फोर्ट हुड गोलीबारी के दोषी निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड से मिलेगी मौत, सैन्य कार्रवाई का होगा लाइव प्रसारण टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर तेरह लोगों की जान लेने वाले निदाल हसन को तीन दिसंबर को फायरिंग स्क्वॉड के सामने खड़ा कर मृत्युदंड दिया जाएगा, जिसका सीधा प्रसारण करने की घोषणा की गई है। संयुक्त राज्य अमेरिका में सैन्य न्याय प्रणाली के तहत एक ऐसा कदम उठाया जा रहा है, जो आधुनिक दौर में बेहद असाधारण माना जाता है। वर्ष 2009 के दौरान टेक्सास स्थित फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर अंधाधुंध गोलियां बरसाकर 13 लोगों की जान लेने वाले पूर्व सैन्य अधिकारी निदाल मलिक हसन को सार्वजनिक रूप से मृत्युदंड देने की तैयारी की गई है। इस सजा का सीधा प्रसारण भी किया जाएगा, जिसे लेकर व्यापक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अमेरिका में इस प्रकार खुले तौर पर या कैमरे के सामने सजा देने की परिपाटी करीब एक सदी पहले बंद हो चुकी थी, जबकि वर्तमान समय में ऐसी व्यवस्थाएं केवल ईरान, उत्तर कोरिया और अफगानिस्तान में तालिबान प्रशासन जैसे बेहद सीमित स्थानों पर ही देखने को मिलती हैं। रक्षा मंत्रालय का फैसला और सजा की तारीख अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि 3 दिसंबर को निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड द्वारा गोलियों से भूनकर मौत की सजा दी जाएगी। इस सैन्य निष्पादन प्रक्रिया का सीधा प्रसारण यानी लाइवस्ट्रीम भी किया जाएगा। कानूनी तौर पर दी जाने वाली किसी आधिकारिक सजा के सीधे प्रसारण का वैश्विक स्तर पर कोई सामान्य उदाहरण नहीं मिलता है। किसी व्यक्ति की जान लिए जाने की प्रक्रिया को कैमरे में कैद कर प्रसारित करना सामान्यतः इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी और आतंकी संगठनों के प्रचार तंत्र से जुड़ा रहा है, जो अपने बंधकों की नृशंस हत्याओं को दुनिया के सामने दिखाते रहे हैं। फोर्ट हुड में हुई थी भीषण गोलीबारी इस पूरे मामले की जड़ें वर्ष 2009 की उस घातक घटना से जुड़ी हैं, जिसने पूरे अमेरिकी रक्षा तंत्र को स्तब्ध कर दिया था। मेजर निदाल मलिक हसन ने टेक्सास के फोर्ट हुड स्थित सैन्य ठिकाने पर अपनी व्यक्तिगत हैंडगन का उपयोग करते हुए अचानक गोलियां बरसानी शुरू कर दी थीं। इस भीषण हमले में 13 लोगों की जान चली गई थी, जिनमें से 12 सेवारत सैनिक थे। इसके अतिरिक्त 32 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। किसी भी अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठान के भीतर घटित होने वाली यह अब तक की सबसे घातक गोलीबारी मानी जाती है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए थे। सार्वजनिक फांसी का ऐतिहासिक संदर्भ विश्व भर में खुले तौर पर लोगों के सामने मृत्युदंड देने की प्रथा अब अत्यंत दुर्लभ हो चुकी है। मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पूर्व में ऐसे कुछ मामलों का उल्लेख किया है, जहां ईरान और सऊदी अरब में खुले मैदान में दी गई फांसी को वहां उपस्थित आम लोगों ने अपने व्यक्तिगत कैमरों में दर्ज कर लिया था। दूसरी तरफ, बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या मुकदमे के कैदियों की हत्या करके उसके वीडियो प्रसारित करने का चलन मुख्य रूप से इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी गुटों तक ही सीमित रहा है। यदि अमेरिका के इतिहास की बात करें तो अगस्त 1936 में रेनी बेथिया नामक एक युवा अश्वेत व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी, जिसे एक बुजुर्ग श्वेत महिला के साथ बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया गया था। उस ऐतिहासिक सार्वजनिक फांसी को देखने के लिए करीब 20,000 लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी। फायरिंग स्क्वॉड द्वारा सजा देने की पूरी प्रक्रिया फायरिंग स्क्वॉड के माध्यम से किसी दोषी को मृत्युदंड देने की एक सख्त और तय तकनीकी कार्यप्रणाली होती है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले कैदी को एक विशेष कुर्सी पर बैठाया जाता है और उसकी कमर तथा सिर को मजबूत चमड़े के पट्टों से कसकर बांध दिया जाता है। इसके पश्चात कैदी के सिर पर एक काला हुड डाल दिया जाता है ताकि उसका चेहरा ढंक जाए। मौके पर उपस्थित एक डॉक्टर स्टेथोस्कोप की सहायता से कैदी की छाती पर उसके दिल के सटीक स्थान की जांच करता है और ठीक उसी जगह पर एक गोलाकार सफेद कपड़ा पिन कर देता है, जो निशानेबाजों के लिए लक्ष्य का कार्य करता है। इसके बाद ठीक 20 फीट की दूरी पर बने एक घेरे में पांच प्रशिक्षित निशानेबाज अपनी