# बुर्किना फासो में मृत्युदंड की वापसी और ब्यूटी पेजेंट पर प्रतिबंध, सैन्य शासन के सख्त फैसलों से मची हलचल

> बुर्किना फासो की अंतरिम संसद ने आतंकवाद और देशद्रोह जैसे मामलों में मौत की सजा बहाल कर दी है, साथ ही देश भर में सभी ब्यूटी कॉन्टेस्ट पर रोक लगा दी है।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-10-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/burkina-faso-brings-back-death-penalty-and-bans-beauty-pageants-under-military-rule-51448 · **Language:** Hindi
**Tags:** बुर्किना फासो, मृत्युदंड, ब्यूटी पेजेंट, कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे, अपराधिक कानून, हाकिली मूसो

बुर्किना फासो में कानूनी और सामाजिक व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव किए जा रहे हैं. देश की अंतरिम संसद ने हाल ही में एक नए आपराधिक कानून को अपनी मंजूरी दे दी है. इस नए प्रावधान के तहत आतंकवाद, देशद्रोह और जासूसी जैसे बेहद गंभीर मामलों में मौत की सजा दिए जाने का रास्ता साफ हो गया है. इससे पहले अफ्रीकी देश में लंबे समय से मृत्युदंड दिए जाने पर पूरी तरह रोक लगी हुई थी.

## ब्यूटी कॉन्टेस्ट पर लगी रोक
अपराध कानूनों में बदलाव के साथ ही सांस्कृतिक मोर्चे पर भी बड़े कदम उठाए गए हैं. देश के संचार, संस्कृति, कला और पर्यटन मंत्रालय ने राष्ट्र स्तर पर आयोजित होने वाले सभी स्थानीय और राष्ट्रीय ब्यूटी कॉन्टेस्ट के आयोजन पर रोक लगा दी है. अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की प्रतियोगिताएं देश की वास्तविक सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक मूल्यों और मानवीय गरिमा के साथ मेल खानी चाहिए. जब तक प्रशासन की ओर से इन आयोजनों के लिए नए और स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार नहीं किए जाते, तब तक किसी भी नए ब्यूटी पेजेंट को मंजूरी नहीं दी जाएगी.

## शिक्षा और विज्ञान को बढ़ावा
ब्यूटी पेजेंट प्रतियोगिताओं पर रोक लगाए जाने के समानांतर सरकार ने महिलाओं को विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए विशेष पहल शुरू की है. इसी कड़ी में सरकार ने 'हाकिली मूसो' नाम से एक नई राष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिता की शुरुआत की है. इस मंच के जरिए गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान के क्षेत्रों में युवा महिलाओं की प्रतिभा को सामने लाने और उन्हें प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है ताकि वे देश के विकास में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकें.

## तख्तापलट के बाद से बदलावों का दौर
सितंबर 2022 में हुए तख्तापलट के बाद सत्ता की कमान संभालने वाले कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल में बुर्किना फासो लगातार अपने कानूनी और सामाजिक ढांचे में बड़े फेरबदल कर रहा है. हालांकि, मानवाधिकार संगठनों की ओर से मृत्युदंड की दोबारा शुरुआत को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की जा रही है, लेकिन सरकार अपने फैसलों पर अडिग नजर आ रही है.

## संसद में सर्वसम्मति से मुहर
इस नए और कड़े कानून के पक्ष में संसद में मौजूद सभी 71 सांसदों ने एकमत होकर मतदान किया. इस निर्णय के साथ ही साल 2018 में मौत की सजा को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए उठाए गए ऐतिहासिक कदम को आधिकारिक रूप से पलट दिया गया है. ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो बुर्किना फासो में आखिरी बार किसी अपराधी को फांसी दिए जाने का मामला साल 1988 का है, जिसके बाद से देश में मृत्युदंड पर अमूमन विराम लगा हुआ था.

## सुरक्षा और संस्कृति को मजबूत करने की दलील
सरकार की ओर से उठाए गए इन तमाम कदमों को देश की राष्ट्रीय संस्कृति, पारंपरिक सामाजिक मूल्यों और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के प्रयासों के तौर पर देखा जा रहा है. बुर्किना फासो के न्याय मंत्री एडासो रोड्रिग बयाला ने इन फैसलों का बचाव करते हुए साफ तौर पर कहा कि देश को आतंकवाद के खतरे से प्रभावी ढंग से निपटने और राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ऐसे सख्त दंड विधानों की सख्त जरूरत है.

