# बिश्केक के शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन में आमने-सामने होंगे नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ, क्या होगी कोई द्विपक्षीय बातचीत

> किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है। इस उच्च स्तरीय मंच पर दोनों नेताओं के बीच किसी आधिकारिक बैठक की संभावना नहीं है, लेकिन अनौपचारिक मेलजोल और प्रोटोकॉल के तहत होने वाली मुलाकातों पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-08-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/bishkek-ke-shanghai-sahyog-sammelan-mein-aamne-samne-honge-narendra-modi-aur-shehbaz-sharif-kya-hogi-koi-dwipakshiya-baatcheet-25250 · **Language:** Hindi
**Tags:** शंघाई सहयोग संगठन, नरेंद्र मोदी, शहबाज शरीफ, बिश्केक शिखर सम्मेलन, भारत पाकिस्तान कूटनीति

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन का शिखर सम्मेलन प्रारंभ हो चुका है, जहां दुनिया भर के शीर्ष राजनेता एक साझा मंच पर एकत्र हुए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान विभिन्न पक्षों के बीच द्विपक्षीय बैठकों और कूटनीतिक वार्ताओं का दौर भी तेजी से चल रहा है। इस सम्मेलन के केंद्र में एक बेहद संवेदनशील पहलू यह है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक ही समय पर एक ही शहर और एक ही आयोजन स्थल पर मौजूद हैं। शहबाज शरीफ अपने मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ मंत्रियों के भारी-भरकम दल के साथ इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे हैं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी पहले से ही वहां उपस्थित रहकर लगातार वैश्विक नेताओं के साथ रणनीतिक चर्चाएं कर रहे हैं। इन दोनों प्रमुख नेताओं की इस सह-उपस्थिति ने इस भू-राजनीतिक आयोजन की उत्सुकता को और अधिक बढ़ा दिया है।

## प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बिश्केक में कूटनीतिक एजेंडा
शंघाई सहयोग संगठन के मुख्य कार्यक्रमों से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शेड्यूल बेहद व्यस्त बना हुआ है। बिश्केक की धरती पर कदम रखते ही उन्होंने भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं को गति प्रदान करते हुए कई महत्वपूर्ण नेताओं के साथ संवाद स्थापित किया है। आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान के साथ हुई उनकी बैठक को बेहद खास माना जा रहा है, जिसमें दोनों देशों ने रक्षा व्यापार, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, दवा उद्योग और शिक्षा के मोर्चों पर आपसी सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अत्यंत सकारात्मक बताया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के माहौल के बीच प्रधानमंत्री ने ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ भी सीधी बातचीत की है। फरवरी महीने में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ उठाए गए सैन्य कदमों के बाद दोनों शीर्ष नेताओं की यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात है। यद्यपि भारत इस पूरे मध्य पूर्व संघर्ष में तटस्थ रुख का पालन कर रहा है, फिर भी ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति तथा खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों एवं नाविकों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह संवाद अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। इसके अलावा, किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ भी प्रधानमंत्री की उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं की रूपरेखा तैयार की गई है।

## पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियां और प्राथमिकताएं
दूसरी तरफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपने देश के विदेश मंत्री इशहाक डार, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और वाणिज्य मंत्री जाम कमाल खान जैसे प्रमुख चेहरों के साथ तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर किर्गिस्तान में डटे हुए हैं। शहबाज शरीफ यहां केवल शंघाई सहयोग संगठन की काउंसिल ऑफ हेड ऑफ स्टेट्स की बैठक में भाग लेने ही नहीं आए हैं, बल्कि आने वाले वर्षों यानी 2026 से 2027 के अंतराल के लिए पाकिस्तान इस संगठन की अध्यक्षता भी संभालने जा रहा है। अपने इस प्रवास के दौरान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री किर्गिज राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय चर्चा करने के साथ-साथ वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शिरकत कर रहे हैं। उनका यह व्यापक दौरा घरेलू राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति दर्ज कराने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

