फ्रांस में भड़की हिंसा के बीच अमेरिकी रुख, इमिग्रेशन नीतियों पर उठे सवाल फ्रांस के कई शहरों में महंगाई और दंगों के बाद लगे कर्फ्यू के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने वहां की इमिग्रेशन नीति की आलोचना की है, जबकि पेरिस में 2500 से अधिक उपद्रवी पकड़े जा चुके हैं। यूरोपीय देश फ्रांस में भड़की व्यापक अशांति, आगजनी और सुरक्षा संकट के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की राजधानी पेरिस की मौजूदा स्थिति और वहां की जनसांख्यिकी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस सरकार की इमिग्रेशन नीति के कारण राजधानी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और यदि समय रहते उनकी चेतावनी पर ध्यान दिया गया होता, तो देश को इस गंभीर संकट और व्यापक हिंसा का सामना नहीं करना पड़ता। इमिग्रेशन नीति और जनसांख्यिकी पर ट्रंप का कड़ा बयान वॉशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के मौजूदा हालातों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फ्रांस की इमिग्रेशन नीतियों के कारण पेरिस के सामाजिक ढांचे में अप्रत्याशित बदलाव आया है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि फ्रांस की राजधानी बहुत जल्द एक मुस्लिम शहर में तब्दील हो जाएगी, जबकि ऐसी कोई व्यवस्था कभी तय नहीं की गई थी। ट्रंप ने रेखांकित किया कि दुनिया भर से बिना रोक-टोक लोगों को अपने देश में प्रवेश की अनुमति देना एक बहुत बड़ी प्रशासनिक भूल साबित हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ अपने पुराने संवाद का हवाला देते हुए बताया कि उन्होंने कई वर्ष पहले ही उन्हें इस नीतिगत खतरे से आगाह किया था। ट्रंप ने कहा, "वह मेरे दोस्त हैं, मैंने बहुत पहले कहा था कि दुनिया भर से हर किसी को आने देकर आप बड़ी गलती कर रहे हैं।" ट्रंप के अनुसार, बड़े पैमाने पर बिना कड़े नियमों के प्रवासियों को देश में बसने देना ही आज के टकराव और अस्थिरता की मुख्य जड़ बन चुका है। पेरिस से नीस तक फैली हिंसा, कई शहरों में लगा कर्फ्यू फ्रांस में यह अशांति उस वक्त चरम पर पहुंची जब बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के ऊंचे खर्च के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिसके बाद सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और दुकानों में भारी लूटपाट की गई। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने राजधानी पेरिस के अलावा लिली और नीस जैसे प्रमुख शहरों में स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लागू कर दिया है। इसके साथ ही कई संवेदनशील इलाकों में सार्वजनिक सभाओं और लोगों के एकत्र होने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इस व्यापक उपद्रव ने देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को गंभीर चोट पहुंचाई है। स्थानीय व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हुआ है, जिससे आम जनता और व्यापारियों में सरकार की सुरक्षा व्यवस्था के प्रति भारी असंतोष फैल गया है। देश में आगामी राष्ट्रपति चुनावों से पहले सुरक्षा मोर्चे पर विफलता और जनता के इस बढ़ते गुस्से ने प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू के नेतृत्व वाली सरकार के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। गृह मंत्री के इस्तीफे की पेशकश और मैक्रों का रुख हिंसा पर काबू पाने के लिए प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कुछ विशेष और अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बेहद सीमित कर्फ्यू लगाने का निर्देश जारी किया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य दंगों और संगठित लूटपाट की वारदातों को तत्काल रोकना है। कानून व्यवस्था के इस गंभीर संकट के बीच फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। हालांकि, देश में बने आपातकालीन माहौल और पुलिस बल के सुचारू संचालन को देखते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान संकट के समय सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों का नेतृत्व स्थिर रहना बेहद अनिवार्य है। उन्होंने लॉरेंट नुनेज को पद पर बने रहने का निर्देश देते हुए यह आदेश दिया कि खुफिया तंत्र की कथित चूकों और हिंसा की पूर्व साजिश का पता लगाने में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। इसके साथ ही मैक्रों ने पुलिस और सुरक्षा बलों को भविष्य में ऐसी अराजकता रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से नई रणनीतियां जमीन पर लागू करने का आदेश दिया है। उपद्रवियों पर बड़ी कार्रवाई, ढाई हजार से अधिक गिरफ्तारियां फ्रांसीसी प्रशासन ने उपद्रव और तोड़फोड़ में शामिल तत्वों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। देश भर के अलग-अलग शहरों से पुलिस अब तक 2,500 से अधिक उपद्रवियों को हिरासत में ले चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय इनपुट के आधार पर संदिग्धों की धरपकड़ जारी है। इस