यूरोपीय संघ के देशों में घुसपैठ के 7 प्रमुख रास्ते और सख्त पहरेबंदी के बीच प्रवासियों का पूरा नेटवर्क अफ्रीका और एशिया से लाखों अवैध प्रवासी हर साल खतरनाक समुद्री और जमीनी मार्गों से यूरोप पहुंचते हैं। स्यूटा संकट के बाद यूरोपीय सीमा एजेंसी फ्रंटेक्स द्वारा चिन्हित सात प्रमुख रास्तों का विस्तृत विवरण और आंकड़े सामने आए हैं। यूरोप में आप्रवासन और अवैध घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में आ गया है। स्पेन के उत्तर अफ्रीकी तट पर स्थित स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में अचानक उत्पन्न हुए एक अभूतपूर्व संकट ने यूरोपीय देशों की नींद उड़ा दी है। मोरक्को की ओर से समंदर पार करके 60 हजार से भी अधिक अवैध प्रवासी स्यूटा के तटीय इलाकों में एकत्र हो गए और शहर की सीमाओं में प्रवेश कर गए। तटीय रेखा पर तैनात स्थानीय पुलिस बल इस भारी भीड़ के सामने असहाय साबित हुए, जिसके बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्पेन सरकार को आपातकालीन कदम उठाना पड़ा। स्पेन ने अपनी सेना के जवानों को समंदर पार स्यूटा की सीमाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए तैनात किया। हालांकि, यूरोपीय महाद्वीप के लिए अवैध घुसपैठ की यह समस्या नई नहीं है। प्रतिवर्ष एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के दर्जनों देशों से लाखों लोग अपना घर छोड़कर यूरोपीय संघ के समृद्ध देशों में शरण लेने की उम्मीद में निकलते हैं। यूरोपीय बॉर्डर एंड कोस्ट गार्ड एजेंसी, जिसे फ्रंटेक्स के नाम से जाना जाता है, के आंकड़ों के अनुसार प्रवासियों द्वारा यूरोप पहुंचने के लिए मुख्यतः सात प्रमुख समुद्री और जमीनी गलियारों का इस्तेमाल किया जाता है। ये रास्ते हजारों किलोमीटर लंबी भौगोलिक दूरी, दुर्गम जंगलों, कंटीली बाड़ों और जानलेवा समुद्री जलमार्गों से होकर गुजरते हैं। प्रवासियों की इस यात्रा का सबसे खौफनाक पहलू भूमध्य सागर यानी मेडिटेरेनियन सी का समुद्री विस्तार है। क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से देखा जाए तो भूमध्य सागर भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के लगभग 78 फीसदी के बराबर है। इस विशाल और अनिश्चित समंदर को अवैध प्रवासी पुरानी, जर्जर लकड़ी की नौकाओं और पतली रबर बोट्स के सहारे पार करने की जोखिम भरी कोशिश करते हैं। इन बेहद असुरक्षित अभियानों में हर साल हजारों निर्दोष लोगों की डूबने, डिहाइड्रेशन और कड़ाके की ठंड से मौत हो जाती है। इसके बावजूद गरीबी, गृहयुद्ध, राजनीतिक उत्पीड़न और बेहतर जीवन की तलाश में लाखों प्रवासी इन सात प्रमुख रास्तों से यूरोप की ओर बढ़ते रहते हैं। सेंट्रल मेडिटेरेनियन रूट: इटली और माल्टा की ओर जोखिम भरा समुद्री सफर सेंट्रल मेडिटेरेनियन रूट को दुनिया के सबसे खतरनाक और घातक समुद्री आप्रवासन मार्गों में गिना जाता है। इस मार्ग के जरिए उत्तरी अफ्रीका के लीबिया और ट्यूनीशिया जैसे ट्रांजिट देशों के समुद्री तटों से प्रवासी नावों पर सवार होकर सीधे उत्तर दिशा में स्थित इटली और माल्टा की ओर प्रस्थान करते हैं। इटली का