# उत्तर कोरिया ने जांची 90 डिग्री से गिरने वाली क्रूज मिसाइल, बंकर भेदी हथियारों से प्रायद्वीप में हलचल

> उत्तर कोरिया ने 90 डिग्री के सीधे कोण पर वार करने वाली नई रणनीतिक क्रूज मिसाइल और क्लस्टर वॉरहेड का परीक्षण किया है। दक्षिण कोरिया के सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक पहाड़ों और भूमिगत बंकरों को निशाना बनाने के लिए तैयार की गई है।

**Type:** article · **Category:** दुनिया · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/world/north-korea-ne-janchi-90-digri-se-girane-vali-kruja-misaila-bnkara-bhedi-hathiyaron-se-prayadvipa-men-halachala-55878 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, क्रूज मिसाइल, किम जोंग उन, सैन्य हथियार, क्लस्टर बम

कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने एक नई रणनीतिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण किया है, जो अपने निशाने पर सीधे लंबवत यानी 90 डिग्री के कोण पर गिरकर हमला कर सकती है। इस नए हथियार परीक्षण का मुख्य उद्देश्य मिसाइल की वर्टिकल स्ट्राइक क्षमता और उड़ान के आखिरी पलों में सटीक निशानेबाजी का मूल्यांकन करना था। मिसाइल के साथ एक मध्यम आकार के डिस्पर्सल यानी क्लस्टर वॉरहेड को भी परखा गया है। इस विकास ने पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि यह तकनीक बंकरों और पहाड़ों के भीतर छिपे कमांड सेंटरों को ध्वस्त करने की मंशा से तैयार मानी जा रही है।

## सीधे कोण से गिरने वाली तकनीक की कार्यप्रणाली
आमतौर पर परंपरागत क्रूज मिसाइलें जमीन या समुद्र की सतह के समानांतर उड़ते हुए तिरछे कोण से लक्ष्य से टकराती हैं। इसके विपरीत, उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रशासन द्वारा सोमवार को जांची गई प्रणाली में मिसाइल अपने लक्ष्य के बिल्कुल ऊपर पहुंचती है और फिर अचानक 90 डिग्री का तीव्र मोड़ लेकर सीधे नीचे की तरफ हमला बोलती है। इस सीधे प्रहार की वजह से मिसाइल को पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल की अतिरिक्त गति हासिल होती है, जिससे जमीन से टकराते समय उसका दबाव और प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। परीक्षण के दौरान मिसाइल के अंतिम चरण की गतिशीलता और सटीकता को प्रमाणित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

## क्लस्टर वॉरहेड और विनाशकारी क्षमता का दायरा
इस क्रूज मिसाइल प्रणाली में एक खास तरह का सब-मुनिशन बम यानी डिस्पर्सल वॉरहेड लगाया गया है, जिसे हवा में ही फटकर सैकड़ों छोटे बमों को चारों तरफ बिखेरने के लिए डिजाइन किया गया है। उत्तर कोरियाई वैज्ञानिकों के दावों के अनुसार, यह वॉरहेड लगभग 5 से 6 हेक्टेयर क्षेत्र, यानी करीब 12 से 15 एकड़ के विशाल भूभाग को पलक झपकते ही पूरी तरह तबाह करने की मारक क्षमता रखता है। उत्तर कोरिया अपनी सैन्य रणनीति में क्लस्टर हथियारों के विस्तार को लगातार तेज कर रहा है। इससे पहले शनिवार को भी अपनी सामरिक बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए क्लस्टर बम का सफल परीक्षण किया गया था, और इस साल के अंत तक ऐसे हथियारों को सेना की अग्रिम इकाइयों में बड़े पैमाने पर शामिल करने का लक्ष्य तय किया गया है।

## दक्षिण कोरिया के भूमिगत ठिकानों पर सीधा खतरा
सियोल स्थित कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के सैन्य विशेषज्ञ शिन जोंग-वू के अनुसार, उत्तर कोरिया ने यह तकनीक खास तौर पर दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सेना के भूमिगत प्रतिष्ठानों को ध्यान में रखकर तैयार की है। दोनों देशों ने संभावित खतरों को देखते हुए अपने महत्वपूर्ण कमांड सेंटर, सुरक्षा बंकर और हथियार डिपो पहाड़ों के भीतर और गहरी कंक्रीट संरचनाओं में बना रखे हैं। जब पारंपरिक मिसाइलें तिरछे कोण से आती हैं, तो पहाड़ों की चट्टानें और कंक्रीट की मजबूत दीवारें धमाके के असर को काफी हद तक झेल लेती हैं। इसके विपरीत, 90 डिग्री पर सीधे नीचे गिरने वाला वर्टिकल हमला कंक्रीट की छतों और पर्वतीय गुफाओं के प्रवेश द्वारों को चीरते हुए पाताल जैसे गहरे ठिकानों तक पहुंच जाता है।

