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  "type": "article",
  "title": "ब्राजील के अमेज़न वर्षावन में मतदान संकट: नावों की कमी से दूरदराज के आदिवासी मतदाताओं का पोलिंग बूथ पहुंचना मुश्किल",
  "summary": "अमेज़ोनास राज्य के जावारी वैली में नदियों के घटते जलस्तर और परिवहन की कमी के कारण 29 अक्टूबर को होने वाले रनऑफ चुनाव में हजारों मूल निवासी वोट डालने से वंचित रह सकते हैं।",
  "content": "ब्राजील के अमेज़न वर्षावन के सबसे दुर्गम इलाकों में रहने वाले मूल निवासी समुदायों के सामने 29 अक्टूबर को होने वाले दूसरे दौर (रनऑफ) के मतदान में बड़ी बाधा खड़ी हो गई है। अमेज़ोनास राज्य के सुदूर जावारी वैली में स्थानीय परिवहन साधनों की भारी कमी और नदियों में कम पानी के चलते कई मतदाता अपने मतदान केंद्रों तक पहुंचने में असमर्थ हैं। इस आगामी रनऑफ चुनाव में मतदाता राज्य के गवर्नर के साथ-साथ देश के राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाले हैं।\n\nचुनाव अदालत ने ठुकराई याचिका\nजावारी वैली के मूल निवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन उनिवाजा (Univaja) ने चुनाव अधिकारियों से यात्रा प्रबंध कराने की अपील की थी। अमेज़ोनास राज्य की चुनावी अदालत ने मंगलवार को इस याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के अधिकारियों का कहना था कि यह गुहार बहुत देर से लगाई गई। इसके अलावा अदालत ने भारी दूरियों और नदियों के घटे जलस्तर का हवाला दिया, जिसके कारण नावें बहुत धीमी गति से चलती हैं और इतने कम समय में व्यवस्था करना नामुमकिन हो गया है।\n\nअदालत के फैसले में यह रेखांकित किया गया कि मतदान केंद्रों और बस्तियों के बीच का फासला बहुत विशाल है। कम पानी में चलने वाली नावों की व्यवस्था इतने कम समय में करना संभव नहीं था। इसके साथ ही फैसले में यह भी बताया गया कि चुनाव कर्मियों और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को संबंधित स्थानों तक पहुंचाने के लिए सैन्य विमानों की मदद लेनी पड़ रही है। इलाके के कई हिस्सों में पहुंच अत्यंत सीमित है और प्रशासन के पास तत्काल कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।\n\nराष्ट्रपति और गवर्नर पद के लिए कड़ा मुकाबला\nअमेज़ोनास राज्य में राजनीतिक मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा बना हुआ है। यहां मतदाता राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच विकल्प चुनने जा रहे हैं। फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और सुदूर-दक्षिणपंथी रुझान वाले उम्मीदवार हैं। हालिया जनमत सर्वेक्षणों से संकेत मिला है कि दोनों के बीच बहुत करीबी मुकाबला है, जिसमें बोल्सोनारो मामूली बढ़त बनाए हुए हैं। पहले दौर के चुनाव में बोल्सोनारो ने राजधानी मनौस में जीत हासिल की थी, जबकि लूला ने राज्य के अधिकांश अंदरूनी कस्बों में जीत दर्ज की थी।\n\nदूरियां और नदी के रास्ते की जटिलताएं\nब्राजील के चुनावी नियमों के अनुसार दूरदराज के आदिवासी समुदायों को मतदान के लिए परिवहन सहायता मुहैया कराई जानी चाहिए। जावारी वैली के भीतर कुछ बड़े गांवों को आसपास के समुदायों के लिए पोलिंग सेंटर बनाया गया है। इसके बावजूद कई मतदाता अपने पोलिंग बूथ से करीब 895 किलोमीटर तक की दूरी पर रहते हैं। नाव से सफर करने में आमतौर पर तीन से पांच दिन का समय लग जाता है। सूखे के मौसम के दौरान नदियों का बहाव और गहराई कम होने से यह लॉजिस्टिक्स और भी ज्यादा जटिल हो जाता है।\n\nउनिवाजा के कानूनी सलाहकार और आदिवासी वकील एलीसियो मारुबो के अनुसार पहले दौर के मतदान से पहले प्रशासनिक तालमेल पूरी तरह से टूट गया था। मारुबो ने कहा, \"हम आम तौर पर चुनावी अधिकारियों को इन मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए लॉजिस्टिक्स व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।\" उनका कहना था कि इस बार स्थिति पूरी तरह उलट रही और चुनाव अधिकारियों ने परिवहन व्यवस्था को लेकर उनसे कोई संवाद नहीं किया।\n\nमारुबो ने महीने की शुरुआत में हुए पहले दौर में कम मतदान का सीधा संबंध परिवहन की इसी समस्या से जोड़ा। पहले दौर के दौरान मतदान से दूर रहने वालों की दर काफी ऊंची रही थी। इसके बाद उनिवाजा ने 13 अक्टूबर को सीधे अधिकारियों के समक्ष याचिका दायर की थी। संगठन का कहना है कि अब भी इस बात का गहरा डर है कि बहुत से लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।