# चीन की सैन्य चुनौती के बीच जापान ने टेरा बी1 इंटरसेप्टर को चुना, जानिए कैसे काम करती है एंटी-ड्रोन तकनीक

> चीन से बढ़ते सैन्य खतरे के बीच जापान ने टेरा बी1 इंटरसेप्टर ड्रोन सिस्टम का चयन किया है। जानिए क्या है सी-यूएएस तकनीक और यह दुश्मन के ड्रोन्स को कैसे ध्वस्त करती है।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-08-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/china-ki-sainya-chunauti-ke-bicha-japan-ne-terra-b1-intaraseptara-ko-chuna-janie-kaise-kama-karati-hai-enti-drona-takanika-23201 · **Language:** Hindi
**Tags:** जापान रक्षा, एंटी ड्रोन सिस्टम, टेरा बी1, चीन सैन्य खतरा, सी-यूएएस तकनीक, ड्रोन इंटरसेप्टर

पूर्वी एशिया में बढ़ते सामरिक तनाव और बीजिंग के आक्रामक रुख को देखते हुए जापानी सरकार ने अपनी सैन्य तैयारियों को नई रफ्तार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में जापान के रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत क्विजिशन, टेक्नोलॉजी एंड लॉजिस्टिक्स एजेंसी (ATLA) ने एक बड़ा रक्षा सौदा किया है। रक्षा समझौते के महज तीन महीनों के भीतर जापान ने कई दावेदार कंपनियों के प्रस्तावों की समीक्षा करने के बाद टेरा बी1 (Terra B1) इंटरसेप्टर ड्रोन सिस्टम को हरी झंडी दे दी है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी ड्रोन्स की बढ़ती भूमिका के बीच जापान का यह कदम उसकी रक्षा रणनीति में आए बुनियादी बदलाव को दर्शाता है।

## पूर्वी एशिया में बढ़ता तनाव और जापान का रक्षा कदम
जापान ने अपने हालिया डिफेंस वाइट पेपर में मानवरहित सैन्य प्रणालियों के विकास पर विशेष जोर दिया है। टोक्यो प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि भविष्य के किसी भी सैन्य टकराव में मानवरहित प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी। रक्षा श्वेत पत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अब तक का सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा करार दिया गया है। इसके अलावा बीजिंग द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से संचालित मानवरहित हथियारों और ड्रोन्स के तेजी से किए जा रहे विकास ने जापानी रक्षा रणनीतिकारों की चिंता बढ़ा दी है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक सेनाओं को अब ऐसे हथियारों को अपनाना होगा जिनका बड़े पैमाने पर कम लागत में उत्पादन संभव हो और जो दुश्मन की बदलती रणनीतियों के अनुरूप खुद को तुरंत ढाल सकें। युद्ध के मैदान के अनुभवों को त्वरित गति से अपनी हथियार प्रणालियों में शामिल करना ही रणनीतिक बढ़त दिला सकता है।

## काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) क्या है?
तकनीकी शब्दावली में एंटी-ड्रोन सिस्टम को काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) कहा जाता है। यह किसी भी राष्ट्र के हवाई सुरक्षा तंत्र का एक आधुनिक कवच होता है, जो दुश्मन के मानवरहित विमानों यानी UAV और ड्रोन्स को ट्रैक करके निष्प्रभावी बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है। चूंकि वाणिज्यिक और सैन्य ड्रोन्स आकार में काफी छोटे होते हैं, इसलिए वे पारंपरिक रडार प्रणालियों की पकड़ में आसानी से नहीं आते। इसी वजह से पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें या बड़े वायु रक्षा तंत्र इन छोटे उड़ते खतरों के खिलाफ बेअसर या अत्यधिक खर्चीले साबित होते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए एंटी-ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जाता है, जो आसमान में संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने से लेकर खतरे को नष्ट करने तक एकीकृत रूप से काम करती है।

## तीन चरणों में काम करती है एंटी-ड्रोन प्रणाली
किसी भी संदिग्ध मानवरहित विमान का मुकाबला करने के लिए आधुनिक एंटी-ड्रोन तकनीक मुख्य रूप से तीन चरणबद्ध प्रक्रियाओं पर काम करती है।

- **डिटेक्शन और ट्रैकिंग:** इस शुरुआती चरण में प्रणाली में एकीकृत उच्च क्षमता वाले रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) सेंसर, ध्वनि तरंगों को पकड़ने वाले अकाउस्टिक सेंसर तथा इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल व इन्फ्रारेड कैमरे काम में आते हैं। ये उपकरण सीमावर्ती या संवेदनशील क्षेत्रों के पास किसी भी संदिग्ध उड़ती वस्तु की तुरंत पहचान कर सुरक्षा बलों को सतर्क कर देते हैं।
- **विश्लेषण (एनालिसिस):** अलर्ट जारी होने के बाद एडवांस्ड सॉफ्टवेयर की सहायता से खतरे का सटीक विश्लेषण किया जाता है। यह सॉफ्टवेयर ड्रोन के मॉडल, उसके नियंत्रण सिग्नल्स के स्रोत और उसकी गति व दिशा का तुरंत पता लगा लेता है।
- **निष्प्रभावीकरण (न्यूट्रलाइजेशन):** खतरे की पुष्टि होते ही प्रणाली दो प्रमुख तरीकों सॉफ्ट किल अथवा हार्ड किल के जरिए ड्रोन को नष्ट या निष्क्रिय कर देती है।

