मॉस्को को उत्तर कोरिया से मिलीं घातक बैलिस्टिक मिसाइलों की नई खेप, जेलेंस्की ने सुरक्षा पर जताया गहरा संकट उत्तर कोरिया ने रूसी सेना को 40 नई बैलिस्टिक मिसाइलों सहित 120 मिसाइलें और विशेष सैन्य इकाई भेजी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस बढ़ते रक्षा गठबंधन को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। पूर्वी यूरोप के रणक्षेत्र में सैन्य समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, जहां उत्तर कोरिया ने रूस के युद्ध प्रयासों को समर्थन देने के लिए अपनी भागीदारी को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है। प्योंगयांग की ओर से रूसी सेना को अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइलों की एक नई खेप सौंपी गई है, जिसके साथ एक विशेष सैन्य दस्ते को भी रूसी क्षेत्र में तैनात किया गया है। इस घटनाक्रम पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा कि यह कदम दोनों देशों के बीच गहराते रक्षा और रणनीतिक संबंधों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। कीव प्रशासन के अनुसार, प्योंगयांग द्वारा उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर यूक्रेनी बुनियादी ढांचे पर हमलों की तीव्रता बढ़ाने की एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है। सैन्य इकाई और मिसाइल बेड़े का विस्तृत विवरण यूक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी एचयूआर द्वारा साझा की गई विस्तृत जानकारी के मुताबिक, इस नई तैनाती में लगभग 90 उत्तर कोरियाई सैन्य कर्मी, 6 मिसाइल लॉन्चर और 120 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। इस आपूर्ति की सबसे चिंताजनक बात यह है कि इसमें 40 बिल्कुल नई KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल की गई हैं। यूक्रेनी रक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी देशों, विशेष रूप से अमेरिका में निर्मित पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार में आ रही कमी के कारण यूक्रेनी वायु रक्षा प्रणाली के लिए इन बैलिस्टिक हमलों को हवा में नाकाम करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन के खिलाफ बड़े पैमाने पर शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद से मॉस्को और प्योंगयांग के बीच सैन्य सहयोग लगातार अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ रहा है। द्विपक्षीय रक्षा संधि और जमीनी बल की भागीदारी रूस और उत्तर कोरिया के बीच यह सैन्य सहयोग एक औपचारिक कानूनी ढांचे के तहत संचालित हो रहा है। जून 2024 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्योंगयांग यात्रा के दौरान उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के साथ 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस ऐतिहासिक समझौते में एक महत्वपूर्ण पारस्परिक सुरक्षा खंड शामिल है, जो प्रावधान करता है कि यदि किसी भी देश पर बाहरी सशस्त्र हमला होता है, तो दूसरा देश तुरंत सैन्य सहायता और अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराएगा। अप्रैल 2025 में उत्तर कोरिया ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया था कि किम जोंग उन की मंजूरी के बाद उसके सैनिकों को रूसी सेना के साथ मिलकर लड़ने के लिए भेजा गया है। इन उत्तर कोरियाई सैनिकों ने रूस के कुर्स्क सीमावर्ती क्षेत्र में जारी युद्ध अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिसकी पुष्टि बाद में रूसी सरकार द्वारा भी सार्वजनिक रूप से की गई। विशाल गोला-बारूद शिपमेंट का इतिहास दोनों राष्ट्रों के बीच हथियारों का हस्तांतरण केवल बैलिस्टिक मिसाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारी मात्रा में आर्टिलरी शेल भी शामिल हैं। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय द्वारा 2024 में जारी एक विस्तृत विश्लेषण के अनुसार, उत्तर कोरिया ने फरवरी 2024 तक रूस को गोला-बारूद से भरे लगभग 6,700 शिपिंग कंटेनर भेजे थे। इस विशाल खेप में 152 मिमी कैलिबर के 30 लाख से अधिक आर्टिलरी शेल और 122 मिमी कैलिबर के लगभग 5 लाख राउंड शामिल थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में सामने आई एक अतिरिक्त मूल्यांकन रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि सितंबर 2023 से मार्च 2025 के दौरान 4 रूसी मालवाहक जहाजों ने प्योंगयांग और रूसी बंदरगाहों के बीच 64 समुद्री यात्राएं कीं, जिनके जरिए अनुमानित 40 लाख से 60 लाख अतिरिक्त आर्टिलरी शेल पहुंचाए गए। यूक्रेनी खुफिया एजेंसी एचयूआर का अनुमान है कि 2023 के मध्य से अब तक कुल 40 लाख आर्टिलरी शेल की आपूर्ति की जा चुकी है, जिनमें से तीन-चौथाई से अधिक हिस्सेदारी 122 मिमी और 152 मिमी वाले गोलों की है। वोरोनिश में तैनाती और मिसाइलों की तकनीकी सीमाएं यूक्रेनी खुफिया एजेंसी एचयूआर के आधिकारिक प्रवक्ता आंद्री चेर्नियाक ने खुलासा किया है कि उत्तर कोरियाई मिसाइल यूनिट को रूस के पश्चिमी वोरोनिश क्षेत्र में स्थित 112वीं मिसाइल ब्रिगेड के साथ एकीकृत किए जाने की प्रबल संभावना है। आंद्री चेर्नियाक ने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि रूसी सेना ने पिछले सप्ताह किए गए एक हवाई हमले में उत्तर कोरिया द्वारा निर्मित बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया था, जो अगस्त 2025 के बाद से इस तरह के हथियार के प्रयोग का पहला दर्ज मामला है। उन्होंने जानकारी दी कि उत्तर कोरिया ने late 2023 से अगस्त 2025 के बीच मॉस्को को लगभग 150 KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलों की आपूर्ति की थी। यूक्रेनी सेना के तकनीकी विशेषज्ञों का आकलन है कि यद्यपि KN-23 और KN-24 मिसाइलों की मारक क्षमता और वॉरहेड ले जाने की क्षमता रूस की अपनी इस्कंदर मिसाइलों की तुलना में अधिक है, लेकिन इनकी सटीक लक्ष्य भेदने की क्षमता काफी कम है। इसी कम सटीकता के कारण आवासीय क्षेत्रों में गिरने से आम नागरिकों को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका आप पर असर वैश्विक सुरक्षा प्रभाव: उत्तर कोरिया और रूस के बीच गहराते सैन्य गठजोड़ से पूर्वी यूरोप में युद्ध लंबा खींचने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति पर दबाव बना रह सकता है। भारतीय पाठकों के लिए: वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति शृंखला में जारी अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सवाल-जवाब 1. उत्तर कोरिया ने रूस को कौन सी मिसाइलें सप्लाई की हैं? उत्तर कोरिया ने रूस को अपनी उन्नत KN-23 और KN-24 बैलिस्टिक मिसाइलों की आपूर्ति की है। 2. यूक्रेन में उत्तर कोरियाई मिसाइलों को रोकने में क्या समस्या आ रही है? यूक्रेनी सेना के अनुसार अमेरिकी पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक कम होने से इन बैलिस्टिक हमलों से बचाव सीमित हो गया है। 3. रूस और उत्तर कोरिया के बीच सैन्य समझौते का क्या आधार है? जून 2024 में पुतिन और किम जोंग उन ने 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी संधि' पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत हमला होने पर एक-दूसरे को तत्काल सैन्य सहायता देने का नियम है। 4. उत्तर कोरिया की KN-23 और KN-24 मिसाइलों की क्या खासियत और कमी है? इन मिसाइलों की रेंज रूस की इस्कंदर मिसाइलों से ज्यादा है और वॉरहेड बड़ा है, लेकिन इनकी सटीकता काफी कम है। https://trendkia.com/world/moscow-ko-north-korea-se-milin-ghataka-bailistika-misailon-ki-nai-khepa-zelenskyy-ne-suraksha-para-jataya-gahara-snkata-14155 TrendKia — Har trend, sabse pehle.