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  "type": "article",
  "title": "कोलकाता एयरपोर्ट की मस्जिद में नमाज पर रोक जारी, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया अंतरराष्ट्रीय विमानन खतरों का हवाला",
  "summary": "कोलकाता एयरपोर्ट स्थित बकरा मस्जिद में नमाज की इजाजत मांगने वाली याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 तय की है।",
  "content": "कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की संवेदनशील परिधि में मौजूद बकरा मस्जिद में नमाज अता करने की मांग को लेकर दायर अर्जी पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तत्काल किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से साफ मना कर दिया है। विमानपत्तन प्राधिकरण और सुरक्षा तंत्र की गंभीर आपत्तियों पर विचार करते हुए अदालत ने मौजूदा पाबंदियों को बरकरार रखा है। इस मामले की अगली कानूनी समीक्षा अब 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। अदालती कार्यवाही के दौरान हवाई अड्डों तथा उड़ानों से जुड़े वैश्विक सुरक्षा खतरों पर भी विस्तृत चर्चा देखने को मिली।\n\nयाचिकाकर्ताओं का पुराना अभ्यास और सुरक्षा प्रोटोकॉल\nअदालत में अर्जी दाखिल करने वाले पक्ष ने अपनी दलील रखते हुए कहा कि संबंधित धर्मस्थल पर दशकों से स्थानीय नमाजी इबादत करते रहे हैं। उनका तर्क था कि पहले एक सुव्यवस्थित सुरक्षा तंत्र के तहत यहां लोगों को प्रवेश दिया जाता था। इस प्रक्रिया में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी CISF के जवान सभी नमाजियों की कड़ी जांच करते थे। गहन तलाशी और पहचान पत्र जांचने के उपरांत सभी लोगों को एक विशेष बस द्वारा मस्जिद तक पहुंचाया जाता था। नमाज संपन्न होते ही उसी वाहन के जरिए सभी को हवाई अड्डा क्षेत्र से बाहर मुख्य मार्ग तक छोड़ दिया जाता था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक इस निर्धारित व्यवस्था से किसी तरह का सुरक्षा संकट पैदा नहीं होता था।\n\nरनवे से 165 मीटर की दूरी और संवेदनशील एप्रन में घुसपैठ\nहवाई अड्डा प्रबंधन की ओर से पेश वकीलों ने अदालत के समक्ष बेहद चौंकाने वाले तथ्य रखे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विवादित ढांचा एयरपोर्ट के अति-संवेदनशील ऑपरेशनल क्षेत्र में मौजूद है, जहां विमानों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। यह मस्जिद सक्रिय रनवे से मात्र 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। विमानन अधिकारियों ने पीठ को अवगत कराया कि पूर्व में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हुई हैं जब बाहरी लोग सुरक्षा घेरा लांघकर एप्रन एरिया तक पहुंच गए थे। रनवे और विमान पार्किंग के इतने निकट अनधिकृत या बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी किसी भी बड़े विमानन हादसे अथवा तोड़फोड़ को खुला निमंत्रण दे सकती है, जिसे नजरअंदाज करना आत्मघाती होगा।\n\nबदलते दौर में आतंकवाद और सुरक्षा परिदृश्य\nकेंद्र और विमानन प्रशासन की तरफ से दलीलें पेश करते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने रेखांकित किया कि पिछले कुछ दशकों में सुरक्षा चुनौतियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि 1993 से पूर्व ऐसे गंभीर और संगठित खतरे सामने नहीं आते थे, किंतु बाद के वर्षों में सामरिक प्रतिष्ठानों पर हमले बढ़े हैं। उन्होंने 2025 में हुए लाल किला हमले का विशेष तौर पर उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लगातार ऐसे खतरों का निशाना बनता रहा है। ऐसे तनावपूर्ण सुरक्षा माहौल में देश के किसी भी प्रमुख हवाई अड्डे के भीतरी परिचालन हिस्से में लोगों के जमावड़े की इजाजत देना भारी जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है।\n\nवैश्विक जोखिमों का दायरा और फ्लाईदुबई प्रसंग\nअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के तर्कों पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा कि इस तरह के खतरे अब सिर्फ भारतीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरी दुनिया इनसे जूझ रही है। जज ने एक दिन पहले घटित फ्लाईदुबई प्रकरण का उल्लेख किया, जहां हवा में उड़ते विमान के भीतर अप्रत्याशित संकट खड़ा हो गया था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने कहा, \n \"नहीं, सिर्फ भारत में नहीं। आजकल यह हर जगह हो रहा है। कल की फ्लाईदुबई घटना को देखिए। आप कल्पना भी नहीं कर सकते।\"\n\nपीठ की यह सख्त टिप्पणी उस गंभीर घटना के संदर्भ में आई जिसमें दुबई से इजरायल के लिए रवाना हुई फ्लाईदुबई की एक यात्री उड़ान में कॉकपिट के भीतर विवाद पैदा हो गया था। उस प्रकरण में ओमान मूल के सह-चालक पर मुख्य पायलट कैप्टन स्मित माच्छर पर हिंसक हमला करने और विमान को दुर्घटनाग्रस्त कराने के प्रयास का आरोप लगा, जिसके बाद विमान को आपात स्थिति में सऊदी अरब की ओर मोड़ना पड़ा था। अदालत ने माना कि विमानन क्षेत्र में अप्रत्याशित जोखिम कहीं भी और कभी भी उभर सकते हैं।