लैम्पेडूसा द्वीप इस रूट का प्राथमिक प्रवेश बिंदु है, जो उत्तरी अफ्रीकी तटरेखा के काफी निकट स्थित है। इस रूट पर मुख्य रूप से बांग्लादेश, मिस्र और इरिट्रिया जैसे देशों के नागरिक यात्रा करते हैं। प्रवासियों को सीमा पार कराने के लिए संगठित मानव तस्करी गिरोह लीबिया और ट्यूनीशिया में सक्रिय हैं। ये गिरोह प्रवासियों से भारी रकम वसूलते हैं और उन्हें अत्यधिक भीड़भाड़ वाली, बिना इंजन या जर्जर इंजन वाली नावों, रबर बोट्स और लकड़ी की छोटी मछली पकड़ने वाली नौकाओं में ठूंस देते हैं। इस जलमार्ग पर मौजूद खतरों की सूची अत्यंत भयानक है। खुले समंदर में नाव पलटने और डूबने की घटनाएं आम हैं। इसके अलावा लंबे समय तक तेज धूप और पानी की कमी के कारण डिहाइड्रेशन, भूख और भीषण मौसम प्रवासियों की जान ले लेता है। लीबिया में ठहराव के दौरान प्रवासियों को मानवाधिकारों के गंभीर हनन, सशस्त्र उग्रवादी समूहों के शोषण, जबरन वसूली और मानव तस्करी के जाल में फंसने का अत्यधिक जोखिम रहता है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन के आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज करते हैं कि इस मार्ग पर प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी मृत अथवा लापता घोषित किए जाते हैं। ईस्टर्न मेडिटेरेनियन रूट: तुर्किये के रास्ते ग्रीस, साइप्रस और बुल्गारिया में प्रवेश ईस्टर्न मेडिटेरेनियन रूट एशिया और मध्य पूर्व के शरणार्थियों के लिए यूरोप में प्रवेश का एक पारंपरिक और बेहद व्यस्त मार्ग है। इस रास्ते का इस्तेमाल मुख्यतः अफगानिस्तान, सूडान, मिस्र और सीरिया के प्रवासी करते हैं। इस मार्ग में समुद्री और जमीनी, दोनों प्रकार के रास्ते शामिल हैं, जो तुर्किये, पूर्वी लीबिया और मिस्र से होकर गुजरते हैं। समुद्री यात्रा के अंतर्गत प्रवासी तुर्किये के पश्चिमी तटों से छोटी रबर नावों के जरिए ग्रीस के एजियन द्वीपों या साइप्रस तक पहुंचने का प्रयास करते हैं। लंबी दूरी के समुद्री अभियानों के लिए, जैसे कि पूर्वी लीबिया से ग्रीस के क्रीट द्वीप तक की यात्रा, तस्कर बड़ी पाल वाली नावों या मछली पकड़ने वाले बड़े जहाजों का सहारा लेते हैं। जमीनी मार्ग पर प्रवासी तुर्किये से सीधे बुल्गारिया की सीमा पार करते हैं या फिर तुर्किये और ग्रीस की सीमा पर बहने वाली एव्रोस नदी को तैरकर या पैदल पार करने की कोशिश करते हैं। इस रूट पर भी मानव तस्करों का विशाल सिंडिकेट काम करता है। तस्कर प्रवासियों को न केवल नाव उपलब्ध कराते हैं, बल्कि सीमावर्ती इलाकों के जंगलों में गश्त कर रहे पुलिस दस्तों से बचने के लिए गाइड की भूमिका भी निभाते हैं। भूमध्य सागर और एजियन सागर का उथल-पुथल भरा मौसम, तापमान का अत्यधिक उतार-चढ़ाव, नदी के तेज बहाव में बह जाने का डर और तस्करों की हिंसा इस मार्ग के मुख्य खतरे हैं। वेस्टर्न अफ्रीकन (अटलांटिक) रूट: कैनरी आइलैंड्स के जरिए स्पेन पहुंचने की खतरनाक कोशिश वेस्टर्न अफ्रीकन या अटलांटिक रूट पश्चिमी अफ्रीका के देशों से स्पेन पहुंचने का सबसे मुख्य समुद्री मार्ग है। इस रास्ते से यात्रा करने वाले अधिकांश प्रवासी माली, सेनेगल और