\n\nसरकारी लीगल सेल की पहल और भौगोलिक चुनौतियां\nअमेज़ोनास पब्लिक डिफेंडर्स ऑफिस की इंडिजिनस राइट्स यूनिट ने भी चुनावी अधिकारियों के समक्ष औपचारिक याचिका दायर की थी। इस कार्यालय ने स्थानीय नेताओं और जमीनी संगठनों से रिपोर्ट मिलने के बाद यह कदम उठाया था। इन रिपोर्टों में साफ तौर पर बताया गया था कि आगामी रनऑफ के लिए मतदान केंद्रों तक पहुंचना मतदाताओं के लिए कितना कठिन बना हुआ है। हालांकि इस बाधा से कुल कितने लोग प्रभावित होंगे, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक बयानों में स्पष्ट नहीं किया गया।\n\nअमेज़न बेसिन की ज्यादातर आबादी शहरों में रहती है, लेकिन मूल निवासियों के कई परिवार घने जंगलों में छोटे-छोटे गांवों में बसे हुए हैं। इनमें से कई बस्तियां निकटतम शहरी क्षेत्र से नाव द्वारा कई दिनों की दूरी पर हैं। जावारी वैली पूरे क्षेत्र का सबसे कटा हुआ और दुर्गम हिस्सा माना जाता है। यहां ऐसी जनजातियां भी रहती हैं जो बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग जीवन बिताती हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस घाटी की कुल आबादी लगभग 6,300 आंकी गई है।\n\nमतदान का कड़वा इतिहास और 2012 की त्रासदी\nइस पूरे इलाके में मतदान की सुविधा हासिल करने का इतिहास काफी दर्दनाक रहा है। वर्ष 2012 तक जावारी वैली के लिए एकमात्र मतदान केंद्र अतालाइया डो नोर्टे में हुआ करता था। उस वर्ष मेयर पद के एक उम्मीदवार ने लगभग 1,200 आदिवासी मतदाताओं को नाव के लिए पेट्रोल दिया था। लेकिन वह ईंधन वापसी के सफर के लिए नाकाफी था। नतीजे के तौर पर लोग बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता के अभाव में हफ्तों तक नदी के किनारों पर फंसे रह गए थे।\n\nउस दुर्भाग्यपूर्ण यात्रा के गंभीर स्वास्थ्य परिणाम सामने आए थे। नदी किनारे फंसे लोगों के बीच रोटावायरस का घातक प्रकोप फैल गया। इस बीमारी से कानामारी समुदाय के पांच नवजात बच्चों की जान चली गई थी और लगभग 100 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। इस त्रासद घटना ने आगे चलकर मतदान व्यवस्था की रूपरेखा को हमेशा के लिए बदल दिया और दूरदराज की बस्तियों के नजदीक ही पोलिंग बूथ बनाने की मांग को मजबूती दी।\n\nसुधार की पहल और ब्रूनो परेरा का योगदान\nवर्ष 2014 में जावारी वैली इंडिजिनस टेरिटरी के गांवों में पहली बार स्थानीय स्तर पर वोटिंग सेंटर स्थापित किए गए थे। यह बदलाव ब्रूनो परेरा के प्रयासों का परिणाम था। परेरा मूल निवासियों के मामलों के विशेषज्ञ थे, जिनकी वर्ष 2022 में हत्या हो गई थी। वे उस समय ब्रिटिश पत्रकार डोम फिलिप्स के साथ जावारी वैली में एक असाइनमेंट पर थे। अपने कार्यकाल के दौरान परेरा ब्राजील की आदिवासी मामलों की एजेंसी के स्थानीय कार्यालय का नेतृत्व कर रहे थे।\n\nपरेरा ने उस संकट के दौरान लोगों तक भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने क्वारंटीन नियमों का पालन कराया ताकि बीमारी दूरदराज के गांवों तक न फैले। बाद में परेरा और स्थानीय आदिवासी नेताओं ने मिलकर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को नदी मार्ग से दूर-दराज के गांवों तक सुरक्षित पहुंचाने की योजना तैयार की थी।\n\nसंविधान प्रदत्त अधिकार और चुनावी दांव\nअमेज़ोनास चुनावी अदालत, ब्राजील की सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट और राष्ट्रीय आदिवासी एजेंसी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मारुबो ने जोर देकर कहा कि संविधान हर नागरिक को वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार की रक्षा जमीनी स्तर पर नहीं हो पा रही है क्योंकि प्रशासन की जिम्मेदारी सभी के लिए बिना किसी रुकावट के लॉजिस्टिक्स का प्रबंध करना है।\n\nयह पूरा विवाद ऐसे समय में गहराया है जब चुनाव प्रचार में पर्यावरण संरक्षण और वर्षावनों की कटाई का मुद्दा केंद्र में है। पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो के कार्यकाल में अमेज़न के जंगलों की कटाई में 60 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके विपरीत लूला की मौजूदा सरकार ने पिछले सप्ताह अमेज़न में वनों की कटाई की दर अब तक के सबसे निचले स्तर पर आने की घोषणा की थी। अमेज़ोनास में स्थानीय नेताओं का मानना है कि परिवहन योजना ही तय करेगी कि सुदूर जंगलों में रहने वाले समुदायों की आवाज इस चुनाव में दर्ज हो पाती है या नहीं।