पश्चिम बंगाल के रेजीनगर उपचुनाव में बीजेपी का कब्जा, शंखरव सरकार ने 75 हजार से अधिक वोटों से दर्ज की जीत पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी के शंखरव सरकार ने एजेयूपी के गोलाम नबी आजाद को 75,816 वोटों के भारी अंतर से हरा दिया है। चार राज्यों की छह सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणामों की घोषणा के साथ ही पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट के नतीजे ने राजनीतिक हलकों में बड़ा ध्यान आकर्षित किया है। पांच विधानसभा और एक लोकसभा सीट के आए नतीजों में रेजीनगर पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं। इस सीट पर बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई(एम), तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट और एजेयूपी के बीच बहुकोणीय चुनावी मुकाबला देखने को मिला। ईवीएम में दर्ज मतों की गिनती पूरी होने पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार शंखरव सरकार ने हुमायूं कबीर की पार्टी एजेयूपी के प्रत्याशी गोलाम नबी आजाद (रॉबिन) को 75,816 वोटों के विशाल अंतर से पराजित किया। विजेता और मुख्य प्रतिद्वंद्वी के बीच मतों का अंतर मतगणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार बीजेपी प्रत्याशी शंखरव सरकार को कुल 1,29,914 वोट हासिल हुए। वहीं दूसरे स्थान पर रहे एजेयूपी उम्मीदवार गोलाम नबी आजाद को 54,098 वोट मिले। इन दोनों प्रमुख उम्मीदवारों के अलावा बाकी सभी दल काफी पीछे छूट गए। कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल्लाहील काफी 6,168 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, जबकि टीएमसी (ममता गुट) के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी 3,847 वोटों के साथ चौथे पायदान पर खिसक गए। सीपीआई(एम) और तृणमूल के दूसरे गुट का चुनावी प्रदर्शन इस उपचुनाव में वाममोर्चे और तृणमूल कांग्रेस के बागी धड़े ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी। सीपीआई(एम) के मोहम्मद सईद को 3,797 वोट मिले। वहीं ऋतब्रत बनर्जी के गुट वाली पार्टी डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सफिउज्जमां शेख को महज 2,044 मतों से संतोष करना पड़ा। इस तरह ऋतब्रत बनर्जी के धड़े को ममता बनर्जी की पार्टी के प्रत्याशी से भी कम वोट हासिल हुए। रेजीनगर का जनसांख्यिकीय गणित और सीट का इतिहास रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और मुस्लिम बहुल माना जाता है। इस इलाके में मुस्लिम आबादी का हिस्सा 65 से 75 प्रतिशत के बीच है, जबकि हिंदू मतदाताओं की तादाद 30 से 35 फीसदी के करीब है। वर्ष 2026 के आम विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटों पर विजय दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने नाओदा सीट को अपने पास बनाए रखने का फैसला किया और रेजीनगर सीट से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद खाली हुई इस सीट पर हुमायूं कबीर ने अपने बेटे गोलाम नबी आजाद को एजेयूपी के टिकट पर उतारा था। इस सामाजिक समीकरण और पारिवारिक प्रभाव के बावजूद बीजेपी प्रत्याशी ने सवा लाख से अधिक मत जुटाकर शानदार जीत हासिल की। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में भी बीजेपी उम्मीदवार ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1,22,753 वोटों से हराया। इसका आप पर असर रेजीनगर उपचुनाव के नतीजे से पश्चिम बंगाल की राज्य स्तरीय और स्थानीय राजनीति के समीकरणों पर सीधा असर पड़ेगा। • पश्चिम बंगाल में: रेजीनगर में बीजेपी के 75,816 वोटों के विशाल अंतर से जीतने के बाद तृणमूल कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों पर अपनी राजनीतिक रणनीति बदलने का दबाव बढ़ गया है। विधानसभा में नए प्रतिनिधि के आने से क्षेत्र के स्थानीय प्रशासनिक विकास और लंबित नागरिक कार्यों में नई प्राथमिकताएं देखने को मिल सकती हैं। • भारत में: चार राज्यों के उपचुनाव नतीजों में बीजेपी की यह मजबूत बढ़त आगामी विधानसभा व स्थानीय चुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाएगी। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन को क्षेत्रीय और अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर अपने वोट बैंक विभाजन का आकलन करना होगा। • मतदाताओं के लिए: अल्पसंख्यक बहुल सीट पर ऐसे नतीजे दिखाते हैं कि बहुकोणीय मुकाबले में वोटों का बिखराव परिणाम तय करने में निर्णायक भूमिका निभाता है। क्षेत्र के सामान्य नागरिकों के लिए अब अपने नवनिर्वाचित विधायक से स्थानीय मुद्दों और वादों को पूरा कराने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। • विपक्षी दलों के लिए: कांग्रेस, टीएमसी के बागी गुट और वाममोर्चे का बहुत कम मतों पर सिमटना यह दर्शाता है कि तीसरे या चौथे मोर्चे के विकल्पों को मतदाताओं ने नकार दिया है। इन दलों को आगे चुनावी मैदान में टिके रहने के लिए अपनी संगठनात्मक पकड़ पर दोबारा काम करना होगा। ऐसा क्यों हुआ रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता तब पड़ी जब 2026 के आम चुनाव में दो सीटों पर जीते हुमायूं कबीर ने इस सीट से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद हुए मुकाबले में कई प्रमुख दलों के उतरने से मतों का भारी बिखराव हुआ। • सीट खाली होने का कारण: वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने नाओदा सीट को अपने पास रखने का निर्णय लिया और रेजीनगर सीट छोड़ दी, जिससे यह उपचुनाव अनिवार्य हो गया। • उम्मीदवारों का चयन: हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी एजेयूपी से अपने पुत्र गोलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतारा। वहीं बीजेपी ने शंखरव सरकार पर दांव लगाया और अन्य दलों ने भी अपने अलग प्रत्याशी उतारे। • विपक्षी वोटों का विखंडन: इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट, कांग्रेस, सीपीआई(एम) और एजेयूपी के अलग-अलग चुनाव लड़ने के कारण गैर-बीजेपी मत बुरी तरह बंट गए। इसका सीधा लाभ बीजेपी उम्मीदवार को मिला और उन्होंने सवा लाख से अधिक मत जुटा लिए। सवाल-जवाब 1. रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में किस उम्मीदवार ने जीत दर्ज की? बीजेपी के उम्मीदवार शंखरव सरकार ने रेजीनगर उपचुनाव में शानदार जीत हासिल की। 2. बीजेपी उम्मीदवार ने कितने वोटों के अंतर से जीत हासिल की? शंखरव सरकार ने एजेयूपी के गोलाम नबी आजाद को 75,816 वोटों के अंतर से हराया। 3. रेजीनगर सीट पर मुख्य उम्मीदवारों को कुल कितने वोट मिले? बीजेपी के शंखरव सरकार को 1,29,914 वोट और एजेयूपी के गोलाम नबी आजाद को 54,098 वोट मिले। 4. रेजीनगर सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता क्यों पड़ी थी? 2026 के चुनाव में हुमायूं कबीर ने रेजीनगर और नाओदा दोनों सीटें जीती थीं, जिसके बाद उन्होंने नाओदा को रखकर रेजीनगर सीट छोड़ दी थी। 5. कांग्रेस और टीएमसी (ममता गुट) के उम्मीदवारों का क्या प्रदर्शन रहा? कांग्रेस के अब्दुल्लाहील काफी को 6,168 वोट मिले जबकि टीएमसी (ममता गुट) के रबीउल आलम चौधरी को 3,847 वोट मिले। https://trendkia.com/west-bengal/west-bengal-ke-rejinagar-upachunava-men-bjp-ka-kabja-shankharavh-sarkar-ne-75-hajara-se-adhika-voton-se-darja-ki-jita-45491 TrendKia — Har trend, sabse pehle.