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  "type": "article",
  "title": "कीव पर बरसीं रूसी बैलिस्टिक मिसाइलें, एक भी नहीं रुकी, 22 की मौत",
  "summary": "यूक्रेनी वायुसेना ने कहा कि इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी के चलते रूस की 23 बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक भी नहीं रोकी जा सकी, इस हमले में कीव और आसपास के इलाके में 22 लोगों की मौत हो गई।",
  "content": "रविवार रात रूस ने कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों की झड़ी लगा दी और इस बार यूक्रेन की वायुसेना एक भी मिसाइल को हवा में मार गिराने में कामयाब नहीं हो पाई। इस हमले में राजधानी कीव में कम से कम 15 और आसपास के कीव क्षेत्र में सात और लोगों की जान चली गई, यानी कुल 22 मौतें दर्ज की गईं। अधिकारियों ने कहा कि यह तबाही इंटरसेप्टर मिसाइलों की गंभीर कमी की वजह से और बढ़ गई।\n\n23 मिसाइलें, एक भी नहीं रुकी\nयूक्रेनी वायुसेना ने साफ कहा कि इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी किल्लत के चलते रूस की तरफ से दागी गई सभी 23 बैलिस्टिक मिसाइलों में से एक को भी मार गिराना मुमकिन नहीं हो सका। एक हफ्ते के भीतर कीव पर यह दूसरा बड़ा रूसी हमला था, और सोमवार सुबह होते होते पूरे शहर में तबाही साफ नजर आने लगी। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने बताया कि यूक्रेनी सेना क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को रोकने में कामयाब रही, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों के सामने बेबस रही। उनके मुताबिक रविवार का यह हमला 68 मिसाइलों और 351 अटैक ड्रोन का बड़ा हमला था, जिसमें वायुसेना 37 मिसाइलें और 326 ड्रोन मार गिराने या बेअसर करने में सफल रही। जेलेंस्की ने आगाह किया कि जब तक पैट्रियट डिफेंस मिसाइलें सहयोगी देशों के गोदामों में पड़ी रहेंगी और यूक्रेन तक नहीं पहुंचेंगी, मॉस्को रिहायशी इमारतों पर हमला करता रहेगा। बैलिस्टिक मिसाइलें क्रूज मिसाइलों और ड्रोन के मुकाबले कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से गिरती हैं, इसलिए इन्हें रोकने के लिए खासतौर पर पैट्रियट जैसी प्रणालियों की जरूरत पड़ती है, और यही वजह है कि इनकी कमी सीधे आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है।\n\nकीव की सड़कों पर तबाही का मंजर\nराजधानी के लोगों के लिए यह एक और खौफनाक रात थी, तेज धमाकों और यूक्रेन के एयर डिफेंस सिस्टम की गड़गड़ाहट के बीच। सोमवार सुबह शहर भर में तबाही का मंजर दिख रहा था। शहर की तीन बड़ी रिहायशी इमारतें आंशिक रूप से ढह गईं, इनमें से कुछ पर तो सीधे मिसाइलें गिरी थीं। हेलीकॉप्टर लगातार आसमान में चक्कर लगाते हुए नदी से पानी लाकर आग बुझाने में जुटे रहे। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के मुताबिक अकेले राजधानी में 56 लोग घायल हुए, जिनमें सात बच्चे शामिल हैं, जबकि चार बचावकर्मियों समेत 29 अन्य लोग भी घायल हुए।\n\nमलबे से उठतीं चीखें और आंसू\nकीव के पोदिल्स्की इलाके में एक हमले वाली जगह पर बचाव दल घंटों एक ऐसी इमारत के मलबे में काम करते रहे जिसके बीचोंबीच एक बड़ा छेद हो गया था। मलबे में दबे लोगों को ढूंढने के लिए स्निफर डॉग्स का इस्तेमाल किया गया, जबकि क्रेनों से कंक्रीट के बड़े बड़े स्लैब हटाए जा रहे थे, जिससे ईंटें नीचे गिरती रहीं। पास ही एक बेंच पर बैठी एक महिला रो रही थी, इतने सदमे में कि बोल तक नहीं पा रही थी, उसकी मदद कर रही टीम ने बताया कि उसके दो रिश्तेदार मलबे में दबे हो सकते हैं। जिन लोगों का सब कुछ इस हमले में तबाह हो गया, वे पुलिस के पास अपना नुकसान दर्ज कराने के लिए कतार में खड़े दिखे।