# होर्मुज में तनाव के बीच भारत में डटा है ईरानी नौसेना का जहाज, छह महीने से कोच्चि में रुका है IRIS लवन

> पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में मची उथल-पुथल के बीच ईरान का एक नौसैनिक जहाज पिछले छह महीनों से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है। तकनीकी खराबी और मानवीय आधार पर भारत ने इसे शरण दी थी।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/hormuja-men-tanava-ke-bicha-bharata-men-data-hai-irani-nausena-ka-jahaja-chhaha-mahine-se-kochchi-men-ruka-hai-iris-lavan-33123 · **Language:** Hindi
**Tags:** ईरानी नौसेना, कोच्चि बंदरगाह, एस जयशंकर, होर्मुज स्ट्रेट, मिलन 2026, भारत ईरान संबंध

पश्चिम एशिया में सुलगती जंग और होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी के हालात के बीच भारत और ईरान के रिश्तों की एक अनूठी तस्वीर सामने आई है। ईरान का नौसैनिक जहाज आईआरआईएस लवन पिछले छह महीनों से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर ही डेरा डाले हुए है। भू-राजनीतिक मोर्चे पर मचे इस घमासान के बीच भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस ईरानी युद्धपोत को अपने यहां ठहरने की अनुमति दी थी, जो युद्ध के बदलते घटनाक्रम के कारण अपने वतन नहीं लौट पाया।

## युद्ध अभ्यास के बाद स्वदेश लौट रहा था जहाज
ईरानी नौसेना का यह लैंडिंग शिप इसी साल फरवरी के महीने में भारत आया था। इसका मुख्य मकसद विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास मिलन-2026 में शिरकत करना था। इस बड़े रक्षा आयोजन में हिस्सा लेने के बाद जब यह जहाज अपने वतन वापस लौट रहा था, तभी पश्चिम एशिया में स्थितियां पूरी तरह बिगड़ गईं और युद्ध छिड़ गया। इसी5 मार्च को ईरानी नौसेना का एक अन्य फ्लीट सप्लाई वेसल आईआरआईएस बुशहर भी श्रीलंका में शरण लेने के लिए मजबूर हुआ था।

## तकनीकी खराबी और मानवीय आधार पर कोच्चि में प्रवेश
अपने तय सफर के दौरान आईआरआईएस लवन के चालकों ने भारत पहुंचने से पहले ही इसमें कुछ तकनीकी दिक्कतें आने की सूचना साझा की थी। इन परेशानियों को देखते हुए भारत ने पूरी तरह मानवीय आधार पर चार मार्च को इस जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति प्रदान की। कोच्चि पहुंचने पर इस युद्धपोत के सभी 183 सदस्यों को भारतीय नौसेना की आधुनिक सुविधाओं के भीतर ठहराया गया था ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

## चालक दल के सदस्य अभी भी भारत में मौजूद
शुरुआती दिनों में भारी संख्या में मौजूद कर्मियों में से अब भी पचास से अधिक चालक दल के सदस्य कोच्चि में ही रुके हुए हैं। हालांकि कुछ अन्य सूत्रों और रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जहाज के सुचारू संचालन और देखभाल के लिए कम से कम दो दर्जन से ज्यादा कर्मी अब भी वहां तैनात हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इस जहाज की सुरक्षा और देखरेख की पूरी जिम्मेदारी अब कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंप दी गई है, जो लगातार इसकी निगरानी कर रही है।

## विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने किया था फैसले का बचाव
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की कूटनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सात मार्च को कोच्चि बंदरगाह पर इस जहाज को प्रवेश दिए जाने के फैसले का पुरजोर समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि जब यह जहाज भारत की सरजमीं पर आया था, तब पश्चिम एशिया के हालात बिल्कुल अलग थे और वह केवल एक पूर्व-निर्धारित नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने आया था। वापसी के वक्त अचानक बदले घटनाक्रम और गंभीर संकट को देखते हुए जहाज ने भारत से गुहार लगाई थी, जिसे मानवीय मूल्यों के तहत स्वीकार किया गया।

## इसका आप पर असर
पश्चिम एशिया के संकट और समुद्री मार्गों में जारी गतिरोध का असर अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर भी देखा जा रहा है।

- **भारत में:** कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।
- **कोच्चि में:** केरल के इस बंदरगाह शहर में विदेशी सैन्य जहाज और उसके बचे हुए चालक दल की लंबे समय तक मौजूदगी से स्थानीय सुरक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों में विशेष निगरानी बरती जा रही है।

## ऐसा क्यों हुआ
पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान के संघर्ष के कारण हालात तेजी से बिगड़े हैं। तेहरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए रणनीतिक होर्मुज स्ट्रेट को बंद या प्रतिबंधित किया गया है, जिससे जहाजों की आवाजाही रुक गई है।

- **युद्ध की शुरुआत:** भारत में सैन्य अभ्यास समाप्त होने के बाद जब ईरानी जहाज अपने देश लौट रहे थे, उसी दौरान क्षेत्र में पूर्ण युद्ध छिड़ गया।
- **तकनीकी संकट:** यात्रा के दौरान जहाज में गंभीर तकनीकी खराबियां आ गई थीं, जिसके कारण उसे अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए सुरक्षित बंदरगाह की आवश्यकता पड़ी।
- **मानवीय सहायता:** संकट में फंसे विदेशी पोत और उसके चालक दल को अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों तथा मानवीय संवेदनाओं के तहत भारत ने शरण दी।

## सवाल-जवाब

### 1. ईरानी नौसेना का जहाज IRIS लवन भारत में क्यों आया था?
यह जहाज फरवरी में विशाखापत्तनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन-2026 नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने आया था।

### 2. यह जहाज वर्तमान में भारत में कहां रुका हुआ है?
यह जहाज पिछले छह महीनों से केरल के कोच्चि बंदरगाह पर रुका हुआ है।

### 3. भारत ने इस जहाज को अपने बंदरगाह पर क्यों रुकने दिया?
जहाज में तकनीकी खराबी आने और पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के कारण मानवीय आधार पर इसे रुकने की अनुमति दी गई थी।

### 4. इस जहाज की देखभाल की जिम्मेदारी किसके पास है?
वर्तमान में इस विदेशी युद्धपोत की देखरेख की जिम्मेदारी कोचीन पोर्ट अथॉरिटी को सौंपी गई है।

### 5. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी थी?
एस. जयशंकर ने कहा था कि जहाज मुश्किल में था और बदलते हालातों के बीच मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे शरण देना एक उचित कदम था।

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