उत्तर कोरिया को पाले में करने की होड़ में चीन और रूस, ट्रंप की बढ़ सकती हैं मुश्किलें उत्तर कोरिया को लेकर वैश्विक राजनीति में नए समीकरण बन रहे हैं। चीन और रूस किम जोंग उन के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने में जुटे हैं, जिससे डोनाल्ड ट्रंप के सामने नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। एक समय था जब उत्तर कोरिया को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूरी तरह काट दिया गया था। संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंधों की वजह से दुनिया का कोई भी देश उसके साथ खुलकर रिश्ते रखने से बचता था, लेकिन वक्त के साथ यह समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। आज हालात यह हैं कि उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन को अपने पाले में लाने के लिए चीन और रूस के बीच एक तरह की होड़ मची हुई है। प्योंगयांग के इन दो बड़े पड़ोसियों का रुख अब पूरी तरह बदल गया है और वे कूटनीतिक व आर्थिक स्तर पर उत्तर कोरिया के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इस कड़ी में हाल ही में बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े कदम उठाए गए हैं। उत्तर कोरिया को जोड़ने वाले दो बिल्कुल नए पुलों का संचालन शुरू हो चुका है। रूस की तरफ से 7 सितंबर 2026 को याकोव नोविचेंको पुल का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इसके ठीक बाद, चीन और उत्तर कोरिया के बीच यालू नदी के ऊपर बने नए पुल को भी 15 अक्टूबर को यातायात और कारोबार के लिए खोल दिया गया। ये नए पुल केवल परिवहन या व्यावसायिक आवाजाही के साधन भर नहीं हैं, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि दोनों देश प्योंगयांग के साथ अपने रिश्तों को कितनी प्राथमिकता दे रहे हैं। यह बढ़ता हुआ संपर्क ठीक ऐसे समय में सामने आया है जब रूस को यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध में उत्तर कोरिया की सीधी सैन्य सहायता मिल रही है। इसके उलट, बीजिंग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसके इस अहम पड़ोसी पर उसका रणनीतिक प्रभाव किसी भी कीमत पर कम न हो। चीन और रूस क्यों बढ़ा रहे हैं नजदीकियां रूस और चीन दोनों की सीमाएं उत्तर कोरिया से सटी हुई हैं, यही वजह है कि भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र उनके लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। हालांकि, दोनों देशों के हित और ज़रूरतें एक-दूसरे से अलग हैं। रूस के लिए इस समय उत्तर कोरिया का साथ बेहद जरूरी हो गया है क्योंकि यूक्रेन के साथ लंबे खिंचते संघर्ष में उसे प्योंगयांग से सैनिक मदद और भारी मात्रा में हथियार मिल रहे हैं। उत्तर कोरियाई सैनिकों ने युद्ध के मैदान में रूस की सैन्य क्षमता को जो संबल दिया है, उसके बदले में मॉस्को ने प्योंगयांग को हरसंभव कूटनीतिक और आर्थिक सहयोग दिया है। यह गठबंधन रूस के लिए इसलिए भी जीवनरेखा बन गया है क्योंकि युद्ध के लंबा चलने से रूसी नागरिकों पर आंतरिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और यूक्रेनी हमले अब रूसी सीमा के काफी भीतर तक होने लगे हैं। दूसरी ओर, बीजिंग की चिंताएं कुछ अलग प्रकार की हैं। चीन और उत्तर कोरिया के बीच 1200 किलोमीटर से अधिक लंबी साझा सीमा है। ऐसे में उत्तर कोरिया के भीतर होने वाला कोई भी राजनीतिक या सामाजिक घटनाक्रम सीधे तौर पर चीन के पूर्वोत्तर क्षेत्रों की सुरक्षा, स्थिरता और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, बीजिंग इस बात को लेकर भी सतर्क है कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच गहरे होते संबंध कहीं प्योंगयांग पर उसके पारंपरिक प्रभाव को कम न कर दें। इसी भू-राजनीतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए चीन ने भी उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को और प्रगाढ़ करने की नीति अपनाई है, जिसका सबसे ताजा प्रमाण इन नए पुलों का खुलना है। डोनाल्ड ट्रंप की योजनाओं पर पड़ेगा असर मास्को और बीजिंग द्वारा उत्तर कोरिया को अपने पाले में करने की इस कूटनीतिक जंग का सीधा असर अमेरिका की विदेश नीति पर पड़ रहा है। विशेष रूप से, यह घटनाक्रम अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन प्रयासों को पेचीदा बना सकता है, जिनमें वे किम जोंग उन के साथ एक बार फिर से सीधी बैठक करने की योजना बना रहे हैं। बीते अगस्त के महीने में डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से यह उम्मीद जताई थी कि उनकी किम जोंग उन से दोबारा मुलाकात होगी। हालांकि, इसके विपरीत उत्तर कोरिया की तरफ से अब तक इस तरह की किसी भी शिखर वार्ता में कोई खास दिलचस्पी दिखाए जाने के संकेत नहीं मिले हैं। प्योंगयांग के तेवर से साफ है कि रूस और चीन से मजबूत होते रिश्तों के बाद उसकी सौदेबाजी की क्षमता काफी बढ़ गई है, जिससे अमेरिकी नेतृत्व की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। इसका आप पर असर उत्तर कोरिया, रूस और चीन के बीच बढ़ रहे इस कूटनीतिक और सैन्य तालमेल का असर वैश्विक सुरक्षा और अमेरिकी कूटनीति पर सीधा पड़ रहा है। • अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में: रूस और उत्तर कोरिया के बीच गहराता सैन्य सहयोग यूक्रेन युद्ध की गतिशीलता को बदल रहा है। इससे मॉस्को को युद्ध के मैदान में अतिरिक्त बल मिल रहा है। • अमेरिका के लिए: डोनाल्ड ट्रंप की उत्तर कोरिया के साथ दोबारा सीधी बातचीत करने की कोशिशों को झटका लग सकता है। प्योंगयांग के तेवर सख्त होने से अमेरिकी राजनयिक दबाव कमजोर पड़ सकता है। • क्षेत्रीय सुरक्षा पर: चीन और उत्तर कोरिया के बीच नए पुल खुलने से दोनों देशों के बीच व्यापार और आवाजाही बढ़ेगी। इससे पूर्वोत्तर एशिया में चीन का आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव और मजबूत होगा। ऐसा क्यों हुआ रूस और चीन द्वारा उत्तर कोरिया के साथ अपने संबंधों को तेजी से मजबूत करने के पीछे उनकी अलग-अलग रणनीतिक और सुरक्षा जरूरतें हैं। • रूस की सैन्य जरूरतें: यूक्रेन के खिलाफ लंबे खिंच रहे युद्ध के कारण रूस को सैनिकों और हथियारों की भारी आवश्यकता है, जिसे उत्तर कोरिया पूरा कर रहा है। • चीन की सीमा सुरक्षा: चीन और उत्तर कोरिया के बीच 1200 किलोमीटर से लंबी सीमा है, और प्योंगयांग में होने वाली कोई भी उथल-पुथल चीन के पूर्वोत्तर हिस्से को प्रभावित कर सकती है। • प्रभाव बनाए रखने की होड़: चीन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि रूस के साथ उत्तर कोरिया के रिश्ते इतने गहरे न हो जाएं कि प्योंगयांग पर बीजिंग का पारंपरिक प्रभाव कमजोर पड़ जाए। सवाल-जवाब 1. रूस ने उत्तर कोरिया के साथ कौन सा नया पुल खोला है? रूस ने 7 सितंबर 2026 को याकोव नोविचेंको पुल का उद्घाटन किया। 2. चीन और उत्तर कोरिया के बीच नया पुल कब खुला? चीन और उत्तर कोरिया के बीच यालू नदी पर बना नया पुल 15 अक्टूबर को खोला गया। 3. रूस को उत्तर कोरिया से किस प्रकार की मदद मिल रही है? रूस को यूक्रेन के खिलाफ लड़ने के लिए उत्तर कोरिया से सैनिक और वहां बने हथियारों की मदद मिल रही है। 4. चीन और उत्तर कोरिया की सीमा की लंबाई कितनी है? चीन और उत्तर कोरिया के बीच 1200 किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा है। 5. डोनाल्ड ट्रंप ने किम जोंग उन से मुलाकात को लेकर क्या कहा था? डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में कहा था कि उनकी किम जोंग उन से दोबारा मुलाकात होगी। https://trendkia.com/world/china-aur-russia-vie-for-north-korea-complicating-donald-trump-ke-diplomatic-plans-52403 TrendKia — Har trend, sabse pehle.