नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन: मोदी, पुतिन और जिनपिंग का जुटान, पश्चिम एशिया से बांग्लादेश तक 3 बड़े मुद्दों पर रहेगी नजर भारत 5 साल बाद 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक में रूस, भारत और चीन की आरआईसी तिकड़ी समेत विस्तारित सदस्य देशों के प्रमुख कूटनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर मंथन होगा। भारत की राजधानी नई दिल्ली 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भव्य मंच बनने के लिए तैयार है। यह आयोजन एक सामान्य कूटनीतिक बैठक से कहीं आगे बढ़कर वैश्विक राजनीति का नया केंद्र बिंदु बनने जा रहा है। भारत में पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रहे इस शिखर सम्मेलन में दुनिया के कई प्रमुख देशों के शीर्ष नेता एक साथ एक ही टेबल पर नजर आएंगे। इस बैठक में रूस, भारत और चीन का शक्तिशाली आरआईसी मंच एक बार फिर वैश्विक धुरी को प्रभावित करता दिखेगा। इसके अतिरिक्त ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की उपस्थिति की संभावना ने भी पश्चिमी एशिया के भावी समीकरणों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्सुकता बढ़ा दी है। आरआईसी तिकड़ी का रणनीतिक उभार और वैश्विक प्रभाव इस शिखर सम्मेलन की सबसे अहम रणनीतिक बात वैश्विक कूटनीति के पटल पर आरआईसी यानी रूस, भारत और चीन की तिकड़ी का पुनर्मिलन माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक इस तिकड़ी को एक ऐसा प्रभावशाली गुट मानते हैं, जिसकी साझी सहमति पश्चिमी दुनिया के पारंपरिक प्रभुत्व को चुनौती देने में सक्षम है। जब दुनिया की ये तीन अग्रणी अर्थव्यवस्थाएं और जनसांख्यिकीय शक्तियां एक साथ बैठेंगी, तो ऊर्जा बाजार, अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारे और डी-डॉलराइजेशन जैसे गंभीर विषयों पर नई रणनीतियों की रूपरेखा तय होगी। नई दिल्ली का यह मंच यह स्पष्ट संदेश देगा कि वैश्विक निर्णयों की दिशा केवल पश्चिमी देशों के रुख से निर्धारित नहीं होगी। भारत-चीन संबंधों का मोड़ और लद्दाख तनाव के बाद का परिदृश्य यदि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली आते हैं, तो यह अक्टूबर 2019 के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर मामल्लपुरम में अनौपचारिक शिखर वार्ता हुई थी। हालांकि उसके कुछ समय बाद, वर्ष 2020 में पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य तनाव उत्पन्न होने के कारण दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में गंभीर कड़वाहट आ गई थी। गतिरोध को समाप्त करने के लिए लंबे समय तक कूटनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत जारी रही। इसके सुखद परिणाम अक्टूबर 2024 में रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान सामने आए, जब प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में सीमा पर सैन्य वापसी और गश्त को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी। इसके बाद पिछले वर्ष अगस्त में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। नई दिल्ली में प्रस्तावित संभावित द्विपक्षीय वार्ता को भारत-चीन सीमा सुरक्षा और आर्थिक संबंधों की भावी दिशा के लिए बेहद निर्णायक माना जा रहा है। शिखर सम्मेलन के एजेंडे में शामिल 3 सबसे बड़े मुद्दे नई दिल्ली सम्मेलन के दौरान मुख्य रूप से तीन बड़े कूटनीतिक विषयों पर गहन मंथन होने की संभावना है • ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा: इस वर्ष फरवरी में पश्चिमी एशिया में हुए इजरायली और अमेरिकी हमलों के बाद क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव काफी बढ़ गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान का दिल्ली आगमन न केवल ईरान का पक्ष स्पष्ट करने में सहायक होगा, बल्कि भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और चाबहार पोर्ट परियोजना को गति प्रदान करने के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। • बांग्लादेश