पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले नंदीग्राम और रेजीनगर में तृणमूल कांग्रेस बैकफुट पर, सुवेंदु अधिकारी की घेराबंदी ने बढ़ाई ममता बनर्जी की मुश्किलें पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनाव से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है, जहां नंदीग्राम के बाद रेजीनगर से भी पार्टी उम्मीदवारों ने मैदान छोड़ने की बात कही है। पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में मतदान की तारीख नजदीक आते ही राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। राज्य की दो अहम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची हलचल ने पूरे सत्ताधारी खेमे को सकते में डाल दिया है। नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी के अचानक कदम पीछे खींचने के सिर्फ चौबीस घंटे के भीतर रेजीनगर सीट पर भी चुनावी तस्वीर पूरी तरह उलट गई। रेजीनगर से तृणमूल कांग्रेस के घोषित प्रत्याशी रबीउल आलम चौधरी द्वारा मैदान से हटने की बात सामने आने से पार्टी संगठन के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी के बीच चल रही वर्चस्व की दूसरी बड़ी जंग माना जा रहा है, जिसमें फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के नेता का पलड़ा काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। हालांकि इस अप्रत्याशित झटके के बाद तृणमूल कांग्रेस की सर्वोच्च नेता भी अपनी नई रणनीति तैयार करने में जुट गई हैं। उपचुनाव से ठीक पहले उम्मीदवारों के पीछे हटने का घटनाक्रम निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना तय है, जबकि वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी। मतदान दिवस में लगभग एक महीने का समय शेष रहते सत्ताधारी दल के प्रत्याशियों का इस अंदाज में मैदान छोड़ देना राज्य भर में चर्चा का केंद्र बन गया है। इस सिलसिले की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस की अधिकृत उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अचानक अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। सबसे ज्यादा हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि अपना पर्चा वापस लेने से केवल कुछ ही घंटे पहले उन्होंने राज्य सचिवालय नबन्ना जाकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भेंट की थी, और उसी दौरान उनकी मुलाकात नंदीग्राम के विधायक तथा नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी से भी हुई थी। इस अहम बैठक के फौरन बाद प्रत्याशी का नाम वापस लेना राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयासों को जन्म दे रहा है। रेजीनगर में भी तृणमूल कांग्रेस को झटका, बीजेपी को बढ़त नंदीग्राम के चौंकाने वाले फैसले से तृणमूल कांग्रेस संभल भी नहीं पाई थी कि मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर सीट से भी पार्टी के लिए बुरी खबर आ गई। वहां से पार्टी के घोषित उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने भी चुनावी मुकाबले से अलग होने का ऐलान कर दिया। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने रेजीनगर विधानसभा सीट से शाखारव सरकार पर दांव लगाया है। तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी के मैदान से हट जाने के कारण अब शाखारव सरकार के सामने मुकाबला बेहद एकतरफा होता दिख रहा है, जिससे उन्हें बिना कड़े संघर्ष के सीधी बढ़त मिलने के आसार बन गए हैं। एक के बाद एक दो सीटों पर प्रत्याशियों का इस तरह पीछे हटना सत्ताधारी दल की चुनावी तैयारियों पर सीधे तौर पर सवाल खड़े कर रहा है। ममता बनाम सुवेंदु की सियासी जंग का पुराना इतिहास पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस टकराव की जड़ें साल 2021 के ऐतिहासिक विधानसभा चुनाव से जुड़ी हुई हैं। उस वक्त नंदीग्राम की बेहद चर्चित सीट पर सुवेंदु अधिकारी ने खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनावी शिकस्त देकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। उस चुनावी नतीजे के बाद से ही सुवेंदु अधिकारी राज्य के भीतर तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के सबसे प्रखर और सीधे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरे। अब 2026 के इस दौर में उपचुनाव की घोषणा के साथ ही उम्मीदवारों के इस तरह अप्रत्याशित रूप से मैदान छोड़ने से बंगाल की राजनीति में नए समीकरण आकार लेने लगे हैं। गिरता कैडर मनोबल और अंदरूनी खींचतान की चुनौती राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वास्तविक मतदान से काफी पहले प्रत्याशियों का इस तरह हाथ खड़े कर देना तृणमूल कांग्रेस के जमीनी कार्यकर्ताओं और कैडर के घटते आत्मविश्वास की ओर इशारा करता है। इस सियासी घटनाक्रम ने यह भी साबित कर दिया है कि दक्षिण बंगाल के अपने प्रभाव वाले इलाकों में सुवेंदु अधिकारी की पकड़ आज भी बेहद मजबूत है। पार्टी के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि संगठन के भीतर जारी कलह, स्थानीय गुटबाजी और बगावती तेवरों की वजह से उम्मीदवार बेहद असहज महसूस कर रहे थे। इसके विपरीत, इन दोनों सीटों पर मिली शुरुआती रणनीतिक बढ़त ने आगामी सियासी लड़ाइयों के लिए भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी जोश भर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के सामने गढ़ बचाने की कड़ी परीक्षा अपने पारंपरिक और भरोसेमंद