पोजीशन लेते हैं। इन सभी पांच निशानेबाजों के हाथों में.30 कैलिबर की राइफलें होती हैं, जिनमें से प्रत्येक राइफल में केवल एक गोली लोड की जाती है। इस प्रक्रिया का सबसे अहम पहलू यह होता है कि पांचों में से किसी एक निशानेबाज की बंदूक में असली कारतूस के स्थान पर खाली कारतूस यानी ब्लैंक राउंड भरा जाता है। यह बात किसी भी निशानेबाज को पहले से नहीं बताई जाती कि किसकी राइफल खाली है। ऐसा मनोवैज्ञानिक संतुलन बनाए रखने के लिए किया जाता है, ताकि दस्ते के प्रत्येक सदस्य के मन में यह विश्वास बना रहे कि संभवतः घातक गोली उसके हथियार से नहीं चली थी। संयुक्त राज्य अमेरिका में वर्ष 1976 के बाद से अब तक केवल 6 दोषियों को ही फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड दिया गया है। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम अमेरिकी सैन्य न्याय और मृत्युदंड की वैश्विक बहसों पर गंभीर प्रभाव डालेगा। • सैन्य नियमों पर असर: अमेरिकी सशस्त्र बलों के भीतर कठोर सैन्य अनुशासन और जघन्य अपराधों पर त्वरित सख्त दंड की मिसाल तय होगी। आने वाले समय में सैन्य प्रतिष्ठानों की आंतरिक सुरक्षा और चरमपंथ से निपटने की नीतियों में कड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। • वैश्विक कानूनी मिसाल: मृत्युदंड के सीधे प्रसारण से अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और कानूनी मंचों पर व्यापक बहस छिड़ेगी। कई देश और नागरिक अधिकार समूह सार्वजनिक प्रसारण की नैतिकता पर सवाल खड़े कर सकते हैं। • मृत्युदंड की पद्धतियां: फायरिंग स्क्वॉड जैसी पुरानी और दुर्लभ सजा विधियों के उपयोग पर नए सिरे से कानूनी समीक्षाएं शुरू हो सकती हैं। यह कदम अन्य अमेरिकी राज्यों में लंबित मृत्युदंड के मामलों की प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकता है। • पीड़ित परिवारों की स्थिति: वर्ष 2009 के हमले में जान गंवाने वाले 12 सैनिकों सहित सभी पीड़ितों के परिवारों के लिए यह फैसला एक लंबे कानूनी इंतजार का अंत होगा। 32 घायल हुए लोगों को वर्षों बाद न्यायिक निष्पादन का अंतिम चरण देखने को मिलेगा। ऐसा क्यों हुआ यह फैसला वर्ष 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर हुए सबसे घातक आतंकी हमले के कानूनी निष्कर्ष के तौर पर सामने आया है। • हमले की भीषणता: मेजर निदाल हसन ने अपनी निजी हैंडगन से अंधाधुंध गोलीबारी कर 13 लोगों को मार डाला था और 32 को घायल किया था। मारे गए लोगों में 12 अमेरिकी सैनिक शामिल थे, जिसने इसे अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुआ सबसे खूनी हमला बना दिया। • रक्षा मंत्री का आधिकारिक आदेश: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस जघन्य सैन्य अपराध के लिए 3 दिसंबर की तारीख तय करते हुए फायरिंग स्क्वॉड द्वारा सजा देने और उसका लाइव प्रसारण करने का निर्देश जारी किया। • अत्यंत दुर्लभ मिसाल: अमेरिका में सामान्यतः 1936 के बाद से सार्वजनिक सजा बंद थी और 1976 के बाद से केवल 6 कैदियों को फायरिंग स्क्वॉड से मारा गया है, जिससे इस ऐतिहासिक फैसले का स्वरूप बेहद असामान्य बन गया है। सवाल-जवाब 1. निदाल हसन कौन है और उसने क्या अपराध किया था? निदाल मलिक हसन पूर्व सैन्य मेजर है जिसने वर्ष 2009 में टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी कर 13 लोगों की जान ली थी और 32 लोगों को घायल किया था। 2. निदाल हसन को सजा-ए-मौत कब दी जाएगी? अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार निदाल हसन को 3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वॉड द्वारा मौत की सजा दी जाएगी। 3. सजा देने की प्रक्रिया का प्रसारण कैसे किया जाएगा? इस सैन्य निष्पादन का इंटरनेट पर सीधा प्रसारण यानी लाइवस्ट्रीम किया जाएगा, जिसे पूरी दुनिया देख सकेगी। 4. फायरिंग स्क्वॉड में कितने निशानेबाज शामिल होते हैं? फायरिंग स्क्वॉड में पांच निशानेबाज शामिल होते हैं, जो 20 फीट की दूरी से .30 कैलिबर की राइफलों से निशाना साधते हैं। 5. फायरिंग स्क्वॉड की एक बंदूक में खाली कारतूस क्यों डाला जाता है? पांच में से एक बंदूक में खाली कारतूस इसलिए भरा जाता है ताकि निशानेबाजों में से किसी को भी यह निश्चित रूप से पता न चले कि घातक गोली उसी ने चलाई थी। 6. अमेरिका में आखिरी बार सार्वजनिक फांसी कब दी गई थी? अमेरिका में अगस्त 1936 में रेनी बेथिया को 20,000 लोगों की भीड़ के सामने सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी। https://trendkia.com/world/fort-hood-golibari-ke-doshi-nidal-hasan-ko-phayaringa-skvoda-se-milegi-mauta-sainya-karravai-ka-hoga-laiva-prasarana-45136 TrendKia — Har trend, sabse pehle.