# मानव इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ, ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ

> ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि मानव इतिहास में किसी भी दौर में इतने बड़े पैमाने पर लोगों तक ऊर्जा नहीं पहुंचाई गई।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/never-seen-in-human-history-australian-pm-anthony-albanese-heaps-massive-praise-on-pm-narendra-modi-39131 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, एंथनी अल्बनीज, भारत ऑस्ट्रेलिया संबंध, ऊर्जा सुरक्षा, मिडिल ईस्ट संकट, कच्चा तेल, रणनीतिक साझेदारी

वैश्विक कूटनीति के गलियारों में इस समय ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज का एक बयान चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने सार्वजनिक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और उनकी नीतियों की खुली प्रशंसा की है।

 

## मानव सभ्यता के इतिहास में अभूतपूर्व कार्य

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मानव सभ्यता के संपूर्ण इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। उनका यह बयान भारत के उस विराट परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा था, जिसके तहत देश के कोने-कोने तक बिजली और ईंधन के साधन पहुंचाए गए हैं। एंथनी अल्बनीज ने दुनिया के सामने माना कि भारत जैसे विशाल भौगोलिक और सामाजिक विविधता वाले राष्ट्र में हर नागरिक तक ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करना कोई साधारण उपलब्धि नहीं है।

 उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के शासनकाल में जितने बड़े पैमाने पर लोगों को ऊर्जा की सुविधा मिली है, वैसी मिसाल पूरी मानव सभ्यता के इतिहास में किसी अन्य दशक या क्षेत्र में देखने को नहीं मिलती। इस दौरान उन्होंने कैनबरा और नई दिल्ली के बीच गहरे होते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनका व्यक्तिगत और राजनीतिक रिश्ता बेहद मजबूत और भरोसेमंद बन चुका है, जो आने वाले कई दशकों तक दोनों देशों के लिए मददगार साबित होगा।

 

## मिडिल ईस्ट का संघर्ष और वैश्विक एनर्जी संकट

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में सामने आई है जब पूरी दुनिया ऊर्जा के मोर्चे पर एक गंभीर संकट से जूझ रही है। पश्चिम यानी मिडिल ईस्ट क्षेत्र में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमर तोड़ दी है। इस भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बुरा प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ा है, जिसे वैश्विक तेल व्यापार की सबसे अहम लाइफलाइन माना जाता है।

 इस बेहद तंग समुद्री मार्ग से दुनिया भर का लगभग एक-चौथाई कच्चा तेल गुजरता है। युद्ध की वर्तमान परिस्थितियों के कारण इस जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है। जब ईंधन के टैंकर अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच पाते, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का अकाल पड़ जाता है और कीमतें रॉकेट की रफ्तार से ऊपर जाने लगती हैं। यूरोप से लेकर एशिया तक के तमाम देश इस समय इसी भारी किल्लत के परिणामों का सामना कर रहे हैं।

 

## पड़ोसी देशों की लाचारी और भारत की स्थिरता

मिडिल ईस्ट के इस महासंकट का सबसे भीषण प्रभाव भारत के पड़ोसी देशों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुल्क ऊर्जा की भारी कमी से त्रस्त हैं और वहां की आम जनता तमाम मुश्किलों का सामना कर रही है। पाकिस्तान में घंटों बिजली गुल रहने की समस्या आम हो चुकी है, जबकि पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने के कारण वाहन चालकों को मजबूरन अपने साधन घरों पर ही खड़े करने पड़ रहे हैं।

 ठीक इसी तरह बांग्लादेश में भी नेचुरल गैस और तेल की किल्लत की वजह से कई फैक्ट्रियों को ताले लगाने पड़े हैं, जिससे उनका कुल निर्यात कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके उलट, भारत ने इस वैश्विक उठापटक और महासंकट के बीच भी अपने घरेलू बाजार में पेट्रोल, डीजल या रसोई गैस की कोई कमी नहीं होने दी। देश के किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन खत्म होने की नौबत नहीं आई और न ही कीमतें अनियंत्रित हुईं। भारत की इस आर्थिक और ऊर्जा स्थिरता को देखकर दुनिया भर के बड़े-बड़े विशेषज्ञ भी हैरान हैं।

 

## भारत की दूरदर्शी रणनीति और विविधीकरण का मास्टरस्ट्रोक

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे समय में जब वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई थी, देश ने एक बेहद सोची-समझी और दूरदर्शी नीति पर अमल किया। संसद के पटल पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात का खुलासा किया था कि अतीत में भारत केवल 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था।

 हालांकि, बदलती वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के संभावित खतरों को भांपते हुए भारत ने अपने आयात स्रोतों का दायरा काफी बड़ा कर दिया। वर्तमान में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 41 अलग-अलग स्रोत तैयार कर रखे हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि जब संघर्ष के कारण किसी एक क्षेत्र से आने वाला तेल बाधित हुआ, तो तुरंत दूसरे वैकल्पिक देशों से सप्लाई सुचारू करवा ली गई। इसी अचूक मास्टरस्ट्रोक के चलते देश के 140 करोड़ नागरिकों को कभी भी ईंधन के संकट से दो-चार नहीं होना पड़ा।

 