बीच, हालात की समीक्षा करते हुए राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश दिया कि सार्वजनिक शांति भंग करने वालों और सरकारी या निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मैक्रों ने कहा कि जिन भी लोगों ने तोड़फोड़ और बर्बरता की है, उन्हें इस भारी विनाश की पूरी भरपाई अपनी जेब से करनी होगी। सरकार ने कानून के उल्लंघन पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाने का फैसला किया है। इसका आप पर असर फ्रांस में जारी व्यापक अशांति और सुरक्षा पाबंदियों का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों, प्रवासियों और वैश्विक आर्थिक धारणा पर पड़ रहा है। • भारतीय यात्रियों पर असर: फ्रांस की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों और छात्रों को पेरिस, लिली और नीस में स्थानीय कर्फ्यू और यात्रा परामर्श पर नजर रखनी चाहिए। संवेदनशील इलाकों में सार्वजनिक आवागमन और बाजारों पर सख्त पाबंदियां लागू हैं। • व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला: फ्रांसीसी शहरों में वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और लूटपाट से खुदरा आपूर्ति व्यवस्था बाधित हुई है। यूरोपीय बाजारों में कारोबार करने वाले निर्यातकों को अस्थायी लॉजिस्टिक्स देरी का सामना करना पड़ सकता है। • सुरक्षा जांच में सख्ती: स्थानीय प्रशासन द्वारा 2500 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी के बाद पूरे देश में पहचान पत्रों और सार्वजनिक जांच की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वहां रहने वाले विदेशी नागरिकों को हर समय वैध वीजा और पहचान दस्तावेज साथ रखने की सलाह दी गई है। • नीतिगत बहस का विस्तार: इमिग्रेशन और सीमा नियंत्रण को लेकर ट्रंप के बयानों से आगामी यूरोपीय चुनावों में सुरक्षा और प्रवासन नियमों को और कड़ा करने की मांग जोर पकड़ सकती है। इस राजनीतिक दबाव का असर भविष्य के वर्क वीजा और रेजिडेंसी नियमों पर पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ फ्रांस में भड़के हालिया दंगे और हिंसा का तात्कालिक कारण लगातार बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के ऊंचे खर्च के खिलाफ भड़का जन आक्रोश है। आर्थिक असंतोष के चलते शुरू हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में असामाजिक तत्वों के शामिल होने से स्थिति तेजी से लूटपाट और आगजनी में तब्दील हो गई। • महंगाई और जीवन स्तर का संकट: दैनिक उपयोग की वस्तुओं, ऊर्जा और आवास की बढ़ती कीमतों ने मध्यम और निम्न आय वर्ग में गहरा रोष पैदा कर दिया। इसी आर्थिक दबाव के चलते जनता सड़कों पर उतर आई थी। • खुफिया तंत्र की रणनीतिक चूक: गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संगठित उपद्रवियों की तैयारियों का समय पर सटीक आकलन न कर पाना हिंसा के बेकाबू होने का मुख्य कारण बना। गृह मंत्री द्वारा इस्तीफे की पेशकश इसी नाकामी को दर्शाती है। • इमिग्रेशन और सामाजिक ध्रुवीकरण: लंबे समय से चली आ रही इमिग्रेशन नीतियों और बड़े शहरों में जनसांख्यिकी बदलावों को लेकर राजनीतिक मतभेद पहले से मौजूद थे। अमेरिकी नेतृत्व द्वारा उठाए गए सवालों ने इस सामाजिक विभाजन को और उजागर कर दिया है। • पूर्व में हुए प्रदर्शनों का इतिहास: फ्रांस में आर्थिक नीतियों और ईंधन की कीमतों को लेकर अतीत में भी येलो वेस्ट जैसे उग्र आंदोलन हो चुके हैं। पर्याप्त निवारक सुरक्षा कदम न उठाए जाने के कारण पुराने ढर्रे पर ही यह आंदोलन भी हिंसक संघर्ष में बदल गया। सवाल-जवाब 1. डोनाल्ड ट्रंप ने पेरिस और फ्रांस की स्थिति पर क्या बयान दिया? ट्रंप ने कहा कि फ्रांस की इमिग्रेशन नीति के चलते पेरिस जल्द ही एक मुस्लिम शहर बन जाएगा, और उन्होंने बहुत पहले मैक्रों को इस बारे में आगाह किया था। 2. फ्रांस में विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की मुख्य वजह क्या थी? बढ़ती महंगाई और जीवन यापन के अत्यधिक खर्च के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे थे, जिसके बाद उपद्रव, झड़पें और लूटपाट शुरू हो गई। 3. फ्रांस के किन शहरों में कर्फ्यू और पाबंदियां लगाई गई हैं? राजधानी पेरिस, लिली, नीस और कुछ अन्य प्रमुख शहरों में स्थानीय कर्फ्यू और सभाओं पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। 4. फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के इस्तीफे पर राष्ट्रपति मैक्रों का क्या फैसला रहा? राष्ट्रपति मैक्रों ने आपात स्थिति में पुलिस नेतृत्व की निरंतरता का हवाला देते हुए नुनेज का इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया। 5. हिंसा के मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है? फ्रांसीसी पुलिस ने देश भर में उपद्रव और तोड़फोड़ के आरोप में 2,500 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। https://trendkia.com/world/france-men-bharaki-hinsa-ke-bicha-ameriki-rukha-imigreshana-nitiyon-para-uthe-savala-49646 TrendKia — Har trend, sabse pehle.