पश्चिम बंगाल में विरोधियों पर बरसे सुवेंदु अधिकारी, राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के खिलाफ चेताया अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने चुनावी विरोध प्रदर्शनों और जादवपुर यूनिवर्सिटी के घटनाक्रम को लेकर कड़ा रुख अपनाया। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तीखी बयानबाजी का दौर एक नए चरम पर पहुंच गया है, जहां सत्तारूढ़ ममता बनर्जी प्रशासन और विपक्षी खेमे के बीच टकराव अब बेहद तल्ख शब्दों के साथ सामने आ रहा है। एक सार्वजनिक मंच से सीनियर नेता सुवेंदु अधिकारी ने हालिया राजनीतिक हलचलों और विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सख्त टिप्पणी की है। उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर आयोजित एक विशेष सभा में बोलते हुए सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुंबई प्रदर्शन और चुनाव आयोग पर उठे सवालों पर टिप्पणी इस पूरे सियासी घटनाक्रम की पृष्ठभूमि मुंबई के शिवाजी पार्क में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन से भी जुड़ी है। वहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की तरफ से मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित धांधली को लेकर मोर्चा खोला गया था। इस प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पद से इस्तीफे की मांग उठाई गई थी। इस तरह के आयोजनों और चुनावी संस्थाओं पर उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुवेंदु अधिकारी ने दो टूक शब्दों में अपनी राय रखी। सभा को संबोधित करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “बहुत से खटमल फिर से चारों तरफ दिखाई देने लगे हैं। हमें पूरी तरह सतर्क और एकजुट रहना होगा। हम राज्य में किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” सुवेंदु अधिकारी के इस रुख से साफ है कि वे संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज पर सवाल खड़े करने और राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाली गतिविधियों के पीछे छिपे तत्वों को गंभीरता से ले रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ समय रहते सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि व्यवस्था पर कोई आंच न आए। जादवपुर यूनिवर्सिटी के नारों पर कड़ी चेतावनी अपने संबोधन में सीनियर नेता ने सिर्फ चुनावी विरोध तक ही अपनी बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों के माहौल पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। विशेष रूप से जादवपुर यूनिवर्सिटी का नाम लेते हुए उन्होंने कैंपस के भीतर लगने वाले आजादी और देशविरोधी नारों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आगाह किया कि शैक्षणिक परिसरों का इस्तेमाल किसी भी हालत में विघटनकारी सोच को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। एक प्रकाशित समाचार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार राष्ट्रवादी युवाओं के एक समूह ने परिसर के अंदर ऐसी विभाजनकारी ताकतों का मजबूती से सामना किया है। सुवेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि समाज और शिक्षण परिसरों को ऐसे तत्वों से मुक्त कराने का समय आ चुका है और ऐसी गतिविधियों को पूरी तरह से समाप्त किया जाना आवश्यक है। एकजुटता और सतर्कता की अपील कार्यक्रम के अंत में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि कानून और व्यवस्था के दायरे से बाहर जाकर की जाने वाली किसी भी गतिविधि को बंगाल की धरती पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और आपसी एकता बनाए रखने का आह्वान किया, ताकि असामाजिक या विघटनकारी तत्व अपने मंसूबों में कामयाब न हो सकें। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है। इसका आप पर असर इस राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों का सीधा प्रभाव राज्य की कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक राजनीतिक संवाद पर पड़ता है। • भारत में: संवैधानिक संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर होने वाले विरोध प्रदर्शनों से देश भर में मतदाता सूची संशोधन की पारदर्शिता पर राजनीतिक बहस तेज होगी। इसके चलते चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जनता का ध्यान और सतर्कता बढ़ेगी। • पश्चिम बंगाल में: जादवपुर यूनिवर्सिटी और अन्य परिसरों में राजनीतिक गतिविधियों और छात्र गुटों के बीच टकराव की आशंका बढ़ सकती है। राज्य के आम नागरिकों और छात्रों को सुरक्षा व्यवस्था तथा राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। ऐसा क्यों हुआ यह तीखी बयानबाजी मुंबई में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन और शैक्षणिक परिसरों में नारों को लेकर उपजे विवाद के कारण सामने आई है। • मतदाता सूची संशोधन पर विरोध: मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। इस विरोध प्रदर्शन ने चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता पर राजनीतिक तकरार छेड़ दी। • परिसर की राजनीति और नारे: जादवपुर यूनिवर्सिटी के अंदर कथित तौर पर देशविरोधी और आजादी वाले नारे लगाए जाने की घटनाओं ने विवाद खड़ा किया। राष्ट्रवादी छात्र समूहों द्वारा इसका विरोध किए जाने के बाद राजनीतिक नेताओं ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। • शताब्दी समारोह का मंच: विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी कार्यक्रम के मंच से कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया। इसी कारण नेताओं ने इन सभी विषयों को एक साथ संबोधित किया। सवाल-जवाब 1. सुवेंदु अधिकारी ने यह बयान किस अवसर पर दिया? उन्होंने यह बयान विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी समारोह के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में दिया। 2. मुंबई के शिवाजी पार्क में किस मांग को लेकर प्रदर्शन हुआ था? वहां कॉकरोच जनता पार्टी ने मतदाता सूची संशोधन में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। 3. जादवपुर यूनिवर्सिटी को लेकर सुवेंदु अधिकारी ने क्या टिप्पणी की? उन्होंने परिसर में आजादी और देशविरोधी नारे लगाने वाले तत्वों की आलोचना की और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकने की बात कही। 4. सुवेंदु अधिकारी ने लोगों से क्या अपील की? उन्होंने लोगों से राष्ट्रविरोधी ताकतों के खिलाफ पूरी तरह सतर्क और एकजुट रहने की अपील की। https://trendkia.com/west-bengal/west-bengal-men-virodhiyon-para-barase-suvendu-adhikari-rashtravirodhi-gatividhiyon-ke-khilapha-chetaya-42903 TrendKia — Har trend, sabse pehle.