भारत और बांग्लादेश के बीच मतभेदों के बावजूद निरंतर बातचीत जरूरी, उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने संबंधों को बताया स्वाभाविक भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने द्विपक्षीय संबंधों को स्वाभाविक बताते हुए कहा है कि मतभेदों के बावजूद दोनों पड़ोसी देशों के बीच लगातार संवाद जारी रहना चाहिए. भारत और बांग्लादेश के संबंधों की गहराई को रेखांकित करते हुए, भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने दोनों देशों के आपसी रिश्तों को 'ऑर्गेनिक' और एक-दूसरे पर निर्भर रहने वाला बताया है. हाल ही में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि दो पड़ोसी देशों के बीच विचारों, नजरियों और काम करने के तौर-तरीकों में अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन इन मतभेदों को कभी भी निरंतर बातचीत और संपर्क के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए. भारत और बांग्लादेश की भौगोलिक निकटता और दोनों देशों के नागरिकों के बीच के गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव को देखते हुए, निरंतर संवाद बनाए रखना बेहद आवश्यक है. यह साझेदारी दोनों पक्षों के साझा हितों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. द्विपक्षीय संबंधों के 'ऑर्गेनिक' स्वरूप को समझना बांग्लादेशी राजनयिक ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों का रिश्ता किसी कृत्रिम समझौते पर नहीं, बल्कि स्वाभाविक और व्यावहारिक जरूरतों पर टिका है. उन्होंने कई अवसरों पर इन संबंधों को 'ऑर्गेनिक' और परस्पर निर्भरता वाला करार दिया है. उनका मानना है कि दो बेहद करीबी देशों के बीच कभी-कभी असहमतियां होना एक सामान्य बात है. लेकिन इन असहमतियों को दूर करने का एकमात्र तरीका लगातार जुड़े रहना है. दोनों देशों की सीमाएं, नदियां और साझा इतिहास उन्हें इस तरह जोड़ते हैं कि एक देश की स्थिति का असर दूसरे पर पड़ना तय है. इसलिए, दोनों देशों के हित इसी में हैं कि वे हर परिस्थिति में बातचीत की मेज पर बने रहें. सरकारी स्तर से आगे जन-जन के संपर्क को विस्तार देना उच्चायुक्त ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच के संपर्क को और अधिक व्यापक बनाने की जरूरत पर बल दिया. उनका मानना है कि दो देशों के रिश्ते केवल राजनयिक स्तर या सरकारी मुलाकातों तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए. इसके बजाय, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सीधे संवाद और आपसी समझ को बढ़ावा मिलना चाहिए. विशेष रूप से उन्होंने छात्रों, स्कूली बच्चों और विश्वविद्यालयों के स्तर पर शैक्षणिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने का सुझाव दिया. उनके अनुसार, इस तरह के अभियानों के माध्यम से लाखों लोगों को एक-दूसरे के करीब लाया जा सकता है, जो अंततः दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक विश्वास और मजबूत रिश्ते की नींव रखेगा. 'इलिश फेस्ट' का सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व दोनों देशों के सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाने के लिए आयोजित होने वाले 'इलिश फेस्ट' का जिक्र करते हुए हमीदुल्लाह ने कहा कि यह केवल भोजन का उत्सव नहीं है. यह दोनों देशों के लोगों को करीब लाने का एक सशक्त माध्यम है. इलिश मछली बांग्लादेश और भारत के विभिन्न राज्यों, विशेष रूप से बंगालियों के लिए एक बेहद संवेदनशील और भावनात्मक महत्व रखती है. उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि इलिश का संबंध सिर्फ अर्थव्यवस्था से ही नहीं है, बल्कि कभी-कभी यह राजनीति का हिस्सा भी बन जाती है. बांग्लादेश उच्चायोग ने पहली बार पिछले साल 27 सितंबर को इस महोत्सव की शुरुआत की थी, और इस बार भी उसी तारीख को इस अनूठे उत्सव का आयोजन किया गया. दिल्ली में डेढ़ साल के कार्यकाल का अनुभव इस उत्सव का आयोजन दिल्ली में उच्चायुक्त के रूप में उनके लगभग डेढ़ साल के कार्यकाल के पूरा होने के अवसर पर भी किया गया था. हमीदुल्लाह ने बताया कि दिल्ली में बिताए गए अपने अठारह महीनों के दौरान उन्होंने भारतीय समाज, व्यापार, राजनीति और कला जगत के कई लोगों से मुलाकात की. यह महोत्सव उन सभी भारतीय मित्रों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करने का उनका एक छोटा सा प्रयास