{
  "type": "article",
  "title": "कनाडा के स्टडी परमिट से चल रहा था लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट, इंटेलिजेंस रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े उजागर",
  "summary": "कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी की क्लासिफाइड इंटेलिजेंस रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि ट्रांसनेशनल क्राइम सिंडिकेट स्टूडेंट और वर्क परमिट के जरिए अपने नेटवर्क को कनाडा में फैला रहे हैं।",
  "content": "कनाडा में उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में जाने वाले हजारों भारतीय छात्रों की सुरक्षा और साख पर कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों के एक हालिया खुलासे से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) की एक क्लासिफाइड इंटेलिजेंस रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि भारत में जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े एक संगठित आपराधिक सिंडिकेट ने कनाडा के वीजा सिस्टम में मौजूद कमियों का फायदा उठाकर अपने नेटवर्क का विस्तार किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, स्टडी वीजा और वर्क परमिट के जरिए कनाडा पहुंचे कुछ भारतीय नागरिक रंगदारी, हिंसा और विभिन्न संगठित अपराधों में संलिप्त पाए गए हैं। इस वजह से अब कनाडाई इमिग्रेशन और सुरक्षा तंत्र की जांच का दायरा सीधे स्टूडेंट वीजा व्यवस्था तक पहुंच गया है।\n\nकनाडाई सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर स्टूडेंट और वर्क परमिट सिस्टम\nकनाडा की इमिग्रेशन व्यवस्था में अस्थायी वीजा श्रेणी का दुरुपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। CBSA की जांच में इस बात के ठोस संकेत मिले हैं कि स्टडी और वर्क परमिट लेकर आए कुछ व्यक्तियों का इस्तेमाल आपराधिक सिंडिकेट द्वारा स्थानीय स्तर पर अपनी जड़ें मजबूत करने के लिए किया जा रहा है। जांच में पाया गया कि हाल के वर्षों में कनाडा के अलग-अलग शहरों में बिश्नोई नेटवर्क से जुड़ी रंगदारी और हिंसा की घटनाओं में अचानक इजाफा हुआ है। जब कनाडाई पुलिस ने इन मामलों की तहकीकात शुरू की, तो कई संदिग्धों के बैकग्राउंड में स्टडी परमिट या वर्क परमिट का होना पाया गया। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों और इंटेलिजेंस रिपोर्ट में इस बात को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल ऐसे लोगों की संख्या कनाडा में मौजूद कुल भारतीय छात्रों के विशाल समुदाय की तुलना में बेहद छोटी है। चिंता का मुख्य कारण इन मामलों के सामने आने की तेजी और संगठित गिरोहों द्वारा अपनाई जा रही खतरनाक कार्यप्रणाली है।\n\nगोल्डी बराड़ और बिश्नोई सिंडिकेट का कनाडाई नेटवर्क मॉडल\nकनाडाई धरती पर बिश्नोई सिंडिकेट के पैर जमाने की पूरी कहानी में गोल्डी बराड़ का नाम केंद्र बिंदु के रूप में उभरता है। रिपोर्ट के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई का मुख्य सहयोगी गोल्डी बराड़ वर्ष 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा गया था। उसने ब्रिटिश कोलंबिया स्थिति थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में दाखिले के नाम पर कनाडा में प्रवेश हासिल किया था। हालांकि, जांच में यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई है कि उसने वास्तव में यूनिवर्सिटी में नियमित कक्षाओं में हिस्सा लिया था या वीजा का इस्तेमाल केवल कानूनी रूप से देश में दाखिल होने के लिए किया था। कनाडा पहुंचने के बाद उसने कथित तौर पर वहां बिश्नोई गिरोह के ऑपरेशन्स की कमान संभाल ली। वर्ष 2019 में उसने रिफ्यूजी स्टेटस के लिए भी आवेदन किया था। भारत में गोल्डी बराड़ पर मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश समेत कई संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। कनाडाई जांच एजेंसियों का मानना है कि गोल्डी बराड़ का यही तरीका आगे चलकर बिश्नोई नेटवर्क के लिए एक काम करने का मॉडल बन गया, जिसके तहत भारत से युवाओं को स्टूडेंट या टेंपरेरी वीजा पर कनाडा भेजा गया।\n\nफुट सोल्जर भर्ती और आपराधिक गतिविधियों की कार्यप्रणाली\nकनाडा में बिश्नोई गिरोह के नेटवर्क का विस्तार एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया। भारत में युवाओं की भर्ती करने के बाद उन्हें पढ़ाई या काम के बहाने टेंपरेरी वीजा पर कनाडा भेजा जाता था। वहां पहुंचने के बाद इन युवाओं को नेटवर्क के निचले स्तर पर काम करने वाले फुट सोल्जर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। गिरोह इनसे रंगदारी के कॉल करवाने, कारोबारियों को धमकाने, लक्षित स्थानों पर फायरिंग करने और आगजनी जैसी हिंसक वारदातें अंजाम दिलवाता था। इसके अलावा, अवैध हथियारों की सप्लाई और ड्रग्स की तस्करी में भी इनकी संलिप्तता के साक्ष्य मिले हैं। उदाहरण के तौर पर, एडमोंटन से सामने आए जशंदीप सिंह के मामले में उसे सिंडिकेट के निचले स्तर का फुट सोल्जर माना गया है, जिसके खिलाफ कानूनी कार्यवाही के बाद अब कनाडा से निर्वासन का आदेश जारी किया जा चुका है। ब्रिटिश कोलंबिया और एडमोंटन पुलिस की अदालती कार्यवाहियों के दौरान भी अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि पकड़ में आए कई आरोपी या तो टेंपरेरी फॉरेन वर्कर वीजा पर आए थे या स्टूडेंट परमिट पर थे।