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  "type": "article",
  "title": "कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत के बाद कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान जेल से बाहर, नंदीग्राम उपचुनाव में झोंकेंगे पूरी ताकत",
  "summary": "कलकत्ता हाई कोर्ट से 2007 के पुराने मामलों में तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिलने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान न्यायिक हिरासत से रिहा हो गए हैं। बाहर आते ही उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए तत्काल प्रचार में जुटने का एलान किया।",
  "content": "पश्चिम बंगाल की चर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान न्यायिक हिरासत से बाहर आ गए हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2007 से जुड़े छह आपराधिक मामलों में अंतरिम राहत दिए जाने के अगले दिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें जेल से रिहा कर दिया। जेल की चारदीवारी से बाहर कदम रखते ही मिलन प्रधान ने स्पष्ट कर दिया कि वह बिना कोई वक्त गंवाए सीधे चुनावी मैदान में उतरेंगे और उनका पूरा ध्यान केवल नंदीग्राम में मतदाताओं के बीच जाकर प्रचार करने पर केंद्रित रहेगा।\n\nहाई कोर्ट से मिली तीन हफ्ते की अंतरिम जमानत\nअदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए मिलन प्रधान को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मंजूर की है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने उन्हें आगामी 21 अक्टूबर को हल्दिया स्थित अदालत में आत्मसमर्पण करने का स्पष्ट आदेश दिया है। जिन छह आपराधिक मामलों में उन्हें राहत मिली है, उनमें से पांच मामले नंदीग्राम थाने से और एक मामला पड़ोसी खेजुरी से संबंधित है। इन मुकदमों में चार मामले हत्या जैसी गंभीर धाराओं से जुड़े हुए हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस प्रत्याशी ने नामांकन के दौरान निर्वाचन आयोग को सौंपे गए अपने चुनावी हलफनामे में भी इन सभी मुकदमों का पूरा ब्योरा पहले ही दर्ज किया था।\n\nनामांकन के बाद गिरफ्तारी पर अदालत की सख्त टिप्पणी\nमामले की न्यायिक सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि जब मिलन प्रधान ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था, उस समय वह पुलिस हिरासत में नहीं थे। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई ठोस साक्ष्य, दस्तावेज या प्रासंगिक सामग्री पेश नहीं की जा सकी, जिससे यह साबित हो सके कि वर्ष 2007 के बाद के वर्षों में घटित किसी अन्य अपराध के सिलसिले में प्रधान की तलाश थी या वह वांछित चल रहे थे।\n\nइसके अलावा अदालत ने यह भी संज्ञान में लिया कि जिन पुरानी घटनाओं के आधार पर ये आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की गई थीं, उनकी जांच पहले ही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा पूरी की जा चुकी है। पीठ ने प्रधान की पृष्ठभूमि पर विचार करते हुए उन्हें एक ऐसा राजनीतिक कार्यकर्ता करार दिया, जिन्होंने 2007 के ऐतिहासिक भूमि आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की थी और उसके बाद के वर्षों में भी लगातार राजनीतिक व सामाजिक गतिविधियों में संलग्न रहे।\n\nप्रचार का सीमित समय और न्यायिक सुरक्षा\nनंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान की तारीख 6 अक्टूबर तय है, जबकि नियमानुसार चुनाव प्रचार का शोर 4 अक्टूबर को ही थम जाएगा। इससे पूर्व भी एक सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि गिरफ्तार किए गए कांग्रेस प्रत्याशी को इस चुनावी मुकाबले में उचित व निष्पक्ष तरीके से भाग लेने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।\n\nइसी क्रम में पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी पुलिस थाने में वर्ष 2007 में दर्ज एक अन्य पुराने मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने भी राहत दी थी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया था कि 7 अक्टूबर तक प्रधान को गिरफ्तार न माना जाए। साथ ही उच्च न्यायालय ने संबंधित पुलिस अधिकारियों को यह हिदायत भी जारी की थी कि 12 अक्टूबर तक इस प्रकरण को लेकर मिलन प्रधान के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक या प्रतिकूल कार्रवाई न की जाए।\n\nबीजेपी उम्मीदवार हसीरानी रथ से चुनावी भिड़ंत\nइस उपचुनाव में कांग्रेस के मिलन प्रधान का मुख्य चुनावी मुकाबला भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार हसीरानी रथ से माना जा रहा है। तय चुनावी कार्यक्रम के अनुसार नंदीग्राम सीट पर 6 अक्टूबर को वोट डाले जाएंगे और 9 अक्टूबर को मतों की गिनती पूरी कर चुनाव परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।