\n\nएक महिला, जिसका फ्लैट आठवीं मंजिल पर था और अब पूरी की पूरी इमारत गायब हो चुकी है, बोलना शुरू ही कर पाई थी कि रोते हुए मुंह फेर लिया। चार साल की भीषण जंग पहले से ही लोगों को थका चुकी है, और अब हवाई हमले और तेज होते जा रहे हैं। एक और निवासी ओलेना ने बताया कि जब पास में पहला धमाका हुआ तो शीशे टूटकर उन पर और आसपास खड़े लोगों पर गिरे, लगभग सिर पर, और उसके बाद सब कुछ हिलने लगा। ओलेना ने कबूल किया कि सायरन बजने पर भी वह बंकर में नहीं गईं क्योंकि वह बेहद थकी हुई थीं और अगले दिन काम पर जाने से पहले सोना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि अब वह शांत महसूस कर रही हैं, लेकिन अब भी पूरे बदन में कंपकंपी महसूस हो रही है।\n\nओलेना का एक सवाल भी था कि इस बार यूक्रेन एक भी बैलिस्टिक मिसाइल क्यों नहीं रोक पाया। उन्होंने कहा कि मिसाइलें उनके घरों पर गिरीं, और यह बहुत डरावना है। उन्हें लगा जैसे उनके पास इन्हें रोकने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर उनके साझेदार देश कहां हैं और यह हो क्या रहा है, यही उनका सवाल था।\n\nजेलेंस्की की नाटो से गुहार\nजेलेंस्की ने सहयोगी देशों से अपील की है कि इस हफ्ते होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन में कीव को एयर डिफेंस मुहैया कराने का ठोस फैसला लिया जाए। हमले से कुछ घंटे पहले ही जेलेंस्की ने आगाह किया था कि मॉस्को कीव पर एक और बड़ा हमला करने की तैयारी में है, गुरुवार के उस हमले के बाद जिसमें 30 लोग मारे गए थे। यूक्रेन ने आरोप लगाया था कि उस हमले में मॉस्को ने जानबूझकर नागरिक इलाकों को निशाना बनाया, जबकि रूस का कहना था कि उसने रूसी क्षेत्र में बिजलीघरों और ऊर्जा ठिकानों पर हाल में हुए यूक्रेनी हमलों के जवाब में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया।\n\nरिपोर्टों के मुताबिक जेलेंस्की मंगलवार से तुर्की के अंकारा में शुरू हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन के इतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात कर सकते हैं। सोमवार को एक्स पर अपनी पोस्ट में जेलेंस्की ने कहा कि यह बेहद जरूरी है कि अमेरिका और यूक्रेन के यूरोपीय साझेदार इस सम्मेलन में एयर डिफेंस के समर्थन में ठोस फैसले लेकर आएं, ताकि आम लोगों की जान बचाई जा सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप के पास इस आतंक को रोकने के लिए पर्याप्त ताकत है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लायेन ने कहा कि यूक्रेन को एयर डिफेंस की तत्काल जरूरत पर सम्मेलन में चर्चा होगी।\n\nहफ्तेभर में दूसरा बड़ा हमला\nकीव भी चुप नहीं बैठा है। यूक्रेन रूस के अहम ऊर्जा ठिकानों पर लगातार ड्रोन हमले करता रहा है, जिसकी वजह से रूस के कब्जे वाले क्रीमिया के सेवस्तोपोल शहर में कुछ समय के लिए बिजली गुल हो गई। यूक्रेनी सेना का कहना है कि उसने रूस की तीन तेल रिफाइनरियों पर हमला किया, जिनमें देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी, यानी ओम्स्क वाली रिफाइनरी भी शामिल है। यह जगह 2,414 किलोमीटर यानी करीब 1,500 मील दूर है, जो रूसी क्षेत्र के भीतर कीव के अब तक के सबसे लंबी दूरी वाले हमलों में से एक है। उधर रूस के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि यूक्रेन ने 625 लंबी दूरी के अटैक ड्रोन दागे, जिनमें से उसकी सेनाओं ने 613 को मार गिराया।