## सैन्य प्रशासन का तर्क और दक्षिण कोरिया का रुख
मिसाइल प्रशासन के प्रमुख ने स्पष्ट किया है कि बदलती वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर सेना की वास्तविक युद्ध क्षमता को सशक्त करना जरूरी हो गया है। उनके मुताबिक, ऐसी उन्नत हथियार प्रणालियां ही देश की संप्रभुता और सुरक्षा की गारंटी दे सकती हैं तथा बाहरी दबाव को रोक सकती हैं। वहीं दूसरी तरफ, दक्षिण कोरियाई सेना भी पूरी सतर्कता के साथ हालात पर नजर बनाए हुए है। दक्षिण कोरिया की सेना के प्रवक्ता कैप्टन जांग डो-यंग ने कहा कि दक्षिण कोरिया किसी भी तरह की उकसावे वाली कार्रवाई का तत्काल और कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। इसके साथ ही दावा किया गया कि दक्षिण कोरियाई सेना के पास उत्तर कोरिया की इस मिसाइल तकनीक की तुलना में कहीं अधिक उन्नत, घातक और सटीक प्रहार करने वाले आधुनिक हथियार पहले से मौजूद हैं।

## इसका आप पर असर
कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ती मिसाइल होड़ से पूर्वी एशिया की कूटनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **भारत में व्यापार सुरक्षा:** एशिया-प्रशांत मार्ग से होने वाले भारतीय समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर क्षेत्रीय तनाव का दबाव बढ़ सकता है। अगर तनाव बढ़ा तो इस समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के बीमा और माल ढुलाई की लागत बढ़ सकती है।
- **प्रवासी सुरक्षा:** दक्षिण कोरिया में कार्यरत हजारों भारतीय नागरिकों और आईटी पेशेवरों की सुरक्षा पर भारतीय दूतावास की निगरानी बढ़ सकती है। आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल और उड़ानों के सामान्य संचालन पर वहां रहने वाले परिवारों को सतर्क रहना होगा।
- **वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार:** दक्षिण कोरिया सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले तकनीक का सबसे बड़ा वैश्विक केंद्र है। सैन्य टकराव का कोई भी जोखिम इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की कीमतों और आपूर्ति में बाधा डाल सकता है।
- **हथियार बाजार में तेजी:** इस परीक्षण के बाद दक्षिण कोरिया और उसके सहयोगी देश अपनी एंटी-मिसाइल प्रणालियों पर रक्षा खर्च बढ़ाएंगे। इससे क्षेत्रीय देशों के बजट में नागरिक योजनाओं के बजाय सैन्य आवंटन में वृद्धि हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तर कोरिया ने यह परीक्षण अपनी पारंपरिक क्रूज मिसाइलों की मारक सीमा और रणनीतिक भेदन क्षमता को बढ़ाने के लिए किया है।

- **बंकर भेदी अनिवार्यता:** दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सेना के शीर्ष ठिकाने पर्वतीय गुफाओं और कंक्रीट बंकरों के भीतर सुरक्षित हैं। क्षैतिज रूप से उड़ने वाली मिसाइलें पहाड़ों की ढलानों को भेद नहीं पातीं, जिसके चलते 90 डिग्री का ऊर्ध्वाधर प्रहार विकसित किया गया।
- **क्लस्टर बम का एकीकरण:** उत्तर कोरिया अपनी अग्रिम मिसाइलों में सब-मुनिशन तकनीक जोड़कर सीमित विस्फोटकों से बड़े पैमाने पर बर्बादी करना चाहता है। शनिवार को बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण के बाद क्रूज मिसाइल पर भी इसे लागू किया गया।
- **प्रतिरोधक क्षमता का प्रदर्शन:** अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद प्योंगयांग अपनी सेना की वास्तविक युद्ध क्षमता को लगातार आधुनिक साबित करना चाहता है। शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में बनाए रखने के लिए वह लगातार नए परीक्षण कर रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर कोरिया ने किस प्रकार की मिसाइल का परीक्षण किया है?
उत्तर कोरिया ने 90 डिग्री के सीधे कोण पर नीचे गिरकर हमला करने वाली रणनीतिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण किया है।

### 2. इस क्रूज मिसाइल में किस तरह का वॉरहेड लगाया गया है?
इसमें एक मध्यम आकार का डिस्पर्सल या क्लस्टर वॉरहेड लगाया गया है जो हवा में फटकर सैकड़ों छोटे बम बिखेर देता है।

### 3. यह वॉरहेड कितने बड़े इलाके को नुकसान पहुंचा सकता है?
उत्तर कोरियाई वैज्ञानिकों के अनुसार यह वॉरहेड 5 से 6 हेक्टेयर यानी लगभग 12 से 15 एकड़ क्षेत्र को तबाह करने में सक्षम है।

### 4. वर्टिकल स्ट्राइक तकनीक का सैन्य महत्व क्या है?
यह तकनीक मिसाइल को गुरुत्वाकर्षण का लाभ दिलाकर सीधे पहाड़ों और भूमिगत कंक्रीट बंकरों को भेदने में सक्षम बनाती है।

### 5. दक्षिण कोरिया ने इस परीक्षण पर क्या प्रतिक्रिया दी?
दक्षिण कोरियाई सेना के प्रवक्ता कैप्टन जांग डो-यंग ने कहा कि उनकी सेना पूरी तरह मुस्तैद है और उसके पास इससे कहीं अधिक उन्नत हथियार मौजूद हैं।

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