## 140 करोड़ भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि

पश्चिम एशिया के सुलगते हालातों के बीच भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था कि उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता क्या है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मसले पर देश का रुख बहुत मजबूती के साथ रखते हुए कहा कि वैश्विक बाजार में चाहे कितनी भी उथल-पुथल क्यों न मचे, सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा को पुख्ता करना है।

 भारत ने किसी भी महाशक्ति के दबाव में आए बिना पूरी तरह स्वतंत्र विदेश नीति का पालन किया। रूस समेत कई अन्य देशों से किफायती दरों पर कच्चा तेल खरीदकर देश के भीतर महंगाई के दबाव को प्रभावी ढंग से रोका गया। एंथनी अल्बनीज का यह बयान इस बात का जीवंत प्रमाण है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया की यह साझेदारी अब एक नए और सुनहरे दौर में प्रवेश कर चुकी है।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में जारी तनाव और भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर दुनियाभर के उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, हालांकि भारत में नीतिगत विविधीकरण के कारण घरेलू स्तर पर कीमतों और आपूर्ति में स्थिरता बनी हुई है।

- **भारत में:** आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में किसी बेकाबू उछाल या गंभीर किल्लत का सामना नहीं करना पड़ा है। सरकार द्वारा विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात के वैकल्पिक स्रोत तैयार करने से देश के भीतर महंगाई नियंत्रित रही है।

- **आर्थिक स्थिरता:** वैकल्पिक बाजारों से किफायती दरों पर ईंधन मिलने के कारण देश के भीतर परिवहन और लॉजिस्टिक्स की लागत स्थिर बनी हुई है। इससे रोजमर्रा की उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में अनावश्यक बढ़ोतरी टल गई है।

- **ऊर्जा सुरक्षा:** वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने के बावजूद देश के चौदह सौ करोड़ नागरिकों के लिए रसोई गैस और ईंधन की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। यह नीति भविष्य के किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करती है।

- **व्यापारिक निरंतरता:** देश के भीतर औद्योगिक इकाइयों और ऊर्जा क्षेत्र को निरंतर ईंधन मिलने से मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी हैं। इससे पड़ोसी देशों की तरह आर्थिक ठहराव या फैक्ट्रियों के बंद होने जैसी स्थितियां भारत में उत्पन्न नहीं हुईं।

- **रणनीतिक लाभ:** स्वतंत्र विदेश नीति और विविधीकृत समझौतों के जरिए किसी एक देश या मार्ग पर निर्भरता खत्म की गई है। इससे दीर्घकालिक रूप से घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को सुरक्षित और स्थिर दर पर ऊर्जा मिलती रहेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की मजबूत स्थिति कई सोची-समझी रणनीतिक पहलों का परिणाम है। इस संकट के समय देश के भीतर ऊर्जा आपूर्ति के स्थिर रहने के पीछे पुख्ता प्रशासनिक कारण और ऐतिहासिक निर्णय रहे हैं।

- **स्रोत विविधीकरण:** भारत ने अपनी जरूरत के कच्चे तेल के स्रोतों का दायरा बढ़ाकर 27 देशों से बढ़ाकर 41 अलग-अलग देशों तक कर दिया। इससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र में तनाव होने पर तुरंत दूसरे विकल्पों से आपूर्ति चालू रखना संभव हो सका।

- **स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट:** पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण तेल परिवहन की प्रमुख लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलमार्ग पर जहाजों की आवाजाही ठप हो गई।

- **स्वतंत्र विदेश नीति:** भारत ने किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी और रूस सहित विभिन्न देशों से किफायती दरों पर कच्चा तेल खरीदा।

- **पड़ोसी देशों की विफलता:** पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मुल्क अपने ऊर्जा आयात के स्रोतों को समय पर विविधतापूर्ण नहीं बना पाए, जिसके कारण उन्हें भारी ईंधन किल्लत और बिजली संकट का सामना करना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने किस मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की?
उन्होंने एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के एक प्रतिष्ठित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की।

### 2. मानव इतिहास को लेकर अल्बनीज ने क्या प्रमुख दावा किया?
उन्होंने दावा किया कि मानव सभ्यता के इतिहास में कभी भी इतने बड़े पैमाने पर लोगों तक ऊर्जा और बिजली नहीं पहुंचाई गई जितनी पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत में हुआ है।

### 3. वैश्विक ऊर्जा बाजार में मौजूदा संकट का मुख्य कारण क्या है?
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण तेल सप्लाई की मुख्य लाइफलाइन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही ठप होना इसका मुख्य कारण है।

### 4. भारत अपनी जरूरत का कितना प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है।

### 5. संकट से निपटने के लिए भारत ने अपने तेल स्रोतों की संख्या कितनी कर ली है?
भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 41 अलग-अलग स्रोत तैयार किए हैं, जबकि पहले यह संख्या केवल 27 देशों तक सीमित थी।

### 6. पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश की क्या स्थिति है?
वहां ईंधन और नेचुरल गैस की भारी किल्लत है जिसके चलते बिजली कटौती हो रही है और कई फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं।

### 7. भारत सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या रही है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बीच देश के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

### 8. कैनबरा और नई दिल्ली के संबंधों पर अल्बनीज ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनका और ऑस्ट्रेलिया का रिश्ता बहुत गहरा और भरोसेमंद है जो आने वाले दशकों तक दोनों देशों के काम आएगा।

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