जेनेवा वार्ता में ईरान का वॉकआउट, ट्रंप की धमकी से परमाणु बातचीत संकट में स्विट्जरलैंड के जेनेवा में चल रही अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य धमकी से ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने 82 मिनट की बातचीत के बाद मीटिंग हॉल छोड़ दिया। पहले दौर में कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का सख्त रुख बातचीत के अगले दौर पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। स्विट्जरलैंड के जेनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु वार्ता अचानक गहरे संकट में आ गई। बातचीत जारी रहने के दौरान ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सैन्य हमले की धमकी दे दी, जिसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कड़ा विरोध जताते हुए करीब 82 मिनट की बातचीत के बाद मीटिंग हॉल छोड़ दिया। मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान और कतर ने ईरानी दल को रोकने की भरसक कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए। ट्रंप की धमकी और ईरान का करारा पलटवार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि अगर ईरान ने हिजबुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका पिछले हफ्ते से भी बड़ा हमला करेगा। यह पोस्ट ठीक उस वक्त आई जब जेनेवा में दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही थी, और इसने पूरे माहौल को एक झटके में बिगाड़ दिया। ईरान ने इस पर फौरन पलटवार किया। ईरान की नेशनल असेंबली के स्पीकर और वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने लिखा, "अगर अमेरिकी धमकियां असरदार होतीं, तो वॉशिंगटन आज जिस स्थिति में है, वहां नहीं पहुंचता।" उन्होंने अमेरिकी नेताओं को अपने बयानों में सावधानी बरतने की नसीहत दी और स्पष्ट किया कि चाहे कुछ भी कहा जाए, ईरान की सेना जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। 82 मिनट की बातचीत, फिर वॉकआउट ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी वार्ताकारों के सामने ट्रंप के इस लहजे पर कड़ा ऐतराज दर्ज कराया। दोनों देशों के प्रतिनिधि करीब 82 मिनट तक आपस में बातचीत करते रहे, लेकिन उसके बाद ईरानी दल मीटिंग हॉल छोड़कर बाहर निकल गया। पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वापस मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे नाकाम रहे। पहले दौर की बातचीत में क्या हुआ? वॉकआउट से पहले हुई बातचीत में कई अहम मुद्दों पर प्रगति हुई। पहले दौर की वार्ता के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे: • ईरान ने अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करने पर चर्चा की। साथ ही ईरान के एनर्जी सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर भी बात हुई। • ईरानी प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने अपने देश की सरकारी मीडिया को बताया कि ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत के लिए ड्राफ्ट को अंतिम रूप दे दिया गया है और जल्द ही छूट लागू की जाएगी। • कतर में फ्रीज किए गए ईरान के 6 अरब डॉलर इस समझौते के तहत वापस किए जाएंगे। • अमेरिकी डेलीगेशन के लीडर जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ पुरानी बातों को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है। • दोनों देशों के बीच जो MOU साइन हुआ है, उसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों के भीतर समझौते तक पहुंचने की बात कही गई है। • अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की कोई अनुमति नहीं दी जाएगी। परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का अडिग रुख परमाणु मुद्दे पर ईरान की स्थिति बिल्कुल साफ है और वह किसी दबाव में आने को तैयार नहीं। ईरान का कहना है कि उसके एटमी प्रोग्राम को कोई नहीं रोक सकता। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने दो टूक कहा, "हम जबरदस्ती, दमन और अपमान के आगे नहीं झुकेंगे। हम अपनी तरक्की और विकास के अधिकार को भी नहीं छोड़ेंगे और उन्हें यह बात माननी ही होगी।" पहले दौर की इस तनावपूर्ण बातचीत से यह साफ हो गया है कि आगे की राह आसान नहीं होगी। ईरान ने ट्रंप से माफी की मांग भी की है, हालांकि डेलीगेशन में मौजूद अमेरिकी प्रतिनिधियों का रुख तुलनात्मक रूप से नरम बताया जा रहा है। अगला दौर होगा या नहीं? ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने कहा है कि ट्रंप के अपमानजनक बयान के बाद बातचीत मुश्किल दौर में पहुंच गई है। हालांकि AP के हवाले से खबर आ रही है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल अभी भी प्रक्रिया में शामिल है और मध्यस्थों से बातचीत छोड़ने का कोई संकेत नहीं दिया है। इस बीच इजरायल ने भी कह दिया है कि उनकी फौज दक्षिणी लेबनान के ब्यू-फोर्ट कॉसल से नहीं हटेगी, जिससे इस पूरे क्षेत्र की जटिलता और बढ़ गई है। इसका आप पर असर • तेल की कीमतें: अमेरिका-ईरान वार्ता में खटास बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है, जिसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। • क्षेत्रीय अस्थिरता: परमाणु समझौते पर अनिश्चितता बने रहने से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है, जो वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित कर सकता है। सवाल-जवाब 1. ट्रंप ने जेनेवा वार्ता के दौरान ईरान को क्या धमकी दी? ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि अगर ईरान ने हिजबुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका पिछले हफ्ते से भी बड़ा हमला करेगा। 2. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वॉकआउट क्यों किया? ट्रंप की धमकी भरी सोशल मीडिया पोस्ट से नाराज ईरानी डेलीगेशन ने अमेरिकी वार्ताकारों के सामने विरोध दर्ज कराया और करीब 82 मिनट की बातचीत के बाद मीटिंग हॉल छोड़ दिया। 3. कतर में ईरान के कितने पैसे फ्रीज हैं और क्या वे वापस मिलेंगे? कतर में ईरान के 6 अरब डॉलर फ्रीज हैं, जो इस समझौते के तहत वापस किए जाएंगे। 4. दोनों देशों के बीच साइन हुए MOU में क्या शर्त है? MOU के तहत ईरान और अमेरिका दोनों 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं। 5. अमेरिकी डेलीगेशन का नेतृत्व किसने किया और उन्होंने क्या कहा? अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जेडी वेंस ने किया, जिन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के साथ पुरानी बातों को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है। 6. ईरान के राष्ट्रपति ने परमाणु कार्यक्रम के बारे में क्या रुख जाहिर किया? राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि ईरान जबरदस्ती या दमन के आगे नहीं झुकेगा और अपनी तरक्की व विकास के अधिकार को नहीं छोड़ेगा। 7. क्या बातचीत का अगला दौर होगा? IRNA के अनुसार बातचीत मुश्किल दौर में है, लेकिन AP की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अभी वार्ता से पूरी तरह पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दिया है। 8. पाकिस्तान और कतर की इस वार्ता में क्या भूमिका रही? पाकिस्तान और कतर इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वॉकआउट से रोकने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। https://trendkia.com/world/geneva-varta-men-iran-ka-vokaauta-trump-ki-dhamaki-se-paramanu-batachita-snkata-men-2268 TrendKia — Har trend, sabse pehle.