# नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की जमानत पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

> सुप्रीम कोर्ट ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की त्वरित सुनवाई वाली याचिका ठुकरा दी है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने मामले को पांच अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

**Type:** article · **Category:** पश्चिम बंगाल · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/west-bengal/nandigram-upachunava-men-congress-pratyashi-milan-pradhan-ki-jamanata-para-turnta-sunavai-se-supreme-court-ka-inakara-40329 · **Language:** Hindi
**Tags:** नंदीग्राम उपचुनाव, मिलन प्रधान, सुप्रीम कोर्ट, सूर्यकांत, तुषार मेहता, ममता बनर्जी, शुभेंदु अधिकारी, कलकत्ता हाईकोर्ट

पश्चिम बंगाल की चर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के बीच सियासी पारा गरमा गया है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की अंतरिम जमानत का विवाद अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गया है। राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा मिलन प्रधान को दी गई अंतरिम राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए इस पर फौरन सुनवाई करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर तत्काल अथवा अगले दिन विचार करने से साफ इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि इस मामले की सुनवाई अब 5 अक्टूबर 2026 यानी सोमवार को ही की जाएगी, जिससे कांग्रेस और उनका समर्थन कर रहीं ममता बनर्जी को बड़ी राहत मिली है।

## शीर्ष अदालत में त्वरित सुनवाई की मांग खारिज
इस पूरे मामले का उल्लेख भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के समक्ष किया गया, जहां राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। तुषार मेहता ने पीठ से पुरजोर अनुरोध किया कि पश्चिम बंगाल सरकार की इस विशेष याचिका को गुरुवार को ही सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि मिलन प्रधान के खिलाफ वर्ष 2007 में छह गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए थे और ऐसे में उन्हें चुनाव लड़ने के लिए दी गई राहत पर जल्द विचार होना बेहद जरूरी है। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शीर्ष अदालत इस याचिका पर सोमवार, पांच अक्टूबर को ही सुनवाई करेगी।

## सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और सीजेआई के बीच तीखी बहस
अदालत की कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने त्वरित सुनवाई पर जोर देते हुए दलील दी कि यदि चुनाव संपन्न होने के बाद मामले पर सुनवाई होगी, तो राज्य सरकार की इस याचिका का कोई औचित्य ही नहीं बचेगा और वह पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाएगी। राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए उन्होंने अदालत से सवालिया लहजे में कहा कि जब एक प्रत्याशी को केवल चुनाव मैदान में उतरने के लिए जमानत दी गई है, तो क्या वे कल तक का जोखिम उठा सकते हैं। उनका कहना था कि वे अदालत से केवल इतनी ही गुहार लगा रहे हैं कि याचिका पर तुरंत गौर किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मामले को अगले दिन यानी गुरुवार की कार्यसूची में शामिल करने से सीधे मना कर दिया। उन्होंने अदालत के मौजूदा कार्यभार का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट का बोर्ड पहले से ही मुकदमों से भरा हुआ है और काफी लंबा है। मुख्य न्यायाधीश ने दो टूक लहजे में कहा कि अदालत इस मामले को निश्चित रूप से खारिज करेगी, लेकिन यह कदम सोमवार को उठाया जाएगा, कल नहीं। जब सॉलिसिटर जनरल मेहता ने एक बार फिर गुरुवार को सूचीबद्ध करने का आग्रह दोहराया, तब मुख्य न्यायाधीश ने अपनी बात पर कायम रहते हुए साफ कहा कि सुनवाई सिर्फ सोमवार को ही होगी। इस विशेष पीठ में सीजेआई सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे।

## कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश और आत्मसमर्पण की शर्तें
पश्चिम बंगाल पुलिस ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल पीठ द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार को दी गई अंतरिम राहत को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है। उच्च न्यायालय ने मंगलवार को अपना फैसला सुनाते हुए मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक की अंतरिम जमानत मंजूर की थी, ताकि वे छह अक्टूबर को निर्धारित नंदीग्राम उपचुनाव में अपना प्रचार कर सकें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ले सकें।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह स्पष्ट व्यवस्था भी दी थी कि राहत की यह मियाद समाप्त होते ही मिलन प्रधान को 21 अक्टूबर को संबंधित निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करना होगा। मिलन प्रधान पर जिन मुकदमों को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, वे सभी वर्ष 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज हुए थे। इन मुकदमों में हत्या, जानलेवा हमला करने के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के कड़े प्रावधानों के उल्लंघन जैसे बेहद संगीन आरोप शामिल हैं।

