किंग मोहम्मद छठे ने फातिमा एज्जरा एल मंसूरी को सौंपी मोरक्को की कमान, बनीं देश की पहली महिला प्रधानमंत्री मोरक्को के किंग मोहम्मद छठे ने 50 वर्षीय फातिमा एज्जरा एल मंसूरी को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया है, जिसके साथ ही वह मोरक्को की पहली और समूचे अरब जगत की दूसरी महिला शासनाध्यक्ष बन गई हैं. उत्तरी अफ्रीकी देश मोरक्को की सत्ता व्यवस्था में एक अभूतपूर्व मोड़ आया है, जब देश की बागडोर पहली बार किसी महिला नेता के हाथों में सौंपी गई है. मोरक्को के किंग मोहम्मद छठे ने 29 सितंबर को बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए 50 वर्षीय फातिमा एज्जरा एल मंसूरी को देश का नया प्रधानमंत्री नामित किया. इस ऐतिहासिक घोषणा के साथ ही मुस्लिम बहुल मोरक्को के समूचे इतिहास में शीर्ष कार्यकारी पद तक पहुँचने वाली वह पहली महिला बन गई हैं. समूचे अरब जगत की बात करें तो ट्यूनीशिया की नजला बौडेन के बाद किसी सरकार का नेतृत्व करने वाली वह दूसरी महिला राजनेता के रूप में दर्ज हो गई हैं. संसदीय नतीजों के बाद गठबंधन की जटिल चुनौती शाही महल द्वारा दी गई औपचारिक जानकारी के मुताबिक, आम चुनावों के नतीजे घोषित होने के ठीक चार दिन बाद देश के शासक ने मंसूरी को नई हुकूमत के गठन की ज़िम्मेदारी सौंपी. मोरक्को की चुनावी और संसदीय संरचना ऐसी है जहाँ किसी एक राजनीतिक दल के लिए अपने दम पर स्पष्ट और पूर्ण बहुमत जुटाना लगभग नामुमकिन रहता है. इसी संवैधानिक व राजनीतिक हकीकत के मद्देनजर, अब प्रधानमंत्री के रूप में मंसूरी को आगामी दिनों में कई अलग-अलग सियासी पार्टियों से तालमेल बिठाना होगा और आम सहमति के आधार पर एक टिकाऊ व मजबूत गठबंधन सरकार का ढांचा तैयार करना होगा. स्थानीय प्रशासन से केंद्रीय नेतृत्व तक का सफर फातिमा एज्जरा एल मंसूरी देश की सियासत में लंबे समय से एक सम्मानित, लोकप्रिय और असरदार हस्ती रही हैं. पेशे से अधिवक्ता 50 वर्षीय मंसूरी इस पद पर आसीन होने से पहले मोरक्को की शहरी नियोजन मंत्री के तौर पर ज़िम्मेदारियाँ संभाल रही थीं. राष्ट्रीय राजनीति में आने से पहले उन्होंने मोरक्को के ऐतिहासिक शहर माराकेश की मेयर बनकर स्थानीय शासन की कमान भी बखूबी संभाली थी. वकालत की कानूनी समझ और प्रशासनिक व्यवस्था पर उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्हें एक शांत, सूझबूझ से भरी मगर सख्त फैसले लेने वाली कद्दावर नेता माना जाता है. नगर पालिका स्तर से लेकर राष्ट्रीय कैबिनेट तक उनके प्रभावी कामकाज ने ही उन्हें प्रधानमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे खड़ा किया था. नई हुकूमत के आगे खड़ी कड़ी आर्थिक और विकास चुनौतियां सत्ता की यह ऐतिहासिक शुरुआत मंसूरी के लिए बेहद पेचीदा और मुश्किल इम्तिहान लेकर आई है. सबसे पहला संकट एक स्थिर गठबंधन तैयार करना है, जहाँ हर सहयोगी घटक दल के अलग एजेंडे और परस्पर विरोधी प्राथमिकताओं के बीच संतुलन कायम रखना होगा. इसके अलावा मोरक्को वर्ष 2030 के फीफा वर्ल्ड कप की संयुक्त मेजबानी करने जा रहा है, जिससे जुड़े अरबों डॉलर के बुनियादी ढांचे, आधुनिक स्टेडियमों और परिवहन प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना उनकी कैबिनेट के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होगा. वहीं घरेलू मोर्चे पर जनता रिकॉर्ड महंगाई से राहत, न्यूनतम