नरसंहार के दोषी रातको म्लादिच का 84 वर्ष की आयु में हेग यूएन जेल में निधन पूर्व युगोस्लाविया में युद्ध अपराधों और नरसंहार के लिए उम्रकैद की सजा काट रहे रातको म्लादिच का द हेग स्थित यूएन जेल अस्पताल में 84 साल की उम्र में निधन हो गया है। पूर्व युगोस्लाविया में हुए भयावह युद्ध के दौरान नरसंहार, युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ संगीन अपराधों के दोषी ठहराए गए रातको म्लादिच का निधन हो गया है। द हेग में संयुक्त राष्ट्र की जेल में सजा काट रहे 84 वर्षीय म्लादिच ने अस्पताल में अंतिम सांस ली। संयुक्त राष्ट्र के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर उनकी मृत्यु की पुष्टि की है। जीवन के अंतिम चरण में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे म्लादिच को यूएन जेल परिसर के अस्पताल में उपशामक देखभाल (पेलिएटिव केयर) दी जा रही थी। वर्षों तक अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रणाली से भागने और अंततः पकड़े जाने के बाद, उनके जीवन का अंत द हेग की उसी हिरासत में हुआ जहाँ उन्हें उनके किए की सजा सुनाई गई थी। युगोस्लाविया युद्ध, नरसंहार और उम्रकैद की ऐतिहासिक सजा रातको म्लादिच को 1992 से 1995 के दौरान पूर्व युगोस्लाविया में छिड़े रक्तपात और हिंसा के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया था। उस दौर में बोस्नियाई युद्ध के दौरान हजारों निर्दोष लोगों की हत्याएं, विस्थापन और अमानवीय अत्याचार हुए थे। इन भयावह कृत्यों के कारण उन्हें दुनिया भर में बुचर ऑफ बोस्निया के नाम से जाना जाने लगा। अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण ने म्लादिच पर नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के गंभीर आरोप तय किए थे। लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहियों के बाद वर्ष 2017 में द हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र अदालत ने उन्हें इन सभी अपराधों का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद म्लादिच की ओर से इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी, लेकिन वर्ष 2021 में अपील अदालत ने भी उनकी उम्रकैद की सजा को पूरी तरह बरकरार रखा। 16 वर्षों की फरारी के बाद सर्बिया के ग्रामीण इलाके से हुई थी गिरफ्तारी बोस्नियाई युद्ध की समाप्ति के बाद रातको म्लादिच अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए लंबे समय तक भूमिगत रहे। वह लगभग 16 वर्षों तक लगातार पुलिस और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों को चकमा देते हुए फरार रहे। इस लंबे समय के दौरान उनकी तलाश में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा अभियान चलाया गया। आखिरकार वर्ष 2011 में उन्हें सर्बिया के एक सुदूर ग्रामीण इलाके से खोज निकाला गया और गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें मुकदमे का सामना करने के लिए द हेग स्थानांतरित कर दिया गया, जहाँ संयुक्त राष्ट्र की विशेष अदालत में उनके खिलाफ ऐतिहासिक सुनवाई शुरू हुई। रिहाई की याचिका खारिज और अंतिम समय की चिकित्सा देखभाल जीवन के अंतिम दौर में रातको म्लादिच का स्वास्थ्य लगातार बिगड़ता चला गया। इस साल मई के महीने में द हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र अदालत ने उनकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। म्लादिच के वकीलों ने उनकी नाजुक स्थिति का हवाला देते हुए रिहाई की गुहार लगाई थी। मामले की सुनवाई करते हुए जज ने यह स्वीकार किया था कि म्लादिच की स्वास्थ्य स्थिति वास्तव में गंभीर और चिंताजनक है। हालांकि, जज ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन और अस्पताल द्वारा उन्हें पूरी तरह से व्यापक, उचित और मानवीय चिकित्सा उपचार प्रदान किया जा रहा है, इसलिए उन्हें रिहा करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है। अंततः इसी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इसका आप पर असर यह घटना अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार कानून और वैश्विक आपराधिक न्याय प्रणाली के संदर्भ में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदेश देती है। • वैश्विक स्तर पर: यह घटना यह रेखांकित करती है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मानवता के खिलाफ किए गए गंभीर अपराधों और नरसंहार के दोषियों को अंततः कानूनी जवाबदेही और सजा का सामना करना पड़ता है। • अंतरराष्ट्रीय न्याय के क्षेत्र में: द हेग स्थित यूएन ट्रिब्यूनल की यह कार्यवाही दर्शाती है कि युद्ध अपराधों के मामलों में न्याय प्रक्रिया दशकों बाद भी अपनी तार्किक परिणति तक पहुँचती है। सवाल-जवाब 1. रातको म्लादिच की मृत्यु कहाँ और किस उम्र में हुई? रातको म्लादिच का निधन द हेग स्थित संयुक्त राष्ट्र जेल अस्पताल में 84 वर्ष की आयु में हुआ। 2. रातको म्लादिच को किस अपराध के लिए सजा सुनाई गई थी? उन्हें 1992 से 1995 के बीच हुए युगोस्लाविया युद्ध के दौरान नरसंहार, युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए उम्रकैद की सजा मिली थी। 3. म्लादिच को कब और कहाँ से गिरफ्तार किया गया था? 16 साल तक फरार रहने के बाद म्लादिच को वर्ष 2011 में सर्बिया के एक ग्रामीण इलाके से गिरफ्तार किया गया था। 4. क्या अदालत ने म्लादिच की रिहाई याचिका स्वीकार की थी? नहीं, द हेग स्थित यूएन कोर्ट ने मई में उनकी रिहाई याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि उन्हें जेल में पर्याप्त देखभाल मिल रही है। https://trendkia.com/world/narasnhara-ke-doshi-ratko-mladi-ka-84-varsha-ki-ayu-men-the-hague-un-jela-men-nidhana-23246 TrendKia — Har trend, sabse pehle.