## नंदीग्राम सीट का चुनावी समीकरण और ममता बनर्जी का समर्थन
नंदीग्राम विधानसभा सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के चलते रिक्त हुई है। उन्होंने इस साल की शुरुआत में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से अपनी किस्मत आजमाई थी और दोनों ही सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का निर्णय लिया और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया। इस रिक्त सीट पर हो रहे उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को खुला समर्थन दे रखा है, जिससे इस कानूनी लड़ाई के पीछे की राजनीतिक जंग और भी दिलचस्प हो गई है।

## इसका आप पर असर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्वरित सुनवाई से इनकार करने के बाद नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव प्रचार जारी रख सकेंगे, जिससे मतदान से पहले कानूनी व प्रशासनिक संतुलन प्रभावित हुआ है।

- **भारत में:** यह निर्णय इस न्यायिक सिद्धांत को पुष्ट करता है कि अदालतों का रोस्टर पूर्व निर्धारित प्राथमिकता पर चलता है और राजनीतिक तात्कालिकता के आधार पर नियमित प्रक्रिया को आसानी से नहीं बदला जा सकता। इससे भविष्य में चुनावी मामलों की त्वरित सुनवाई के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण नजीर स्थापित होती है।
- **पश्चिम बंगाल में:** नंदीग्राम के मतदाताओं के सामने कांग्रेस प्रत्याशी छह अक्टूबर तक बिना कानूनी रुकावट के चुनाव प्रचार कर सकेंगे। इसके चलते स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को मतदान शांतिपूर्ण ढंग से कराने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी।
- **उम्मीदवारों के लिए:** चुनावी मुकाबले में शामिल अन्य राजनीतिक दलों को अब प्रचार के दौरान अपनी चुनावी रणनीति सीधे मतदाताओं के बीच तय करनी होगी। कानूनी रोक की संभावना चुनाव से पहले खत्म होने के कारण प्रतिद्वंद्वी दलों को मैदान में ही मुकाबला करना पड़ेगा।
- **अदालती प्रक्रिया के लिए:** आरोपी उम्मीदवार को 21 अक्टूबर को निचली अदालत में सरेंडर करना अनिवार्य रहेगा। इसका अर्थ यह है कि चुनावी छूट केवल तय समय सीमा तक ही वैध है और आपराधिक मामलों की कानूनी प्रक्रिया इसके बाद स्वतः बहाल हो जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी विवाद कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा एक आपराधिक आरोपी को चुनाव लड़ने के लिए दी गई अंतरिम जमानत और उसके खिलाफ राज्य सरकार की त्वरित रोक लगाने की कोशिशों के कारण पैदा हुआ।

- **सीधे कारण:** कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को प्रचार करने के लिए 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दे दी थी। पश्चिम बंगाल पुलिस और राज्य सरकार इस फैसले पर तत्काल रोक लगवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
- **त्वरित सुनवाई की मांग:** सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि छह अक्टूबर को मतदान होना है, इसलिए यदि गुरुवार को सुनवाई नहीं हुई तो याचिका का मकसद ही खत्म हो जाएगा। उनका तर्क था कि गंभीर आरोपों का सामना कर रहे व्यक्ति को प्रचार की छूट देने पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
- **अदालत का इनकार:** मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत का दैनिक बोर्ड पहले से ही मुकदमों से भरा हुआ है। उन्होंने याचिका को आपातकालीन आधार पर अगले दिन लगाने के बजाय सामान्य प्रक्रिया के तहत सोमवार, 5 अक्टूबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
- **पृष्ठभूमि का संदर्भ:** मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के समय हत्या और आर्म्स एक्ट समेत छह आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा इस्तीफा देकर भवानीपुर सीट अपने पास रखने के कारण खाली हुई थी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार क्यों किया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि अदालत का बोर्ड पहले से ही बहुत लंबा है, इसलिए इस याचिका पर गुरुवार के बजाय सोमवार, पांच अक्टूबर को सुनवाई की जाएगी।

### 2. कलकत्ता हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान को किस तारीख तक अंतरिम जमानत दी है?
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी है और 21 अक्टूबर को अदालत में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

### 3. नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव क्यों कराया जा रहा है?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों सीटों से चुनाव जीतकर नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई।

### 4. मिलन प्रधान के खिलाफ दर्ज मामले किस घटना से जुड़े हैं?
मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमले और शस्त्र कानून के तहत दर्ज छह मामले 2007 में नंदीग्राम में हुए भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े हैं।

### 5. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई करने वाली पीठ में कौन-कौन से न्यायाधीश शामिल थे?
इस मामले की सुनवाई करने वाली पीठ में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे।

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