## क्या होगी दोनों नेताओं के बीच किसी प्रकार की वार्ता
इस पूरे आयोजन का सबसे पेचीदा और बहुप्रतीक्षित प्रश्न यह है कि जब भारत और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री एक ही छत के नीचे मौजूद हैं, तो क्या उनके बीच संवाद का कोई अवसर बन पाएगा। इस सवाल का स्पष्ट उत्तर तस्वीरों के समीकरण और कूटनीतिक प्रोटोकॉल के दायरे में छिपा हुआ है। भारत की तरफ से यह साफ कर दिया गया है कि शहबाज शरीफ के साथ किसी भी प्रकार की आधिकारिक या संरचित द्विपक्षीय बैठक का कोई प्रस्ताव या योजना नहीं है। नई दिल्ली का आधिकारिक रुख आज भी पूरी तरह अडिग है कि जब तक पाकिस्तान अपनी सीमा पार से संचालित होने वाली आतंकवादी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम नहीं कसता, तब तक किसी भी मेज पर बैठकर बातचीत शुरू नहीं की जा सकती। हालांकि, शंघाई सहयोग संगठन जैसे बहुपक्षीय मंचों पर जहां चीन, रूस, भारत, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस सहित दस सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक ही हॉल के भीतर बैठते हैं, वहां एक-दूसरे के आमने-सामने आना अनिवार्य हो जाता है। सामूहिक समूह फोटोग्राफी और आधिकारिक रात्रिभोज के दौरान दोनों नेताओं के बीच शिष्टाचार के नाते एक औपचारिक संपर्क होने की गुंजाइश से इंकार नहीं किया जा सकता है। विश्लेषकों की निगाहें इस बात पर भी टिकी रहेंगी कि जब दोनों नेता एक-दूसरे के करीब से गुजरेंगे, तो उनकी देहभाषा यानी बॉडी लैंग्वेज कैसी रहती है और क्या वे आपसी शिष्टाचार का परिचय देते हैं या पूरी तरह बेरुखी दिखाते हैं।

## रणनीतिक मजबूरियां और भारत का कड़ा रुख
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की यह पूरी कवायद इस बात पर केंद्रित हो सकती है कि वे इस बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत का संदेश अपने देश की जनता तक पहुंचाकर घरेलू राजनीतिक मोर्चे पर बढ़त हासिल कर सकें। इस समय पाकिस्तान गंभीर आर्थिक बदहाली से जूझ रहा है और अपनी आगामी अध्यक्षता के जरिए वैश्विक सुर्खियों में बने रहने का प्रयास कर रहा है। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर बेहद स्पष्ट नजर आ रहा है। वे आर्मेनिया, ईरान और रूस जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ वैश्विक भू-राजनीति और आर्थिक सहयोग के मुद्दों पर खुलकर संवाद कर रहे हैं। भारत ने अपने आचरण से यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि बहुपक्षीय मंचों का उपयोग देश के दीर्घकालिक राष्ट्रीय और रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए, न कि पुराने द्विपक्षीय विवादों में उलझने के लिए। बिश्केक के इस कूटनीतिक मंच पर जहां एक तरफ भारत का बढ़ता वैश्विक प्रभाव साफ झलक रहा है, वहीं पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने मीडिया के कैमरों को पूरी तरह सतर्क कर दिया है। भले ही किसी औपचारिक द्विपक्षीय समझौते की उम्मीद शून्य हो, लेकिन इस सम्मेलन के गलियारों से बाहर आने वाली छोटी-छोटी तस्वीरें और दृश्य आने वाले दिनों में दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों की नई दिशा तय करेंगे।

## इसका आप पर असर
शंघाई सहयोग संगठन के इस सम्मेलन का सीधा असर क्षेत्रीय कूटनीति और द्विपक्षीय संबंधों की दिशा पर पड़ता है।

- **भारत में:** नागरिकों के लिए यह इस बात का संदेश है कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर अपने कड़े रुख से पीछे नहीं हटेगी। देश की विदेश नीति क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए कूटनीतिक मोर्चे पर मजबूत सहयोग तलाश रही है।
- **अंतरराष्ट्रीय स्तर पर:** इस सम्मेलन से पश्चिम एशिया और मध्य एशिया के देशों के साथ ऊर्जा सुरक्षा तथा आर्थिक साझेदारी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। वैश्विक निवेशकों और कूटनीतिक विश्लेषकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्षेत्रीय महाशक्तियां आपसी तनावों के बीच कैसे तालमेल बिठाती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. शंघाई सहयोग संगठन का यह शिखर सम्मेलन कहां आयोजित किया जा रहा है?
यह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया जा रहा है।

### 2. क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शहबाज शरीफ के बीच कोई औपचारिक बैठक तय है?
भारत की ओर से शहबाज शरीफ के साथ किसी भी आधिकारिक या संरचित द्विपक्षीय बैठक का कोई कार्यक्रम नहीं है।

### 3. पाकिस्तान कौन से वर्ष के लिए इस संगठन की अध्यक्षता संभालने जा रहा है?
पाकिस्तान वर्ष 2026 से 2027 के अंतराल के लिए इस संगठन की अध्यक्षता संभालने जा रहा है।

### 4. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिश्केक में किन प्रमुख नेताओं से मुलाकात की है?
प्रधानमंत्री मोदी ने आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से मुलाकात की है।

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