# रेजिनगर उपचुनाव हारने के बाद हुमायूं कबीर का सियासी यू-टर्न, 2029 में बहरामपुर से लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा

> पश्चिम बंगाल के रेजिनगर उपचुनाव में बेटे की पराजय के बाद आम जनता उन्नयन पार्टी प्रमुख हुमायूं कबीर ने संन्यास की बात वापस लेते हुए 2029 में बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ ताल ठोकने की बात कही है।

**Type:** article · **Category:** पश्चिम बंगाल · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/west-bengal/rejinagar-upachunava-harane-ke-bada-humayun-kabir-ka-siyasi-yu-tarna-2029-men-baharampur-se-lokasabha-chunava-larane-ki-ghoshana-45646 · **Language:** Hindi
**Tags:** हुमायूं कबीर, रेजिनगर उपचुनाव, अधीर रंजन चौधरी, बहरामपुर, पश्चिम बंगाल राजनीति, आम जनता उन्नयन पार्टी

पश्चिम बंगाल की रेजिनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। इस चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को हार का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि रेजिनगर विधानसभा सीट हुमायूं कबीर द्वारा खुद इस्तीफा दिए जाने के चलते ही रिक्त हुई थी। मतगणना के बाद शुक्रवार को सामने आए चुनावी फैसले के फौरन बाद हुमायूं कबीर ने अपने रुख में बड़ा बदलाव दिखाते हुए वर्ष 2029 के आम चुनाव में उतरने का एलान कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि वे 2029 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर संसदीय क्षेत्र से किस्मत आजमाएंगे और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को शिकस्त देंगे। इससे ठीक एक दिन पहले, यानी गुरुवार को उन्होंने सक्रिय राजनीति से किनारा करने के संकेत दिए थे।

## उपचुनाव प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन पर धांधली के गंभीर आरोप
मतगणना में सामने आए परिणाम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने पूरी चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने मतदान को अनुचित बताते हुए आरोप लगाया कि वास्तविक मतदान कराने के बजाय जनादेश छीना गया है। उनके मुताबिक पुलिस तंत्र ने मुस्लिम मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से रोका। उन्होंने बेलडांगा थाने के प्रभारी अधिकारी और पुलिस अधीक्षक पर सांठगांठ करके 5 करोड़ रुपये लेने का सीधा आरोप लगाया और दावा किया कि यह सब मुख्यमंत्री से बेहतर पदस्थापना पाने की मंशा से किया गया।

अपनी पार्टी के प्रदर्शन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच भी उनके बेटे को 54 हजार वोट हासिल हुए। हुमायूं कबीर ने दावा किया कि यदि मतदान वाले दिन पुलिस प्रशासन उन्हें हिरासत में नहीं रखता, तो उनके बेटे को 1 लाख 50 हजार वोट मिलते। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने एक ही मतदान केंद्र में जाकर तीन अलग-अलग वोट डाले।

## मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण और अदालती फैसलों का हवाला
चुनावी नतीजों के इतर हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल या भारतीय जनता पार्टी से कोई प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति हमेशा मंदिर केंद्रित रही है, और जब उन्होंने बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी थी तब विरोधियों ने भी मंदिर निर्माण की नींव रखी थी।

मस्जिद निर्माण की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना के संचालन के लिए बाकायदा एक ट्रस्ट गठित किया गया है, जिसकी पूरी जानकारी भारत सरकार को भी है। उन्होंने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मस्जिद का नाम तय करने का वैधानिक अधिकार ट्रस्ट के पास सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के अनुरूप यह ढांचा बाबरी के नाम से ही तैयार किया जाएगा। उन्होंने समयसीमा साझा करते हुए बताया कि इस मस्जिद का निर्माण 6 दिसंबर 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा, जहां एक साथ 1 लाख मुस्लिम नमाजी नमाज अदा कर सकेंगे।

## संन्यास की बात से पलटे, बहरामपुर से ताल ठोकने और विदेश जाने की बात कही
गुरुवार को विधायकी छोड़ने और राजनीति से हटने की मंशा जताने वाले हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को संन्यास के मुद्दे पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया। अपने नए राजनीतिक कार्यक्रम की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि साल 2029 के मार्च और अप्रैल महीने में होने वाले आम चुनाव में वे बहरामपुर लोकसभा सीट से अपनी उम्मीदवारी पेश करेंगे।