था, जिन्होंने उनके इस कार्यकाल को सफल और यादगार बनाने में योगदान दिया. महोत्सव में जुटे कई प्रमुख भारतीय चेहरे इस खास सांस्कृतिक शाम में भारत की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की, जिससे इस आयोजन का महत्व और बढ़ गया. कार्यक्रम में मणिशंकर अय्यर, एमजे अकबर, सैयदा हमीद, ज्योति मल्होत्रा और आशीष नंदी जैसी जानी-मानी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. बांग्लादेशी राजनयिक के अनुसार, इस आयोजन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों का कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना इस बात का सबूत है कि सांस्कृतिक साझापन लोगों को जोड़ने में कितना कारगर है. हालांकि यह एक अनौपचारिक और मनोरंजन से भरपूर कार्यक्रम था, लेकिन इसने दोनों देशों के बीच संबंधों के कई गंभीर और महत्वपूर्ण पहलुओं को भी सामने रखने का काम किया. इसका आप पर असर भारत और बांग्लादेश के बीच मजबूत और निरंतर राजनयिक संबंध दोनों देशों के आम नागरिकों की दैनिक जीवन सुरक्षा और व्यापार को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. • सुरक्षा और स्थिरता: दोनों देशों के बीच लगातार बातचीत सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने में मदद करती है. इससे सीमा पर रहने वाले नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल मिलता है. • पर्यटन और यात्रा: सांस्कृतिक और जन-जन के बीच संपर्क बढ़ने से दोनों देशों के बीच वीजा और यात्रा प्रक्रियाएं सुगम होती हैं. इससे पर्यटकों और परिवार के सदस्यों से मिलने जाने वाले लोगों को आसानी होगी. • व्यापार और कीमतें: सुगम व्यापार संबंधों से कृषि और अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात-निर्यात बिना किसी बाधा के होता है. यह बाजार में वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर कीमतों को नियंत्रण में रखता है. • शैक्षणिक अवसर: छात्रों और विश्वविद्यालयों के बीच आदान-प्रदान बढ़ने से भारतीय छात्रों को सीमा पार नए शैक्षणिक अवसर मिलेंगे. इससे अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा. ऐसा क्यों हुआ यह राजनयिक टिप्पणी भौगोलिक वास्तविकताओं और ऐतिहासिक सांस्कृतिक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है. • भौगोलिक अनिवार्यता: भारत और बांग्लादेश एक लंबी सीमा साझा करते हैं, जिससे सुरक्षा और पर्यावरण सहयोग दोनों के लिए अनिवार्य हो जाता है. दोनों देशों का भूगोल यह तय करता है कि वे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हो सकते. • सांस्कृतिक विरासत: दोनों देशों के बीच साझा भाषा और इतिहास, विशेष रूप से बंगाल क्षेत्र में, गहरे भावनात्मक संबंध बनाते हैं. 'इलिश फेस्ट' जैसे कार्यक्रम इसी सांस्कृतिक विरासत का उपयोग कूटनीतिक संवाद को आसान बनाने के लिए करते हैं. • राजनयिक दूरदर्शिता: अलग रणनीतिक विचारों के बावजूद, दोनों देश समझते हैं कि बातचीत बंद होना नुकसानदेह है. लगातार संवाद आपसी गलतफहमियों को समय रहते सुलझाने में मदद करता है. सवाल-जवाब 1. भारत-बांग्लादेश संबंधों पर यह बयान किसने दिया? भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने यह बयान दिया. 2. उच्चायुक्त ने दोनों देशों के बीच मतभेदों पर क्या रुख अपनाया? उन्होंने कहा कि विचारों और तौर-तरीकों में अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन इन्हें निरंतर बातचीत के रास्ते में बाधा नहीं बनने देना चाहिए. 3. राजनयिक द्वारा उल्लिखित 'इलिश फेस्ट' का क्या महत्व है? यह महोत्सव हिलसा मछली को एक सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में मनाता है ताकि औपचारिक कूटनीति से आगे बढ़कर लोगों को करीब लाया जा सके. 4. इस महोत्सव में किन प्रमुख भारतीय हस्तियों ने हिस्सा लिया? इस कार्यक्रम में मणिशंकर अय्यर, एमजे अकबर, सैयदा हमीद, ज्योति मल्होत्रा और आशीष नंदी जैसी हस्तियां शामिल हुईं. 5. इस महोत्सव का आयोजन कब किया गया था? यह महोत्सव पहली बार पिछले साल 27 सितंबर को आयोजित किया गया था, और इसका दूसरा संस्करण इस साल उसी तारीख को आयोजित किया गया. https://trendkia.com/world/india-aura-bangladesh-ke-bicha-matabhedon-ke-bavajuda-nirntara-batachita-jaruri-uchchayukta-riaz-hamidullah-ne-snbndhon-ko-bataya--39339 TrendKia — Har trend, sabse pehle.