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  "type": "article",
  "title": "निर्वासित उइगर नेतृत्व ने चीन के साथ तुर्की की बढ़ती सुरक्षा साझेदारी को बताया विश्वासघात",
  "summary": "ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्ज़ाइल ने तुर्की पर आरोप लगाया है कि वह चीन के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाकर उइगर और अन्य तुर्किक समुदायों के साथ विश्वासघात कर रहा है। यह आरोप चीन और तुर्की के उप विदेश मंत्रियों की 16 जुलाई की मुलाकात के बाद सामने आया है।",
  "content": "निर्वासन में चल रही एक उइगर प्रशासनिक इकाई ने तुर्की पर आरोप लगाया है कि वह चीन के साथ अपनी सुरक्षा साझेदारी को उन तुर्किक समुदायों की कीमत पर आगे बढ़ा रहा है, जो चीनी शासन के अधीन रहते हैं। यह आरोप दोनों देशों के वरिष्ठ राजनयिकों के बीच हाल ही में हुई एक नई दौर की बातचीत के कुछ दिनों बाद सामने आया है।\n\nविवाद की वजह\nईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्ज़ाइल ने यह प्रतिक्रिया चीन के उप विदेश मंत्री मियाओ देयू और तुर्की के उप विदेश मंत्री बेरिस एकिंसी के बीच 16 जुलाई को हुई मुलाकात के बाद दी। चीन के विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस बैठक में दोनों पक्ष कानून प्रवर्तन और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए, जबकि तुर्की ने वन चाइना सिद्धांत को दोहराते हुए भरोसा दिलाया कि उसकी जमीन का इस्तेमाल चीन की तथाकथित संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।\n\nनिर्वासित सरकार ने बताया विश्वासघात\nएग्ज़ाइल सरकार यानी ETGIE ने एक्स पर पोस्ट किए बयान में इस बातचीत को उइगर, कज़ाख, किर्गिज़ और अन्य तुर्किक समुदायों के खिलाफ दशकों से चले आ रहे विश्वासघात की एक और कड़ी बताया। संगठन का दावा है कि ये समुदाय ईस्ट तुर्किस्तान में चीन के तथाकथित नरसंहार और औपनिवेशिक कब्जे के तहत पीड़ित हैं। एक अलग बयान में संगठन ने तुर्की के रुख को हकीकत की पूरी तरह उलटी तस्वीर बताया और कहा कि ईस्ट तुर्किस्तान असल में तुर्किक लोगों की कब्जा की गई मातृभूमि है, न कि वैध चीनी क्षेत्र। इसने इस दावे को 1940 के दशक के आखिर से जोड़ा, जब उसके मुताबिक चीनी सेना ने अल्पकालिक स्वतंत्र ईस्ट तुर्किस्तान गणराज्य को उखाड़ फेंका और वहां गैरकानूनी औपनिवेशिक नियंत्रण थोप दिया।\n\nबयान में कहा गया, \"यह कूटनीति नहीं है। यह अपराध में साझेदारी है।\" संगठन का आरोप है कि तुर्की का बीजिंग के साथ लंबे समय से चला आ रहा सुरक्षा संबंध, जिसे वह 1996 से जोड़ता है, ईस्ट तुर्किस्तान की आज़ादी की मांग करने वाले आंदोलन की निगरानी, घुसपैठ, अपराधीकरण और दमन में मददगार साबित हुआ है।\n\nअलग मुलाकात, सीधी अपील\nआलोचना के साथ ही ETGIE ने यह भी बताया कि उसके विदेश और सुरक्षा मंत्री सालिह हुदायार ने अटलांटिक काउंसिल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के इतर तुर्की के उप विदेश मंत्री लेवेंट गुमरुक्जू से अलग से मुलाकात की। बताया जाता है कि इस बातचीत में हुदायार ने अंकारा से बीजिंग के साथ सुरक्षा और खुफिया सहयोग खत्म करने और इसके बजाय दुनिया के मंच पर ईस्ट तुर्किस्तान की तरफ से आवाज़ उठाने की मांग की।\n\nजबरन मजदूरी और नसबंदी के आरोप\nETGIE ने इस बात को भी रेखांकित किया कि यह आलोचना ऐसे समय आई है जब तुर्की और चीन अपने राजनयिक संबंधों के 55 साल पूरे कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि यह मौका लाखों उइगर और अन्य तुर्किक लोगों की उस हकीकत को छुपा देता है, जिन्हें उसके मुताबिक कैद रखा गया है, जबरन मजदूरी कराई गई है, बिना सहमति नसबंदी की गई है और परिवारों से अलग किया गया है। संगठन ने चीन के \"जातीय एकता और प्रगति प्रोत्साहन कानून\" का भी हवाला दिया, जिसे मार्च 2026 में लागू किया गया और जो उसके मुताबिक नरसंहार जैसी नीतियों को कानूनी आधार देता है।\n\nबीजिंग की प्रतिक्रिया\nचीन लगातार शिनजियांग में नरसंहार या मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि क्षेत्र में उसके कदम किसी समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि उग्रवाद, अलगाववाद और आतंकवाद से निपटने के लिए हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ETGIE ने तुर्की-चीन बातचीत की आलोचना क्यों की?\n16 जुलाई को चीन और तुर्की के उप विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी, जिसे ETGIE उइगर और अन्य तुर्किक समुदायों के खिलाफ विश्वासघात मानता है।\n\n2. 16 जुलाई की बैठक में किसने हिस्सा लिया?\nचीन के उप विदेश मंत्री मियाओ देयू और तुर्की के उप विदेश मंत्री बेरिस एकिंसी ने यह बातचीत की।\n\n3. तुर्की ने चीन को क्या भरोसा दिलाया?\nतुर्की ने वन चाइना सिद्धांत दोहराया और कहा कि उसकी जमीन का इस्तेमाल चीन की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ नहीं होने दिया जाएगा।\n\n4. सालिह हुदायार कौन हैं और उन्होंने क्या मांग की?\nसालिह हुदायार ETGIE के विदेश और सुरक्षा मंत्री हैं, उन्होंने तुर्की के उप विदेश मंत्री लेवेंट गुमरुक्जू से मुलाकात में अंकारा से बीजिंग के साथ सुरक्षा सहयोग खत्म करने की मांग की।\n\n5. ETGIE किन मानवाधिकार आरोपों का हवाला दे रहा है?\nसंगठन का दावा है कि लाखों उइगर और अन्य तुर्किक लोगों को कैद रखा गया है, जबरन मजदूरी कराई गई है, बिना सहमति नसबंदी की गई है और परिवारों से अलग किया गया है।\n\n6. मार्च 2026 में लागू हुए किस कानून का जिक्र किया गया?\nचीन के \"जातीय एकता और प्रगति प्रोत्साहन कानून\" का हवाला दिया गया, जिसे ETGIE नरसंहार जैसी नीतियों को कानूनी आधार देने वाला बताता है।\n\n7. चीन ने इन आरोपों पर क्या कहा?\nचीन लगातार शिनजियांग में नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को खारिज करता रहा है और कहता है कि उसके कदम उग्रवाद, अलगाववाद और आतंकवाद से निपटने के लिए हैं।",
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  "category": "दुनिया",
  "publishedAt": "2026-07-19",
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    "ईस्ट तुर्किस्तान",
    "उइगर",
    "तुर्की चीन संबंध",
    "सालिह हुदायार",
    "शिनजियांग",
    "वन चाइना नीति"
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