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  "type": "article",
  "title": "नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत",
  "summary": "कलकत्ता हाईकोर्ट ने 2007 के एक पुराने मामले में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें नंदीग्राम उपचुनाव ठीक से लड़ने की अनुमति मिलनी चाहिए।",
  "content": "पश्चिम बंगाल की चर्चित नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव से ठीक पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के मामले में बेहद अहम रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान दो टूक शब्दों में कहा कि न्यायिक हिरासत में चल रहे कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव प्रचार और मतदान प्रक्रिया में ठीक से भाग लेने की पूरी छूट दी जानी चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि जिस पुराने आपराधिक मामले के आधार पर निचली अदालत ने उन्हें 7 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था, उसमें उन्हें फिलहाल गिरफ्तार नहीं माना जाएगा। नंदीग्राम में आगामी 6 अक्टूबर को वोट डाले जाने हैं, जबकि चुनाव प्रचार की मियाद 4 अक्टूबर को समाप्त हो रही है। इस चुनावी समयसीमा को ध्यान में रखते हुए उच्च न्यायालय का यह फैसला प्रत्याशी के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।\n\nखेजुरी थाने के 2007 के मामले में 12 अक्टूबर तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक\nसुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार और संबंधित पुलिस महकमे को कड़ा निर्देश जारी किया। अदालत ने कहा कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के अंतर्गत आने वाले खेजुरी पुलिस थाने में दर्ज वर्ष 2007 के मुकदमा संख्या 45 के संदर्भ में 12 अक्टूबर तक याचिकाकर्ता मिलन प्रधान के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित आपराधिक मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं माना जाएगा। पीठ ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि लगभग 19 साल पुराने यानी वर्ष 2007 के एक आपराधिक मामले में जांच अधिकारी ने अचानक 19 सितंबर को याचिकाकर्ता को औपचारिक रूप से गिरफ्तार दिखाने की अर्जी दी। अदालत ने टिप्पणी की कि जब मामला इतना पुराना था, तो इतने वर्षों तक जांच अधिकारी क्या कर रहे थे और अचानक चुनाव की घोषणा के बीच में ही उन्हें हिरासत में लेने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।\n\nअदालत में वकीलों की जिरह और प्रोडक्शन वारंट का विवाद\nयाचिकाकर्ता मिलन प्रधान की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अयन भट्टाचार्य (अयान भट्टाचार्जी) ने पीठ के समक्ष दलील पेश की कि 22 सितंबर को पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय को केवल 11 मुकदमों की सूची सौंपी थी। उस समय राज्य की ओर से कहा गया था कि उनके खिलाफ केवल पांच मामले लंबित हैं, जबकि पिछली सरकार ने पांच अन्य मामले वापस ले लिए थे और छठे मामले में उनकी कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन इस सूचना के तुरंत बाद पुलिस ने 2007 के एक नए मामले में उन्हें गिरफ्तार दिखा दिया और निचली अदालत से 7 अक्टूबर तक की न्यायिक हिरासत हासिल कर ली। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि उन्हें खेजुरी थाने के केस नंबर 45 की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी और अभियोजन पक्ष ने प्रोडक्शन वारंट से जुड़े तथ्यों को भी छुपाया।\n\nइसके जवाब में राज्य सरकार का पक्ष रख रहे अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि 19 सितंबर को कोंटाई की एसीजेएम अदालत ने खेजुरी थाने के मामले में प्रधान के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया था। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य अपराध शामिल हैं। हालांकि, जब न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज मांगा जिससे यह साबित हो सके कि वास्तव में प्रधान को प्रोडक्शन वारंट नियमानुसार तामील कराया गया था, तो राज्य सरकार कोई संतोषजनक साक्ष्य पेश नहीं कर सकी। इस पर न्यायाधीश ने मौखिक रूप से अतिरिक्त महाधिवक्ता से कहा कि प्रत्याशी को नंदीग्राम उपचुनाव में बिना अनुचित बाधा के अपनी उम्मीदवारी पेश करने और चुनाव लड़ने का अवसर दिया जाए।\n\nपुराने मुकदमों की पृष्ठभूमि और 2020 में केस वापसी का घटनाक्रम\nअदालत की कार्यवाही के दौरान मुकदमों के इतिहास पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने पीठ को जानकारी दी कि वर्ष 2020 में पिछली सरकार ने उन सभी छह आपराधिक मुकदमों को वापस लेने का निर्णय लिया था जिनमें मिलन प्रधान पर आरोप तय किए गए थे। लेकिन इसके बाद वर्ष 2021 में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने इन सभी मामलों को दोबारा शुरू करने का आदेश पारित कर दिया था, क्योंकि इन मुकदमों में हत्या जैसे अत्यंत संगीन आरोप दर्ज थे। जब अदालत ने सवाल किया कि यदि गिरफ्तारी वारंट इतने लंबे समय से लंबित पड़ा था तो जांच अधिकारी अब तक हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे रहे, तो सरकारी वकील ने दलील दी कि पिछली सरकार के कार्यकाल में इन मामलों पर कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया गया था।