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  "type": "article",
  "title": "इंडोनेशियाई राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और प्रमुख हस्तियों की जासूसी मामले में तीन वरिष्ठ पुलिस जनरल हिरासत में लिए गए",
  "summary": "इंडोनेशियाई पुलिस ने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अन्य प्रमुख हस्तियों के फोन गैरकानूनी तरीके से टैप करने के आरोप में तीन वरिष्ठ जनरलों को हिरासत में लिया है।",
  "content": "इंडोनेशिया में एक हाई-प्रोफाइल मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने तीन वरिष्ठ पुलिस जनरलों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक इन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर देश के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो समेत कई प्रमुख हस्तियों के फोन गैरकानूनी तरीके से टैप करने और महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड मिटाने का गंभीर आरोप लगा है। जांचकर्ताओं का कहना है कि यह पूरा मामला इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में अनाधिकृत घुसपैठ और संवेदनशील डेटा में हेरफेर से जुड़ा हुआ है। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच चल रही है, जबकि इस कथित जासूसी के पीछे का मकसद अब तक स्पष्ट नहीं किया गया है।\n\nराष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय में हिरासत में रखे गए तीनों आरोपी\nराष्ट्रीय पुलिस की आपराधिक जांच एजेंसी के प्रमुख असेप सफरुद्दीन ने एक आधिकारिक ब्रीफिंग में बताया कि तीनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तीनों अधिकारियों को राष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय स्थित डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। पुलिस के अनुसार जांच का दायरा गैरकानूनी इंटरसेप्शन, सुरक्षा प्रणालियों में अनाधिकृत पहुंच और इलेक्ट्रॉनिक डेटा को मिटाने के आरोपों तक फैला है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब तक न तो राष्ट्रपति प्रबोवो की तरफ से और न ही हिरासत में लिए गए अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है।\n\nपुलिस द्वारा नामित किए गए तीन संदिग्धों में राष्ट्रपति कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल लिस्ट्यो सिगिट प्रबोवो शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय पुलिस के कानूनी प्रभाग के प्रमुख इंस्पेक्टर जनरल अहरी सोंटा नसुशन को भी मामले में नामजद किया गया है। तीसरे संदिग्ध राष्ट्रीय पुलिस शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षक इंस्पेक्टर जनरल एको हादी संतोसो हैं। इस मामले में टिप्पणी के लिए राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ कार्यालय के प्रवक्ता से संपर्क नहीं हो सका।\n\nराष्ट्रपति से लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं तक निगरानी का आरोप\nअसेप सफरुद्दीन ने मंगलवार देर रात जकार्ता स्थित राष्ट्रीय पुलिस मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन के दौरान बताया कि इन संदिग्धों पर नियमों की अनदेखी करके गैरकानूनी तरीके से निगरानी नेटवर्क चलाने का आरोप है। उन्होंने कहा कि संदिग्धों ने इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति, सरकारी अधिकारियों, राजनीतिक हस्तियों, मीडिया से जुड़े लोगों, सामुदायिक नेताओं, गैर-सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं और प्रमुख उद्योगपतियों के फोन नंबरों की गैर-प्रक्रियात्मक और अवैध टैपिंग करवाई।