\n\nनंदीग्राम सीट पर इस उपचुनाव की नौबत इसलिए आई क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा क्षेत्रों से एक साथ चुनाव लड़ा था और दोनों ही जगहों पर जीत दर्ज की थी। दो सीटों पर विजय प्राप्त करने के बाद उन्होंने नियमानुसार नंदीग्राम विधानसभा सीट से अपना इस्तीफा दे दिया, जिसके चलते खाली हुई इस सीट पर निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव कराया जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nनंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की रिहाई से विधानसभा क्षेत्र की चुनावी स्पर्धा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• पश्चिम बंगाल में: यह न्यायिक आदेश चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के कानूनी अधिकारों और प्रचार की स्वतंत्रता को रेखांकित करता है। राज्य भर में राजनीतिक दलों और चुनाव तंत्र के लिए यह संदेश है कि नामांकन के बाद की गिरफ्तारियों पर अदालतें सख्त नजर रखती हैं।\n• नंदीग्राम में: कांग्रेस उम्मीदवार की रिहाई से क्षेत्र में त्रिकोणीय प्रचार अभियान तेज होगा और मतदाताओं को सभी प्रत्याशियों की बात सुनने का मौका मिलेगा। 4 अक्टूबर को प्रचार थमने से पहले मिलन प्रधान को केवल कुछ ही दिन प्रचार के लिए मिल सकेंगे, जिससे इलाके में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रहेगी।\n• मतदाताओं के लिए: 6 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले क्षेत्र के लोगों को सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों के एजेंडे को समझने का अवसर मिलेगा। 9 अक्टूबर को मतगणना के बाद यह साफ होगा कि इस राजनीतिक हलचल का जनादेश पर क्या असर हुआ।\n• प्रशासन और सुरक्षा पर: हल्दिया अदालत में 21 अक्टूबर को सरेंडर की शर्त और खेजुरी मामले में 12 अक्टूबर तक सुरक्षा के चलते स्थानीय पुलिस को शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने पर ध्यान देना होगा। चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन को मतदान दिवस पर कानून-व्यवस्था की कड़ी निगरानी रखनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की रिहाई और अंतरिम राहत का फैसला कलकत्ता हाई कोर्ट में पेश किए गए तथ्यों और गिरफ्तारी के समय की विसंगतियों के कारण संभव हुआ।\n\n• गिरफ्तारी का समय और सबूतों का अभाव: अदालत ने पाया कि नामांकन दाखिल करते समय प्रधान न्यायिक हिरासत में नहीं थे और राज्य सरकार उनके खिलाफ 2007 के बाद किसी अपराध में वांछित होने का कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाई। इसी कानूनी खामी के कारण पीठ ने उन्हें तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दी।\n• सीबीआई जांच और राजनीतिक पृष्ठभूमि: जिन पुरानी घटनाओं को लेकर हत्या समेत छह प्राथमिकियां दर्ज की गई थीं, उनकी जांच पूर्व में ही सीबीआई कर चुकी है। अदालत ने प्रधान को 2007 के भूमि आंदोलन से जुड़ा सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता माना, जिससे उनकी चुनावी भागीदारी के अधिकार को प्राथमिकता मिली।\n• उपचुनाव की अनिवार्यता: नंदीग्राम में यह उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर एक साथ जीत दर्ज की थी। नियमों के तहत उन्होंने बाद में नंदीग्राम सीट से त्यागपत्र दे दिया, जिसके चलते यह सीट रिक्त हो गई थी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मिलन प्रधान कौन हैं और उन्हें जेल से क्यों रिहा किया गया?\nमिलन प्रधान नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। उन्हें कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा 2007 के छह आपराधिक मामलों में तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दिए जाने के बाद जेल से रिहा किया गया।\n\n2. हाई कोर्ट ने मिलन प्रधान को कब तक सरेंडर करने का आदेश दिया है?\nउच्च न्यायालय ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर को हल्दिया की अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।\n\n3. नंदीग्राम विधानसभा सीट पर मतदान और मतगणना कब होगी?\nनंदीग्राम उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होगा और चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त हो जाएगा। मतों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी।\n\n4. नंदीग्राम में उपचुनाव कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी?\n2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत दर्ज की थी, जिसके बाद उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी।\n\n5. नंदीग्राम उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से कौन चुनाव मैदान में है?\nनंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से हसीरानी रथ चुनावी मैदान में हैं।",
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  "category": "पश्चिम बंगाल",
  "publishedAt": "2026-09-30",
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    "नंदीग्राम उपचुनाव",
    "मिलन प्रधान",
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