मजदूरी में ठोस बढ़ोतरी और युवाओं के वास्ते नए रोजगार के चुनावी वादों को जल्द जमीन पर उतरते देखना चाहती है, जिसे साधना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती रहेगा. इसका आप पर असर इस ऐतिहासिक नियुक्ति से मोरक्को में शासन और विकास प्राथमिकताओं की दिशा तय होगी. • लैंगिक प्रतिनिधित्व: अरब दुनिया में महिला नेतृत्व की स्वीकार्यता को मजबूती मिली है. ट्यूनीशिया के बाद यह कदम उत्तरी अफ्रीका में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए नया मानक स्थापित करता है. • फीफा वर्ल्ड कप 2030 की तैयारियां: विश्व कप से जुड़ी विशाल निर्माण परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ेगी. स्टेडियम, सड़क और हवाई अड्डों के लिए अरबों डॉलर के टेंडर समय पर पूरे करने का दबाव रहेगा. • रोजगार और वेतन: न्यूनतम मजदूरी बढ़ने से आम परिवारों की क्रय शक्ति में सुधार की उम्मीद है. युवाओं के लिए तय चुनावी वादों के तहत नए रोजगार अवसरों के सृजन पर ध्यान दिया जाएगा. • महंगाई पर नियंत्रण: घरेलू बाजार में जरूरी खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के प्रयास होंगे. इससे आम नागरिकों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी. ऐसा क्यों हुआ मोरक्को में संसदीय चुनावों के बाद संवैधानिक नियमों के तहत किंग मोहम्मद छठे द्वारा नई सरकार का चयन किया गया है. • चुनावी जनादेश: आम चुनाव के नतीजे आने के चार दिन बाद किंग ने संवैधानिक परंपरा निभाते हुए सरकार बनाने का न्योता दिया. संसद में किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने से सर्वमान्य चेहरे की दरकार थी. • मंसूरी का मजबूत प्रशासनिक रिकॉर्ड: माराकेश की मेयर और केंद्रीय शहरी नियोजन मंत्री के तौर पर मंसूरी ने कड़े फैसले लेने की क्षमता साबित की थी. कानून और नागरिक प्रशासन में उनकी गहरी पकड़ ने उन्हें शीर्ष दावेदार बनाया. • अरब जगत में बदलते राजनीतिक रुझान: इससे पहले ट्यूनीशिया में नजला बौडेन को प्रधानमंत्री बनाकर इस बदलाव की शुरुआत हुई थी. मोरक्को का यह फैसला आधुनिक सुधारों और आगामी अंतरराष्ट्रीय आयोजनों के प्रबंधन की ज़रूरत को दर्शाता है. सवाल-जवाब 1. मोरक्को की नई प्रधानमंत्री कौन बनी हैं? 50 वर्षीय फातिमा एज्जरा एल मंसूरी मोरक्को की नई प्रधानमंत्री बनी हैं, जिन्हें किंग मोहम्मद छठे ने 29 सितंबर को नियुक्त किया. 2. फातिमा मंसूरी की नियुक्ति क्यों ऐतिहासिक मानी जा रही है? वह मोरक्को के इतिहास में पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और ट्यूनीशिया की नजला बौडेन के बाद पूरे अरब जगत में सरकार संभालने वाली दूसरी महिला नेता हैं. 3. प्रधानमंत्री बनने से पहले फातिमा मंसूरी किस पद पर थीं? वह पेशे से वकील हैं और प्रधानमंत्री बनने से पहले देश की शहरी नियोजन मंत्री तथा माराकेश शहर की मेयर रह चुकी हैं. 4. नई मोरक्को सरकार के सामने प्रमुख आर्थिक और विकास चुनौतियां क्या हैं? सरकार को गठबंधन स्थिरता के अलावा बढ़ती महंगाई रोकना, न्यूनतम मजदूरी बढ़ाना, युवाओं को रोजगार देना और 2030 फीफा वर्ल्ड कप के बुनियादी ढांचे को पूरा करना होगा. https://trendkia.com/world/king-mohammed-vi-ne-fatima-ezzahra-el-mansouri-ko-saunpi-morocco-ki-kamana-banin-desha-ki-pahali-mahila-pradhanamntri-40690 TrendKia — Har trend, sabse pehle.