\n\nपुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि यह अनाधिकृत वायरटैपिंग वर्ष 2025 और 2026 के दौरान अंजाम दी गई थी। जांचकर्ताओं का कहना है कि संदिग्ध अधिकारियों ने वर्ष 2010 के राष्ट्रीय पुलिस विनियमन के तहत तय अनिवार्य चरणों और प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही इंटरसेप्शन के आदेश जारी कर दिए थे। असेप सफरुद्दीन के अनुसार कई फोन नंबरों को आवश्यक सत्यापन के बिना ही लॉफुल इंटरसेप्शन मैनेजमेंट सिस्टम यानी LIMS में दर्ज कर दिया गया था। जांच एजेंसियों का कहना है कि ऐसा करके वैध निगरानी को नियंत्रित करने के लिए बनाई गई अनिवार्य जांच प्रक्रिया को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया था।\n\nडिजिटल सबूत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त\nजांच एजेंसी के प्रमुख ने जानकारी दी कि मामले की जांच के दौरान पुलिस अब तक 10 गवाहों और 3 विशेषज्ञ गवाहों से गहन पूछताछ कर चुकी है। इसके साथ ही फोरेंसिक विश्लेषण के लिए कई अहम तकनीकी उपकरण जब्त किए गए हैं। पुलिस ने जांच के लिए 11 मोबाइल फोन, एक आईपैड और 4 फ्लैश ड्राइव अपने कब्जे में ली हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इन जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच से यह साबित करने में मदद मिलेगी कि वायरटैपिंग के अनुरोध किस तरह भेजे गए थे और पूरी निगरानी प्रणाली को कैसे संचालित किया जा रहा था।\n\nअसेप सफरुद्दीन ने यह भी खुलासा किया कि संदिग्धों ने हाल ही में LIMS प्रणाली से अहम फाइलों को हटाने का निर्देश दिया था। पुलिस का आरोप है कि जिन रिकॉर्ड्स को डिलीट करवाया गया, उनमें इंटरसेप्ट की गई बातचीत और संचार डेटा मौजूद था। जांचकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि इस डिजिटल डेटा को सबूतों को छुपाने और पूरी गतिविधि के निशान मिटाने के मकसद से नष्ट किया गया था। पुलिस ने अभी तक इस कथित अभियान के असली उद्देश्य की जानकारी सार्वजनिक नहीं की है और मामले की पड़ताल जारी है।\n\nदेशद्रोह के संकेत नहीं, नए कानूनों के तहत चलेगा मुकदमा\nइंडोनेशिया के कानून, मानवाधिकार, आव्रजन एवं सुधार समन्वय मंत्री युसरील इहजा महेंद्रा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जांचकर्ताओं को मामले में देशद्रोह का कोई संकेत नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि संदिग्धों के खिलाफ इंडोनेशिया की नई दंड संहिता की धारा 258 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा। यह कानूनी प्रावधान गैर-सार्वजनिक इलेक्ट्रॉनिक संचार की अवैध निगरानी और गैरकानूनी इंटरसेप्शन से जुड़ा है, जिसमें अधिकतम 10 साल तक की कैद की सजा का प्रावधान है।\n\nयुसरील इहजा महेंद्रा ने आगे बताया कि संदिग्धों को धारा 332 के तहत भी आरोपों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें अधिकतम 6 साल की सजा हो सकती है। इसके अतिरिक्त इंडोनेशिया के इलेक्ट्रॉनिक सूचना और लेनदेन कानून की धारा 32 के तहत भी आरोप तय किए जा रहे हैं। यह कानून इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं के अनाधिकृत बदलाव, विनाश, विलोपन, स्थानांतरण या उसे छुपाने से संबंधित अपराधों को दंडनीय बनाता है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही आगे की विस्तृत जानकारी सामने आ सकेगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस बड़े कानूनी और सुरक्षा घटनाक्रम से इंडोनेशियाई सुरक्षा प्रणालियों में निगरानी नियमों की कठोरता बढ़ सकती है।\n\n• गोपनीयता नियम: सुरक्षा प्रणालियों में अनधिकृत पहुंच पर सख्त कानूनी कार्रवाई से सरकारी और नागरिक निगरानी नियमों में कड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि भविष्य में किसी भी फोन या डिजिटल डिवाइस की जांच केवल वैध अदालती अनुमति के बाद ही संभव हो।