और पड़ोसी कूटनीति: भारत ने अपनी क्षेत्रीय कूटनीतिक पहल के तहत गैर-सदस्य देशों को भी आमंत्रित किया है। इसमें बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बिम्सटेक (BIMSTEC) के वर्तमान अध्यक्ष के रूप में विशेष अतिथि के तौर पर बुलाया गया है। यह आमंत्रण दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच आपसी विश्वास और सहभागिता को सुदृढ़ करने की भारत की नीति को रेखांकित करता है। • फिलिस्तीन मुद्दे पर आम सहमति की चुनौती: आधिकारिक ब्रिक्स घोषणापत्रों में फिलिस्तीन समस्या और 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' की भाषा को लेकर सदस्यों के बीच भिन्न राय है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को छोड़कर बाकी सभी सदस्य देश कठोर भाषा का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में ईरान और UAE के मतभेदों के बीच सहमति बनाना मेजबान भारत के लिए एक बड़ा कूटनीतिक परीक्षण होगा। विस्तारित ब्रिक्स के भीतर खींचतान और भारत की मध्यस्थ भूमिका जनवरी 2024 में ब्रिक्स का विस्तार करते हुए इसमें ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था। इस बार सम्मेलन का आधिकारिक विषय 'Building for resilience, innovation, cooperation and sustainability' रखा गया है। हालांकि इस सहयोगात्मक विषय के पीछे बहुपक्षीय मेज पर तीखी कूटनीतिक खींचतान भी मौजूद है। फरवरी के हमलों के बाद से ईरान और संयुक्त अरब अमीरात अलग-अलग गुटों का समर्थन कर रहे हैं, जिससे ब्रिक्स के आंतरिक कामकाज पर असर पड़ा है। इस मतभेद का असर मई में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में देखने को मिला था, जो बिना किसी साझे घोषणापत्र जारी किए ही समाप्त हो गई थी। चूंकि भारत के संबंध ईरान और संयुक्त अरब अमीरात दोनों के साथ गहरे और रणनीतिक हैं, इसलिए दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी होंगी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों देशों के बीच की खाई को पाटकर सर्वसम्मत साझा घोषणापत्र तैयार कराने में किस प्रकार की मध्यस्थ भूमिका निभाते हैं। इसका आप पर असर भारत के लिए: नई दिल्ली में इस बड़े सम्मेलन की मेज़बानी से भारत का वैश्विक कूटनीतिक प्रभाव बढ़ेगा और चाबहार पोर्ट जैसी महत्वपूर्ण सामरिक परियोजनाओं को गति मिल सकती है। वैश्विक स्तर पर: कच्चे तेल के कारोबार, व्यापारिक लेन-देन में डी-डॉलराइजेशन और मध्य पूर्व में जारी तनाव के समाधान की दिशा में यह बैठक दूरगामी प्रभाव डाल सकती है। सवाल-जवाब 1. नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कब आयोजित हो रहा है? यह शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित हो रहा है। 2. क्या चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस सम्मेलन के लिए भारत आ रहे हैं? यदि शी जिनपिंग सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो यह अक्टूबर 2019 में हुई मामल्लपुरम वार्ता के बाद उनका पहला भारत दौरा होगा। 3. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की मुख्य थीम क्या है? इस सम्मेलन की आधिकारिक थीम 'Building for resilience, innovation, cooperation and sustainability' रखी गई है। 4. बांग्लादेश के किस नेता को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है? बिम्स्टेक (BIMSTEC) के अध्यक्ष के रूप में बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आमंत्रित किया गया है। 5. फिलिस्तीन के मुद्दे पर ब्रिक्स देशों के बीच क्या मतभेद हैं? संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को छोड़कर ब्रिक्स के अन्य सभी सदस्य देश आधिकारिक दस्तावेज़ों में फिलिस्तीन और टू-स्टेट सॉल्यूशन पर सख्त रुख चाहते हैं, जबकि UAE नरम भाषा के पक्ष में है। https://trendkia.com/world/new-delhi-men-brics-sammelana-modi-putin-aura-xi-jinping-ka-jutana-pashchima-eshiya-se-bangladesh-taka-3-bare-muddon-para-rahegi-n-12181 TrendKia — Har trend, sabse pehle.