# ग्रामीण रोजगार योजना में सुस्ती पर कड़ा रुख, सीएम सुवेंदु अधिकारी ने बुलाई सभी बीडीओ की समीक्षा बैठक

> पश्चिम बंगाल में 125 दिन की ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की धीमी रफ्तार पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को साल्ट लेक में सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है.

**Type:** article · **Category:** पश्चिम बंगाल · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/west-bengal/gramina-rojagara-yojana-men-susti-para-kara-rukha-cm-suvendu-adhikari-ne-bulai-sabhi-bdos-ki-samiksha-baithaka-55633 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुवेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल, ग्रामीण रोजगार योजना, बीडीओ, साल्ट लेक, दिलीप घोष, पंचायत विभाग, वीबी-जीआरएएम-जी

पश्चिम बंगाल में गांवों के स्तर पर रोजगार गारंटी से जुड़ी परियोजनाओं की रफ्तार उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है. राज्य में 125 दिनों के सुनिश्चित ग्रामीण काम से जुड़ी व्यवस्था के क्रियान्वयन में सुस्ती और फील्ड स्तर पर सामने आ रही ढिलाई को देखते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण समीक्षा सत्र बुलाया है. इस विचार-विमर्श में राज्यभर के सभी ब्लॉक विकास अधिकारी सीधे शामिल होंगे, ताकि जिलों और ब्लॉकों में चल रहे कार्यों का सही लेखा-जोखा सामने आ सके.

## जमीनी स्तर पर रुकावटों की होगी पड़ताल
प्रशासनिक तंत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पंचायत स्तर से लेकर अलग-अलग जिलों में इस कल्याणकारी योजना के संचालन को लेकर लगातार शिकायतें मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजी जा रही थीं. इन पत्रों और ज्ञापनों में अधिकारियों की सुस्ती के साथ-साथ कामों के रुकने का हवाला दिया गया था. इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने कागजी रिपोर्टों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे जमीनी अमले से जवाब मांगने का रास्ता चुना है. बैठक के दौरान हर ब्लॉक में शुरू की गई पहलों का ब्योरा परखा जाएगा और यह जाना जाएगा कि योजना के क्रियान्वयन में कौन सी व्यावहारिक बाधाएं आ रही हैं.

## साल्ट लेक स्थित मुख्यालय में जुटेगा पूरा अमला
यह अहम बैठक बुधवार सुबह 11 बजे शुरू होगी, जिसके लिए कोलकाता के उत्तरी बाहरी इलाके साल्ट लेक में स्थित पश्चिम बंगाल पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास विभाग के मुख्यालय को चुना गया है. प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार, इस मंथन में मुख्यमंत्री के साथ राज्य के पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष और राज्य मंत्री शांतनु प्रमाणिक भी मौजूद रहेंगे. नेतृत्व सीधे तौर पर बीडीओ से यह समझना चाहता है कि कुछ खास इलाकों में काम की गति कमजोर क्यों बनी हुई है और स्थानीय स्तर पर किन प्रशासनिक चूकों की वजह से योजना पिछड़ रही है.

## शीर्ष नौकरशाहों के मंथन के बाद उठाया गया कदम
फील्ड अधिकारियों के साथ यह सीधी बातचीत अचानक नहीं हो रही है, बल्कि इससे ठीक पहले एक उच्चस्तरीय समीक्षा पूरी की जा चुकी है. पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ने विभिन्न महकमों के सचिवों, प्रधान सचिवों और अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ एक मैराथन बैठक की थी. उस चर्चा में भी कई विकास खंडों के अंदर योजनाओं में हो रही देरी का मसला प्रमुखता से रेखांकित हुआ था. सचिवालय के एक अधिकारी के अनुसार, उस बैठक के बाद ही यह तय हुआ कि केवल सचिवालय के भीतर निर्देश जारी करने से बात नहीं बनेगी और ब्लॉक स्तर के प्रभारियों से आमने-सामने संवाद जरूरी है. शीर्ष स्तर से अधिकारियों को साफ संदेश दिया जा चुका है कि ग्रामीण आजीविका से जुड़े इस बड़े कार्यक्रम में किसी भी तरह की लापरवाही को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा.

## 100 की जगह 125 दिन के काम का नया ढांचा
विधानसभा चुनाव के उपरांत सत्ता परिवर्तन के बाद पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की ओर से तैयार विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), यानी वीबी-जीआरएएम-जी व्यवस्था को जमीन पर उतारा गया था. इस नए ढांचे के तहत ग्रामीण परिवारों के लिए काम की गारंटी को पुरानी 100 दिनों की सीमा से बढ़ाकर सालाना 125 दिन कर दिया गया था. यह संशोधित व्यवस्था राज्य में एक जुलाई 2026 से प्रभावी बनाई गई थी. हालांकि नई प्रणाली के औपचारिक रूप से लागू होने के महीनों बाद भी अपेक्षित प्रगति न मिलने से मुख्यमंत्री कार्यालय असंतुष्ट दिखा है. सरकार की मंशा इस बैठक के जरिए प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को तेज गति देने की है.