\n\nचार साल की जंग, अब भी जारी\nरूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू किया था, और फिलहाल वह यूक्रेन के करीब पांचवें हिस्से पर कब्जा जमाए हुए है। चार साल से ज्यादा वक्त से चल रही इस जंग ने आम लोगों को थका दिया है, और अब हवाई हमलों की तीव्रता और बढ़ती जा रही है, जिससे कीव के लिए सहयोगी देशों से पैट्रियट जैसी एयर डिफेंस मिसाइलें हासिल करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे भारत से जुड़ी नहीं है, लेकिन इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस हो सकता है।\n\n• वैश्विक बाजारों के लिए: यूक्रेन का रूस की तेल रिफाइनरियों, जैसे ओम्स्क की रिफाइनरी, पर हमला जारी रहना वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर डाल सकता है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी पड़ सकता है।\n• निवेशकों के लिए: नाटो शिखर सम्मेलन में एयर डिफेंस को लेकर होने वाला फैसला यह तय करेगा कि यह जंग आने वाले हफ्तों में और तेज होती है या ठहराव की तरफ बढ़ती है, जिस पर वैश्विक बाजार और ऊर्जा कीमतें करीब से नजर रखेंगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रूस ने रविवार रात कीव पर कितनी बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और कितनी रोकी गईं?\nरूस ने 23 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं और यूक्रेनी वायुसेना इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी के चलते एक भी नहीं रोक पाई।\n\n2. इस हमले में कुल कितने लोगों की मौत हुई?\nकीव शहर में कम से कम 15 और आसपास के कीव क्षेत्र में सात और लोगों की मौत हुई, यानी कुल 22 मौतें।\n\n3. रविवार रात रूस ने कुल कितने हथियार दागे?\nजेलेंस्की के मुताबिक रूस ने 68 मिसाइलें और 351 अटैक ड्रोन दागे, जिनमें से यूक्रेन ने 37 मिसाइलें और 326 ड्रोन मार गिराए या बेअसर किए।\n\n4. इस हमले में कितने लोग घायल हुए?\nयूक्रेन की आपातकालीन सेवा के मुताबिक राजधानी में 56 लोग घायल हुए जिनमें सात बच्चे शामिल हैं, और चार बचावकर्मियों समेत 29 अन्य लोग भी घायल हुए।\n\n5. जेलेंस्की नाटो देशों से क्या मांग कर रहे हैं?\nवे चाहते हैं कि नाटो शिखर सम्मेलन में सहयोगी देश यूक्रेन को एयर डिफेंस, खासकर पैट्रियट मिसाइलें, देने का ठोस फैसला लें।\n\n6. नाटो शिखर सम्मेलन कब और कहां हो रहा है?\nयह मंगलवार से तुर्की के अंकारा में शुरू हो रहा है, जहां जेलेंस्की के डोनाल्ड ट्रंप से मिलने की संभावना है।\n\n7. यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई में क्या किया?\nयूक्रेन ने रूस की तीन तेल रिफाइनरियों पर हमला किया, जिनमें ओम्स्क की सबसे बड़ी रिफाइनरी भी शामिल है, जो 2,414 किलोमीटर यानी करीब 1,500 मील दूर है।\n\n8. गुरुवार के हमले में क्या हुआ था?\nगुरुवार को हुए हमले में 30 लोगों की मौत हुई थी, जिसे यूक्रेन ने नागरिक इलाकों पर जानबूझकर किया गया हमला बताया, जबकि रूस ने इसे ऊर्जा और सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई बताया।",
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  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-07-06",
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    "यूक्रेन युद्ध",
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