सियासी इलाकों में पकड़ बनाए रखना अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ी संगठनात्मक चुनौती बन चुका है। सुवेंदु अधिकारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल अपनी विधानसभा सीट की रक्षा करने में ही सक्षम नहीं हैं, बल्कि विरोधी खेमे को बड़ी रणनीतिक शिकस्त देने की ताकत भी रखते हैं। पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग से पहले सत्ताधारी दल के प्रत्याशियों का यह कदम साफ दर्शाता है कि नेता प्रतिपक्ष की राजनीतिक घेराबंदी तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य माने जाने वाले दुर्ग में सेंध लगाने में कामयाब रही है। चुनाव के आधिकारिक परिणाम भले ही 9 अक्टूबर को सामने आएं, लेकिन सियासी हलकों में यह आम राय बन रही है कि ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी के बीच छिड़े इस ताजा मुकाबले के शुरुआती दौर में भारतीय जनता पार्टी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है। इसका आप पर असर पश्चिम बंगाल की दो महत्वपूर्ण सीटों पर उम्मीदवारों के मैदान छोड़ने से स्थानीय प्रशासन, मतदाताओं के चुनावी विकल्पों और राज्य की राजनीतिक दिशा पर सीधा असर पड़ा है। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी और सत्ताधारी दलों की संगठनात्मक क्षमता का आकलन करने वाले विश्लेषक इसे क्षेत्रीय राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देख रहे हैं। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों के भीतर आंतरिक अनुशासन और प्रत्याशी चयन की कमजोरियों पर नई बहस शुरू हो सकती है। • पश्चिम बंगाल में: नंदीग्राम और रेजीनगर के मतदाताओं के सामने मतदान से पहले ही मुख्य मुकाबले के सीमित होने की स्थिति पैदा हो गई है। 6 अक्टूबर को वोट डालने वाले आम नागरिकों के लिए अब चुनावी विकल्प काफी बदल जाएंगे, जिसका सीधा असर स्थानीय जनसमस्याओं और आगामी विकास योजनाओं के वादों पर पड़ेगा। • राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर: जमीनी स्तर पर चुनावी प्रचार में जुटे कैडर के उत्साह और प्रचार रणनीतियों में तत्काल बदलाव करना पड़ेगा। जिन कार्यकर्ताओं ने हफ्तों से प्रचार में पसीना बहाया था, उन्हें अब नए नेतृत्व और निर्देशों का इंतजार करना होगा। • आगामी चुनावी संतुलन पर: इन दोनों क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरण बदलने से निकट भविष्य में होने वाले अन्य चुनावों के लिए गठबंधन और टिकट वितरण के नियम और सख्त हो जाएंगे। सभी राजनीतिक दलों को अपने प्रत्याशियों की निष्ठा और चुनावी मजबूती का दोबारा आकलन करना पड़ेगा। ऐसा क्यों हुआ पश्चिम बंगाल उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रत्याशियों द्वारा नाम वापस लेने के पीछे पार्टी की आंतरिक कलह, स्थानीय असंतोष और मजबूत विपक्षी रणनीतिक दबाव मुख्य कारण बनकर उभरे हैं। • आंतरिक कलह और असंतोष: पार्टी संगठन के भीतर टिकट वितरण के बाद से ही स्थानीय नेताओं और बागियों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिल रही थी। असंतुष्ट गुटों के असहयोग और खुलकर सामने आए विरोध के चलते घोषित प्रत्याशियों के लिए स्वतंत्र रूप से चुनाव प्रचार करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। • विपक्षी नेता का रणनीतिक दबाव: दक्षिण बंगाल में मजबूत प्रभाव रखने वाले सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और रेजीनगर दोनों क्षेत्रों में आक्रामक चुनावी घेराबंदी कर रखी थी। उनके प्रभाव और स्थानीय पकड़ के कारण तृणमूल उम्मीदवारों पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव बन गया था। • नामांकन वापसी से पहले की बैठकें: नंदीग्राम की प्रत्याशी ने राज्य सचिवालय में मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष दोनों से मुलाकात की थी, जिसके फौरन बाद उनका इस्तीफा सामने आया। इन मुलाकातों के दौरान उभरे राजनीतिक समीकरणों ने प्रत्याशियों को चुनावी मुकाबले से हटने के लिए प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. पश्चिम बंगाल की किन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं? पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव आयोजित किए जा रहे हैं। 2. इन दोनों सीटों पर मतदान और मतगणना की तारीखें क्या हैं? दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को चुनाव परिणामों की घोषणा की जाएगी। 3. नंदीग्राम से तृणमूल कांग्रेस की किस प्रत्याशी ने नामांकन वापस लिया? नंदीग्राम से पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अचानक अपना नामांकन वापस ले लिया। 4. रेजीनगर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान छोड़ने वाले उम्मीदवार कौन हैं? रेजीनगर से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने चुनावी मैदान से हटने का ऐलान किया है। 5. भारतीय जनता पार्टी ने रेजीनगर सीट से किसे चुनावी मैदान में उतारा है? भारतीय जनता पार्टी ने रेजीनगर विधानसभा सीट से शाखारव सरकार को अपना उम्मीदवार बनाया है। 6. नंदीग्राम सीट का पिछला चुनावी इतिहास क्या रहा है? साल 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को पराजित किया था। https://trendkia.com/west-bengal/west-bengal-upachunava-se-pahale-nandigram-aura-rejinagar-men-tmc-baikaphuta-para-suvendu-adhikari-ki-gherabndi-ne-barhai-mamata-b-33644 TrendKia — Har trend, sabse pehle.