\n\n2016 से 2024 के बीच अपराधों के आंकड़ों में 8,800 फीसदी की उछाल\nइंटेलिजेंस रिपोर्ट में शामिल आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को आंकड़ों के जरिए बयां करते हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2016 से वर्ष 2024 के बीच भारतीय स्टडी परमिट पर कनाडा आए छात्रों से संबंधित आपराधिक आरोपों में 8,800 प्रतिशत का अभूतपूर्व उछाल दर्ज किया गया है। वर्ष 2019 से 2023 के बीच स्टडी परमिट धारक लगभग 4,000 भारतीय नागरिकों के खिलाफ कुल 17,929 आपराधिक आरोप दर्ज किए गए। इनमें से 4,920 आरोप गंभीर स्वरूप के या संगठित अपराध से जुड़े हुए थे। केवल वर्ष 2024 के एकल वर्ष में ही स्टडी वीजा पर आए भारतीयों के खिलाफ 13,000 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज किए गए। यद्यपि ये आंकड़े कनाडा में पढ़ रहे लाखों निर्दोष और प्रतिभावान भारतीय छात्रों की पूरी आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं करते, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों के लिए अपराध का यह तेजी से बढ़ता ग्राफ बेहद चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहा है।\n\nअदालती गवाही, सीबीएसए की कार्रवाई और इमिग्रेशन स्क्रीनिंग की कमियां\nइस पूरे घटनाक्रम ने कनाडा की इमिग्रेशन स्क्रीनिंग प्रक्रिया और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, वीजा और इमिग्रेशन चैनलों का इस्तेमाल करके किसी देश में प्रवेश करना और फिर आपराधिक गतिविधियों को संचालित करना कोई बिल्कुल नई बात नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में भारत से कनाडा जाने वाले छात्रों की संख्या में हुई भारी बढ़ोतरी के बीच इस व्यवस्था का दुरुपयोग चरम पर पहुंच गया है। स्थिति से निपटने के लिए CBSA ने रंगदारी और हिंसा से जुड़े सैकड़ों मामलों की गहन जांच शुरू की है। जांच के आधार पर कई संदिग्धों के खिलाफ रिमूवल ऑर्डर जारी किए गए हैं और अनेक विदेशी नागरिकों को कनाडा से बाहर भेजने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब वीजा बैकग्राउंड चेकिंग को और सख्त करने पर जोर दे रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: कनाडा जाने की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिवारों के लिए वीजा नियमों में सख्ती और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है।\n\nकनाडा में: वहां पढ़ रहे निर्दोष भारतीय छात्रों को स्थानीय स्तर पर बढ़ी हुई सामाजिक और प्रशासनिक जांच व सतर्कता का सामना करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कनाडा की सुरक्षा एजेंसी सीबीएसए की इंटेलिजेंस रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ है?\nरिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि लॉरेंस बिश्नोई जैसे आपराधिक सिंडिकेट स्टूडेंट वीजा और वर्क परमिट का दुरुपयोग करके कनाडा में अपने नेटवर्क और फुट सोल्जर तैयार कर रहे हैं।\n\n2. गोल्डी बराड़ कनाडा कब और किस वीजा पर गया था?\nगोल्डी बराड़ वर्ष 2017 में स्टूडेंट वीजा पर ब्रिटिश कोलंबिया की थॉम्पसन रिवर्स यूनिवर्सिटी में दाखिले के नाम पर कनाडा पहुंचा था और 2019 में रिफ्यूजी स्टेटस का दावा किया।\n\n3. 2016 से 2024 के बीच अपराधों के आंकड़ों में कितनी बढ़ोतरी देखी गई?\nइस अवधि के दौरान स्टडी परमिट पर आए भारतीय नागरिकों से जुड़े आपराधिक आरोपों में 8,800 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया।\n\n4. 2019 से 2023 के दौरान कितने छात्रों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए?\nलगभग 4,000 स्टडी परमिट धारक भारतीय नागरिकों पर 17,929 आपराधिक आरोप दर्ज किए गए, जिनमें से 4,920 आरोप गंभीर या संगठित अपराध से जुड़े थे।\n\n5. क्या कनाडा में मौजूद सभी भारतीय छात्र इन गतिविधियों में शामिल हैं?\nनहीं, इंटेलिजेंस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि आरोपी छात्र कनाडा में मौजूद कुल भारतीय छात्रों की आबादी का केवल एक छोटा सा हिस्सा हैं।\n\n6. सुरक्षा एजेंसियां और सीबीएसए इस स्थिति में क्या कार्रवाई कर रही हैं?\nसीबीएसए ने सैकड़ों एक्सटॉर्शन मामलों की जांच शुरू की है, कई संदिग्धों के खिलाफ रिमूवल आदेश जारी किए हैं और निर्वासन की प्रक्रिया तेज कर दी है।",
  "url": "https://trendkia.com/world/canada-ke-study-permit-se-chala-raha-tha-lawrence-bishnoi-syndicate-intelligence-report-men-chaunkane-vale-ankare-ujagara-14152",
  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-08-06",
  "tags": [
    "कनाडा छात्र वीजा",
    "लॉरेंस बिश्नोई",
    "गोल्डी बराड़",
    "कनाडा इमिग्रेशन",
    "सीबीएसए रिपोर्ट",
    "अवैध नेटवर्क"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}