अधीर रंजन चौधरी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता की भाजपा के साथ अंदरूनी सांठगांठ है। उन्होंने दावा किया कि वे शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली जाकर नितिन गडकरी से मुलाकात करते हैं। हुमायूं कबीर ने संकल्प दोहराया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में अधीर रंजन चौधरी को पराजित करके दिखाएंगे और उस चुनावी जीत के बाद भारत छोड़कर दुबई चले जाएंगे। इसके अलावा हुमायूं कबीर ने यह भी ऐलान किया कि मुख्यमंत्री और शुभेंदु के खिलाफ उनके रुख के तहत वे अब भविष्य में विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने नहीं जाएंगे।

## इसका आप पर असर
रेजिनगर उपचुनाव परिणाम और हुमायूं कबीर के राजनीतिक दावों का सीधा असर मुर्शिदाबाद और आसपास के संसदीय क्षेत्रों के चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा।

- **भारत में:** वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर सीट पर मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ गई है। इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों के बीच स्थानीय गठबंधनों और वोटों के बंटवारे पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।
- **पश्चिम बंगाल में:** मुर्शिदाबाद और रेजिनगर क्षेत्र में स्थानीय मतदाताओं के बीच राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज होने की आशंका है। विधानसभा से कबीर के बहिष्कार और नए राजनीतिक मोर्चों के उभार से क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक कार्यों की प्राथमिकताओं पर असर पड़ सकता है।
- **मतदाताओं पर प्रभाव:** चुनाव में धांधली और पुलिस की भूमिका पर लगे आरोपों से स्थानीय चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। भविष्य के चुनावों में चुनाव आयोग द्वारा इलाके के संवेदनशील बूथों पर निगरानी और सुरक्षा इंतजाम कड़े किए जा सकते हैं।
- **धार्मिक परियोजनाओं पर:** मुर्शिदाबाद में घोषित मस्जिद निर्माण से स्थानीय सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में तेजी आएगी। 6 दिसंबर 2028 तक परियोजना पूरी होने से इलाके के श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ा धार्मिक केंद्र तैयार होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह राजनीतिक घटनाक्रम रेजिनगर विधानसभा उपचुनाव में हुमायूं कबीर के बेटे की हार और प्रशासन के साथ हुए टकराव के सीधे परिणाम के रूप में सामने आया है।

- **सीट खाली होना और पराजय:** हुमायूं कबीर के अपने पद से इस्तीफा देने के कारण रेजिनगर सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा था। इस चुनाव में उनकी पार्टी के उम्मीदवार और उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को हार का सामना करना पड़ा।
- **मतदान के दिन पुलिस कार्रवाई:** मतदान के दौरान कानून-व्यवस्था के तहत हुमायूं कबीर को पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। इस कदम से आक्रोशित होकर उन्होंने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए और प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप लगाए।
- **राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता:** बहरामपुर और मुर्शिदाबाद क्षेत्र में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी के साथ हुमायूं कबीर का पुराना सियासी टकराव रहा है। बेटे की हार के बाद खुद को राजनीतिक रूप से प्रासंगिक बनाए रखने के लिए उन्होंने 2029 के आम चुनाव में सीधी टक्कर लेने का मार्ग चुना।

## सवाल-जवाब

### 1. रेजिनगर उपचुनाव में हुमायूं कबीर की पार्टी से कौन उम्मीदवार था?
आम जनता उन्नयन पार्टी से हुमायूं कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद उम्मीदवार थे, जिन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा।

### 2. हुमायूं कबीर ने 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर क्या घोषणा की है?
उन्होंने एलान किया है कि वे मार्च-अप्रैल 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव में बहरामपुर सीट से अधीर रंजन चौधरी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

### 3. हुमायूं कबीर ने चुनाव प्रक्रिया पर क्या आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने मुस्लिम मतदाताओं को वोट डालने से रोका और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने 5 करोड़ रुपये लिए।

### 4. मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित मस्जिद निर्माण को लेकर उन्होंने क्या समयसीमा बताई?
उन्होंने कहा कि यह मस्जिद 6 दिसंबर 2028 तक बनकर तैयार हो जाएगी, जहां एक साथ 1 लाख लोग नमाज पढ़ सकेंगे।

### 5. क्या हुमायूं कबीर ने राजनीति से संन्यास ले लिया है?
नहीं, उन्होंने संन्यास के संकेत देने के बाद यू-टर्न ले लिया और 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

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