जादवपुर विश्वविद्यालय के बाहर शुभेंदु अधिकारी की बड़ी रैली, परिसर के द्वार बंद होने पर देशविरोधी ताकतों को उखाड़ फेंकने का दिया संकल्प दक्षिण कोलकाता में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में निकाली गई 3 किलोमीटर लंबी गेरुआ सम्मान यात्रा के दौरान जादवपुर यूनिवर्सिटी के गेट बंद रहे। अधिकारी ने परिसर के बाहर जनसभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रविरोधी तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी हलचल के बीच दक्षिण कोलकाता की सड़कों पर बुधवार को एक बड़ा राजनीतिक और सांस्कृतिक शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में आयोजित तीन किलोमीटर लंबी पदयात्रा के दौरान जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रवेश द्वार पूरी तरह बंद कर दिए गए। परिसर के गेट बंद किए जाने से नाराज शुभेंदु अधिकारी ने यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर एकत्र जनसमूह को संबोधित करते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी को ऋषि अरविंद की पावन भूमि बताते हुए चेतावनी दी कि परिसर के भीतर देशविरोधी नारे लगाने वाली ताकतों और अराजक तत्वों को पूरी तरह उखाड़ फेंका जाएगा। जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस और देशविरोधी ताकतों पर तीखा प्रहार यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार के बाहर जनता को संबोधित करते हुए शुभेंदु अधिकारी ने अपने इरादे साफ किए। उन्होंने कहा कि जादवपुर यूनिवर्सिटी देश का एक प्रमुख सेंटर ऑफ एक्सीलेंस है और यह महान क्रांतिकारी ऋषि अरविंद की भूमि रही है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि परिसर में "कश्मीर मांगे आजादी" जैसे देशविरोधी नारे लगाने वाले समूहों, माओवादी नेता किशनजी को रेड सेल्यूट देने वाले लोगों तथा दीवारों पर "भगवा तांडव" जैसे अपमानजनक शब्द लिखने वालों का पूरी तरह सफाया किया जाएगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने वर्ष 2011 में ली गई अपनी उस ऐतिहासिक शपथ को भी याद किया, जिसके तहत उन्होंने पश्चिम बंगाल से कम्युनिस्ट शासन को बेदखल करने का संकल्प लिया था। गेरुआ सम्मान यात्रा का रूट और संतों की भव्य सहभागिता यह विशाल विरोध मार्च दक्षिण कोलकाता के गोलपार्क से प्रारंभ होकर जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर 8B बस स्टैंड पर जाकर समाप्त हुआ। 'गेरुआ सम्मान यात्रा' के नाम से निकाली गई इस 3 किलोमीटर लंबी रैली में सैकड़ों BJP समर्थकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में साधु और संतों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। रैली में शामिल लोग केसरिया वस्त्र पहने हुए थे और हाथों में केसरिया ध्वज थामे 'जय श्री राम' के नारे लगा रहे थे। मंच से एक वरिष्ठ BJP नेता ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य ध्येय केसरिया रंग की गरिमा और उसके सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करना है, साथ ही उन प्रयासों का पुरजोर विरोध करना है जो केसरिया ध्वज और उसके प्रतीक चिन्हों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। परिसर में बढ़ा वैचारिक तनाव और हालिया घटनाक्रम की कड़ी जादवपुर यूनिवर्सिटी में निकाला गया यह मार्च हालिया महीनों में बढ़े राजनीतिक और वैचारिक टकराव की पृष्ठभूमि में आयोजित किया गया है। पिछले कुछ समय से यूनिवर्सिटी परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों और RSS से जुड़े छात्र संगठन ABVP के बीच लगातार हिंसक झड़पें, दीवारों पर नारे लिखने का मुकाबला और नारों की जंग तेज होती देखी गई है। इस रैली से दो हफ्ते से भी कम समय पहले शुभेंदु अधिकारी ने कैंपस के बाहर आयोजित एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत की थी, जिसमें लगभग 10,000 लोगों के विशाल जनसमूह ने एक साथ राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' का संपूर्ण संस्करण गाया था। उसी अभियान की निरंतरता में बुधवार को यह गेरुआ यात्रा निकाली गई। इसका आप पर असर जादवपुर यूनिवर्सिटी के आसपास बढ़ी राजनीतिक हलचल और रैलियों से स्थानीय निवासियों, यात्रियों और विद्यार्थियों की दैनिक गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। • भारत में: शैक्षणिक संस्थानों में राजनीतिक निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। इसके परिणामस्वरूप देश भर के प्रमुख विश्वविद्यालयों में परिसर सुरक्षा नियमों को अधिक सख्त बनाया जा सकता है। • पश्चिम बंगाल में: राज्य में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक ध्रुवीकरण और विरोध प्रदर्शनों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। इससे आम नागरिकों को संवेदनशील इलाकों में अचानक उत्पन्न होने वाले राजनीतिक तनाव के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता है। • कोलकाता में: गोलपार्क से 8B बस स्टैंड मार्ग पर यातायात प्रतिबंधों के कारण दैनिक यात्रियों को आवाजाही में असुविधा का सामना करना पड़ा है। इस क्षेत्र से गुजरने वाली सार्वजनिक बस सेवाओं और निजी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना व्यावहारिक कदम होगा। • जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए: परिसर के मुख्य गेट बंद रहने और सुरक्षा जांच सख्त होने से कक्षाओं और प्रशासनिक कार्यों के समय में बदलाव हो रहा है। विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों को परिसर में प्रवेश के लिए अपने पहचान पत्र साथ रखना और अद्यतन समय सारणी का पालन करना अनिवार्य है। ऐसा क्यों हुआ जादवपुर यूनिवर्सिटी के बाहर हुई यह विशाल रैली परिसर में लंबे समय से जारी राजनीतिक संघर्ष और हालिया विवादित घटनाक्रमों का प्रत्यक्ष परिणाम है। • वैचारिक टकराव: परिसर के भीतर वामपंथी छात्र संगठनों और RSS से संबद्ध ABVP के बीच लगातार हिंसक झड़पें और नारेबाजी की घटनाएं होती रही हैं। इस वैचारिक प्रतिद्वंद्विता ने विश्वविद्यालय के माहौल को अत्यधिक संवेदनशील बना दिया है। • विवादित नारे और भित्तिचित्र: विश्वविद्यालय की दीवारों पर "कश्मीर मांगे आजादी" के नारे लिखे जाने और "भगवा तांडव" जैसे शब्दों के प्रयोग से राजनीतिक समूहों में भारी आक्रोश पैदा हुआ। इसी आक्रोश के विरोध में गेरुआ सम्मान यात्रा का आयोजन किया गया। • सुरक्षा उपाय और गेट बंदी: पदयात्रा के दौरान संभावित अप्रिय घटनाओं और परिसर में घुसपैठ को रोकने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने मुख्य द्वारों को बंद कर दिया था। इस कदम ने रैली में शामिल नेताओं और समर्थकों के विरोध को और अधिक तीव्र कर दिया। • राजनीतिक गोलबंदी: आगामी स्थानीय और राज्यस्तरीय राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए विभिन्न दल विश्वविद्यालय परिसर को अपने मुख्य एजेंडे के रूप में रेखांकित कर रहे हैं। इससे परिसर के आसपास शक्ति प्रदर्शन की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। सवाल-जवाब 1. जादवपुर यूनिवर्सिटी के बाहर शुभेंदु अधिकारी की रैली किस नाम से आयोजित की गई थी? यह 3 किलोमीटर लंबी रैली 'गेरुआ सम्मान यात्रा' के नाम से आयोजित की गई थी, जो गोलपार्क से शुरू होकर 8B बस स्टैंड पर समाप्त हुई। 2. पदयात्रा के दौरान जादवपुर यूनिवर्सिटी में क्या स्थिति उत्पन्न हुई? शुभेंदु अधिकारी की पदयात्रा के समय सुरक्षा कारणों से जादवपुर यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे। 3. शुभेंदु अधिकारी ने परिसर के बाहर अपने भाषण में किन मुद्दों को उठाया? उन्होंने परिसर में 'कश्मीर मांगे आजादी' के नारे लगाने वालों, किशनजी को रेड सेल्यूट देने वालों और 'भगवा तांडव' लिखने वाले तत्वों को उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया। 4. इस रैली में किन समूहों और समर्थकों ने भाग लिया? इस यात्रा में सैकड़ों BJP समर्थकों के अलावा बड़ी संख्या में साधु और संतों ने भाग लिया, जो केसरिया वस्त्र पहने हाथों में झंडे लिए हुए थे। 5. दो हफ्ते पहले विश्वविद्यालय परिसर के पास कौन सा प्रमुख कार्यक्रम आयोजित हुआ था? लगभग दो हफ्ते पहले परिसर के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम में करीब 10,000 लोगों ने एक साथ 'वंदे मातरम' का संपूर्ण संस्करण गाया था। https://trendkia.com/west-bengal/jadavpur-university-ke-bahara-suvendu-adhikari-ki-bari-raili-parisara-ke-dvara-bnda-hone-para-deshavirodhi-takaton-ko-ukhara-phenk-30408 TrendKia — Har trend, sabse pehle.