\n• नागरिक सुरक्षा: गैर-सरकारी संगठनों, पत्रकारों और व्यापारिक नेताओं के डेटा को अवैध निगरानी से बचाने के लिए नए डिजिटल सुरक्षा दिशा-निर्देश लागू हो सकते हैं। इससे सामान्य उपयोगकर्ताओं और संगठनों की निजी सूचनाओं के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगेगी।\n• साइबर कानून: देश के नए आपराधिक कोड और इलेक्ट्रॉनिक सूचना कानून के तहत कड़े प्रावधान लागू होने से डिजिटल अपराधों में सजा की प्रक्रिया तेज होगी। कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ न्यूनतम छह से अधिकतम दस वर्ष तक की जेल की सजा तय हो सकती है।\n• संस्थागत जवाबदेही: कानून प्रवर्तन एजेंसियों में आंतरिक जांच प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने के लिए स्वतंत्र निगरानी दल गठित किए जा सकते हैं। इससे प्रशासनिक स्तर पर बिना अनुमति के डेटा एक्सेस करने वाले किसी भी अधिकारी पर सीधी जवाबदेही तय होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटना कानून प्रवर्तन प्रणाली के भीतर निर्धारित कानूनी सुरक्षा मानकों की अनदेखी और सुरक्षा तंत्र में अनधिकृत घुसपैठ के कारण घटित हुई।\n\n• सीधा कारण: वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वर्ष 2010 के पुलिस नियमों को दरकिनार करते हुए राष्ट्रपति और अन्य प्रमुख हस्तियों के फोन नंबरों को आवश्यक अनुमति के बिना इंटरसेप्शन सिस्टम में शामिल कर लिया। इस सीधे उल्लंघन ने अवैध निगरानी को संभव बनाया।\n• प्रक्रियात्मक चूक: लॉफुल इंटरसेप्शन मैनेजमेंट सिस्टम में फोन नंबर दर्ज करने से पहले अनिवार्य सत्यापन जांच को नजरअंदाज किया गया। इस आंतरिक सुरक्षा चूक के चलते वैध निगरानी के तय मापदंड टूट गए।\n• सबूत मिटाने का प्रयास: निगरानी गतिविधि उजागर होने के डर से संबंधित अधिकारियों ने सिस्टम से इंटरसेप्टेड रिकॉर्ड्स को डिलीट करने का निर्देश दिया। इस कदम ने मामले में आपराधिक साक्ष्य छिपाने की स्थिति पैदा कर दी।\n• मकसद की स्थिति: अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस जासूसी के पीछे देशद्रोह का कोई पहलू नहीं मिला है, हालांकि असली उद्देश्य का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किन वरिष्ठ पुलिस जनरलों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है?\nराष्ट्रपति कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ जनरल लिस्ट्यो सिगिट प्रबोवो, कानूनी प्रभाग प्रमुख इंस्पेक्टर जनरल अहरी सोंटा नसुशन और प्रशिक्षण संस्थान के प्रशिक्षक इंस्पेक्टर जनरल एको हादी संतोसो को हिरासत में लिया गया है।\n\n2. इस कथित अवैध वायरटैपिंग के निशाने पर कौन-कौन लोग थे?\nइस निगरानी के निशाने पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, सरकारी अधिकारी, राजनेता, मीडियाकर्मी, सामाजिक कार्यकर्ता और कारोबारी थे।\n\n3. यह अवैध निगरानी किस समयावधि के दौरान की गई थी?\nपुलिस जांच के अनुसार यह अनधिकृत वायरटैपिंग वर्ष 2025 और 2026 के बीच अंजाम दी गई थी।\n\n4. जांचकर्ताओं ने सबूत के तौर पर क्या-क्या चीजें जब्त की हैं?\nजांच टीम ने साक्ष्य के रूप में 11 मोबाइल फोन, एक आईपैड और 4 फ्लैश ड्राइव जब्त किए हैं।\n\n5. संदिग्धों पर किन कानूनों के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं?\nसंदिग्धों पर नई दंड संहिता की धारा 258 और धारा 332 के अलावा इलेक्ट्रॉनिक सूचना और लेनदेन कानून की धारा 32 के तहत आरोप लगाए जा रहे हैं।\n\n6. क्या इस मामले में देशद्रोह का कोई पहलू सामने आया है?\nसमन्वय मंत्री युसरील इहजा महेंद्रा के अनुसार जांचकर्ताओं को 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