## इसका आप पर असर
बुर्किना फासो के इन नए और कड़े फैसलों का असर वहां के नागरिकों के दैनिक जीवन, सुरक्षा और सामाजिक आयोजनों पर सीधा पड़ेगा।

- **अंतरराष्ट्रीय स्तर पर:** मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक मंचों पर बुर्किना फासो की सैन्य सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना हो सकती है और diplomatic दबाव बढ़ सकता है।
- **स्थानीय स्तर पर:** बुर्किना फासो के नागरिकों के लिए सुरक्षा के नाम पर कड़े कानूनी प्रतिबंध लागू होंगे और सभी तरह के सौंदर्य प्रतियोगिताओं के आयोजन पर पूरी तरह रोक रहेगी।
- **महिलाओं के लिए:** विज्ञान प्रतियोगिताओं जैसे शैक्षणिक कार्यक्रमों के जरिए युवा महिलाओं को शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे।
- **कानूनी व्यवस्था में:** देश में आतंकवाद और देशद्रोह जैसे गंभीर मामलों में अब आरोपियों को मृत्युदंड का सामना करना पड़ सकता है, जिससे न्याय प्रणाली पूरी तरह बदल गई है।
- **सांस्कृतिक आयोजनों पर:** जब तक मंत्रालय की ओर से नए दिशा-निर्देश जारी नहीं होते, तब तक किसी भी सांस्कृतिक या स्थानीय ब्यूटी कॉन्टेस्ट की अनुमति नहीं दी जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
बुर्किना फासो की सैन्य सरकार द्वारा मृत्युदंड की बहाली और ब्यूटी पेजेंट पर प्रतिबंध लगाने के पीछे देश की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और सांस्कृतिक नीतियों में बदलाव की मंशा है।

- **आतंकवाद से मुकाबला:** देश में बढ़ते आतंकी खतरों और सुरक्षा चुनौतियों से सख्ती से निपटने के लिए सरकार ने कठोर दंड विधान को आवश्यक माना है।
- **सांस्कृतिक पहचान की रक्षा:** अधिकारियों का मानना है कि पश्चिमी प्रभाव वाले ब्यूटी कॉन्टेस्ट देश के पारंपरिक सामाजिक मूल्यों और मानवीय गरिमा के अनुकूल नहीं हैं।
- **राजनीतिक नेतृत्व का बदलाव:** सितंबर 2022 के तख्तापलट के बाद सत्ता में आई कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे की सरकार लगातार अपने पुराने कानूनी ढांचे को नए सिरे से परिभाषित कर रही है।
- **संसदीय समर्थन:** अंतरिम संसद के सभी 71 सांसदों ने नए आपराधिक कानून के समर्थन में मतदान किया, जिससे इस बड़े फैसले को कानूनी वैधता मिल गई।

## सवाल-जवाब

### 1. बुर्किना फासो की संसद ने कौन सा नया कानून पास किया है?
अंतरिम संसद ने नए आपराधिक कानून को मंजूरी दी है जिसके तहत आतंकवाद और देशद्रोह जैसे मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।

### 2. ब्यूटी कॉन्टेस्ट पर प्रतिबंध किसने लगाया है?
संचार, संस्कृति, कला और पर्यटन मंत्रालय ने देश भर में राष्ट्रीय और स्थानीय ब्यूटी कॉन्टेस्ट के आयोजन पर रोक लगा दी है।

### 3. हाकिली मूसो क्या है?
यह महिलाओं को शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए शुरू की गई एक राष्ट्रीय विज्ञान प्रतियोगिता है।

### 4. बुर्किना फासो में तख्तापलट कब हुआ था?
सितंबर 2022 में तख्तापलट के जरिए कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे की अगुवाई वाली सरकार सत्ता में आई थी।

### 5. संसद में नए कानून के पक्ष में कितने वोट पड़े?
नए कानून के पक्ष में सभी 71 सांसदों ने मतदान किया।

### 6. इससे पहले बुर्किना फासो में मौत की सजा कब खत्म की गई थी?
साल 2018 में मौत की सजा को खत्म करने के लिए कदम उठाया गया था।

### 7. बुर्किना फासो में आखिरी बार फांसी कब दी गई थी?
देश में आखिरी बार फांसी दिए जाने का मामला 1988 का है।

### 8. इस फैसले का बचाव किसने किया है?
बुर्किना फासो के न्याय मंत्री एडासो रोड्रिग बयाला ने इस फैसले का बचाव किया है।

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