\n\nइसका आप पर असर\nब्राजील के अमेज़न वर्षावन में परिवहन की कमी का सीधा असर सुदूर आदिवासी बस्तियों के लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व पर पड़ रहा है।\n\n• मतदान से वंचित होना: सैकड़ों मूल निवासी मतदाता नदी मार्ग से कई दिनों की दूरी के कारण वोट डालने से चूक सकते हैं। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।\n• सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स: नदियों में पानी का स्तर घटने से नावों का सफर जोखिम भरा और बेहद धीमा हो गया है। स्थानीय लोगों को भोजन और ईंधन की कमी का सामना करना पड़ सकता है।\n• पर्यावरण नीतियों पर असर: अमेज़न क्षेत्र के वोट संरक्षण नीतियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। सुदूर मतदाताओं की गैरहाजिरी से चुनाव नतीजों का संतुलन बदल सकता है।\n• संविधान प्रदत्त अधिकारों का हनन: बुनियादी परिवहन न मिलने से नागरिकों के मताधिकार की रक्षा करने में प्रशासन विफल साबित हो रहा है। इसके चलते स्थानीय समुदाय भविष्य में कानूनी और मानवाधिकार मंचों पर अपनी आवाज उठा सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nअमेज़न के जावारी वैली में यह चुनावी संकट कई भौगोलिक, मौसमी और प्रशासनिक कारणों के एक साथ सामने आने से पैदा हुआ है।\n\n• नदियों का गिरता जलस्तर: शुष्क मौसम के चलते नदियों में पानी बहुत कम हो गया है, जिससे नावें सामान्य गति से नहीं चल पा रही हैं। इस प्राकृतिक स्थिति ने पहले से कठिन 895 किलोमीटर तक के लंबे नदी सफर को और भी ज्यादा धीमा कर दिया है।\n• प्रशासनिक देरी और तालमेल की कमी: चुनाव अधिकारियों ने इस बार स्थानीय आदिवासी संगठनों से समय रहते संपर्क नहीं किया। इसके बाद जब 13 अक्टूबर को मदद की गुहार लगाई गई, तो अदालत ने समय की कमी बताते हुए उसे खारिज कर दिया।\n• संसाधनों का गंभीर अभाव: दुर्गम इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें पहुंचाने के लिए सैन्य विमानों की जरूरत पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन के पास इतने बड़े पैमाने पर नाव और ईंधन का तुरंत बंदोबस्त करने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं।\n• अतीत की त्रासदियों का डर: वर्ष 2012 में बिना समुचित व्यवस्था के वोट डालने गए लोगों के बीच रोटावायरस फैलने से 5 बच्चों की मौत हो गई थी। इसलिए समुदाय बिना पुख्ता सरकारी इंतज़ाम के जोखिम भरी यात्रा करने से बच रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जावारी वैली के मतदाताओं के लिए मुख्य समस्या क्या है?\nसूखे मौसम में नदियों का जलस्तर कम होने और प्रशासन द्वारा नावों की व्यवस्था न किए जाने से कई मतदाता पोलिंग बूथ नहीं पहुंच पा रहे हैं।\n\n2. अमेज़ोनास चुनाव अदालत ने याचिका क्यों खारिज की?\nअदालत ने कहा कि याचिका बहुत देर से आई और लंबी दूरी तथा कम पानी के कारण इतने कम समय में नावें जुटाना संभव नहीं था।\n\n3. इस रनऑफ चुनाव में किन प्रमुख नेताओं के बीच मुकाबला है?\nअमेज़ोनास में राष्ट्रपति पद के लिए मुख्य मुकाबला लूला डा सिल्वा और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो के बीच है।\n\n4. मतदान केंद्र मतदाताओं से कितनी दूरी पर स्थित हैं?\nकुछ मतदाता अपने मतदान केंद्रों से करीब 895 किलोमीटर दूर रहते हैं, जहां पहुंचने में नाव से 3 से 5 दिन लगते हैं।\n\n5. वर्ष 2012 के चुनाव में कौन सी त्रासदी हुई थी?\nनाव का ईंधन खत्म होने से नदी किनारे फंसे मतदाताओं में रोटावायरस फैल गया था, जिससे पांच बच्चों की जान चली गई थी।\n\n6. जावारी वैली में पहली बार स्थानीय पोलिंग केंद्र कब बने थे?\nवर्ष 2014 में ब्रूनो परेरा और स्थानीय आदिवासी नेताओं के प्रयासों से जावारी वैली के गांवों में पहली बार वोटिंग सेंटर बने थे।",
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  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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