गिनी के नागरिक होते हैं। ये प्रवासी अपने गृह राज्यों से निकलकर सबसे पहले मॉरिटानिया, मोरक्को, सेनेगल या गाम्बिया जैसे तटीय ट्रांजिट देशों में इकट्ठा होते हैं। इन तटों से प्रवासी अटलांटिक महासागर में स्थित स्पेन के कैनरी आइलैंड्स की ओर अपनी नावें मोड़ते हैं। इस यात्रा के लिए स्थानीय स्तर पर कायुकोस या पतेरास कही जाने वाली लंबी, लकड़ी की पारंपरिक मछली पकड़ने वाली नावों का उपयोग किया जाता है। इन नावों की निर्माण संरचना खुले महासागर की विशाल लहरों को झेलने के अनुकूल नहीं होती, फिर भी तस्कर क्षमता से कहीं अधिक लोगों को इनमें सवार कर देते हैं। मॉरिटानिया और सेनेगल में फैले संगठित नेटवर्क इस अवैध कारोबार का संचालन करते हैं। अटलांटिक महासागर की तीव्र धाराएं, अनिश्चित समुद्री तूफान और लंबी दूरी इस रास्ते को बेहद जानलेवा बना देती हैं। यदि नाव का दिशा-सूचक उपकरण खराब हो जाए या ईंधन खत्म हो जाए, तो नावें कैनरी द्वीपों से भटककर खुले महासागर में गुम हो जाती हैं, जहां सभी सवारों की भूख और प्यास से तड़पकर मौत हो जाती है। वेस्टर्न बाल्कन रूट: बाल्कन प्रायद्वीप के जंगलों और पहाड़ों से होकर जमीनी रास्ता वेस्टर्न बाल्कन रूट पूरी तरह से एक जमीनी आप्रवासन मार्ग है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तुर्किये, अफगानिस्तान और सीरिया से आने वाले प्रवासी करते हैं। इस मार्ग की विशेषता यह है कि अधिकांश प्रवासी पहले ग्रीस या बुल्गारिया में प्रवेश करते हैं और फिर वहां से शेंगेन ज़ोन के विकसित यूरोपीय देशों तक पहुंचने के लिए बाल्कन क्षेत्र के देशों का रुख करते हैं। प्रवासी जिन प्रमुख ट्रांजिट देशों से होकर पैदल या गाड़ियों में गुजरते हैं, उनमें नॉर्थ मैसिडोनिया, सर्बिया, बोस्निया और हर्जेगोविना, अल्बानिया तथा मोंटेनेग्रो शामिल हैं। इन देशों से आगे बढ़ते हुए उनका लक्ष्य हंगरी, क्रोएशिया, रोमानिया और स्लोवेनिया की सीमाओं को लांघना होता है, ताकि वे अंततः जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे पश्चिमी यूरोपीय राष्ट्रों में शरण का दावा कर सकें। सीमा पार करने के लिए प्रवासी घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी श्रृंखलाओं में मीलों पैदल चलते हैं। कई मामलों में तस्कर प्रवासियों को मालगाड़ियों, सीलबंद ट्रकों और कंटेनरों में छिपाकर ले जाते हैं। कड़ाके की ठंड, पाला, जंगलों में रास्ता भटकना, सीमा पुलिस की सख्त गश्त और बिना हवा वाले ट्रकों में दम घुटने का जोखिम इस रास्ते पर हर समय बना रहता है। वेस्टर्न मेडिटेरेनियन रूट: मोरक्को और अल्जीरिया से स्यूटा, मेलिला और स्पेन में घुसपैठ वेस्टर्न मेडिटेरेनियन रूट वही चर्चित मार्ग है जिसके माध्यम से हाल ही में मोरक्को से हजारों प्रवासियों ने स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में प्रवेश किया है। इस मार्ग पर मुख्यतः अल्जीरिया, सोमालिया और मोरक्को के नागरिक यात्रा करते हैं। उत्तर अफ्रीका के मोरक्को और अल्जीरिया इस मार्ग के प्रमुख ट्रांजिट केंद्र हैं। इस रूट के तहत प्रवासी दो तरीकों से यूरोप में दाखिल होने की कोशिश