## इसका आप पर असर
इस समीक्षा बैठक का सीधा असर पश्चिम बंगाल के गांवों में रहने वाले उन परिवारों पर पड़ेगा जो आजीविका के लिए रोजगार गारंटी योजना पर निर्भर हैं.

- **पश्चिम बंगाल में:** ब्लॉक स्तर पर सुस्ती दूर होने से गांवों में काम मिलने की गति तेज होगी. जिन ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का रोजगार समय पर नहीं मिल पा रहा था, उन्हें रुके हुए कार्यों के दोबारा शुरू होने से राहत मिलेगी.
- **भारत में:** केंद्र की वीबी-जीआरएएम-जी नीति को राज्यों में लागू करने के तौर-तरीकों पर इसका प्रभाव दिखेगा. अन्य राज्यों में भी ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही सख्त किए जाने की संभावना बढ़ेगी.
- **पंचायत स्तर पर:** स्थानीय विकास परियोजनाओं के चयन और उनकी मंजूरी में तेजी आएगी. ग्राम पंचायतों में लंबे समय से अटके सार्वजनिक निर्माण कार्य जल्द पूरे किए जा सकेंगे.
- **प्रशासनिक तंत्र पर:** बीडीओ और पंचायत कर्मियों की जवाबदेही तय होने से फाइलों के लटके रहने की समस्या खत्म होगी. कार्यस्थल पर मजदूरों की हाजिरी और मस्टर रोल का प्रबंधन अधिक पारदर्शी बनेगा.

## ऐसा क्यों हुआ
मुख्यमंत्री कार्यालय को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि नई 125 दिवसीय ग्रामीण रोजगार योजना जमीन पर अपेक्षित तेजी नहीं पकड़ पा रही है. इसी असंतोष के चलते राज्य नेतृत्व ने सीधे ब्लॉक विकास अधिकारियों को तलब करने का निर्णय लिया.

- **प्रशासनिक सुस्ती की शिकायतें:** पंचायत और जिला स्तर से नियमित रूप से काम में देरी की रिपोर्टें सचिवालय पहुंच रही थीं. मुख्यमंत्री कार्यालय ने पाया कि कई विकास खंडों में काम की गति संतोषजनक नहीं है.
- **सचिवालय स्तर की समीक्षा का नतीजा:** पिछले सप्ताह विभागीय अतिरिक्त मुख्य सचिवों, प्रधान सचिवों और सचिवों के साथ बैठक में यह मसला उठा था. शीर्ष अधिकारियों की उस बैठक के बाद फील्ड अफसरों से सीधे सवाल-जवाब की जरूरत महसूस की गई.
- **योजना के नए दायरे का दबाव:** राज्य में 1 जुलाई 2026 से 100 दिन के बजाय 125 दिन की रोजगार गारंटी व्यवस्था लागू हुई थी. बदले हुए बड़े लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए स्थानीय अधिकारियों की सीधी जवाबदेही जरूरी हो गई.

## सवाल-जवाब

### 1. मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने किन अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है?
मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) की समीक्षा बैठक बुलाई है.

### 2. यह बैठक कब और किस जगह आयोजित की जा रही है?
यह बैठक बुधवार सुबह 11 बजे साल्ट लेक स्थित राज्य पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास विभाग के मुख्यालय में होगी.

### 3. बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा कौन-कौन से मंत्री शामिल होंगे?
बैठक में पंचायत मामलों एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष और राज्य मंत्री शांतनु प्रमाणिक उपस्थित रहेंगे.

### 4. समीक्षा बैठक बुलाने की मुख्य वजह क्या है?
125 दिन की ग्रामीण रोजगार योजना के क्रियान्वयन में प्रशासनिक सुस्ती और धीमी प्रगति की शिकायतों के बाद यह बैठक बुलाई गई है.

### 5. पश्चिम बंगाल में वर्तमान में कितने दिनों के ग्रामीण रोजगार की गारंटी दी गई है?
नई वीबी-जीआरएएम-जी व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को सालाना 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है, जो पहले 100 दिन थी.

### 6. राज्य में 125 दिनों के रोजगार वाली यह नई व्यवस्था कब से प्रभावी हुई थी?
यह योजना पश्चिम बंगाल में 1 जुलाई 2026 से लागू की गई थी.

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