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  "title": "शुभेंदु अधिकारी ने 'बांग्लार बाड़ी' का नाम बदलकर किया 'पश्चिम बंग आवास', लाभार्थियों के खाते में पहुंचे 6000 करोड़ रुपये",
  "summary": "पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल ने राज्य की प्रमुख आवास योजना का नाम बदलकर 'पश्चिम बंग आवास' कर दिया है। नबान्न से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 10 लाख से अधिक लाभार्थियों को 60-60 हजार रुपये की अंतिम किस्त जारी की।",
  "content": "राज्य सचिवालय नबान्न में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बैठक के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी आवास योजना में व्यापक बदलाव की आधिकारिक घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को जानकारी दी कि राज्य मंत्रिमंडल ने जन कल्याणकारी आवास पहल 'बांग्लार बाड़ी' का नाम परिवर्तित कर 'पश्चिम बंग आवास' करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने योजना के तहत पंजीकृत 10 लाख से अधिक पात्र परिवारों के बैंक खातों में वित्तीय सहायता की दूसरी और अंतिम किस्त की राशि भी सीधे जारी कर दी है।\n\nलाभार्थियों के खातों में पहुंची 6,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि\nराज्य सचिवालय से कल्याणकारी राशि की अंतिम किस्त जारी करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आंकड़ों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस चरण में कुल 10,20,379 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है, जिनमें से प्रत्येक परिवार के खाते में 60-60 हजार रुपये की राशि भेजी गई है। इस पूरी प्रक्रिया के तहत राज्य कोष से 6,000 करोड़ रुपये से अधिक का विशाल बजट आवंटित और वितरित किया जा चुका है। सरकार का यह कदम राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बेघर एवं जरूरतमंद परिवारों को अपने पक्के मकान के सपने को साकार करने में सीधी मदद पहुंचाएगा।\n\nअक्टूबर में दुर्गा पूजा के बाद नए आवेदकों को मिलेगी वित्तीय सहायता\nआवास योजना के भविष्य के विस्तार के संबंध में मुख्यमंत्री ने अगले चरणों की समयसीमा भी स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि आगामी अक्टूबर माह में दुर्गा पूजा का पावन त्योहार संपन्न होने के तुरंत बाद कई लाख नए चयनित लाभार्थियों को योजना की पहली किस्त की राशि दी जाएगी। इस कल्याणकारी योजना के मौजूदा नियमों के अनुसार, अपना घर बनाने के लिए लाभार्थियों को दो समान किस्तों में कुल 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर लगभग 20 लाख नए आवेदकों के नामों को सूची में पहले ही जोड़ा जा चुका है और आने वाले दिनों में सत्यापन प्रक्रिया के साथ और भी सुयोग्य नाम शामिल किए जाएंगे।\n\nराज्य की ऐतिहासिक पहचान और श्यामा प्रसाद मुखर्जी के योगदान का जिक्र\nयोजना के नए नामकरण का औचित्य समझाते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसके पीछे जुड़े गहरे ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'पश्चिम बंग' नाम के साथ भारतीय स्वतंत्रता और विभाजन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ा हुआ है। वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के कालखंड में इस क्षेत्र को पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बनाने का एक बड़ा षड्यंत्र रचा गया था, जिसे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के दूरदर्शी नेतृत्व में पूरी तरह नाकाम कर दिया गया था। इसी ऐतिहासिक विरासत को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने राज्य के नाम से 'पश्चिम' शब्द को नहीं हटाने का भी संकल्प लिया है, ताकि आने वाली भावी पीढ़ियां अपने अतीत और सांस्कृतिक गौरव से सदैव अवगत रह सकें।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: राज्य स्तरीय आवास योजनाओं के नामकरण और निधि आवंटन के तरीकों से देश के अन्य राज्यों को भी पारदर्शिता और समयबद्ध वित्तीय सहायता का मॉडल देखने को मिलता है।\n\nपश्चिम बंगाल में: योजना के 10.2 लाख से अधिक पात्र परिवारों को 60,000 रुपये की अंतिम किस्त मिलने से घर निर्माण का काम पूरा हो सकेगा, जबकि 20 लाख नए आवेदकों को अक्टूबर दुर्गा पूजा के बाद पहली किस्त का लाभ मिलेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पश्चिम बंगाल की 'बांग्लार बाड़ी' आवास योजना का नया नाम क्या है?\nआवास योजना का नाम बदलकर आधिकारिक तौर पर 'पश्चिम बंग आवास' कर दिया गया है।\n\n2. हालिया किस्त में कितनी वित्तीय सहायता जारी की गई है?\nकुल 10,20,379 लाभार्थियों को दूसरी और अंतिम किस्त के रूप में 60-60 हजार रुपये मिले हैं, जो कुल 6,000 करोड़ रुपये से अधिक है।\n\n3. इस योजना के तहत प्रति परिवार कुल कितनी वित्तीय सहायता दी जाती है?\nलाभार्थियों को दो किस्तों में कुल 1.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है, जिसमें प्रत्येक किस्त 60,000 रुपये की होती है।\n\n4. नए आवेदकों को पहली किस्त कब जारी की जाएगी?\nकई लाख नए लाभार्थियों को अक्टूबर महीने में दुर्गा पूजा उत्सव समाप्त होने के बाद पहली किस्त जारी की जाएगी।\n\n5. मंत्रिमंडल ने राज्य के नाम से 'पश्चिम' शब्द न हटाने का फैसला क्यों किया?\nमुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार यह नाम 1947 के विभाजन और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा इस क्षेत्र को पूर्वी पाकिस्तान में जाने से रोकने के ऐतिहासिक घटनाक्रम से जुड़ा है।",
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  "category": "पश्चिम बंगाल",
  "publishedAt": "2026-08-06",
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