करते हैं। पहला तरीका मोरक्को या अल्जीरिया से छोटी रबर बोट्स के जरिए स्पेन के मुख्य भूभाग के दक्षिणी तटों तक समुद्री यात्रा करना है। दूसरा तरीका उत्तर अफ्रीकी मुख्य भूमि पर स्थित स्पेन के दो स्वायत्त शहरों, स्यूटा और मेलिला की सीमाओं में घुसपैठ करना है। स्यूटा और मेलिला की सीमाओं पर स्पेन ने कई मीटर ऊंची, रेजर वायर और अत्याधुनिक सेंसरों से लैस दोहरी बाड़ लगाई हुई है। तस्कर गिरोह सैकड़ों प्रवासियों के समूह बनाकर एक साथ सीमा की बाड़ पर धावा बोलने की रणनीति अपनाते हैं ताकि सुरक्षा बल उन्हें रोक न सकें। कई लोग तटीय चट्टानों के किनारे समंदर में तैरकर बाड़ को दरकिनार करने की कोशिश करते हैं। बाड़ के कटीले तारों से गंभीर चोटें लगना, सुरक्षा बलों के साथ झड़प और समंदर में डूबना इस मार्ग के सबसे बड़े खतरे हैं। ईस्टर्न बॉर्डर्स रूट: बेलारूस और रूस के घने जंगलों से यूरोपीय संघ में प्रवेश ईस्टर्न बॉर्डर्स रूट यूरोपीय संघ की पूर्वी सीमाओं से होकर गुजरने वाला एक जटिल जमीनी मार्ग है। मध्य पूर्व, अफ्रीका और एशिया के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले प्रवासी इस रास्ते का चयन करते हैं। इस मार्ग की अनूठी बात यह है कि प्रवासी सबसे पहले वैध या अवैध हवाई यात्रा के जरिए रूस या बेलारूस की राजधानी पहुंचते हैं। इसके बाद मानव तस्करी नेटवर्क उन्हें रूस और बेलारूस के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंचाते हैं। वहां से प्रवासी यूरोपीय संघ के सदस्य देशों पोलैंड, लिथुआनिया और लातविया की सीमाओं में अवैध रूप से दाखिल होने का प्रयास करते हैं। एक बार इन देशों में प्रवेश मिलने के बाद वे यूरोपीय संघ के अन्य आंतरिक देशों की ओर बढ़ जाते हैं। यह मार्ग मुख्य रूप से बेहद घने दलदली जंगलों, नदियों और सीमा पर बनी तारबंदी से होकर गुजरता है। इस इलाके में सर्दियों के दौरान तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है। भीषण ठंड से हाइपोथर्मिया होने, दलदल में फंसने, नदियों में बह जाने और सीमा पर तैनात सशस्त्र बलों की कठोर कार्रवाई के कारण यहां प्रवासियों को भारी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना सहनी पड़ती है। इंग्लिश चैनल रूट: दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग को पार कर ब्रिटेन पहुंचने का जोखिम इंग्लिश चैनल रूट यूरोप महाद्वीप से यूनाइटेड किंगडम तक पहुंचने का अंतिम और बेहद जोखिम भरा समुद्री मार्ग है। इस रास्ते पर यात्रा करने वाले अधिकांश प्रवासी इरिट्रिया, अफगानिस्तान, ईरान, सूडान और सोमालिया जैसे अस्थिर देशों से संबंध रखते हैं। ये लोग पूरे यूरोप को पार करके उत्तरी फ्रांस और बेल्जियम के तटीय इलाकों में एकत्र होते हैं। उत्तरी फ्रांस से डोवर जलडमरूमध्य और इंग्लिश चैनल को पार करके यूनाइटेड किंगडम के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों, विशेष रूप से डोवर के बंदरगाह शहर तक पहुंचने के लिए प्रवासी छोटी रबर नावों का सहारा लेते हैं। इस पूरे नेटवर्क का नियंत्रण उत्तरी फ्रांस में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों के पास है, जो नावों और जीवन रक्षक जैकेटों के बदले मोटी रकम वसूलते हैं। इंग्लिश चैनल को दुनिया के सबसे व्यस्त और व्यापारिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण समुद्री जहाजरानी मार्गों में गिना जाता है। इस संकरे जलमार्ग में हर समय विशाल मालवाहक जहाज, कंटेनर शिप और टैंकर गुजरते रहते हैं। अत्यधिक तेज समुद्री लहरों, घने कोहरे, पानी के बहुत कम तापमान और विशाल जहाजों से टकराने के डर के कारण छोटी रबर नावों के डूबने का जोखिम हमेशा अत्यधिक बना रहता है। पिछले एक दशक का वार्षिक आंकड़ा: प्रवासियों की संख्या और समुद्री हादसों में जान गंवाने वालों का रिकॉर्ड यूरोपीय सीमा एजेंसी फ्रंटेक्स और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के संयुक्त संकलित आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले एक दशक में यूरोपीय सीमाओं पर प्रवासियों का दबाव निरंतर बना हुआ है। वर्ष 2026 की शुरुआती अवधि में ही अब तक 49 हजार 786 प्रवासी यूरोप में प्रवेश कर चुके हैं, जबकि स्यूटा में हाल ही में मोरक्को की सीमा से 60 हजार से अधिक प्रवासियों का नया आगमन दर्ज किया गया है। वर्ष 2015 से लेकर 2025 तक के पिछले दस वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि हर साल औसतन 1 लाख से अधिक लोग यूरोपीय सीमाओं पर पहुंचते हैं, और हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं • वर्ष 2025: 1 लाख 54 हजार 500 प्रवासियों ने यूरोप में प्रवेश किया, जबकि 2 हजार 950 लोग समुद्री या जमीनी हादसों में मृत अथवा लापता दर्ज किए गए। • वर्ष 2024: 1 लाख 99 हजार 400 प्रवासी यूरोपीय सीमाओं तक पहुंचे, जिसमें 3 हजार 580 लोगों की मौत या लापता होने की पुष्टि हुई। • वर्ष 2023: 2 लाख 75 हजार 200 प्रवासियों का आगमन हुआ और 4 हजार 110 लोगों की यात्रा त्रासदी में बदल गई। • वर्ष 2022: 1 लाख 73 हजार 400 प्रवासियों ने दाखिला लिया, जबकि 3 हजार 017 लोग हादसों का शिकार बने। • वर्ष 2021: 1 लाख 32 हजार 800 प्रवासियों का पंजीकरण हुआ, जिसमें 3 हजार 231 लोगों की मौत या गायब होने का रिकॉर्ड बना। • वर्ष 2020: वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के बावजूद 96 हजार 800 लोग पहुंचे, और 1 हजार 881 लोगों की जान चली गई। • वर्ष 2019: 1 लाख 23 हजार 700 प्रवासियों का आगमन दर्ज किया गया, जबकि 1 हजार 510 लोग मृत या लापता घोषित हुए। • वर्ष 2018: 1 लाख 41 हजार 400 प्रवासियों ने यूरोपीय सीमाओं में प्रवेश किया, जिसमें 2 हजार 277 लोगों की मौत दर्ज की गई। • वर्ष 2017: 1 लाख 85 हजार 100 प्रवासियों का आगमन हुआ, और 3 हजार 139 लोग हादसों का शिकार हुए। • वर्ष 2016: 3 लाख 72 हजार 800 प्रवासियों ने यूरोप का रुख किया, जबकि 5 हजार 096 लोगों की दुखद मृत्यु दर्ज हुई। • वर्ष 2015: सीरियाई संकट के दौरान 10 लाख 31 हजार 700 प्रवासियों का ऐतिहासिक आगमन दर्ज हुआ था, जिसमें 3 हजार 771 लोग अपनी जान से हाथ धो बैठे थे। मानवीय संकट और सुरक्षा नीतियों के बीच झूलता यूरोप यूरोपीय संघ के देशों के सामने एक ओर मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय