पश्चिम बंगाल उपचुनाव में ममता बनर्जी गुट को दोहरा झटका, नंदीग्राम और रेजीनगर से दोनों प्रत्याशियों ने मैदान छोड़ा पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट के नंदीग्राम प्रत्याशी संचिता प्रधान डे और रेजीनगर प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी ने 24 घंटे के भीतर अपने नामांकन वापस ले लिए हैं। पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में 24 घंटे के भीतर एक बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला है। आगामी विधानसभा उपचुनावों को लेकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट को उस समय गहरे संकट का सामना करना पड़ा, जब पार्टी के दो घोषित उम्मीदवारों ने एक के बाद एक चुनावी मुकाबले से हटने का फैसला कर लिया। सबसे पहले नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनावी ताल ठोक रहीं संचिता प्रधान डे ने अपना पर्चा वापस लिया। इस घटना के 24 घंटे पूरे भी नहीं हुए थे कि मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से प्रत्याशी बनाए गए पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी ने भी चुनाव मैदान छोड़ दिया। दोनों उम्मीदवारों के इस अचानक लिए गए फैसले ने बंगाल के चुनावी परिदृश्य में खलबली मचा दी है। इन दोनों सीटों पर चुनावी गतिविधियां ऐसे समय में हो रही हैं जब तृणमूल कांग्रेस के नाम और आधिकारिक चुनाव चिह्न को लेकर संगठन के भीतर खींचतान चल रही है। निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के चलते दोनों ही गुटों पर आगामी उपचुनावों में पार्टी के पुराने नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगी हुई है। इसी वजह से ममता बनर्जी के खेमे को दोनों सीटों पर नए नाम और नए चुनाव चिह्न के सहारे मतदाताओं के बीच उतरना था। नए सिंबल के साथ चुनाव प्रचार शुरू करने की इस विषम परिस्थिति के बीच उम्मीदवारों की वापसी ने पार्टी की रणनीति को गहरा झटका दिया है। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे का राजनीतिक सफर और नामांकन वापसी नंदीग्राम विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाई गईं संचिता प्रधान डे पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदीग्राम क्षेत्र स्थित बोयाल-2 ग्राम पंचायत की निवासी हैं। वह पेशे से एक शिक्षिका हैं और इलाके के बोयाल प्राइमरी स्कूल या नॉर्थ बोयाल प्राइमरी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती रही हैं। स्थानीय स्तर पर जमीनी राजनीति में उनकी सक्रियता करीब डेढ़ दशक पुरानी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार वह 2008 से तृणमूल कांग्रेस के साथ जुड़ी रही हैं और उन्होंने अपना सियासी आधार ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर पर तैयार किया। साल 2013 के पंचायत चुनावों में संचिता प्रधान डे ने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर नंदीग्राम पंचायत समिति का चुनाव जीता। पंचायत समिति सदस्य बनने के बाद उन्हें महिला एवं बाल कल्याण विभाग की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद 2018 के पंचायत चुनावों में भी उन्होंने अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखा और दोबारा पंचायत समिति की सदस्य बनीं, जहां उन्हें शिक्षा विभाग की कर्माध्यक्ष बनाया गया। हालांकि 2023 के पंचायत चुनाव में उनके राजनीतिक सफर में उतार-चढ़ाव आया, जब पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बावजूद वह इलाके में लगातार सक्रिय रहीं। सितंबर 2026 में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संचिता प्रधान डे पर भरोसा जताते हुए उन्हें हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम उपचुनाव में मैदान में उतारा। यह वही विधानसभा क्षेत्र है जहां 2021 के आम चुनाव में ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच ऐतिहासिक मुकाबला हुआ था, जिसमें सुवेंदु अधिकारी ने जीत हासिल की थी। नंदीग्राम से नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद 18 सितंबर को संचिता प्रधान डे ने सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की और उसी दिन उन्होंने अपना नामांकन वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया, लेकिन इसी बीच एक पुराने मामले में मिलन प्रधान की गिरफ्तारी हो गई, जिससे वहां का राजनीतिक माहौल और अधिक पेचीदा हो गया। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी का चुनावी दांव और मैदान छोड़ने की वजह नंदीग्राम के बाद मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट पर भी ममता बनर्जी गुट को दूसरा बड़ा झटका लगा। यहां से उम्मीदवार बनाए गए रबीउल आलम चौधरी बेलडांगा क्षेत्र के मिर्जापुर इलाके के रहने वाले हैं। संचिता प्रधान डे के विपरीत रबीउल आलम चौधरी का राजनीतिक कद राज्य स्तर पर विधायक के रूप में स्थापित रहा है। वह कृषि कार्यों और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। शैक्षणिक योग्यता के लिहाज से वह बी.कॉम डिग्री धारक हैं, जिन्होंने 1983 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध एसआरएफ कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। रबीउल आलम चौधरी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं और वह पूर्व विधायक नुरुल चौधरी के भतीजे हैं। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरुआत कांग्रेस से की थी। 