और बड़ा एकमुश्त एडवांस देने का प्रलोभन देते थे।

### 6. यह गिरोह मुख्य रूप से कहां से संचालित हो रहा था?
यह गिरोह बिहार के एक संदिग्ध समूह द्वारा संचालित किया जा रहा था, जिसने पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से युवक-युवतियों को अपने साथ जोड़ा था।

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