\n\nअंतरिम आदेश से इनकार और आगामी सुनवाई\nसमस्त पक्षों की प्राथमिक बहस सुनने के पश्चात न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने नमाज की बहाली के लिए कोई भी अंतरिम निर्देश पारित नहीं किया। इसका सीधा अर्थ यह है कि एयरपोर्ट की सुरक्षा के मद्देनजर मस्जिद में बाहरी लोगों के प्रवेश पर जो रोक लगी थी, वह यथावत जारी रहेगी। अदालत ने पूरे मामले को 7 अक्टूबर 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया है। आगामी तारीख पर अदालत रनवे की सुरक्षा, संवेदनशील क्षेत्र में लोगों की आवाजाही के खतरे और वैकल्पिक प्रबंधों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विस्तृत सुनवाई करेगी।\n\nइसका आप पर असर\nकोलकाता एयरपोर्ट परिसर की मस्जिद में बाहरी नमाजियों के प्रवेश पर रोक बरकरार रहने से विमानन सुरक्षा और स्थानीय श्रद्धालुओं की आवाजाही सीधे तौर पर प्रभावित हुई है।\n\n• कोलकाता में: बकरा मस्जिद में नमाज अता करने के इच्छुक स्थानीय लोगों को अब एयरपोर्ट के बाहर स्थित मस्जिदों का रुख करना होगा। संवेदनशील रनवे क्षेत्र में बाहरी लोगों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहने से एयरपोर्ट की सुरक्षा चाक-चौबंद रहेगी।\n• भारत में: देश भर के हवाई अड्डों के संवेदनशील ऑपरेशनल एरिया में स्थित पुराने धार्मिक या सार्वजनिक ढांचों के लिए यह अदालती रुख सुरक्षा प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। विमानन सुरक्षा एजेंसियां ऐसे सभी परिसरों में बाहरी आवाजाही को लेकर अपनी मानक संचालन प्रक्रिया को और कड़ा करेंगी।\n• यात्रियों के लिए: एयरपोर्ट के सुरक्षा घेरे में अनधिकृत पहुंच पर सख्त रुख से विमान यात्रियों के लिए सुरक्षा जोखिम कम होंगे। रनवे और एप्रन के 165 मीटर के दायरे में बाहरी आवाजाही रुकने से सुरक्षा चूकों की संभावना नगण्य हो जाएगी।\n• अगला कानूनी कदम: याचिकाकर्ताओं को अब किसी भी राहत के लिए 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई तक इंतजार करना होगा। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था पर बहस होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा अंतरिम राहत देने से इनकार करने का मुख्य कारण रनवे की निकटता, पूर्व में हुई सुरक्षा चूकें और आधुनिक विमानन क्षेत्र में बढ़ते अप्रत्याशित खतरे हैं।\n\n• रनवे से अत्यधिक निकटता: मस्जिद हवाई अड्डे के अति-संवेदनशील ऑपरेशनल क्षेत्र में रनवे से महज 165 मीटर की दूरी पर स्थित है। विमानों के टेक-ऑफ और लैंडिंग क्षेत्र के इतने करीब बाहरी लोगों की मौजूदगी को विमानन अधिकारियों ने गंभीर खतरा माना।\n• सुरक्षा घेरा लांघने की पिछली घटनाएं: हवाई अड्डा प्रबंधन ने अदालत में प्रमाण दिया कि पूर्व में बाहरी लोग कई बार सुरक्षा चक्र तोड़कर विमान एप्रन क्षेत्र तक पहुंच गए थे। इन गंभीर चूकों के चलते सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई देने को तैयार नहीं थीं।\n• बदला हुआ सामरिक परिदृश्य: अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि 1993 के बाद से सुरक्षा हालात बदले हैं और 2025 के लाल किला हमले जैसी घटनाएं बताती हैं कि संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर कभी भी हमला हो सकता है।\n• फ्लाईदुबई की घटना का न्यायिक संदर्भ: जस्टिस कृष्ण राव ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर विमानन सुरक्षा के नए खतरे सामने आ रहे हैं, जैसे दुबई-इजरायल फ्लाइट में पायलटों का विवाद। इस कारण सुरक्षा प्रोटोकॉल से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कलकत्ता हाईकोर्ट में किस मस्जिद को लेकर सुनवाई हो रही थी?\nकोलकाता एयरपोर्ट परिसर के ऑपरेशनल एरिया में स्थित बकरा मस्जिद में नमाज पढ़ने की अनुमति को लेकर सुनवाई हो रही थी।\n\n2. जस्टिस कृष्ण राव ने मामले में क्या आदेश दिया?\nजस्टिस कृष्ण राव ने नमाज की इजाजत देने के लिए कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया और अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 तय की।\n\n3. मस्जिद रनवे से कितनी दूरी पर स्थित है?\nविमानन अधिकारियों की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद सक्रिय रनवे से करीब 165 मीटर की दूरी पर स्थित है।\n\n4. याचिकाकर्ताओं के अनुसार पहले नमाज की क्या व्यवस्था थी?\nयाचिकाकर्ताओं का कहना था कि पहले CISF द्वारा जांच के बाद नमाजियों को बस से मस्जिद ले जाया जाता था और नमाज के बाद वापस छोड़ा जाता था।\n\n5. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने किन घटनाओं का हवाला दिया?\nअतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने 1993 के बाद बदले सुरक्षा माहौल और 2025 के लाल किला हमले का हवाला दिया।\n\n6. अदालत में फ्लाईदुबई की किस घटना का जिक्र किया गया?\nकोर्ट में उस घटना का जिक्र हुआ जहां दुबई से इजरायल जा रही फ्लाईदुबई उड़ान में को-पायलट ने कैप्टन स्मित माच्छर पर हमला किया और विमान को सऊदी अरब डायवर्ट करना पड़ा।",
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  "category": "पश्चिम बंगाल",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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