## सॉफ्ट किल बनाम हार्ड किल तकनीक
दुश्मन के ड्रोन को बेअसर करने के लिए एंटी-ड्रोन प्रणालियों में दो अलग-अलग तकनीकों का उपयोग किया जाता है। सॉफ्ट किल तकनीक के तहत ड्रोन के रेडियो सिग्नल्स, कंट्रोल फ्रीक्वेंसी या GPS नेविगेशन लिंक को शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक जैमर्स की मदद से पूरी तरह बाधित कर दिया जाता है। अपने नियंत्रण केंद्र से संपर्क टूटते ही ड्रोन या तो वहीं जमीन पर गिर जाता है या फिर स्वचालित रूप से अपने उड़ान भरने के मूल स्थान की ओर लौटने पर मजबूर हो जाता है। वहीं दूसरी ओर हार्ड किल तकनीक का इस्तेमाल तब किया जाता है जब खतरा अधिक गंभीर हो और सॉफ्ट किल कारगर न हो। हार्ड किल में एंटी-ड्रोन गन, उच्च ऊर्जा वाली लेजर बीम या मिसाइल इंटरसेप्टर का प्रयोग करके दुश्मन के ड्रोन को हवा में ही सीधे निशाना बनाकर पूरी तरह नष्ट कर दिया जाता है।

## आधुनिक युद्धक रणनीतियों में क्यों जरूरी हैं एंटी-ड्रोन सिस्टम?
आधुनिक दौर में एंटी-ड्रोन प्रणालियों की अनिवार्यता कई बड़े कारणों से बढ़ गई है। पारंपरिक लड़ाकू विमानों और मिसाइलों की तुलना में ड्रोन निर्माण की लागत बहुत कम होती है, लेकिन ये छोटे ड्रोन किसी सैन्य अड्डे, पावर प्लांट या बुनियादी ढांचे पर हमला करके करोड़ों रुपये का भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा भारत जैसे देशों के सामने सीमा पार से होने वाली तस्करी और आतंकवाद की गंभीर चुनौती है, जहाँ सीमा पार से ड्रोन्स के माध्यम से हथियार, नशीले पदार्थ और गोला-बारूद भेजने की घटनाएं तेजी से सामने आई हैं। साथ ही आधुनिक युद्धों में 'लोइटरिंग म्यूनिशन' यानी सुसाइड ड्रोन्स का इस्तेमाल बढ़ा है, जो कई घंटों तक आसमान में मंडराकर सही समय पर आत्मघाती हमला करते हैं। ऐसे में 24 घंटे सक्रिय रहने वाले एंटी-ड्रोन सुरक्षा घेरे की आवश्यकता सर्वोपरि हो गई है।

## इसका आप पर असर
जापान और चीन के बीच बढ़ते तनाव तथा रक्षा ड्रोन्स के विकास का वैश्विक और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।

- **भारत में सुरक्षा प्रभाव:** सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए भारतीय सुरक्षा बल भी एंटी-ड्रोन तकनीक को तेजी से तैनात कर रहे हैं। इससे संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा और घुसपैठ पर लगाम लगेगी।
- **वैश्विक रक्षा बजट:** ड्रोन्स के बढ़ते खतरे के कारण विभिन्न देश अपने सैन्य बजट का बड़ा हिस्सा C-UAS प्रणालियों पर खर्च करेंगे। इससे आधुनिक हवाई सुरक्षा प्रणालियों की मांग में इजाफा होगा और सैन्य तैयारियों का स्तर बढ़ेगा।
- **तकनीकी विकास:** AI और स्वदेशी रक्षा निर्माण में निवेश बढ़ने से ड्रोन और एंटी-ड्रोन उद्योग में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।
- **नागरिक सुरक्षा:** महत्वपूर्ण हवाई अड्डों, ऊर्जा संयंत्रों और सार्वजनिक स्थानों पर एंटी-ड्रोन कवच स्थापित होने से अनधिकृत ड्रोन्स के खतरों से आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

## सवाल-जवाब

### 1. जापान ने किस एंटी-ड्रोन सिस्टम का चयन किया है?
जापान के रक्षा मंत्रालय के तहत ATLA ने कई कंपनियों के प्रस्तावों के मूल्यांकन के बाद टेरा बी1 (Terra B1) इंटरसेप्टर ड्रोन सिस्टम का चयन किया है।

### 2. C-UAS तकनीक का पूरा नाम और उद्देश्य क्या है?
C-UAS का पूरा नाम काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम है, जिसका मुख्य काम हवाई क्षेत्र में अवैध या दुश्मन के ड्रोन्स की पहचान करके उन्हें नष्ट करना है।

### 3. एंटी-ड्रोन सिस्टम में सॉफ्ट किल और हार्ड किल में क्या अंतर है?
सॉफ्ट किल इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए ड्रोन का संपर्क काट देता है, जबकि हार्ड किल में लेजर या मिसाइल से ड्रोन को हवा में नष्ट किया जाता है।

### 4. पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम ड्रोन्स के सामने क्यों कारगर नहीं होते?
ड्रोन्स का आकार छोटा होता है और वे रडार पर कम दिखते हैं, इसलिए पारंपरिक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें उन पर बेअसर या अत्यधिक खर्चीली साबित होती हैं।

### 5. जापान के डिफेंस वाइट पेपर में चीन को लेकर क्या कहा गया है?
वाइट पेपर में चीन की सैन्य गतिविधियों को सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा बताया गया है और बीजिंग के AI-ड्रोन विकास पर गहरी चिंता जताई गई है।

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