\n\nगौरतलब है कि मिलन प्रधान के खिलाफ अधिकांश आपराधिक मुकदमे वर्ष 2007 के दौर के हैं, जब पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम और खेजुरी इलाकों में तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार की ओर से प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के विरोध में जबरदस्त हिंसक आंदोलन छिड़ा हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उन पर हत्या, जानलेवा हमला, हत्या के इरादे से अपहरण, सबूतों को नष्ट करने, जबरन घर में घुसने, घातक हथियारों के साथ दंगा भड़काने और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन से जुड़ी कई धाराएं लगाई गई थीं। प्रधान ने अपने खिलाफ चल रहे चार अलग-अलग मुकदमों में पहले ही सक्षम अदालतों के समक्ष जमानत की अर्जी लगा रखी है।\n\nसियासी उलटफेर के चंद घंटों बाद हुई थी गिरफ्तारी\nनंदीग्राम उपचुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी इस पूरे कानूनी विवाद में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। नंदीग्राम विधानसभा सीट पर तृणमूल कांग्रेस की घोषित उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के अचानक चुनावी मैदान से हटने के बाद एक अप्रत्याशित राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला था। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सार्वजनिक घोषणा की थी कि उनकी पार्टी का गुट नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करेगा। इस राजनीतिक ऐलान के चंद घंटों के भीतर ही 18 सितंबर को पुलिस प्रशासन ने हरकत में आते हुए मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया था। बचाव पक्ष ने अदालत से गुहार लगाई कि राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ किसी अन्य पुराने मामले का बहाना बनाकर दंडात्मक कदम न उठाए जाएं।\n\nइसका आप पर असर\nकलकत्ता हाईकोर्ट का यह निर्देश नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में चुनावी मुकाबले को निष्पक्ष बनाने और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में बड़ा कदम है।\n\n• मतदाताओं के अधिकार: नंदीग्राम के मतदाताओं को सभी प्रमुख उम्मीदवारों के बीच निष्पक्ष चुनाव में भाग लेने का लोकतांत्रिक अवसर मिलेगा। प्रत्याशी के कानूनी संरक्षण से चुनाव में एकतरफा मुकाबला होने की आशंका खत्म होगी।\n• चुनावी प्रक्रिया: जेल में बंद उम्मीदवार के कानूनी अधिकारों की बहाली से प्रचार और मतदान प्रक्रिया की वैधता मजबूत होगी। नामांकन और प्रचार के दौरान प्रशासनिक मनमानी पर अदालत की निगरानी बनी रहेगी।\n• पश्चिम बंगाल में: राज्य में विपक्षी दलों के उम्मीदवारों के खिलाफ दर्ज पुराने मुकदमों के दुरुपयोग पर न्यायिक रोक लगेगी। इससे आगामी स्थानीय और राज्य स्तरीय चुनावों में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।\n• भारत में: देश भर में चुनाव के ठीक बीच में प्रत्याशियों की संदिग्ध या अचानक होने वाली गिरफ्तारियों पर कानूनी मिसाल कायम होगी। अदालत का यह आदेश लोकतांत्रिक मर्यादा और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को मजबूती प्रदान करता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान पर 2007 के भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को लेकर कानूनी विवाद तब गहराया, जब राजनीतिक समर्थन मिलने के तुरंत बाद उनकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद पुलिस द्वारा एक के बाद एक पुराने मामलों में हिरासत मांगने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।\n\n• राजनीतिक घटनाक्रम: तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी के मैदान से हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया। इस राजनीतिक घोषणा के चंद घंटों बाद 18 सितंबर को पुलिस ने प्रधान को गिरफ्तार कर लिया।\n• पुराने मामलों का इतिहास: वर्ष 2007 में वाम मोर्चा सरकार के समय नंदीग्राम और खेजुरी में हुए हिंसक आंदोलन के सिलसिले में प्रधान पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हुए थे। वर्ष 2020 में पिछली सरकार ने केस वापस लिए, लेकिन 2021 में हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर उन्हें दोबारा शुरू कराया था।\n• अदालती निर्देश का उल्लंघन: 22 सितंबर को राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में केवल 11 मामलों की सूची दी थी, लेकिन इसके तुरंत बाद 2007 के एक अन्य मामले में उन्हें गिरफ्तार दिखा दिया गया। कोई वैध प्रोडक्शन वारंट पेश न होने पर हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर तक दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कलकत्ता हाईकोर्ट ने मिलन प्रधान के मामले में क्या आदेश दिया है?\nहाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि 2007 के खेजुरी थाने के मामले में 12 अक्टूबर तक मिलन प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए और उन्हें इस मामले में गिरफ्तार न माना जाए।\n\n2. नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव और प्रचार की तारीखें क्या हैं?\nनंदीग्राम उपचुनाव के लिए मतदान 6 अक्टूबर को होगा और चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा।\n\n3. मिलन प्रधान को किन आरोपों के तहत मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है?\nउन पर 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन के समय हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा भड़काने और आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज मामलों में आरोप हैं।\n\n4. मिलन प्रधान की गिरफ्तारी किस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद हुई थी?\nतृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी के हटने के बाद ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद 18 सितंबर को उन्हें गिरफ्तार किया गया था।",
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  "category": "पश्चिम बंगाल",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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