प्रशांत महासागर में गहराते अल नीनो से अगले छह महीनों में भीषण गर्मी की चेतावनी, लाखों मौतों की आशंका प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा तीव्र अल नीनो वैश्विक तापमान में भारी उछाल ला सकता है, जिससे आगामी छह माह में भारत समेत कई देशों में स्वास्थ्य और आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है। जलवायु वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में तेजी से आकार ले रहे एक असामान्य मौसमी बदलाव को लेकर दुनिया भर को सतर्क किया है। महासागरीय सतह पर तापमान में आ रही यह तेजी अगले छह महीनों के भीतर वैश्विक स्तर पर जानलेवा गर्मी के रूप में सामने आ सकती है। वैज्ञानिकों के ताजा आकलन के अनुसार, पहले से जारी जलवायु परिवर्तन के अलावा इस अतिरिक्त मौसमी उथल-पुथल की वजह से दुनियाभर में करीब 4.5 लाख से अधिक लोगों की जान जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। शिकागो विश्वविद्यालय से संबद्ध क्लाइमेट इंपैक्ट लैब ने इस संबंध में विस्तृत ब्योरा साझा करते हुए तत्काल सुरक्षात्मक उपायों की आवश्यकता बताई है। प्रशांत महासागर की सतह पर असामान्य तापमान वृद्धि अल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक मौसमी परिघटना है जिसके दौरान प्रशांत महासागर के मध्यवर्ती और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य सीमा से काफी ऊपर चला जाता है। जब महासागर का विशाल जल क्षेत्र इस कदर गर्म होता है, तो पूरी दुनिया के मौसमी तंत्र पर गहरा असर पड़ता है। इसके चलते सामान्य वर्षा, तापमान के संतुलन और मानसूनी हवाओं की दिशा में भारी फेरबदल देखने को मिलता है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि मौजूदा चक्र की तीव्रता असाधारण है, क्योंकि महासागर के कई हिस्सों में तापमान सामान्य रिकॉर्ड से बहुत अधिक मापा गया है। मानवीय गतिविधियों के चलते धरती का वातावरण पहले से ही गर्म चल रहा है, और ऐसे में यह अतिरिक्त गर्मी मौसमी प्रभावों को कहीं ज्यादा जानलेवा बना रही है। साढ़े चार लाख से अधिक मौतों का गंभीर जोखिम अत्यधिक गर्मी के कारण होने वाली संभावित मौतों का यह आंकड़ा नियमित मौतों से अलग आंका गया है। शोध दल के अनुसार, यह अनुमान लगभग 4,51,000 मानवीय जिंदगियों के नुकसान की आशंका को दिखाता है। शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर, क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के सह-संस्थापक और इस अध्ययन के सह-लेखक माइकल ग्रीनस्टोन के मुताबिक, 4,51,000 लोगों की संभावित मृत्यु का पैमाना इतना विस्तृत है कि इसकी गंभीरता को केवल संख्याओं में नहीं मापा जा सकता। ग्रीनस्टोन ने रेखांकित किया कि यह आंकड़ा हमारे परिवारों, माता-पिता, बच्चों, बुजुर्गों, पड़ोसियों और दैनिक जीवन यापन में जुटे आम नागरिकों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। भारत सहित कई महाद्वीपों पर चौतरफा संकट जलवायु विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इस असाधारण अल नीनो का असर किसी एक भूभाग तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रत्यक्ष और परोक्ष प्रभाव भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और अमेरिका जैसे विशाल देशों में साफ तौर पर दर्ज किया जाएगा। इस दौरान दुनिया के विभिन्न अंचलों में मौसम के दो विपरीत और आक्रामक रूप देखने को मिल सकते हैं। जहां कुछ भौगोलिक क्षेत्रों में लंबे समय तक पड़ने वाला सूखा, भीषण लू और जंगलों की अनियंत्रित आग तबाही मचाएगी, वहीं अन्य स्थानों पर अतिवृष्टि, विनाशकारी बाढ़ और तेज तूफानों के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है। यह संकट न केवल प्राकृतिक आपदाओं से जान जाने तक सीमित रहेगा, बल्कि कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव डालकर खाद्य सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और व्यापक अर्थव्यवस्था को भी गहरा आघात पहुंचाएगा। समय रहते राहत और बचाव की रणनीतियां अध्ययन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अत्यधिक गर्मी के कारण होने वाली मौतों का यह आंकड़ा कोई अटल नियति नहीं, बल्कि एक संभावित जोखिम का विश्लेषण है। इसके जरिए विश्व के विभिन्न क्षेत्रों की संवेदनशीलता के आधार पर अलग-अलग अनुमान पेश किए गए हैं, ताकि प्रशासन समय रहते सक्रिय कदम उठा सके। हालांकि इस मौसमी बदलाव के प्रभावों को पूरी तरह टालना असंभव है, मगर पुख्ता योजनाओं से इंसानी नुकसान को बड़े पैमाने पर सीमित किया जा सकता है। इसके लिए बेहतर और सटीक ताप पूर्वानुमान जारी करने, सार्वजनिक स्थलों पर