शरणार्थी संधियों का पालन करने की नैतिक जिम्मेदारी है, तो दूसरी ओर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और सीमाओं की अखंडता बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। स्पेन द्वारा स्यूटा में सेना की तैनाती और पोलैंड तथा ग्रीस द्वारा सीमा पर ऊंची बाड़ का निर्माण यह दर्शाता है कि यूरोपीय देश अब अनियंत्रित घुसपैठ को रोकने के लिए कठोर नीतियां अपना रहे हैं। मानव तस्करी सिंडिकेट्स का सफाया करने के लिए यूरोपीय देशों द्वारा उत्तरी अफ्रीकी और बाल्कन देशों के साथ मिलकर संयुक्त सुरक्षा अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद गरीबी, युद्ध और जलवायु परिवर्तन जैसे मूल कारणों का समाधान न होने तक एशिया और अफ्रीका से यूरोप की ओर प्रवासियों का यह अनवरत और खतरनाक प्रवाह रुकने की संभावना कम ही नजर आती है। इसका आप पर असर • वैश्विक यात्रियों और प्रवासियों के लिए: यूरोपीय संघ के देशों द्वारा सीमा सुरक्षा, वीज़ा जांच और आप्रवासन नियमों को अत्यंत सख्त किया जा रहा है, जिससे सामान्य यात्रियों को अधिक सत्यापन प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है। • अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति पर: मानव तस्करी के खिलाफ अभियानों में तेज़ी और विभिन्न राष्ट्रों के बीच द्विपक्षीय सीमा नियंत्रण समझौतों में बढ़ोतरी होगी। सवाल-जवाब 1. स्यूटा में हाल ही में क्या संकट उत्पन्न हुआ था? स्यूटा में मोरक्को से 60 हजार से अधिक अवैध प्रवासियों ने समंदर पार कर प्रवेश कर लिया था, जिससे स्थिति नियंत्रित करने के लिए स्पेन को सेना तैनात करनी पड़ी। 2. यूरोप में अवैध घुसपैठ के मुख्य रास्ते कौन से हैं? यूरोपीय सीमा एजेंसी फ्रंटेक्स के अनुसार, यूरोप में प्रवेश के सात प्रमुख रास्ते हैं: सेंट्रल मेडिटेरेनियन, ईस्टर्न मेडिटेरेनियन, वेस्टर्न अफ्रीकन (अटलांटिक), वेस्टर्न बाल्कन, वेस्टर्न मेडिटेरेनियन, ईस्टर्न बॉर्डर्स और इंग्लिश चैनल रूट। 3. भूमध्य सागर पार करने में प्रवासियों को किन खतरों का सामना करना पड़ता है? प्रवासियों को जर्जर नावों में डूबने, कड़े मौसम, डिहाइड्रेशन, भूख, मानव तस्करों के शोषण और लीबिया जैसे क्षेत्रों में हिंसक समूहों का सामना करना पड़ता है। 4. 2015 से 2026 तक यूरोप में कितने प्रवासियों ने प्रवेश किया है? 2015 के ऐतिहासिक शिखर पर 10 लाख 31 हजार 700 लोग पहुंचे थे, जबकि 2025 में 1 लाख 54 हजार 500 और 2026 में अब तक 49 हजार 786 प्रवासी पहुंचे हैं। 5. वेस्टर्न बाल्कन और ईस्टर्न बॉर्डर्स रूट्स की मुख्य विशेषताएं क्या हैं? ये दोनों मुख्यतः जमीनी मार्ग हैं, जहां प्रवासी घने जंगलों, बर्फीले पहाड़ों, नदियों और कंटीले तारों की बाड़ को पार करते हैं या ट्रकों और मालगाड़ियों में छिपकर यात्रा करते हैं। 6. मानव तस्कर इन रूट्स पर किस प्रकार काम करते हैं? तस्कर गिरोह प्रवासियों से भारी रकम लेकर असुरक्षित नावें, फर्जी दस्तावेज, जमीनी गाइड और सीमा पार कराने के लिए परिवहन वाहन उपलब्ध कराते हैं। 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