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  "type": "article",
  "title": "लीबिया के विवाद में कूदा पाकिस्तान, मध्यस्थता की आड़ में अरबों डॉलर की डिफेंस डील",
  "summary": "पाकिस्तान अब लीबिया के दो धड़ों के बीच शांति वार्ता में मध्यस्थ बना है, लेकिन इस पहल के पीछे 4 अरब डॉलर के हथियार सौदे का बड़ा आर्थिक पहलू भी सामने आया है।",
  "content": "पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर शांतिदूत के रूप में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-तालिबान और ईरान-अमेरिका के बीच तनाव को कम करने में भूमिका निभाने के बाद, इस्लामाबाद अब लीबिया के आंतरिक विवाद को सुलझाने के मिशन पर निकल पड़ा है। लीबिया के भीतर चल रही दो अलग-अलग सरकारों के बीच बातचीत की प्रक्रिया अभी अपने शुरुआती दौर में है, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने का बीड़ा उठाया है। इस कवायद का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह शांति वार्ता का प्रयास लीबिया की पूर्वी सेना के साथ पाकिस्तान द्वारा की गई 4 अरब डॉलर यानी करीब 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रक्षा सौदेबाजी के कुछ ही महीनों बाद शुरू हुआ है।\n\nसत्ता का दोहरा केंद्र और संघर्ष\nलीबिया पिछले कई सालों से दो सत्ता केंद्रों के बीच बंटा हुआ है। देश के एक हिस्से में संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त पश्चिमी सरकार काम कर रही है, जबकि दूसरा बड़ा हिस्सा पूर्वी लीबिया का है जहां मिलिट्री कमांडर खलीफा हफ्तार का सैन्य वर्चस्व है। दोनों गुट लंबे समय से सत्ता हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, इन दोनों विरोधी पक्षों ने खुद इस्लामाबाद से इस गतिरोध को समाप्त करने के लिए मदद मांगी थी। इसके बाद 2025 के अंत से पाकिस्तान दोनों गुटों के बीच एक सेतु बनाने का काम कर रहा है।\n\nपर्दे के पीछे की वैश्विक राजनीति\nइस्लामाबाद की इस मध्यस्थता के पीछे की गतिविधियों की पूरी जानकारी अमेरिका को है और वह इस प्रक्रिया में शामिल भी है। इसके अलावा सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे बड़े देश भी पाकिस्तान की इस पहल का समर्थन करते हुए नजर आ रहे हैं। इस पूरी बातचीत का आधार एक 36 महीनों का खाका है, जिसका उद्देश्य लीबिया में एक नई सरकार का गठन करना है। प्रस्ताव के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त पश्चिमी सरकार के वर्तमान प्रमुख अब्दुलहामिद दबेबाह प्रधानमंत्री पद पर बने रहेंगे। वहीं, सैन्य कमांडर खलीफा हफ्तार के बेटे सद्दाम हफ्तार को प्रेसिडेंशियल काउंसिल का चेयरमैन बनाने की योजना है। चूंकि खलीफा हफ्तार की सेना का लीबिया के अधिकांश तेल कुओं और महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा है, इसलिए देश का वित्तीय बजट उन्हीं के नियंत्रण में रहेगा।\n\nरक्षा समझौते का वित्तीय पहलू\nपाकिस्तान की इस कूटनीतिक सक्रियता के पीछे आर्थिक लाभ भी एक बड़ा कारक है। दिसंबर 2025 में पाकिस्तान ने लीबिया की पूर्वी सेना के साथ इतिहास का सबसे बड़ा डिफेंस एक्सपोर्ट एग्रीमेंट किया था। इस 4 अरब डॉलर से अधिक की डील में 16 जेएफ-17 फाइटर जेट और 12 सुपर मुशशाक ट्रेनर विमान शामिल हैं। यह समझौता पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर और सद्दाम हफ्तार के बीच हुई मुलाकात के बाद अंतिम रूप ले पाया था।\n\nहथियार प्रतिबंध और वैश्विक स्थिति\nयह डिफेंस डील अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं का विषय बनी हुई है क्योंकि साल 2011 से ही संयुक्त राष्ट्र ने लीबिया पर हथियारों की खरीद-बिक्री के लिए सख्त प्रतिबंध लगा रखे हैं। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी इन दावों को खारिज करते हुए तर्क दे रहे हैं कि इस समझौते से किसी भी वैश्विक नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है। पाकिस्तान का मानना है कि कई अन्य देश भी लीबिया को रक्षा सहायता उपलब्ध करा रहे हैं। लीबिया में अपनी इस नई एंट्री के जरिए पाकिस्तान न केवल उत्तरी अफ्रीका के क्षेत्र में अपना रणनीतिक दबदबा कायम करना चाहता है, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में खुद को एक बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में भी प्रोजेक्ट करने की कोशिश में है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: पाकिस्तान का रक्षा निर्यात में सक्रिय होना भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर असर डाल सकता है।\n\nनिवेशकों के लिए: वैश्विक रक्षा बाजार में पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता और उसके रक्षा सौदों पर कड़ी नजर रखना निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. लीबिया में पाकिस्तान क्या भूमिका निभा रहा है?\nपाकिस्तान लीबिया की दो प्रतिद्वंद्वी सरकारों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है ताकि देश में शांति वार्ता सफल हो सके।\n\n2. पाकिस्तान और लीबिया के बीच कौन सी डिफेंस डील हुई है?\nदिसंबर 2025 में पाकिस्तान ने लीबियाई पूर्वी सेना के साथ 4 अरब डॉलर से अधिक की डिफेंस डील की, जिसमें 16 JF-17 लड़ाकू विमान और 12 सुपर मुशशाक विमान शामिल हैं।\n\n3. क्या लीबिया पर हथियारों की खरीद पर कोई प्रतिबंध है?\nजी हां, संयुक्त राष्ट्र ने 2011 से लीबिया पर हथियारों की खरीद-बिक्री को लेकर प्रतिबंध लगा रखा है।\n\n4. 36 महीनों के प्लान में कौन प्रमुख पदों पर रहेगा?\nप्रस्ताव के अनुसार, अब्दुलहामिद दबेबाह प्रधानमंत्री बने रहेंगे और सद्दाम हफ्तार को प्रेसिडेंशियल काउंसिल का चेयरमैन बनाया जाएगा।",
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  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-07-07",
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    "पाकिस्तान",
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    "मध्यस्थता",
    "डिफेंस डील",
    "असीम मुनीर",
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