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  "title": "बिश्केक एससीओ शिखर सम्मेलन: आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख और द्विपक्षीय बैठकों का दौर",
  "summary": "किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आह्वान किया और वैश्विक नेताओं से कई अहम मुलाकातें कीं।",
  "content": "किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के 26वें वार्षिक शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस उच्चस्तरीय वैश्विक मंच पर भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, जिनके साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर भी इस महत्वपूर्ण यात्रा में शामिल रहे। सम्मेलन की शुरुआत के साथ ही कूटनीतिक गतिविधियों का दौर तेजी से आगे बढ़ा और विभिन्न देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच कई अनौपचारिक एवं औपचारिक बैठकें देखने को मिलीं।\n\nविदेशी समकक्षों के साथ कूटनीतिक मुलाकातें\nशिखर सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बातचीत की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों के साथ हुई अपनी अनौपचारिक मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं। इन तस्वीरों में रूसी विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ उनकी बातचीत के दृश्य शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से भी मुलाकात की और इस दौरान दोनों पक्षों के बीच सकारात्मक चर्चा हुई। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से हुई उनकी मुलाकात भी कूटनीतिक हलकों में खासी चर्चा का विषय रही।\n\nएससीओ के 25 वर्ष और मुख्य थीम\nयह विशेष सम्मेलन शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना के पच्चीस वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित किया गया। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय स्थायी शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना निर्धारित किया गया था। इस वैश्विक आयोजन में दुनिया के कई बड़े नेताओं ने हिस्सा लिया, जिनमें प्रमुख रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शामिल रहे। सम्मेलन के दौरान इन तीनों नेताओं की आपसी उपस्थिति और उनके बीच हुई द्विपक्षीय बैठकों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।\n\nआतंकवाद के मुद्दे पर भारत का स्पष्ट संदेश\nशिखर सम्मेलन के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद की वैश्विक समस्या पर बेहद कड़ा रुख अपनाया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति के बीच उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस गंभीर खतरे से निपटने के दौरान किसी भी प्रकार का दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने आतंकवाद के पूरे तंत्र को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने की जोरदार वकालत की, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nशिखर सम्मेलन में लिए गए निर्णयों और वैश्विक नेताओं के बीच हुई वार्ताओं का असर क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा नीतियों पर सीधा पड़ता है।\n\n• भारत में: देश की विदेश नीति और आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख से क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीतियों को मजबूती मिलती है, जिसका असर घरेलू सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर दिखाई देता है।\n• अंतरराष्ट्रीय स्तर पर: बिश्केक में हुई इन बैठकों से मध्य एशिया और यूरेशियाई देशों के साथ व्यापारिक तथा रणनीतिक साझेदारी के नए रास्ते खुलते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एससीओ शिखर सम्मेलन 2026 कहाँ आयोजित किया गया?\nयह शिखर सम्मेलन किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित किया गया।\n\n2. भारतीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किसने किया?\nभारतीय प्रतिनिधिमंडल का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया।\n\n3. इस सम्मेलन का मुख्य विषय क्या था?\nसम्मेलन का थीम स्थायी शांति, विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना रखा गया था।\n\n4. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने किन प्रमुख नेताओं से मुलाकात की?\nउन्होंने रूस, ईरान, ताजिकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों के साथ बैठकें कीं।\n\n5. प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के बारे में क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे पर कोई दोहरा रवैया नहीं होना चाहिए और इसके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त किया जाना चाहिए।",
  "url": "https://trendkia.com/world/bishkek-sco-shikhar-sammelan-atankwad-aur-dvipakshiya-baithak-25842",
  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-09-01",
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    "एससीओ समिट 2026",
    "नरेंद्र मोदी",
    "एस जयशंकर",
    "बिश्केक शिखर सम्मेलन",
    "शंघाई सहयोग संगठन"
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  "site": "TrendKia"
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