शीतलन केंद्रों का निर्माण करने, उच्च तापमान के दौर में अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती करने तथा खुले आसमान के नीचे कड़ी धूप में श्रम करने वाले मजदूरों के लिए कार्यस्थल सुरक्षा के कड़े नियम लागू करने की सिफारिश की गई है। इसका आप पर असर आने वाले छह महीनों के दौरान अल नीनो के कारण पड़ने वाली प्रचंड गर्मी और मौसमी असंतुलन का सीधा असर आम नागरिकों के स्वास्थ्य, कामकाज और दैनिक खर्च पर पड़ सकता है। • भारत में: भीषण गर्मी और अनिश्चित वर्षा के कारण कृषि पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी और पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है। आम लोगों और किसानों को स्थानीय मौसम चेतावनियों के अनुसार सिंचाई और खुले में काम करने के समय में बदलाव करना होगा। • खुले में काम करने वाले श्रमिक: दोपहर के समय अत्यधिक तापमान रहने से निर्माण और असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए लू का खतरा बहुत बढ़ जाएगा। नियोक्ताओं और स्थानीय निकायों को कार्य के घंटे पुनर्निर्धारित करने और छायादार आराम स्थलों की व्यवस्था करनी होगी। • बुजुर्ग और मरीज: अत्यधिक उच्च तापमान दिल की बीमारियों, सांस की तकलीफ और डिहाइड्रेशन को तेजी से बढ़ा सकता है। परिवारों को अपने घर के बुजुर्गों और बच्चों को सीधे धूप से बचाने तथा पर्याप्त तरल पदार्थ देने की व्यवस्था रखनी होगी। • बिजली और जल आपूर्ति: कूलिंग उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ने से बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे बिलों में उछाल और स्थानीय स्तर पर कटौती हो सकती है। उपभोक्ताओं को ऊर्जा और पीने के पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल की तैयारी रखनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी जलक्षेत्र में समुद्र की सतह का असामान्य रूप से गर्म होना इस वैश्विक मौसमी उथल-पुथल की मुख्य वजह है, जिसने पहले से गर्म चल रहे वायुमंडल में गर्मी का अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। • महासागरीय सतह का अत्यधिक गर्म होना: प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में पानी का तापमान प्राकृतिक औसत से कहीं ज्यादा बढ़ गया है, जिससे अल नीनो की तीव्रता काफी अधिक हो गई है। यह अतिरिक्त ऊष्मा वायुमंडलीय हवाओं और बादलों के सामान्य परिसंचरण को पूरी तरह से विचलित कर देती है। • मानवजनित ग्लोबल वार्मिंग का दोहरा असर: वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों की वजह से धरती का तापमान पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर चल रहा था। जब इस गर्म वायुमंडल में शक्तिशाली अल नीनो का उभार हुआ, तो मौसमी प्रभावों की मार दोगुनी गंभीर हो गई। • वैश्विक मौसम प्रणालियों का ध्रुवीकरण: अल नीनो सक्रिय होने से मानसूनी हवाओं और नमी के वितरण में असंतुलन पैदा होता है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में बादल नहीं बरसते और सूखा पड़ता है, जबकि अन्य इलाकों में अत्यधिक वर्षा से बाढ़ आ जाती है। सवाल-जवाब 1. अल नीनो से अगले छह महीनों में कितनी मौतों की आशंका जताई गई है? जलवायु वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार, इस तीव्र अल नीनो के कारण अत्यधिक गर्मी से दुनिया भर में 4.5 लाख से अधिक (लगभग 4,51,000) लोगों की जान जाने का खतरा है। 2. यह अध्ययन किस संस्थान द्वारा जारी किया गया है? यह आकलन शिकागो विश्वविद्यालय के क्लाइमेट इंपैक्ट लैब द्वारा जारी किया गया है, जिसके सह-लेखक प्रोफेसर माइकल ग्रीनस्टोन हैं। 3. अल नीनो वास्तव में क्या होता है? यह एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे दुनिया भर के मौसम तंत्र में बदलाव आता है। 4. किन प्रमुख देशों में इसका असर देखने को मिल सकता है? वैज्ञानिकों के अनुसार इस असामान्य अल नीनो का असर भारत, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और अमेरिका समेत दुनिया के कई हिस्सों में महसूस किया जाएगा। 5. प्रशासन इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा सकता है? प्रशासन बेहतर ताप पूर्वानुमान, सार्वजनिक शीतलन केंद्रों की स्थापना, अस्पतालों में चिकित्सा कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और खुले में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के उपाय कर सकता है। https://trendkia.com/world/pacific-ocean-men-gaharate-el-nino-se-agale-chhaha-mahinon-men-bhishana-garmi-ki-chetavani-lakhon-mauton-ki-ashnka-37087 TrendKia — Har trend, sabse pehle.