2013 में रेजीनगर सीट पर हुए उपचुनाव में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2016 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर रेजीनगर सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। साल 2021 के चुनाव से पहले रबीउल आलम चौधरी तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लड़ते हुए रबीउल आलम चौधरी ने शानदार जीत दर्ज की। उस चुनाव में उन्हें 1,18,494 वोट हासिल हुए थे और उनका वोट शेयर 56.73 प्रतिशत रहा था। वह 2021 से 2026 तक रेजीनगर के विधायक रहे। हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त हुई थी, जिसके चलते सितंबर 2026 के उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट ने एक बार फिर रबीउल को अपना उम्मीदवार बनाया। हालांकि 19 सितंबर को रबीउल आलम चौधरी ने अचानक अपना पर्चा वापस ले लिया। नामांकन वापसी के पीछे उन्होंने नए चुनाव चिह्न के साथ कार्यकर्ताओं को लामबंद करने में आ रही दिक्कतों, भारी दबाव और कुछ सहयोगियों की गिरफ्तारी का हवाला दिया। दो अलग पृष्ठभूमि के नेताओं की एक जैसी वापसी नंदीग्राम और रेजीनगर के इन दोनों उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि पूरी तरह भिन्न है। एक तरफ संचिता प्रधान डे प्राथमिक शिक्षा और ब्लॉक स्तर की पंचायत राजनीति से उठकर पहली बार विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरी थीं, तो दूसरी ओर रबीउल आलम चौधरी तीन बार विधायक रह चुके एक मंझे हुए राजनेता हैं। इसके बावजूद मात्र 24 घंटे के अंतराल पर दोनों के चुनाव से पीछे हटने ने उपचुनावों की पूरी दिशा बदल दी है। तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक विवाद और चुनाव आयोग द्वारा पुराने चुनाव चिह्न के उपयोग पर लगाई गई अंतरिम रोक के बाद नए नाम और प्रतीक के साथ प्रचार अभियान खड़ा करना पार्टी के लिए एक कठिन परीक्षा साबित हो रहा है। नंदीग्राम में कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी और दोनों प्रत्याशियों के हटने के बाद अब इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी लड़ाई पूरी तरह नए समीकरणों की तरफ मुड़ गई है। इसका आप पर असर नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनावों से उम्मीदवारों के हटने से मतदाताओं और स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर सीधा असर पड़ा है। • पश्चिम बंगाल में: राज्य में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे विवाद और चुनाव आयोग के आदेश से पार्टी कार्यकर्ताओं में भ्रम बढ़ सकता है। मतदाता अब बिना पारंपरिक चुनाव चिह्न के नए राजनीतिक समीकरणों के बीच मतदान करेंगे। • नंदीग्राम में: संचिता प्रधान डे के हटने और कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी के बाद मतदाताओं के सामने मुख्य विपक्षी विकल्प बदल गए हैं। स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं को अब नेतृत्व के नए निर्देशों का इंतजार करना पड़ेगा। • रेजीनगर में: तीन बार के विधायक रबीउल आलम चौधरी के चुनाव न लड़ने से समर्थकों को नया चुनावी विकल्प चुनना होगा। क्षेत्र के चुनावी समीकरण अब हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद नए उम्मीदवारों के इर्द-गिर्द घूमेंगे। • चुनावी प्रक्रिया पर: नामांकन वापसी के बाद दोनों सीटों पर बैलेट पेपर और मतदान विकल्पों की संरचना बदल जाएगी। निर्वाचन अधिकारियों को मतदान केंद्रों पर संशोधित उम्मीदवार सूची प्रदर्शित करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ उम्मीदवारों द्वारा नामांकन वापस लेने के पीछे पार्टी के अंदरूनी विवाद, चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश और स्थानीय स्तर पर उत्पन्न हुआ दबाव प्रमुख कारण बनकर सामने आया है। • चुनाव चिह्न पर आयोग की रोक: निर्वाचन आयोग के अंतरिम आदेश के चलते पार्टी के दोनों गुटों पर पुराने नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई थी। नए नाम और चुनाव चिह्न के साथ बहुत कम समय में मतदाताओं के बीच पहुंचना उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया था। • नंदीग्राम में राजनीतिक मुलाक़ात: संचिता प्रधान डे ने 18 सितंबर को सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात की और उसी दिन अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद ममता बनर्जी गुट द्वारा समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। • रेजीनगर में कार्यकर्ताओं पर दबाव: रबीउल आलम चौधरी ने स्पष्ट किया कि नया प्रतीक मिलने के बाद कार्यकर्ताओं को मैदान में सक्रिय करना कठिन हो गया था। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय स्तर पर दबाव और कुछ लोगों की गिरफ्तारी को भी चुनाव मैदान छोड़ने की वजह बताया। सवाल-जवाब 1. किन दो उम्मीदवारों ने उपचुनाव से अपना नामांकन वापस लिया है? नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी ने अपने नामांकन वापस लिए हैं। 2. संचिता प्रधान डे का पेशा और राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है? वह पेशे से प्राइमरी स्कूल शिक्षिका हैं और 2008 से राजनीति में सक्रिय रहते हुए नंदीग्राम पंचायत समिति की सदस्य रह चुकी हैं। 3. रबीउल आलम चौधरी ने रेजीनगर से चुनाव मैदान छोड़ने का क्या कारण बताया? उन्होंने नए चुनाव चिह्न के कारण कार्यकर्ताओं को जुटाने में आ रही परेशानी, दबाव और कुछ लोगों की गिरफ्तारी को कारण बताया। 4. नंदीग्राम में नामांकन वापसी के बाद कांग्रेस प्रत्याशी के साथ क्या हुआ? ममता बनर्जी द्वारा समर्थन दिए जाने के तुरंत बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। 5. रेजीनगर विधानसभा सीट उपचुनाव के लिए क्यों खाली हुई थी? रेजीनगर सीट पूर्व विधायक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई थी। https://trendkia.com/west-bengal/west-bengal-upachunava-men-mamata-banerjee-guta-ko-dohara-jhataka-nandigram-aura-rejinagar-se-donon-pratyashiyon-ne-maidana-chhora-33519 TrendKia — Har trend, sabse pehle.