जापान में अमेरिकी टाइफोन मिसाइल की तैनाती पर रूस भड़का, दिया कड़ा अल्टीमेटम जापान में अमेरिकी टाइफोन मिसाइल सिस्टम की तैनाती से रूस और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया है। मॉस्को ने चेतावनी दी है कि अभ्यास समाप्त होने के बाद भी यदि यह हथियार वहां रहा तो मास्को उचित प्रतिक्रिया देगा। अमेरिका और जापान के बीच हालिया सैन्य गतिविधियों ने रूस की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। जापानी द्वीप क्यूशू में अमेरिकी टाइफोन मिसाइल सिस्टम की मौजूदगी को लेकर मॉस्को ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रूस ने चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि यदि सैन्य अभ्यास के समापन के बाद भी यह घातक मिसाइल प्रणाली जापान की धरती से नहीं हटाई जाती है, तो रूस इसकी काट के लिए कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। रूस की नाराजगी और कूटनीतिक आपत्तियां रूसी उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा है कि हालांकि जापान की ओर से यह भरोसा दिलाया गया है कि इस प्रणाली को वापस ले लिया जाएगा, लेकिन मौजूदा जापानी सरकार के रुख पर मॉस्को को पूरी तरह विश्वास नहीं है। इस सैन्य अभ्यास को लेकर रूस ने अपनी नाराजगी सितंबर महीने में ही दर्ज करा दी थी, जब ओरिएंट शील्ड नाम के इस युद्धाभ्यास में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं एक साथ शामिल हुई थीं। इसी दौरान अमेरिकी टाइफोन सिस्टम को क्यूशू में उतारा गया था, जिसके विरोध में रूस ने 3 सितंबर को जापान को एक औपचारिक विरोध-पत्र भी सौंपा था। टॉमहॉक मिसाइलों की मारक क्षमता से बढ़ी हलचल इस पूरे विवाद की जड़ केवल सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि टाइफोन मिसाइल की रणनीतिक क्षमता और उसकी भौगोलिक स्थिति है। यह कोई साधारण रॉकेट लॉन्चर नहीं है, बल्कि अमेरिकी सेना का एक उन्नत भूमि-आधारित मोबाइल मिसाइल सिस्टम है। इस प्रणाली के जरिए टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों को दागा जा सकता है, जिनकी मारक क्षमता लगभग 1,600 किलोमीटर तक आंकी गई है। क्यूशू जैसे रणनीतिक स्थान से दागी जाने वाली ऐसी मिसाइलें रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्रों के साथ-साथ चीन के भी कुछ हिस्सों को अपनी जद में ले सकती हैं। यही वजह है कि मॉस्को इस तैनाती को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधा और गंभीर खतरा मान रहा है। इसका आप पर असर यह भू-राजनीतिक तनाव एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। • भारत में: क्षेत्रीय सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक रक्षा बाजारों और कूटनीतिक रुख पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है। • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर: रूस और अमेरिका के बीच इस तरह की सैन्य तैनाती से कूटनीतिक संवाद और अधिक जटिल हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ यह विवाद जापान और अमेरिका द्वारा आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास और उसमें उन्नत हथियारों के उपयोग के कारण पैदा हुआ है। • सैन्य अभ्यास: सितंबर में आयोजित ओरिएंट शील्ड अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना ने रणनीतिक रूप से संवेदनशील क्यूशू क्षेत्र में टाइफोन मिसाइल को तैनात किया। • मारक क्षमता: इस सिस्टम से दागी जाने वाली टॉमहॉक मिसाइलों की 1,600 किलोमीटर की रेंज रूस के सुदूर पूर्व तक पहुंचती है, जिसे मॉस्को सुरक्षा खतरा मानता है। • कूटनीतिक अविश्वास: जापान द्वारा सिस्टम हटाने के आश्वासन के बावजूद पिछली कार्यप्रणाली को देखते हुए रूसी प्रशासन को मौजूदा सरकार पर भरोसा नहीं है। सवाल-जवाब 1. रूस ने किस अमेरिकी मिसाइल सिस्टम पर आपत्ति जताई है? रूस ने जापान में तैनात किए गए अमेरिकी टाइफोन मिसाइल सिस्टम पर कड़ी आपत्ति जताई है। 2. यह मिसाइल सिस्टम जापान में कहां तैनात किया गया था? इसे जापान के क्यूशू द्वीप पर तैनात किया गया था। 3. टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता कितनी है? टॉमहॉक क्रूज मिसाइल की बताई गई मारक क्षमता करीब 1,600 किलोमीटर तक है। 4. रूस ने जापान को औपचारिक विरोध-पत्र कब भेजा था? रूस ने 3 सितंबर को जापान को औपचारिक विरोध-पत्र भेजा था। 5. इस मामले पर रूस की तरफ से किसने बयान दिया है? रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको ने इस मामले पर बयान दिया है। https://trendkia.com/world/japan-mein-amsarkyi-typhon-missile-ki-tainati-par-russia-bharka-diya-kada-ultimatum-39941 TrendKia — Har trend, sabse pehle.