बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव से पहले ईरान पर हमले की बनाई थी योजना, अमेरिकी दखल से टला प्लान इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की रूपरेखा तैयार की थी, जिसे अमेरिकी हस्तक्षेप और सैन्य अधिकारियों के विरोध के बाद रोक दिया गया। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने देश में होने वाले चुनावों से ठीक पहले ईरान के विरुद्ध एक बड़े सैन्य अभियान को अंजाम देने की पूरी तैयारी कर ली थी। मीडिया में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस गुप्त योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय और मोसाद प्रमुख रोमन गोफ़मैन के बीच रूपरेखा तैयार की गई थी। हालांकि, इस संवेदनशील ऑपरेशन की भनक लगते ही अमेरिका ने कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप किया और इसे आगे बढ़ने से रोकने के प्रयास किए। इस पूरी योजना का मकसद चुनाव से पहले ईरान के खिलाफ कड़ा संदेश देना था, लेकिन देश के भीतर और बाहर से हुए विरोध के कारण यह योजना धरी की धरी रह गई। सुरक्षा अधिकारियों और नेतन्याहू में तीखा विरोध योजना की भनक लगते ही इज़राइल की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारियों ने बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख की इस पहल का खुलकर विरोध करना शुरू कर दिया था। इन अधिकारियों को इस बात का गहरा डर सता रहा था कि इस तरह के आक्रामक कदम से ईरान के साथ चल रहा तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच सकता है और देश में निर्धारित चुनाव प्रक्रिया भी गंभीर रूप से बाधित हो सकती है। सुरक्षा हलकों की इन तमाम चेतावनियों और आपत्तियों के बावजूद, शुरुआती दौर में ऑपरेशन की तैयारियां चुपचाप जारी रखी गईं, जिससे राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच दूरियां काफी बढ़ गईं। अमेरिकी दखल और सैन्य सेंसरशिप का पेंच चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस गोपनीय ऑपरेशन की तैयारियों के दौरान एक इज़राइली सुरक्षा कर्मी द्वारा जल्दबाजी में उठाए गए कदम के कारण अमेरिका को इसकी आधिकारिक जानकारी मिल गई। इसके तुरंत बाद अमेरिका ने सक्रिय होकर इस खतरनाक ऑपरेशन को रोकने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह सारी जानकारी इज़राइली सैन्य सेंसरशिप के दायरे में रहकर ही प्रसारित की गई थी। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने उसी समय साफ कर दिया था कि चुनावों से पहले ईरान पर हमला करना उनके किसी भी एजेंडे में शामिल नहीं था। सेना प्रमुख एयाल ज़मीर के साथ हुआ था बड़ा टकराव घटनाक्रम के दौरान 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ एयाल ज़मीर के बीच एक अभूतपूर्व टकराव की खबरें सामने आईं। रक्षा अधिकारियों का मानना था कि इस प्रकार का कदम ईरान के साथ सीधा सैन्य संघर्ष पैदा कर सकता है। अज्ञात सूत्रों के हवाले से बताया गया कि एयाल ज़मीर ने इस तरह के किसी भी निर्देश का पुरजोर विरोध किया और इस पर व्यापक चर्चा की मांग उठाई। उन्होंने बेंजामिन नेतन्याहू से यह भी आग्रह किया कि वे इस ऑपरेशन के लिए कानूनी स्वीकृति की पुष्टि करने वाले आधिकारिक और हस्ताक्षरित दस्तावेज उपलब्ध कराएं, जिससे सेना की स्थिति स्पष्ट हो सके। नेतन्याहू ने मतभेदों की खबरों को नकारा इन खबरों के सामने आने के उसी रात चैनल 14 को दिए गए एक इंटरव्यू में, बेंजामिन नेतन्याहू ने एयाल ज़मीर के साथ किसी भी तरह के विवाद या झगड़े की बात को पूरी तरह बकवास करार दिया। हालांकि, उसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने हाल ही में आईडीएफ और मोसाद को ईरानी सत्ता को उखाड़ फेंकने का निर्देश दिया था, हालांकि इसे रिपोर्ट में बताए गए विशेष सैन्य निर्देश से सीधे तौर पर नहीं जोड़ा गया। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का खुलासा इसके अगले दिन यानी 26 अक्टूबर को द न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया कि बेंजामिन नेतन्याहू पिछले कई हफ्तों से ईरान पर एक नए हवाई हमले की योजना पर काम कर रहे थे, लेकिन एयाल ज़मीर ने ऐन वक्त पर इसे रोक दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना प्रमुख को इस बात की कोई तत्काल आवश्यकता नजर नहीं आई कि चुनाव से ठीक पहले ऐसा कोई जोखिम उठाया जाए। एयाल ज़मीर को इस बात की चिंता थी कि इस तरह के अलग-थलग ऑपरेशन से ईरान बुरी तरह भड़क सकता है और इज़राइल की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अन्य घटनाक्रमों के बीच, पोलैंड के क्राको में हाल ही में हुई एक गोलीबारी की घटना में पांच लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे, जिसके बाद संदिग्ध हमलावर को गिरफ्तार कर लिया गया। इसका आप पर असर इस घटनाक्रम का सीधा असर भू-राजनीतिक स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। • भारत में: मध्य पूर्व में अचानक तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों पर असर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। कच्चे तेल के दाम बदलने से घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है। • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर: इज़राइल और ईरान के बीच संभावित संघर्ष टलने से फिलहाल वैश्विक स्तर पर बड़े युद्ध का खतरा टल गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में बनी अनिश्चितता का माहौल कुछ हद तक नियंत्रित हुआ है। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा घटनाक्रम इज़राइल में आगामी चुनावों और ईरान के साथ लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक तनाव के कारण उपजा था। • राजनीतिक दबाव: इज़राइली प्रधानमंत्री चुनावों से ठीक पहले अपनी सुरक्षा नीति को कड़ा करना चाहते थे ताकि राजनीतिक बढ़त हासिल की जा सके। • सैन्य चिंताएं: आईडीएफ चीफ और सुरक्षा अधिकारियों का मानना था कि इस समय कोई भी आक्रामक कदम देश को अनचाहे युद्ध में धकेल सकता है। • अमेरिकी हस्तक्षेप: योजना की भनक अमेरिकी प्रशासन को लगने के बाद कूटनीतिक दबाव बनाया गया, जिससे इस कार्रवाई पर रोक लग गई। सवाल-जवाब 1. बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ किस ऑपरेशन की योजना बनाई थी? बेंजामिन नेतन्याहू ने इज़राइली चुनावों से ठीक पहले ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य अभियान की योजना बनाई थी। 2. इस ऑपरेशन की योजना में कौन-कौन शामिल था? इस योजना में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद प्रमुख रोमन गोफ़मैन शामिल थे। 3. इस ऑपरेशन को किसने रोका? इस ऑपरेशन को अमेरिकी हस्तक्षेप और इज़राइली सैन्य अधिकारियों के भारी विरोध के कारण रोका गया। 4. आईडीएफ चीफ एयाल ज़मीर ने इसका विरोध क्यों किया? एयाल ज़मीर को डर था कि इस कदम से ईरान के साथ बड़ा टकराव शुरू हो सकता है और चुनाव प्रक्रिया बाधित हो सकती है। 5. प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी? प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावों से पहले ईरान पर हमला करना उनके एजेंडे में नहीं था। https://trendkia.com/world/benjamin-netanyahu-ne-chunava-se-pahale-iran-para-hamale-ki-banai-thi-yojana-us-dakhala-se-tala-plan-57657 TrendKia — Har trend, sabse pehle.